जंगल सफारी का लेंगे रोमांचक अनुभव
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में प्रकृति को करीब से जानेंगे संभावना विद्यालय के छात्र-छात्राएं
दो दिवसीय नेचर स्टडी कैंप में जंगल सफारी का रोमांच करेंगे अनुभव, लौटकर लिखेंगे यात्रा वृत्तांत
आरा। शहर के मझौंवा स्थित संभावना आवासीय उच्च विद्यालय के छात्र-छात्राएं दो दिवसीय नेचर स्टडी कैंप में शामिल होने के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व जाएंगे। यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की शाहाबाद इकाई एवं संभावना आवासीय उच्च विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कैंप के लिए विद्यार्थियों का जत्था 23 अक्टूबर को रवाना होगा। 25 अक्टूबर को उनकी वापसी होगी।

कैंप के दौरान छात्र-छात्राओं को प्रकृति, वन्यजीवों और पर्यावरण को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। बच्चे सफारी जिप्सी में सवार होकर जंगल सफारी के रोमांच का अनुभव करेंगे। इस यात्रा में विद्यालय की प्राचार्या डॉ. अर्चना सिंह, आर्ट टीचर संजीव सिन्हा, स्पोर्ट्स टीचर कन्हैया सिंह एवं निशा कुमारी भी शामिल होंगी।
प्रकृति के साथ ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का भी करेंगे भ्रमण
विद्यालय की प्राचार्या डॉ. अर्चना सिंह ने बताया कि गंडक नदी के तट पर स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। इसे बिहार का कश्मीर भी कहा जाता है। यह क्षेत्र महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि और लव-कुश की जन्मस्थली के रूप में भी प्रसिद्ध है। भ्रमण के दौरान बच्चे भैंसालोटन, कौलेश्वर नाथ मंदिर, जटाशंकर मंदिर, नरदेवी मंदिर, त्रिवेणी घाट, वाल्मीकि आश्रम, शीश महल और गजेंद्र मोक्ष धाम सहित कई महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण करेंगे।
उन्होंने बताया कि इस यात्रा के दौरान बच्चों को प्राकृतिक वातावरण को समझने के साथ-साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित होने का अवसर मिलेगा।
यात्रा वृत्तांत लिखेंगे बच्चे, तीन सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को मिलेगा पुरस्कार
विद्यालय के निदेशक डॉ. कुमार द्विजेंद्र ने बताया कि नेचर स्टडी कैंप का उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर प्रकृति का व्यावहारिक अध्ययन कराना है। भ्रमण से लौटने के बाद विद्यार्थियों को अपना यात्रा वृत्तांत लिखने के लिए तीन दिनों का समय दिया जाएगा। इसमें उन्हें बताना होगा कि यात्रा के दौरान उन्होंने क्या सीखा और उन्हें किस तरह की प्रेरणा मिली।
यात्रा वृत्तांत के आधार पर सर्वश्रेष्ठ तीन विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। इससे बच्चों में लेखन क्षमता, अवलोकन कौशल और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित होगी।
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