निजीकरण के विरोध में 16 -17 दिसंबर को बैंको का राष्ट्रव्यापी हड़ताल

बैंकों में लटके ताले, विशाल प्रदर्शन

निजीकरण के खिलाफ यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस




10 वर्षों में लगभग 14 लाख करोड़ का परिचालन लाभ प्राप्त

योजनाओं को लागू करने में 90% से अधिक भागीदारी सरकारी बैंकों का योगदान

केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को निजी हाथों में सौंपने के लिए बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक 2021 संसद के वर्तमान सत्र में पारित कराना चाहती है जिससे निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो सके. दूसरी और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन से जुड़े संगठनों के अधिकारी व कर्मचारी सरकार के निर्णय के खिलाफ है तथा इस बात के लिए पूरी तरह लामबंद है कि राष्ट्रीय कृत बैंकों का निजी करण किसी भी सूरत में नहीं करने दिया जाएगा.

निजी करण के खिलाफ यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस ने 3 दिसंबर से आंदोलन की शुरुआत कर रखी है और 16 व 17 दिसंबर को दो दिवस की देशव्यापी हड़ताल पर चले गए है. इस आशय की जानकारी देते हुए बैंक एसो.के उप महासचिव संजय तिवारी ने बताया कि सरकार की नीतियों के खिलाफ आज पूरे देश में हड़ताल और प्रदर्शन किया जा रहा है. संजय तिवारी ने कहा कि दो दिनों के हड़ताल के बाद शनिवार और रविवार को छुट्टी है इस लिए अब बैंक सोमवार को ही खुलेंगे.आपको बता दें कि ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कनफेडरेशन (एआईबीओसी) के महासचिव सौम्य दत्ता ने कहा कि बुधवार को अतिरिक्त मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष सुलह-सफाई बैठक विफल रही और यूनियनों ने हड़ताल पर जाने के फैसले को कायम रखा है. राष्ट्रव्यापी एक दिवसीय बैंक हड़ताल का पटना सहित पूरे बिहार में व्यापक असर देखा जा रहा है। बिहार की 6775 बैंक शाखाएं और 6690 एटीएम भी इस हड़ताल से प्रभावित हैं . पटना के बैंकों में भी हड़ताल का प्रभाव देखने को मिल रहा है, बैंक कर्मचारी सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं और बंद बैंकों के बाहर धरने पर बैठे हैं.बिहार प्रोविंसियल बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन के उप महासचिव सचिव संजय तिवारी हड़तालियों के साथ पटना में मौजूद हैं.

निजीकरण के विरोध में बैंककर्मी पटना में प्रदर्शन करते हुए

क्या है देश में  “सरकारी बैंकिंग तंत्र का देश के विकास में महत्व”

1. देश के मूलभूत आर्थिक आवश्यकता बैंकिंग को प्रत्येक देशवासी को उपलब्ध करवाने के मुख्य उद्देश्य के साथ सरकारी बैंक दुर्गम से दुर्गम इलाकों में शाखाएं खोल कर देश के आर्थिक विकास में लगातार योगदान दे रहे हैं

2.जन धन योजना मुद्रा योजना पीएम स्वनिधि योजना अटल पेंशन योजना सुकन्या समृद्धि योजना सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर आदि जैसी तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में 90% से अधिक भागीदारी सरकारी बैंकों की ही रही है

3. 2006-7 की विश्वव्यापी आर्थिक मंदी से भारत को उबारने का कठिन कार्य सरकारी बैंकों की अगुवाई में ही संभव हो सका। यही नहीं किसी प्राइवेट बैंक के बंद होने की कगार पर पहुंचने पर भी यही सरकारी बैंक उसे संभालते हैं. हाल ही में यस बैंक को बचाने के लिए एसबीआई आगे आया.

4. तमाम विपरीत परिस्थितियों में स्टाफ की भारी कमी और गैर लाभप्रद योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने के बाद भी साल दर साल सरकारी बैंकों का मुनाफा बढ़ा है. 2021-22 की पहली तिमाही में ही 50000 करोड़ का परिचालन लाभ हुआ है जबकि पिछले 10 वर्षों में लगभग 14 लाख करोड़ का परिचालन लाभ प्राप्त किया गया है.

5. बैंकों की कुल जमा राशि का 60% सरकारी बैंकों के पास है जो जनता का सरकारी बैंकों में विश्वास को दर्शाता है. कृषि के लिए आसान केसीसी हो या शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन हो या मकान बनाने के लिए हाउसिंग लोन सरकारी बैंकों ने हर क्षेत्र में जनता की सेवा ही की है.

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