चढ़ा बसन्त, गूंजे वैदिक मंत्र, भक्तिमय हुआ वातावरण

By om prakash pandey Jan 23, 2018

हवन-यज्ञ और संगीतमय आरती के बीच हुई माँ सरस्वती की पूजा


संस्कारों के लिए सांस्कृतिक आंदोलन जरूरी: कुमार द्विजेन्द्र




आरा, 22 जनवरी. भारत मे बसन्त के आगमन के साथ ही उत्सवी माहौल शुरू जो जाता है. पुरातन काल में यहाँ बसन्तोसव पर बड़े-बड़े मेले और उत्सवी माहौल का आयोजन होता था. बदले परिवेश में भले वो मेले ना मिलें लेकिन बसन्तोसव का आयोजन कर इस परंपरा और संस्कृति को बचा रहा है जिले का एक मात्र विद्यालय “सम्भावना उच्च विद्यालय”. मां सरस्वती की पूजा तो बसंत शुरू होते हैं सभी विद्यालयों में होती लेकिन बसंत ऋतु का भव्य स्वागत कार्यक्रम के द्वारा कहीं भी नहीं होता है यह भव्य आयोजन संभावना स्कूल हर वर्ष बसंत उत्सव मना कर ही करता है. हर वर्ष आयोजित होने वाले इस आयोजन के जरिये विद्यालय आने वाली पीढ़ी में संस्कार और संस्कृति को बचाये रखने का मूलमंत्र भरना चाहती है. बसन्तोसव पर विद्यालय में सम्पन्न पूजा की पटना नाउ द्वारा प्रस्तुत है खास रिपोर्ट:

स्कुल का प्रांगण है और बच्चों शिक्षको और अभिभावकों के साथ कुछ अतिथियों की भीड़ जमा है. बड़ा सा हवन कुंड बना है जिसके चारों ओर लोग बैठे हुए हैं बस पंडित जी द्वारा पूजा का इंतजार है….ये माहौल था सम्भावना स्कूल के पूजनोत्सव का. बसंत पंचमी के पावन अवसर पर संभावना आवासीय उच्च विद्यालय में उच्च विद्यालय में विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती का पूजनोत्सव सह बसन्तोत्सव का भब्य आयोजन सम्पन्न हुआ. इस अवसर पर विधिवत पूजन के साथ हवन-यज्ञ और विशाल महाआरती का संगीतमय आयोजन हुआ. पूजनोत्सव सह हवन-यज्ञ में विद्यालय के निदेशक कुमार द्विजेन्द्र, विद्यालय की प्राचार्या डॉ अर्चना सिंह, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और बच्चों के साथ उपस्थित अतिथियों ने भी हिस्सा लिया. मां सरस्वती के नारे और वैदिक मंत्र के उच्चारण से आसपास का वातावरण भक्तिमय हो गया. विद्यालय हर वर्ष बसन्तोसव पर बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत करता है लेकिन इस बार यह आयोजन ठंड के कारण 3 फरवरी को प्रस्तुत होगा. हालांकि बावजूद इसके कुछ कार्यक्रम जरूर प्रस्तुत किये गए.

इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक इस अवसर पर विद्यालय के संगीत शिक्षक सरोज सुमन के निर्देशन सरस्वती वंदना, देवी गीत, और लोक गीतों की प्रस्तुति की गई. इस अवसर पर बच्चों को संबोधित करते हुए विद्यालय की प्राचार्या डॉ अर्चना सिंह ने कहा कि बसंतोत्सव हर्ष और उल्लास का पर्व है. मां सरस्वती हमें ज्ञान की प्रेरणा देती है. बसंतोत्सव का यह आयोजन सिर्फ धार्मिक व सांस्कृतिक नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कार से परिचित कराने एक व्यापक अभियान है.

बसंतोत्सव के इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक कुमार द्विजेन्द्र ने कहा कि इस आयोजन से बच्चों में संस्कार बनाना है तथा तथा अपने संस्कारों के प्रति लगाव पैदा करना है. उन्होंने कहा कि बदलते परिवेश में अपनी सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने और उसकी पहचान बनाये रखने के लिए एक सांस्कृतिक आंदोलन की जरूरत है.

मंच संचालन विद्यालय के प्रचार उप प्राचार्य राघवेंद्र कुमार वर्मा ने किया धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय के वरीय शिक्षक ऋषिकेश ओझा ने किया. आयोजन को सफल बनाने में मार्कण्डेय ओझा, शशि भूषण सिंह, रवि प्रकाश, विष्णु शंकर तथा कला शिक्षक संजीव सिन्हा का विशेष योगदान रहा.

आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट

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