सरकार ने लगाया पूरा जोर लेकिन विधानसभा में विपक्ष ने दिखा दी अपनी ताकत

आज विधानसभा में जो कुछ हुआ वह क्या ज़रूरी था नीतीश जी! सरकार के पास पर्याप्त पुलिस बल है. एक-एक विधायक पर दस-दस पुलिसवालों को लगाकर उनको उठाकर कहीं भी पहुँचा दिया जा सकता था. लेकिन विधायकों के साथ जिस ढंग का व्यवहार हुआ है वह भविष्य के प्रति शुभ संकेत नहीं है.हमारे पुलिस और प्रशासन का चरित्र औपनिवेशिक है. अंग्रेजों ने इसका गठन जनता की सेवा के लिए नहीं बल्कि उनके दमन के लिए किया था. जहाँ भी सरकार के विरुद्ध स्वर उभरे, तत्क्षण उसे वहीं कुचल दिया जाए. इसके गठन का आधार यही था. उसी पुलिस बल को नीतीश जी निरंकुश बनाने वाला क़ानूनी अधिकार देने जा रहे हैं. आज भी अंग्रेजों की बनाई मानसिकता से ही पुलिस बल काम कर रहा है. उस में कोई परिवर्तन नहीं आया है. विधानसभा की आज की घटना ने यही साबित किया है. ऐसे में विरोधी दल के पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था ! सरकार के ख़िलाफ़ समाज के अलग अलग तबकों का आज विरोध प्रदर्शन हो रहा है. शिक्षक हों या जीविका दीदी, सब बेचैन हैं. नीतीश जी अंग्रेजों की तरह ही सारे सभी विरोधों को कुचल देने की क़ानूनी ताक़त से पुलिस बल को लैस कर रहे हैं. इसलिए जैसे भी संभव था, प्रतिप़क्ष ने उक्त क़ानून का विरोध किया है और आगे इस विरोध को जारी रखेंगे. शिवानन्द तिवारी की कलम से 23 मार्च

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अभूतपूर्व: विधानसभा से बाहर फेंके गए विधायक

BMP को असीमित अधिकार देने वाले विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक 2021 के खिलाफ विपक्ष के सारे विधायक अध्यक्ष के चैंबर के बाहर धरना पर बैठ गये थे. इस घटना के विधानसभा अध्यक्ष ने पुलिस बुलायी. पुलिस की पिटाई से कई विधायक घायल हुए हैं. दो विधायक बेहोश हो गये. दरअसल बिहार विधानसभा में विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक पर चर्चा होनी थी. दिन के तीन बजे अध्यक्ष ने जैसे बिल पर चर्चा की अनुमति दी, सदन में हंगामा मच गया. राजद-कांग्रेस, माले समेत तमाम विपक्षी विधायकों ने इस विधेयक के विरोध में हंगामा खड़ा कर दिया. तमाम विपक्षी विधायक वेल में आ गये. भारी हंगामे के बीच अध्यक्ष ने विपक्षी विधायकों को मार्शल आउट कराने का निर्देश दिया. विधायकों को मार्शल ने सदन से बाहर निकाला. इस बीच सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गयी. सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद विपक्षी विधायक विधानसभा अध्यक्ष के चैंबर के सामने धरना पर बैठ गये. अध्यक्ष के कमरे को बाहर से बंद कर दिया गया. उधर सदन की कार्यवाही साढ़े चार बजे से फिर शुरू होनी थी. साढ़े चार बजे सदन में कार्यवाही शुरू होनी थी. कार्यवाही शुरू होने के लिए घंटी बजने लगी. लेकिन अध्यक्ष अपने कमरे में बंद थे. विपक्षी विधायक उन्हें कमरे से बाहर निकलने नहीं दे रहे थे. पटना एसएसपी के नेतृत्व में पुलिस ने विधायकों को पीटाउधर सरकार हर हाल में पुलिस विधेयक को सदन से पारित कराने पर आमदा थी. लिहाजा विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्षी विधायकों को अपने चैंबर के सामने से हटाने के लिए पुलिस

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