अब कचरा शुल्क ख़त्म करने की मांग उठी

चैम्बर द्वारा नगर निगम की ओर से लिए जानेवाले कचरा शुल्क को समाप्त करने का आग्रह

बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज ने तारकिशोर प्रसाद, माननीय उप मुख्यमंत्री-सह-नगर विकास एवं आवास मंत्री आनन्द किशोर, प्रधान सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, सीता साहु, माननीय मेयर एवं हिमांशु शर्मा, नगर आयुक्त से आग्रह किया है कि कचरा शुल्क लिए जाने के पटना नगर निगम के सशक्त स्थायी समिति के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए जिससे कि व्यवसायियों पर लगाए गए इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ से राहत मिल सके




चैम्बर अध्यक्ष पी० के० अग्रवाल ने कहा कि यह सर्वविदित है कि नागरिकों को नगर निगम द्वारा प्रदान की जानेवाली सेवाओं यथा गृह कर, मल कर जल कर, शिक्षा कर स्वास्थ्य कर आदि की सुविधा प्रदान करने के बदले उक्त क्षेत्र में आनेवाले प्रत्येक निजी मकान या व्यवसायिक प्रतिष्ठान सभी से क्षेत्रफल या निर्माण के अनुसार निगम के द्वारा होल्डिंग टैक्स की वसूली की जाती है। उसके बावजूद व्यवसायिक प्रतिष्ठानों या घर घर से कूड़ा उठाने के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाना अव्यवहारिक प्रतीत होता है। उन्होंने आगे बताया कि व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से घर-घर कूड़ा उठाने के लिए निगम के सशक्त स्थायी समिति के द्वारा अतिरिक्त शुल्क लिए जाने का निर्णय जन विरोधी है इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए क्योंकि व्यवसायी पहले से ही सरकार की ओर से अधिरोपित कई प्रकार के करों के बोझ से दबे हैं। ऐसा लगता है कि सशक्त स्थायी समिति द्वारा एक निजी कंपनी को सभी व्यवसायिक संपत्ति धारकों से जबरन कचरा शुल्क वसूलने की छूट दी गई है जो सही नहीं है। साथ चार्ट के माध्यम से यह बताया गया है कि पटना में जो कचरा शुल्क निर्धारित किया गया है वह देश के विभिन्न शहरों से अधिक है

पटना-रुपया300/- से 5000/- दुकान, | सरकारी एवं कॉमर्शियल ऑफिसेज, गोदाम, मॉल, पेट्रोल पम्प सुपर मार्केट, शोरूम, वर्कशोप रेस्टोरेंट, गेस्ट हाउस, धर्मशाला बैंक, बीमा कार्यालय, छोटे एवं मध्यम उद्योग, मैरेज हॉल, एक्जीविशन हॉल, ट्रेड फेयर

झारखंड-रुपया 50/- से 1000/ होटल, रेस्टोरेंट, स्कूल,मल्टीप्लेक्स स एवं अन्य प्रतिष्ठान

लखनउ-रुपया 100/- से 200/ फूड, वेंडर्स एवं छोटे दुकान, फेयर, महोत्सव एवं एक्जीविशन

अग्रवाल ने कहा कि एक दुकान जिसका क्षेत्रफल 150 से 250 वर्ग फीट है और जिसका होल्डिंग टैक्स सालाना 2000 से 3000 रुपया लगता है तो वैसी परिस्थिति में जो प्रति माह ठोस कचरा प्रबंधन शुल्क निर्धारित किया गया है वह 3600 होगा जो कि होल्डिंग टैक्स से अधिक होगा उसी प्रकार से यदि कोई ऑफिस कॉमर्शियल कम्पलेक्स में है जिसका क्षेत्रफल 500 से 700 वर्ग फीट का है और उस कम्पलेक्स में 50 से 60 ऑफिस है तथा उसका होल्डिंग टैक्स सालाना 3000 से 5000 लगता है वैसी परिस्थिति में भी यदि सभी ऑफिस से प्रति माह 500 रूपया ठोस कचरा प्रबंधन शुल्क लिया जाएगा तो वह 25000 होगा जो सालाना होल्डिंग टैक्स से काफी अधिक है और व्यवहारिक भी प्रतीत नहीं होता है। अतः ठोस कचरा प्रबंधन शुल्क किसी भी परिस्थिति में होल्डिंग टैक्स से 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। एक ओर सालाना होल्डिंग टैक्स का भुगतान एवं दूसरी ओर कचरा के लिए अलग से शुल्क का भुगतान यह दोहरी कर प्रणाली पूर्णरूपेण व्यवहारिक प्रतीत नहीं होता है । देश के अन्य महानगरों की देखा-देखी करके कचरा शुल्क लगाया जा रहा है जबकि अन्य महानगरों एवं बिहार में अवस्थित विभिन्न शहरों में कहीं से भी कोई तुलना नहीं किया जा सकता है और यही कारण है कि इस निर्णय का जगह-जगह विरोध हो रहा है।

अहमदाबाद रुपया 60/ (2/- रुपया प्रति दिन) सभी कॉमर्शियल प्रतिष्ठान ,कॉमर्शियल

मुम्बई- रुपया 150/ सभी कॉमर्शियल प्रतिष्ठान

आन्ध्र प्रदेशरुपया 100/- से 500/ सभी कॉमर्शियल प्रतिष्ठान

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