जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्यजी महाराज का तीन दिवसीय पटना प्रवास कल से

पटना, 09 मई। रामानंद संप्रदाय (वैरागी वैष्णव) के प्रमुख और श्रीमठ, काशी पीठाधीश्वर जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामनरेशाचार्य जी महाराज तीन दिवसीय प्रवास पर कल यानि गुरुवार को पटना पहुंचेंगे। पटना में उनके स्वागत-अभिनंदन की जोर-शोर से तैयारी चल रही है।
रामानंदाचार्य आध्यत्मिक मंडल, बिहार के प्रचार सचिव सतेन्द्र पांडेय ने बताया कि जगदगुरु स्वामी रामनरेशाचार्यजी महाराज 10 मई की सुबह काशी से प्रस्थान करेंगे और सड़क मार्ग से भभुआ, मोहनिया, आरा, बिहटा होते हुए शाम को पटना पहुंचेंगे। श्रीसंप्रदाय के संत-महंत और वैरागी वैष्णवजन रास्ते में जगह –जगह अपने आचार्य का स्वागत-सत्कार करने वाले हैं। आरा, बिहटा में भी स्वागत की जोरदार तैयारी है। उन्होंने बताया कि दो साल पहले पटना में हुए ऐतिहासिक चातुर्मास अनुष्ठान के बाद पहली बार स्वामी जी तीन दिन पटना में रहने वाले हैं। इस दौरान नवीन पुलिस लाइन, पटना के सामने हल्दी इस्टेट कॉम्पलेक्स में उनका विश्राम होगा। पटना के भक्त-संत और वैष्णव जन 11 मई से 13 मई की सुबह तक उनके दर्शन, पूजन, सत्संग का लाभ उठा सकेंगे। 13 मई को वे सड़क मार्ग द्वारा काशी के लिए प्रस्थान कर जाएंगे।
प्रचार सचिव सत्येन्द्र पांडेय के मुताबिक स्वामीजी अभी मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और उत्तरप्रदेश में मास पर्यन्त रामभाव प्रसार यात्रा का समापन कर काशी लौटे हैं। वे काशी के पंचगंगाघाट स्थित उस श्रीमठ के वर्तमान आचार्य हैं, जिसे सगुण और निर्गुण रामभक्ति परंपरा का मूल आचार्यपीठ होने का गौरव प्राप्त है। स्वामीजी ने अपना संपूर्ण जीवन रामभक्ति की उस पावन धारा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए समर्पित किया है जिसका श्रीगणेश सवा सात सौ साल पहले स्वामी रामानंद ने किया था। “जात-पात पूछे ना कोई- हरि को भजै सो हरि का होई”- जैसा क्रांतिकारी नारा देने वाले स्वामी रामानंद ने मध्यकाल में भक्ति मार्ग की अलख जगायी थी और कबीरदास, रविदास, पीपानरेश, धन्ना जाट और सेन नाई जैसे भक्तों के जरिये रामभक्ति की अविरल गंगा को महलों से निकालकर गरीबों की झोंपड़ी तक पहुंचायी थी।

(ब्यूरो रिपोर्ट)