जी हाँ दारोगा से एसएसपी तक जाता है पैसा

By pnc Jan 11, 2017

”अरे तुम लोग समझता नहीं है केस डायरी में कितना खर्चा पड़ता है बुद्धि लगाना पड़ता है उस सब खर्चा तो देना होगा ना. अगर नाम हटा देंगे तो सब पूछेगा कि क्यों हटाये डीएसपी पूछेगा काहे हटाये इंस्पेक्टर पूछेगा, तुम लोग नहीं समझ सकते कि हमलोगों पर कितना दबाव होता है हमको तो 20 हजार बचेगा बाकि तो इंस्पेक्टर से लेकर एसएसपी तक जायेगा.

केस में जज की नहीं दरोगा की चलती है. जबतक केस डायरी से निर्दोष आरोपी का नाम नहीं हटेगा तब तक जज भी कुछ नहीं कर सकता है




केस डायरी से नाम हटाने के लिए मांगे थे एक लाख रुपये 

ये बात गर्व से कहने वाले बिहार पुलिस के  सब इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार हैं ,माल ऐंठने  के चक्कर में दारोगा जी लोग ऐसे ही बोलते हैं ,क्या उनके द्वारा ऐंठा गया माल इंस्पेक्टर और एसपी साहब तो कितना जाता है ये तो दारोगा बाबु ही बता सकते हैं .फिलहाल उनकी कमाई पर विराम लग गया है और उनके इस बोल को लेकर एसएसपी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया है , बेचारे एसएसपी के नाम पर रिश्वत मांग रहे थे .पीड़ित ने उनकी फोन की रिकॉर्डिंग कर  के  एसएसपी को सौंप दी ,बिहार पुलिस के एक दारोगा की हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी क्योंकि वे कानून को कुछ नहीं समझते . सब इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार ने पीड़ित परिवार से कहा कि केस में जज की नहीं दरोगा की चलती है. जबतक केस डायरी से निर्दोष आरोपी का नाम नहीं हटेगा तब तक जज भी कुछ नहीं कर सकता है. ये बातें करने वाला  सबइंस्पेक्टर प्रदीप कुमार है जो पटना के फतुआ थाने में तैनात था. उसके ओडियो टेप के साथ पीड़ित परिवार जब एसएसपी के पास पहुंचा तो मामला सामने आया. एसएसपी मनु महाराज ने तत्काल उस सब इंस्पेक्टर को निलंबित कर कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिया. आपको बता दें कि मई 2016 में फतुआ थाना क्षेत्र में एक युवती की क्षत विक्षत लाश मिली थी .उसी दिन पुनपुन थानें में एक युवक की लाश बरामद की गई. युवती की पहचान तो हो गई लेकिन युवक के शव की पहचान नहीं हो पाई. दोनों मामलों को एक साथ करके पटना पुलिस ने झूठा खुलासा कर दिया.और प्रेम प्रसंग में हुई हत्या .युवती के पिता की शिकायत पर केस दर्ज हुआ और पुलिस ने युवती के पति, ससुर और गांव के एक अन्य व्यक्ति को जेल भेज दिया. इसके 60 दिन बाद युवती का असली प्रेमी पकड़ा गया और उसने हत्या की बात कबूल की. बावजूद इसके युवती के ससुराल वाले जेल से नहीं छूटे, इसका मूल कारण ये था कि मामले की जांच कर रहे सब इंस्पेक्टर को कोर्ट में डायरी भेजने के लिए रिश्वत नहीं दी गई. सब इंस्पेक्टर फोन पर यह मान रहा था कि जो जेल में है वो निर्दोष है लेकिन जबतक रिश्वत के एक लाख रूपये नहीं मिलेंगे तब तक वो डायरी कोर्ट में दाखिल नहीं करेगा.

By pnc

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