नई शिक्षा नीति की खास बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति 2019 को दी मंजूरी

करीब साढ़े तीन दशक बाद देश में एक बार फिर एजुकेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति 2019 को मंजूरी दे दी है. 35 साल बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय एक बार फिर शिक्षा मंत्रालय हो गया है. बदलते वक्त की जरूरत के अनुसार शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन किया गया है. ना सिर्फ स्कूली शिक्षा बल्कि यूनिवर्सिटी एजुकेशन में भी अब बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. इसके साथ राष्ट्रीय शिक्षा आयोग को मंजूरी दी गई है जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होंगे.




केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने केंद्रीय कैबिनेट के फैसले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के लिए बड़े स्तर पर सलाह ली गई. 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6600 ब्लॉक्स, 676 जिलों से सलाह ली गई.

नई शिक्षा नीति के तहत कोई छात्र एक कोर्स के बीच में अगर कोई दूसरा कोर्स करना चाहे तो पहले कोर्स से सीमित समय के लिए ब्रेक लेकर ऐसा कर सकता है. नए नियम में यह रहेगा कि एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा, तीन या चार साल के बाद डिग्री मिल सकेगी.
बताया गया कि मल्टीपल एंट्री थ्रू बैंक ऑफ क्रेडिट के तहत छात्र के फर्स्ट, सेकंड ईयर के क्रेडिट डिजीलॉकर के माध्यम से क्रेडिट रहेंगे, जिससे कि अगर छात्र को किसी कारण ब्रेक लेना है और एक फिक्स्ड टाइम के अंतर्गत वह वापस आता है तो उसे फर्स्ट और सेकंड ईयर रिपीट करने को नहीं कहा जाएगा. छात्र के क्रेडिट एकेडमिक क्रेडिट बैंक में मौजूद रहेंगे। ऐसे में छात्र उसका इस्तेमाल अपनी आगे की पढ़ाई के लिए कर सकेंगे।

10+2 फॉर्मेट खत्म
नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली शिक्षा में 10+2 फॉर्मेट को रिप्लेस करते हुए 5+3+3+4 फॉर्मेट लाया गया है. इसे डिफाइन करते हुए मंत्री ने बताया कि अब स्कूल के पहले पांच साल में प्री-प्राइमरी स्कूल के तीन साल और कक्षा 1 और कक्षा 2 सहित फाउंडेशन स्टेज शामिल होंगे. अगले तीन साल को कक्षा 3 से 5 की तैयारी के चरण में विभाजित किया जाएगा. इसके बाद में तीन साल मध्य चरण (कक्षा 6 से 8) और माध्यमिक अवस्था के चार वर्ष (कक्षा 9 से 12) होंगे.

Pncb