आज हमें बहाली प्रक्रिया से क्यों अलग रखा जा रहा है – NIOS अभ्यर्थी

पटना (राजेश तिवारी की रिपोर्ट) | बिहार सरकार और एनसीटीई के गलत नीतियों के चलते आज बिहार के करीब ढाई लाख प्रशिक्षित शिक्षक सड़क पर उतरने को मजबूर है. दरअसल बिहार प्राथमिक शिक्षक नियोजन प्रक्रिया में एनआईओएस डीएलएड किए हुए प्रशिक्षु शिक्षकों को नियोजन प्रक्रिया से अलग रखा गया है. बिहार सरकार के शिक्षा विभाग का कहना है कि नियोजन प्रक्रिया में जिन्हे 2 वर्षीय डीएलएड किए हुए छात्रों को है, को जगह दिया जाएगा. लेकिन बिहार सरकार ने एनआईओएस से डीएलएड किए हुए छात्रों को यह कर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया कि यह कोर्स 18 महीना का है. वही बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने एनसीटीई से मार्गदर्शन मांगा जिसमें एनसीटीई ने भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया कि बहाली प्रक्रिया में शामिल होंगे या नहीं होगा. हालाकि एनसीटीई ने अपने मार्गदर्शन में कहा कि नहीं नियोजन प्रक्रिया में 2 वर्षीय डीएड कोर्स होना चाहिए. उसके बाद बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने एक गाइडलाइन जारी किया जिसमें 2019- 20 बिहार प्राथमिक शिक्षक नियोजन प्रक्रिया में यह प्रशिक्षित शिक्षक नियोजन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है. बुधवार सुबह सभी गैर सरकारी प्रशिक्षित शिक्षक राजधानी पटना के गर्दनीबाग में समान डिग्री समान अधिकार को लेकर धरना प्रदर्शन किया. इन प्रशिक्षित शिक्षकों का कहना है कि जब हम लोग पूरी पारदर्शिता के हम लोगों ने परीक्षा दी SBAऔर डब्लू बी ए पूर्ण निष्ठा के साथ पूरा किया, जब 4 सेमेस्टर में परीक्षा हुई. तभी बिहार सरकार को भी मालूम है कि परीक्षा कितनी शांतिपूर्ण और कदाचार मुक्त हुआ जिसमें

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प्रशिक्षित शिक्षक अब सड़क पर लड़ने को तैयार

पटना (राजेश तिवारी) | एनआईओएस से डीएलएड किए हुए प्रशिक्षित शिक्षक अपनी डिग्री को मान्यता दिलाने के लिए अब कोर्ट से लेकर सड़क पर लड़ने को तैयार हैं. ये प्रशिक्षित शिक्षक 25 सितंबर को राजधानी के गर्दनीबाग में धरना प्रदर्शन करेंगे. इन प्रशिक्षित शिक्षकों की मांग है कि “समान डिग्री समान नियोजन” किया जाए. इन प्रशिक्षित शिक्षकों का ये भी कहना है कि अगर एक ही संस्था से कराए गए डिग्री को अगर राज्य सरकार सरकारी शिक्षकों को मान्यता देती है तो गैर सरकारी शिक्षकों को नियोजन इकाई में क्यों नहीं मान्यता देगी. यह सभी नव प्रशिक्षु शिक्षक आगामी 25 सितंबर को राजधानी के गर्दनीबाग में धरना प्रदर्शन किए प्रशासन से इजाजत ले ली है. आपको बता दें कि बिहार में तकरीबन ढाई लाख प्रशिक्षित शिक्षक बिहार नियोजन प्रक्रिया 2019 -20 से सरकार की गलत नीतियों से नियोजन प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं.

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