‘तीर’ की लड़ाई में हाईकोर्ट से भी शरद गुट को झटका

चुनाव आयोग के बाद अब कोर्ट ने भी शरद यादव के दावे को खारिज कर दिया है. गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने शरद यादव गुट की याचिका को निरस्त कर दिया है. शरद गुट ने ‘तीर’ चुनाव चिन्ह पर दावा कतृरते हुए चुनाव आयोग के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चैलेंज किया था. दिल्ली हाईकोर्ट की जज इंद्रमीत कौर कोचर ने मामले की सुनवाई करते हुए मौजूदा याचिका को रद्द कर दिया. चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया है कि अभी संबंधित फैसले की संक्षिप्त रिपोर्ट ही सौंपी है और नीतीश कुमार के साथ जेडीयू चुनाव चिह्न ‘तीर’ बरकरार रखने संबंधी फैसले की विस्तृत रिपोर्ट चुनाव आयोग कारणों सहित दिल्ली हाईकोर्ट को 27 नवंबर तक सौंप देगा. ऐसे में अब गुजरात में शरद गुट को ‘ऑटोरिक्शा’ के चुनाव चिन्ह के साथ ही चुनाव लड़ना होगा. बता दें कि जदयू शरद गुट ने दिल्ली हाईकोर्ट में बिना कारण बताए फैसले लेने पर आयोग के फैसले को चुनौती दी थी. शरद गुट ने बुधवार को कोर्ट की सुनवाई के दौरान चुनाव चिह्न ‘तीर’ को फ्रिज करने और चुनाव आयोग के विस्तृत कागजात सौंपने तक मौजूदा याचिका पेंडिंग रखने की अपील की थी. लेकिन कोर्ट ने जेडीयू शरद गुट की मौजूदा याचिका निरस्त कर दी है. चुनाव आयोग के 27 नवंबर तक विस्तृत कागजात सौंपने के बाद अगर जेडीयू शरद गुट आयोग के रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होता तो कोर्ट में दोबारा नई याचिका दायर कर सकता है.

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चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ कोर्ट जाएगा शरद गुट

जनता दल यूनाइटेड (JDU) के संस्थापक रहे शरद यादव अब कोर्ट की शरण में जाएंगे. शरद यादव गुट ने जेडीयू के चुनाव चिन्ह तीर पर अपना दावा जताते हुए चुनाव आयोग में अपील की थी. लेकिन चुनाव आयोग ने नीतीश कुमार के जदयू के पक्ष में फैसला दिया था. शरद यादव पक्ष के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्हें चुनाव आयोग के फैसले पर एतराज है. इसलिए अब वे इसके खिलाफ दिल्ली हाइकोर्ट में अपील करेंगे. शुक्रवार को चुनाव आयोग ने नीतीश खेमे के पक्ष में अपना फैसला सुनाया था जिसके बाद नीतीश कुमार गुट ने खुशी जाहिर करते हुए कहा था कि ये सच्चाई की जीत है. इस मामले पर नीतीश कुमार ने कहा कि जो भी हो, लेकिन इसपर पार्टी को प्रचार खूब मिला. बता दें कि जदयू पार्टी पर अपना कब्जा जमाए रखने की कवायद में नीतीश और शरद यादव गुट लगे हैं. नीतीश कुमार के साथ एक ओर विधायकों और सांसदों से लेकर पार्टी की पूरी फोज है वहीं शरद यादव के पास गिने-चुने लोग ही हैं. इसके साथ ही अब शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता भी खतरे में है.

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