जानिए, घी खाना क्यों शुरू करें

आज बहुत से लोग, विशेष रूप से युवा पीढ़ी, घी खाने के बिल्कुल खिलाफ है. ऐसा इसलिए है क्योंकि, उन्हें इस सुनहरे रंग के, स्वादपूर्ण और पोषक तत्व से भरपूर मक्खन के स्वास्थ्य लाभों के बारे में मालूम नहीं है. प्राचीन भारत में घी की खपत आयुर्वेद में देखी जा सकती थी. आयुर्वेद में इसे एक पवित्र औषधीय और पोषण से भरपूर तत्व माना जाता था. घी से होने वाले निम्नांकित लाभ बहुत कम लोगों को मालूम है: घी लैक्टोज से मुक्त है: कई व्यक्ति लैक्टोज (दुग्धशर्करा) को पचाने में सक्षम नहीं होते हैं, जो दूध में पाया जाने वाला एक प्रकार का आहार उत्पाद है. कम ही लोग जानते हैं कि दुनिया की कुल आबादी का एक बड़ा प्रतिशत लैक्टोज को पचा नहीं सकते है. ऐसे लोगों के लिए घी अत्यंत फायदेमंद खाने योग्य पदार्थ हैं. वे बिना किसी चिंता के घी का उपभोग कर सकते हैं. प्राचीन भारत में हमारी संस्कृति उन तरीकों से अवगत थी, जिससे हम किसी भी डेयरी के उत्पाद को आसानी से पचा सकते थे. दरसअल घी बनने की प्रक्रिया के दौरान दूध में से लैक्टोज हट जाती है जिससे घी रूपी मक्खन के तेल का शुद्धतम रूप हमलोगों को मिलता है जो हमारे शरीर के लिए अत्यंत पौष्टिक होता है. घी केसिन मुक्त है: केसिन दूध में एक तरह का प्रोटीन घटक होता है जिसके कारण ही दूध एलर्जी का कारण बनता है. केसिन प्रोटीन को “स्लो डाइजेशन प्रोटीन” भी कहा जाता है क्योकि यह शरीर में धीरे-धीरे रिलीज होता है. वैसे तो

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