BSSC अध्यक्ष पद से आलोक राज के इस्तीफे पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग

अभ्यर्थियों और विपक्ष की ओर उठी मांग

ज्वायनिंग के छठे दिन ही आलोक राज ने क्यों दे दिया इस्तीफा!




पटना।। बिहार कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष पद से आलोक राज के इस्तीफा से बिहार में चल रही भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है. मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने इस पर सरकार से जवाब मांगा है.

राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने BSSC के अध्यक्ष पद से आलोक राज द्वारा दिए गए इस्तीफे को असामान्य घटना बताते हुए बिहार सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि मात्र छह दिनों के अंदर हीं आलोक राज का इस्तीफा दिए जाने को हल्के में नहीं लिया जा सकता. बिहार में अभी कई विभागों में बहाली की प्रक्रिया चल रही है और इस बीच आलोक राज के इस्तीफे से सवाल जरूर खड़े होते हैं.

राजद प्रवक्ता ने कहा कि आलोक राज ने इस्तीफे का कारण भले ही व्यक्तिगत बताया हो, लेकिन अगर ऐसा होता तो वे पदभार ही ग्रहण नहीं करते. चूंकि ऐसे पदों पर नियुक्ति कोई आनन-फानन में नहीं की जाती. नियुक्ति के पहले उच्च स्तरीय विमर्श जरुर किया गया होगा और अधिसूचना जारी करने के पहले उनकी सहमति भी जरुर ली गई होगी. उन्होंने बजाप्ता पदभार भी ग्रहण कर लिया था और काम करना भी शुरू कर दिया था. फिर पदभार ग्रहण करने के मात्र पांच-छह दिनों में हीं इस्तीफा देना सवाल जरूर खड़ा करता है.

राजद नेता ने कहा कि स्पष्ट तौर पर यह व्यवस्था पर सवाल है क्योंकि जिस ढंग से बिहार के एनडीए शासनकाल में बहाली से सम्बंधित अधिकांश परीक्षाओं की बदनामी होती रही है, परीक्षाएं सवाल के घेरे में आती रही हैं. कहीं प्रश्नपत्र लीक हुआ तो कहीं सेंटर मैनेज करने के आरोप लगे. ऐसी एजेंसियों से भी परीक्षा संचालित कराई गई है जो दूसरे राज्यों में ब्लैक लिस्टेड हैं या जिनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. ऐसे में आलोक राज के इस्तीफे पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है. इसलिए आलोक राज के इस्तीफे को लेकर बिहार सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.

इधर छात्र नेता दिलीप कुमार ने भी आलोक राज के इस्तीफा प्रकरण पर उन्होंने कहा कि आलोक राज एक ईमानदार और स्वच्छ छवि के अधिकारी रहे हैं. उनका इस्तीफा बीएसएससी में किसी बड़े खेल और धांधली की ओर इशारा करता है. दिलीप कुमार ने आरोप लगाया कि बीएसएससी पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा रहा है. कई परीक्षाओं में पेपर लीक और सेटिंग के मामले सामने आ चुके हैं. वर्तमान में आयोग के माध्यम से द्वितीय इंटर स्तरीय परीक्षा, CGL-4 सहित बड़ी संख्या में बहाली होनी हैं. ऐसे समय में अध्यक्ष का इस्तीफा अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है. छात्र नेता ने बीपीएससी के पूर्व परीक्षा नियंत्रक अमरेंद्र कुमार का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 67वीं बीपीएससी परीक्षा के पेपर लीक मामले में आंदोलन कर अमरेंद्र कुमार को हटवाया गया था, लेकिन बाद में उन्हें बीएसएससी का सदस्य बना दिया गया, जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.

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