कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को दी यह सलाह

आरा, 13 अप्रैल. कृषि वैज्ञानिक पीके द्विवेदी ने किसानों को सलाह दी है कि सामुदायिक कटनी यानि एक दूसरे का सहयोग करते हुए गेहूं की फसल काट लें. मशीनों के सहारे गेहूं कटनी का इंतजार करने  वाले कृषकों को मशीन ऑपरेटरों के क्वारंटीन पीरियड तक इंतजार उनकी फसल को क्षति पहुंचा सकता है.

पीके द्विवेदी ने सलाह दी है कि अपने साथ खेतों में पानी का अतिरिक्त स्टोर कर लें ताकि मौसम शुष्क होने पर अगलगी की अवस्था में उसका उपयोग आग पर काबू पाने में किया जा सके.




उन्होंने सचेत किया है कि मौसम में परिवर्तन होने पर ओला वृष्टि फसल को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए सभी बातों का ध्यान रखते हुए सभी किसान एक दूसरे को सहयोग करें.

गौरतलब है कि भोजपुर में 88 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोयी जाती है. इसे काटने के लिए मशीन, कुशल ऑपरेटर तथा कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है परन्तु कोरोना की वजह से कुशल श्रमिक नहीं मिल रहे. जिले में जो मशीन ऑपरेटर दूसरे प्रदेशों से आये हैं उन्हें क्वारंटीन कर दिया गया है. ऐसे में किसानों को मशीन तथा ऑपरेटरों पर अतिरिक्त खर्च करने के बावजूद समय पर गेहूं की फसल काटने में समस्या आ सकती है.

उधर उदवंतनगर प्रखंड के कुसुम्हा ग्राम पंचायत मे गेहु फसल कटाई मे सोसल डिस्टेंनसिंग का निरीक्षण करने के लिए जिला कृषि पदाधिकारी संजय नाथ तीवारी गए और कटाई के वक्त सोशल डिस्टनसिंग का पाठ भी पढ़ाया.

आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट