गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हेतु प्रभावी शैक्षणिक प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला
पटना।। आज अधिवेशन भवन में शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा आयोजित एक दिवसीय उच्चस्तरीय कार्यशाला में माननीय उप मुख्यमंत्री सह शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सहभागिता की तथा क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) एवं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) के साथ सीधा संवाद स्थापित किया. कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य में शिक्षा व्यवस्था को गति प्रदान करना तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी रणनीति तैयार करना रहा.

अपने संबोधन में मंत्री ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था का वास्तविक आकलन लर्निंग आउटकम्स के आधार पर ही किया जाना चाहिए. उन्होंने निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि शिक्षक प्रशिक्षण का छात्रों के सीखने के स्तर पर वास्तविक प्रभाव पड़ रहा है या नहीं, तथा इसके लिए नियमित मूल्यांकन की सुदृढ़ व्यवस्था विकसित की जाए.

उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए केवल प्रक्रियाएं नहीं, बल्कि उनके परिणामों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है. इस दिशा में ऑनलाइन माध्यम से लर्निंग आउटकम्स में हो रहे सुधार का निरंतर विश्लेषण किया जाएगा तथा उसके आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे.

कार्यशाला के प्रारंभिक सत्र में अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग द्वारा प्रतिभागियों के साथ विस्तृत संवाद किया गया. उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए संसाधनों का सटीक आकलन एवं प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है. इस क्रम में सभी अधिकारियों को प्रखंडवार रिक्ति एवं स्वीकृत पदों का अद्यतन करने का निर्देश दिया गया, ताकि कार्यबल का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके. उन्होंने मॉडल स्कूलों के संचालन हेतु निर्धारित SOP के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षकों के व्यवस्थित प्रशिक्षण तथा विद्यालय भवनों को नवाचारी एवं आकर्षक स्वरूप में विकसित करने पर विशेष बल दिया. साथ ही सभी कर्मियों के वेतन के समयबद्ध भुगतान को भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए.

कार्यशाला के दौरान प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने मॉडल स्कूलों एवं Foundational Literacy and Numeracy (FLN) अभियान पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया. उन्होंने सघन नामांकन अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करने को कहा कि प्रत्येक बच्चा समय पर विद्यालय से जुड़ सके. इस हेतु टोला सेवक एवं तालीमी मरकज के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया गया.

कार्यशाला के एक सत्र में सेंसस निदेशक रंजिता द्वारा स्व-गणना (Self Enumeration) प्रक्रिया पर संक्षिप्त एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिसमें इसके तकनीकी पहलुओं एवं नागरिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया गया.

एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र में महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया को “क्या, कब और कैसे” के आधार पर विस्तार से समझाया. उन्होंने बताया कि किसी भी कार्रवाई के लिए स्पष्ट तथ्यों एवं साक्ष्यों का संकलन, समयबद्ध प्रक्रिया तथा विधिसम्मत एवं पारदर्शी जांच अत्यंत आवश्यक है. प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पालन को अनिवार्य बताते हुए उन्होंने कहा कि यही निर्णय को टिकाऊ एवं न्यायसंगत बनाता है. प्रशिक्षण के दौरान केस स्टडी के माध्यम से व्यावहारिक समझ भी विकसित की गई.
कार्यशाला के एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्से में अध्ययन दल द्वारा अन्य राज्यों – केरल, उत्तर प्रदेश, असम, महाराष्ट्र एवं तेलंगाना – में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यों के अनुभव साझा किए गए. इनसे प्राप्त सीख को बिहार में लागू कर शिक्षा प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया गया.
इसके अतिरिक्त कार्यशाला में एसी, डीसी, यूसी, न्यायालयीन वाद (Court Cases), PMS पोर्टल, HRMS पोर्टल, नई शिक्षा नीति (NEP 2020), शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा ई-शिक्षाकोष जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत चर्चा एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे प्रशासनिक कार्यों में दक्षता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके.
कार्यशाला में शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं, प्रशासनिक प्रक्रियाओं, कक्षा-कक्ष अवलोकन, शिक्षक प्रशिक्षण एवं गुणवत्ता सुधार से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई. अंततः सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि लंबित कार्यों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करें. यह कार्यशाला राज्य की शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी, जवाबदेह एवं परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रभावी पहल सिद्ध होगी.
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