32 वर्षों में 3000 से ज्यादा उपवास वाले सन्त का धर्मनगरी में हुआ आगमन

जैन संत अंतर्मन आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज जी ससंघ का हुआ मंगल प्रवेश आरा,8मार्च. 32 वर्षों में 3000 से ज्यादा उपवास की कठिनतम साधना वाले संत का धर्मनगरी में रविवार को आगमन हुआ. मंदिरों की धर्मनगरी आरा में, जैन आचार्य अंतर्मन श्री प्रसन्न सागर महाराज ससंघ का जैन धर्मावलंबियों के द्वारा भव्य मंगल प्रवेश रविवार को बड़े ही भक्तिपूर्वक हुआ. प्रातः समय बामपाली स्थित ज्ञान ज्योति आवासीय विद्यालय में जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा संपन्न हुआ. आचार्य ससंघ का नगर आरा स्थित श्री 1008 अतिशयकारी चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर के लिए मंगल विहार हुआ. जैन समाज के लोगों ने आचार्य ससंघ का भव्य आगवानी किया. शहर के चंदवा मोड़ से लेकर जेल रोड स्थित जैन मंदिर तक भक्तों ने गाजा-बाजा के साथ भव्य जुलूस निकाला गया. जुलूस में भक्तों ने जैन ध्वज लहराते, गुरुदेव का जयकारा लगाते, पुष्पवृष्टि करते हुये जैन मंदिर पहुँचे. वहीं आचार्य ससंघ का पाद-प्रक्षालन, मंगल आरती एवं भजन एवं धर्मसभा का आयोजन हुआ. उन्होंने धर्मसभा में भक्तों से कहा कि आरा बहुत ही पवित्र भूमि है यहां भगवान पार्श्वनाथ एवं भगवान महावीर के साथ अनेकों आचार्य एवं गुरुओं की विश्राम स्थली है, उन्होंने कहा कि आप सभी बहुत ही सौभाग्यशाली है कि इतने पवित्र भूमि परते है. श्री दिगम्बर जैन मुनि संघ के सचिव अजय कुमार जैन ने बताया कि अंतर्मन आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज के संघ में मुनि पीयूष सागर महाराज एवं ऐलक पर्वसागर महाराज है. ये संघ भारतवर्ष के विभिन्न शहरों से होते हुये धर्मनगरी आरा पहुँचे है. ये संघ

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