बिहार के आवास प्रक्षेत्र को जीएसटी की बड़ी राहत- सुशील मोदी

नई दिल्ली/पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | नई दिल्ली में जीएसटी कौंसिल की हुई 33 वीं बैठक में किफायती आवासों (Affordable Housing) पर जीएसटी की दर कम करने के बिहार के प्रस्ताव को स्वीकार कर किफायती आवास प्रक्षेत्र को बड़ी राहत दी गयी है. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि इससे पटना जैसे शहरों के आवास प्रक्षेत्र जो पिछले कई वर्षों से जीएसटी की अधिक दर के कारण मंदी के दौर से गुजर रहे थे, उन्हें अब सीधा लाभ मिलेगा. अपने ऐतिहासिक निर्णय में जीएसटी कौंसिल ने किफायती आवासों के लिए टैक्स की दर बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट के 8% से घटा कर 1% तथा गैर किफायती आवासों पर कर की दर 12% से घटा कर मात्र 5% कर दिया है.पटना जैसे शहरों में 90 वर्ग मीटर एरिया तक और 45 लाख कीमत वाले आवासों के साथ ऐसे गैर किफायती आवासीय परियोजनाओं को भी इसका लाभ मिलेगा जिसके 15% एरिया में व्यावसायिक निर्माण किया गया हो. यानी आवासीय परियोजनाओं को 15% तक व्यावसायिक निर्माण की छूट दी गयी है.जीएसटी कौंसिल के इस निर्णय से किफायती और गैर किफायती निर्माणाधीन फ्लैट की बिक्री का मार्ग अब प्रशस्त होगा तथा खरीददारों को भी बड़ी राहत मिलेगी.

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GST काउंसिल से आ सकती है राहत की खबर

गुवाहाटी में GST काउंसिल की 23वीं बैठक का आज दूसरा दिन है. उम्मीद है कि रोजाना इस्तेमाल की कई चीजों पर टैक्स स्लैब 28 फीसदी से कम किया जा सकता है. GST  के खिलाफ सड़क पर कांग्रेस के प्रदर्शन-हंगामे के बीच मोदी सरकार GST पर कुछ बड़ी राहत का ऐलान कर सकती है.  गुवाहाटी की बैठक में 28 फीसदी टैक्स स्लैब में शामिल 200 से ज़्यादा आइटम्स में से 80 फीसदी आइटम्स पर टैक्स घटकर 18 फीसदी किए जाने की संभावना है. जानकारी के मुताबिक शैंपू, फर्नीचर, इलेक्ट्रिक स्वीच और प्लास्टिक पाइप पर टैक्स रेट कम किया जाएगा. इसके अलावा कंपोजीशन स्कीम के तहत 1 फीसदी छूट और नॉन एसी रेस्टोरेंट पर टैक्स घटाने पर भी फैसला संभव है. छोटे कारोबारियों को राहत देने के मकसद से कंपोजिशन स्कीम में भी बदलाव की तैयारी है. बता दें कि GST की दरें और नियमों पर अंतिम फैसला लेने की जिम्मेदारी GST  काउंसिल को दी गयी है. काउंसिल के अध्यक्ष वित्त मंत्री अरुण जेटली हैं जबकि वित्त राज्य मंत्री के साथ 29 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों, दिल्ली और पुडुडुचेरी के नामित मंत्री इसके सदस्य हैं. बिहार के डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री सुशील मोदी भी बैठक से पहले ही कई महत्वपूर्ण सामानों पर टैक्स की दर कम करने की संभावना जता चुके हैं.

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कुछ मुश्किलें हुईं दूर, बाकी की उम्मीद जगी

व्यापारियों को परेशान कर रही GST की उलझनें कुछ हद तक दूर हुई हैं. 6 अक्टूबर को  22वीं बैठक में GST परिषद ने 1.5 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली इकाइयों को हर महीने के बजाय तीन महीने में एक बार रिटर्न जमा करने की छूट दे दी है. छोटे कारोबारियों के लिए कंपोजिशन योजना की सीमा भी 75 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई है. GST के लागू होने के बाद तीन महीने की अवधि में कारोबार जगत को पेश आ रही मुश्किलों पर चर्चा के लिए शुक्रवार को हुई GST परिषद की बैठक में ये फैसले लिए गए. बैठक में खास तौर पर छोटे एवं मझोले उद्योग और निर्यातकों को पेश आ रही समस्याओं पर गौर किया गया. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि छोटे कारोबारियों और निर्यातकों को राहत देने के लिए कई रियायतें देने पर सहमति बनी है. उन्होंने बताया कि छोटे एवं मझोले कारोबारियों को अब मासिक रिटर्न नहीं भरना होगा. जिन इकाइयों का सालाना कारोबार 1.5 करोड़ रुपये तक है उन्हें अब तिमाही रिटर्न भरना होगा. अभी तक जीएसटी के तहत पंजीकृत हरेक कारोबारी को मासिक आधार पर अपना रिटर्न जमा करना होता था. लेकिन ऑनलाइन रिटर्न जमा करने के लिए बनाई गई व्यवस्था GST नेटवर्क पर भारी बोझ पडऩे और अनुपालन संबंधी अन्य शर्तों के चलते कारोबारी खासे परेशान होने लगे. इसका असर यह हुआ कि जुलाई की तुलना में अगस्त और सितंबर के महीनों में GST रिटर्न आंशिक रूप से कम हो गया. इसके अलावा कारोबार जगत के

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