पटना जल जमाव त्रासदी | गिरी कइयों पर गाज | क्या इससे निकलेगा समाधान

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) |  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद में पिछले दिनों पटना में अतिवृष्टि से जलजमाव से संबंधित समीक्षा बैठक की. बैठक में नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद ने बताया कि 27 सितम्बर को 98 मि0मी0, 28 सितम्बर को 151.9 मि0मी0 तथा 29 सितम्बर को 91.6 मि0मी0 यानि तीन दिनों में कुल 341.5 मि0मी0 वर्षा हुयी. उन्होंने जलजमाव से उत्पन्न परिस्थिति, उसके कारणों एवं तात्कालिक समाधान एवं दीर्घकालिक कार्ययोजना की विस्तृत प्रस्तुति मुख्यमंत्री के समक्ष दी. प्रधान सचिव वित्त सह पटना जिले के प्रभारी सचिव एस0 सिद्धार्थ ने जलजमाव के दौरान किये गये निरीक्षण एवं सर्वे की जानकारी दी. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य उदय कांत मिश्रा ने पटना शहर के विभिन्न क्षेत्रों में वर्षापात के उतार-चढ़ाव संबंधी जानकारी दी ताकि जलजमाव के समाधान के लिये बनायी जाने वाली कार्ययोजना में इसका भी ध्यान रखा जाय. पटना के जिलाधिकारी कुमार रवि ने भी जलजमाव के दौरान किये गये राहत कार्यों की जानकारी दी. मुख्यमंत्री ने कहा कि पटना में जलजमाव के कारण लोगों को काफी परेशानी हुयी है. नगर विकास एवं आवास विभाग ने इसके लिये कुछ दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की है, जिसमें बुडको के एक चीफ इंजीनियर, 2 सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर, 6 एक्सक्यूटिव इंजीनियर, 1 एक्सक्यूटिव इंजीनियर मैकेनिकल, एक असिस्टेंट इंजीनियर मैकेनिकल के विरूद्ध शो काॅज नोटिस जारी किया गया है. एक एक्सक्यूटिव इंजीनियर को एडमिनिस्ट्रेटिव ग्राउण्ड पर ट्रांसफर किया गया है. नमामि गंगे प्रोजेक्ट के एल० एण्ड टी० कम्पनी के प्रोजेक्ट मैनेजर को शो काॅज

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हर रात आठ घंटे चलेंगी विदेशी मशीनें, काम होगा पटना की सफाई का

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | पटना दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है और इसके प्रदूषण का मुख्य कारण धूलकण है. शहर की सफाई के लिए इटली एवं तुर्की से मंगाई गई स्वीपिंग मशीनें शुक्रवार रात से सड़कों पर उतरेंगी. हर रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक यह मशीनें काम करेंगी. तीन बड़ी मशीनें प्रतिदिन 150 किलोमीटर और चार छोटी मशीनें प्रतिदिन 140 किलोमीटर सफाई करेंगी. धूल-गंदगी की सफाई और कचरा उठाने के अलावा इन मशीनों से नियमित रुप से सड़कों की धुलाई भी की जाएगी.शहर के सभी प्रमुख सड़कों पर इन गाड़ीनुमा सफाई मशीनों से साफ-सफाई का काम किया जाएगा. हर अंचल से इस संबंध में प्रस्ताव मांगा गया था जिसके आधार पर रोस्टर तैयार किया गया है. हर अंचल में एक बड़ी मशीन उपलब्ध कराई जाएगी. वहीं चार छोटी मशीनों का आवश्यकतानुसार प्रयोग किया जाएगा. गंगा किनारे बने रिवर फ्रंट की सफाई के लिए एक छोटी स्वीपिंग मशीन को रिजर्व में रखा गया है. इटली और तुर्की से आयातित इन मशीनों के संचालन एवं रखरखाव का जिम्मा हैदराबाद की एजेंसी श्री राज राजेश्वरी इंटरप्राइजेज को सौंपा गया है. एजेंसी के साथ पटना नगर निगम ने एक साल का एग्रीमेंट किया है जिसकी अवधि 2 साल तक बढ़ाई जा सकती है. इस एकरारनामा के अंतर्गत एजेंसी को गाड़ियों के परिचालन एवं मेंटेनेंस का कार्य करना है. पटना नगर निगम का उद्देश्य है, संपूर्ण पटना शहर को धूल मुक्त किया जाए.

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मछली खाने पर भी आफत

पटना में अब मछली बेचने पर प्रतिबंध सरकार ने 15 दिनों के लिए लगाया बैन उल्लंघन पर 7 साल कैद और 10 लाख जुर्माना स्वास्थ्य सचिव संजय कुमार ने की घोषणा बाहर की मछलियों में पाया गया मनुष्य के लिए खतरनाक रसायन फार्मालीन आंध्र और पश्चिम बंगाल से आने वाली मछलियों में पाया गया है पटना (राजेश तिवारी की रिपोर्ट) | पटना नगर निगम के क्षेत्रों में अब पंद्रह दिनों तक मछली नहीं दिखेगी. बिहार सरकार ने इस पर रोक लगा दी है. राजधानी की सड़कों के कोने पर बिकने वाली मछली पर रोक लगा दी गई है. स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने सोमवार को एक प्रेसवार्ता में ये जानकारी दी कि पटना नगर निगम क्षेत्र में आंध्र और बंगाल से आने वाली मछलियों की बिक्री पर रोक लगा दी गई है. यह रोक अभी पटना नगर निगम क्षेत्र में रहेगी. इसके साथ ही मछली का भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन पर भी रोक लगायी गयी है. यदि आज से पटना नगर निगम क्षेत्र में कोई मछली की बिक्री करते पकड़ा जाता है तो उसे 7 साल की सजा और 10 लाख का फाइन हो सकता है. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने इसको लेकर आदेश जारी कर दिया है तथा पटना के डीएम को मछली पर रोक का जिम्मा दिया गया है. प्रधान सचिव ने बताया कि आंध्र प्रदेश और बंगाल सहित बिहार की कुछ मछलियों के नमूनों की जांच की गयी जिसका रिपोर्ट यह बताता है कि मछली खाने योग्य नहीं है. क्योंकि 10 सैंपल की जांच में

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