दीपावली पर मिलेगी भोजपुरी को सरकार की सौगात !

‘काँटो की राह’ में खड़ी ‘भोजपुरी’ कब शुरू होगी भोजपुरी की पढ़ाई? छठ के बाद मिलेगी खुशखबरी! राजभवन द्वारा VKSU में भोजपुरी की पढ़ाई पर लगे विराम के बाद एक बार फिर राजभवन द्वारा भोजपुरी भाषा की पढ़ाई को पुनः चालू करने के लिए सुगबुगाहट ने फिर से एक भोजपुरी के लिए जैसे रोशनी जगा दी है. दीपावली और छठ पर्व के बाद हो सकता है कि उपहार स्वरूप इस संदर्भ में राजभवन से कोई आदेश आ जाये. इस कार्य मे VC ने अपनी विशेष सक्रियता दिखाई और इस संदर्भ में उन्होंने राज्यपाल से लेकर मुलाकात भी किया. राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात कर आये VKSU के VC सैय्यद मुमताजुद्दीन काफी उत्साहित हैं. उन्होंने पटना नाउ से बातचीत करते हुए जिस अंदाज में और जोश के साथ राजभवन के सकरात्मक बात की चर्चा की उससे यही उम्मीद जताई जा रही है कि भोजपुर वासियो को जल्द ही नए राज्यपाल द्वारा दीपावली के उपहार के रूप में भोजपुरी की पढ़ाई को फिर से चालू करने रूपी आदेश को दिया जा सकता है. VC ने बताया कि राज्यपाल से मुलाकात के बाद घंटो इस बात पर चर्चा हुई और उसके बाद राज्यपाल द्वारा बुलायी गयी बैठक में उन्होंने भाग भी लिया. VC के अनुसार राज्यपाल का रूख भोजपुरी को लेकर बड़ा ही सक्रिय है. उम्मीद है कि दिपावली और छठ की छुटियों के बाद राजभवन से खुशखबरी भोजपुरिया जनमानस को मिल सकती है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जबतक राजभवन से इस संदर्भ को लेकर चिठ्ठी नही आती तबतक कुछ भी

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भोजपुरी के लिए फिर से आंदोलन की तैयारी

हस्ताक्षर अभियान के साथ हो रही शुरुआत भोजपुरी भाषा की पढ़ाई की मांग लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर विश्वविद्यालय प्रशासन एवं राज्य सरकार को सूचना दे दी गई है. patnanow से बात करते हुए NSUI के सीनियर लीडर अभिषेक द्विवेदी ने बताया कि 24 अगस्त से इस मांग को लेकर हस्ताक्षर सह जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा. हस्ताक्षर के लिए स्कूल कॉलेज के कैम्पस से लेकर मुहल्लों तक पहुंच बनाई जाएगी. 29 अगस्त को विश्वविद्यालय कैंपस में धरना दिया जाएगा. अगर इतने पर भी मांग नहीं मानी गई तो पदयात्रा और राजभवन मार्च किया जाएगा. गौरतलब है कि एक वर्ष पहले भोजपुरी बचाओ अभियान में सभी संगठनों ने जुड़कर भोजपुरी के लिए आवाज बुलंद की थी. जिसका सफल नेतृत्व करते हुए दो युवाओं ,ओ पी पांडेय और मंगलेश तिवारी ने किया था. पिछले साल 5 सितंबर को हुए इस बन्द ने सबको भोजपुरी के लिए एक किया था. पूर्व में भी विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा इस मुद्दे पर धरना, प्रदर्शन और आंदोलन हुए, विश्वविद्यालय बन्द कराया गया, रेल भी रोका गया पर जिसमे NSUI की भी जबरदस्त भूमिका थी. लेकिन एक साल बीतने के बाद भी भोजपुरी भाषा पढ़ाई शुरू नहीं हो पायी. विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने स्तर से स्नातक और स्नातकोत्तर में भोजपुरी की पढ़ाई को लेकर हरसम्भव प्रयास किया. ड्राफ्ट और आर्डिनेंस तैयार कर विश्वविद्यालय सिंडिकेट की मुहर के साथ राजभवन भेज दिया गया पर इसका कोई नतीजा नहीं निकला. राजभवन अपने वादे से मुकर

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