गुजरातियों के लिए डीलक्स बस और बिहारियों के लिए साधारण ट्रेन भी क्यों नही!

पटना, 15 अप्रैल. बिहार से बाहर फंसे मजदूरों को लेकर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव बहुत दुखी हैं और उन्होंने उन्हें उनके घरों तक भेजने के लिए सरकार से गुहार लगाई है. उन्होंने कहा कि प्रवासी मज़दूर भाईयों के Video देखकर दुःखी हो गया। कमजोर, मज़दूर और मज़लूम वर्ग का सूरत और मुंबई में अपने घर लौटने के लिये सड़क पर उतरना सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है. सरकार ग़रीब मज़दूर बंधुओं को उनके घर तक सकुशल पहुँचाने की व्यवस्था क्यों नहीं कर पा रही है? जैसे विदेशों से जो लोग आए उनकी स्क्रीनिंग कर उन्हें अपने घर तक पहुँचाया गया उसी तरह देश के सभी ग़रीब प्रवासी लोगों की स्क्रीनिंग कर उन्हें भी अपने घर भेजा जाइए. एक छोटे से रूम में 20 से अधिक ग़रीब मज़दूर रहते है। क्या सरकार नहीं जानती वहाँ कैसी Physical Distancing है? 100 मज़दूर एक शौचालय का प्रयोग करते है। अगर उन्हें देश भर में खड़ी रेलगाड़ियों में Physical Distancing का ख़्याल रखकर वापस घर भेज दिया जाए तो क्या दिक्कत है? हमारे कार्यालय से दिनभर में हज़ारों मज़दूरों से बात कर उनकी मदद की जा रही है। अब उनके पास पैसा, राशन-पानी कुछ नहीं है। जिनके पास है वो भी अपने घर जाना चाहते है। इस देश में अमीर और ग़रीब के लिए अलग-अलग क़ानून नहीं हो सकता? बिहार सरकार तुरंत गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और पंजाब सरकारों से बात कर सभी बिहारियों को वापस लाएँ। संकट की घड़ी में हम उन्हें ऐसे नहीं छोड़ सकते। यह सरकार की नैतिक ज़िम्मेवारी है। दिल्ली

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बड़ा फैसला: 1 साल तक 30%वेतन दान करेंगे सांसद

कोरोनावायरस ने ना सिर्फ इंसानी शरीर बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था को भी करारी चोट दी है. भारत भी ऐसे देशों में से एक है जहां 21 दिनों के लॉक डाउन के कारण अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है. इन सब को देखते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने आज एक बड़ा फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी कैबिनेट मंत्रियों और सांसदों की वेतन में 30 फीसदी की कटौती की गई है और यह कटौती एक साल तक की जाएगी. देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और कई राज्यों के राज्यपाल ने स्वेच्छा से सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में वेतन कटौती का फैसला किया है. यह धनराशि भारत के समेकित कोष में जाएगी. फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कैबिनेट ने भारत में कोरोना वायरस के प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन के लिए 2020-21 और 2021-22 के लिए सांसदों को मिलने वाली निधि यानी MPLAD फंड को अस्थाई तौर पर निलंबित कर दिया है. दो साल के लिए MPLAD फंड के 7900 करोड़ रुपये का उपयोग भारत की संचित निधि में किया जाएगा.

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