अबतक 150 से ज्यादा की मौत, राहत शिविरों के भरोसे बाढ़ पीड़ित

बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ से सूबे में अब तक 153 लोगों की मौत हुई है. जबकि 17 जिलों की एक करोड़ से ज्यादा की आबादी इसकी चपेट में है. बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी से घिरे करीब 4.64 लाख लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. इसके अलावा इन क्षेत्रों में 1,289 राहत शिविर खोले गए हैं, जिसमें करीब 3.92 लाख लोग शरण लिए हुए हैं.

    




पहली तस्वीर दरभंगा के घनश्यामपुर की और दूसरी अररिया की है

बता दें कि गुरुवार को बाढ़ से मरने वालों की संख्या 119 थी जो बढ़कर 153 तक पहुंच गई. सबसे ज्यादा मौत अररिया में हुई है जहां 30 लोगों की जान गई है, जबकि  पश्चिमी चंपारण में 23, सीतामढ़ी में 13, पूर्वी चंपारण में 11, किशनगंज में 11, सुपौल में 11, मधेपुरा में नौ, पूर्णिया में नौ, कटिहार में 7,  दरभंगा में 4, मधुबनी में 8, शिवहर में 3, गोपालगंज व सहरसा में 4-4, मुजफ्फरपुर में एक, खगड़िया में 3 तथा सारण में 2 लोगों की मौत हुई है.

बाढ़ पीड़ितों तक मेडिकल हेल्प पहुंचाते NDRF के जवान
इन सबके बीच NDRF और SDRF की 27 टीमें पूरे बिहार में राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं. ये टीमें रात और दिन का फर्क भूलकर लोगों को बचा रही हैं. बेतिया के लौरिया में SDRF ने पेड़ पर चढ़े और पेड़ पकड़े 5 व्यक्तियों को बचाया. जानकारी के मुताबिक करीब  7 बजे रात में जब SDRF की टीम SHO के साथ बचाव कार्य करके वापस लौट रही थी, अचानक, गंडक नदी में उफनते पानी में उन्हें चिल्लाने की आवाज आई. सतर्क जवानों ने सर्च लाइट से ध्यान से देखा, तो पेड़ के ऊपर 2 लोग चढ़े थे, पेड़ की शाखा को पकड़ कर 2 लोग और 2 लोग झाड़ी पकड़ कर 4 घंटे से बाढ़ से प्राणरक्षा हेतु संघर्षरत थे. SDRF के जवानों ने तुरंत उन सभी को पानी से बाहर निकाल कर नया जीवन प्रदान किया.

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इधर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कल अधिकारियों से बाढ़ प्रभावित परिवारों को समय पर राहत देने को कहा है. साथ ही कुछ और नए इलाकों में खाने के पैकेट गिराने के आदेश दिए हैं. शुक्रवार को पटना में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बाढ़ से संबंधित समीक्षा बैठक में नीतीश ने कई और महत्वपूर्ण निर्देश दिए.

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने किशनगंज से अररिया होते हुए बहादुरगंज जाने वाली सड़क को ‘रि-स्टोर’ करने का निर्देश पथ निर्माण विभाग को दिया. उन्होंने कहा कि इस सड़क के बनने से बाढ़ राहत व बचाव कार्य युद्धस्तर पर किया जा सकेगा. इस काम के लिए ‘बोर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन’ की सहायता लेने को भी कहा है, जिससे क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों की मरम्मत में आसानी हो.