अब पटना होगा रोबोटिक तकनीक से नी-ट्रांसप्लांट करने वाला इंडिया का दूसरा केंद्र

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | मेडिकल साइंस में लगातार हो रहे नए नए तकनीकी अविष्कारों के बीच बिहार की राजधानी पटना में भी इसका आगाज देखने को मिल रहां है. यहां अनुप इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स एंड रिहैबिलिटेशन (AIOR) ने स्ट्राइकर्स मैको रोबोटिक आर्म असिस्टेड यानि आंशिक घुटना एवं सम्पूर्ण कूल्हा ट्रांसप्लांट प्रक्रिया को लेकर रविवार को पटना के लेमन ट्री होटल में एक कार्यशाला का आयोजन किया. इस कार्यशाला में रोबोटिक तकनीक से आंशिक घुटना एवं सम्पूर्ण कूल्हा प्रत्यारोपण के बारे में बताया गया. ज्ञातव्य है यह सुविधा जल्द ही AIOR के द्वारा पटना में शुरू की जा रही है जो इंडिया का दूसरा सेंटर होगा.

क्या है यह रोबोटिक तकनीक
रोबोटिक आर्म असिस्टेंट सर्जरी जोड़ों के प्रतिस्थापन का एक नया तरीका है जो मरीज के अनुसार इम्प्लांट अलाइनमेंट और पोजिशनिंग के उन्नत स्तर की संभावनाओं को पेश करता है. यह तकनीक सर्जनों को रोगी आधारित 3D प्लान बनाने का अवसर देता है और उन्हें नियंत्रित रोबोटिक आर्म प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी का मौका देता है जो सर्जन को उच्च स्तर की सही प्रक्रिया के निष्पादन में मदद करता है.




हॉस्पिटल के डॉक्टर ने कहा “मैको जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी की प्रक्रिया में बदलाव ला रहा है. वर्चुअल 3D मॉडल का इस्तेमाल करते हुए, मैको पद्धति सर्जन को हर मरीज के अनुसार ऑपरेशन के पूर्व विशेष सर्जिकल योजना बनाने का मौका देती है ताकि ऑपरेशन रूम में प्रवेश करने के पूर्व सर्जन के पास प्रतिस्थापन की एक स्पष्ट योजना होगी. सर्जरी के दौरान सर्जन उस योजना को निष्पादित कर सकता है और आवश्यक सामंजस्य कर सकता है, जबकि रोबोटिक आर्म सर्जन योजना उच्च स्तर की निश्चितता और संभावना को सुनिश्चित कर सकता है. इस पद्धति की इन तीन विशेषताओं के संयोग में बेहतर परिणाम और मरीज के अत्यधिक संतुष्टि की संभावना होती है”.

AIOR के कंसलटेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन एवं हेड ऑफ आथ्रोप्लास्टी यूनिट, डॉ आशीष सिंह ने इस तकनीक में यूनाइटेड किंगडम और विभिन्न जगहों में प्रशिक्षण प्राप्त किया है. डॉ आशीष सिंह ने प्राथमिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है एवं यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो से कंप्यूटर एसिस्टेड ऑर्थोपेडिक सिस्टम्स एग्जाम्स में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा हासिल किया है.
डॉ आशीष ने बताया कि हमें बेहद खुशी हो रही है कि हमारे द्वारा AIOR में अभी तक लगभग 400 से 500 ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी किया गया है. अपना नेविगेशन प्लेटफॉर्म स्थापित कर हम गौरवान्वित हैं लेकिन नवीनतम तकनीक के साथ जॉइंट रिप्लेसमेंट सेवाएं प्रदान कर हम विश्व में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनने जा रहे हैं.

डॉ. आशीष ने आगे बताया कि प्रत्यारोपण के दौरान हड्डी को कितना काटना है, कैसे काटना है, यह सब रोबोट तय करता है. इस कारण इसका रिजल्ट काफी बेहतर मिलता हैं. प्रत्यारोपण के बाद हड्डी कितनी मुड़ेगी, इसकी भी जानकारी मशीन से प्राप्त हो जाती है. इस प्रक्रिया में कुल खर्च सामान्य सर्जरी की तुलना में सिर्फ 10% अधिक लगता है. हालांकि इस पद्धति में मरीज जल्द स्वस्थ हो जाता है और अपने काम पर लौट सकता है.

कार्यशाला में जाने माने ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ आर एन सिंह ने कहा “इस क्षेत्र में इस तकनीक का इस्तेमाल कर हम गौरवान्वित हैं और समाज को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना हमारी प्रतिबद्धता का एक हिस्सा है. हम इस सर्जरी में स्ट्राइकर्स कंपनी का कृत्रिम घुटना इस्तेमाल करतें हैं जो कि बेस्ट होता है”.
डॉ आर एन सिंह ने बताया कि इस तकनीक से जोड़ों के घिस जाने से होने वाले दर्द से मुक्ति मिल जाती है. इस सर्जरी की लागत रु123456 है.
इस संगोष्ठी में लगभग सौ हड्डी रोग विशेषज्ञों ने शिरकत किया.