8 साल पहले का ‘ब्लैक फ्राइडे’ और ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या !

आरा, 1 जून. आज से 8 साल पहले रणवीर सेना के सुप्रीमो ब्रह्मेश्वर मुखिया की मौत दर्जनों गोलियां उनके सीने में दाग कर दी गयी थी. बिहार के इतिहास का वह ऐसा ब्लैक फ्राइडे बन गया जिसे कभी मिटाया नही जा सकता है. उनकी मौत के बाद जो उनके समर्थकों का तांडव बिहार के राजधानी तक जो हुआ वह अकल्पनीय है. CBI जांच के बाद भी अबतक अपराधी पकड़ से बाहर हैं. उनकी आठवीं पुण्यतिथि पर ब्लैक फ्राइडे की उस घटना को आइये जानते हैं अमरेंद्र कुमार के आंखों देखे संस्मरण में… वह 31 मई की रात थी, 31 मई 2012 तब बिहार में सुशासन की परिभाषा धीरे-धीरे अपना आकार ले रही थी, यही कारण था कि लोग बिजली पर कम और खुले आसमान के नीचे सोने में ज्यादा यकीन करते थे ताकि अगले दिन फिर से काम धंधे या फिर नौकरी पर जा सकें. आम दिनों की तरह ही मैं अपने कतीरा स्थित आवास के छत पर सोया था. 31 मई की रात गर्मी ऐसी थी कि मानो बदन का पूरा पानी बिस्तर पर आ चुका हो लेकिन नींद पूरी करने की जद्दोजहद के बीच सुबह तब हुई जब अहले सुबह टहल कर लौटते हुए पापा ने मोबाइल पर फोन कर बताया कि ‘बेटा मुखिया जी नहीं रहे’ तब एंड्रॉयड फोन का जमाना नहीं हुआ करता था यही कारण था कि सीडीएमए को भी लोग सीने से लगाकर रखते थे..क्या पता किस काल कौन सा कॉल और मैसेज आ जाए. तब मैं पत्रकारिता की पौधशाला में अंकुर होकर लिखना

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