गुरुजी के गुरुकुल ने पेश की मिसाल

लोक आस्था के महापर्व छठ की तैयारी को लेकर जिला प्रशासन जोर-शोर से लगा हुआ है. आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी छठ घाटों पर तैयारी का जायजा लिया. इन सबके बीच छात्रों में शिक्षा का अलख जगा रहे डॉ एम रहमान ने सैकड़ों छात्रों के साथ पटना के काली घाट की सफाई की. गंगा के इस सबसे पुराने घाट पर हर साल बड़ी संख्या में लोग छठ के अर्ध्य के लिए जुटते हैं. ऐसे में पढ़ाई के साथ सामाजिक सरोकारों से लगातार जुड़े रहने वाले अदम्य अदिति गुरुकुल के संस्थापक डॉ रहमान ने हर संप्रदाय के छात्रों के साथ छठ घाट की सफाई करके समाज को एक बड़ा संदेश दिया है. डॉ रहमान ने इस मौके पर लोगों खासकर छात्रों को दिवाली और छठ की शुभकामनाएं दी हैं. डॉ रहमान ने कहा कि समाज में मिलजुलकर और साथ चलकर ही हम सही नागरिक होने का कर्तव्य निभा सकते हैं और जीवन में सफल होने के लिए भी ये सबसे जरुरी है. इस मौके पर डॉ रहमान के साथ अदम्य अदिति गुरुकुल के निदेशक मुन्ना सर और संस्थान के सैकड़ों छात्र उपस्थित थे.  बता दें कि डॉ एम रहमान शिक्षक के रुप में जहां हर साल बड़ी संख्या में छात्रों को नौकरी प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, वहीं अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन भी वे बखूबी कर रहे हैं. डॉ रहमान के संस्थान अदम्य अदिति गुरुकुल में गरीब, अनाथ और दिव्यांग छात्रों को महज 11 रुपए में प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कराई जाती है. हर साल इस

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BPSC के खिलाफ कोर्ट जाएंगे अभ्यर्थी

BPSC के एक्सपेरिमेंट से PT में छात्र हुए परेशान  एक तो बेरोजगारी, उसपर से सरकार के रुख़ से व्यथित हैं युवा सरकारी नौकरी के मौके लगातार कम हो रहे सरकार की बेरुखी से डिप्रेशन में हैं छात्र अब तो जागिए सरकार शराबबंदी और दहेजबंदी से ज्यादा जरुरी है रोजगार कैसा लगता है जब आप परीक्षा की तैयारी करें और वैकेंसी ही ना आए. कैसा लगता है जब हर बार नेता रोजगार के अवसर देने का वायदा करके चुनाव जीतें और कुर्सी मिलते ही रोजगार शब्द से ही नाता तोड़ लें. इसका दर्द तो उन्हें ही पता होगा जिनके पास उम्र सीमा का बंधन हो और वक्त पर वैकेंसी ना आने के कारण वे बेरोजगार रह जाएं. शायद इसका अहसास भी आज किसी राजनीतिक पार्टी को नहीं है. क्योंकि आज रोजगार से बड़े मुद्दे जीएसटी, नोटबंदी, शराबबंदी और दहेजबंदी हैं. बिहार की बात करें तो BSSC जैसा आयोग एक-एक परीक्षा लेने में वर्षों लगा देता है.. और रिजल्ट तो भूल ही जाइए. वहीं BPSC एक साथ तीन-तीन बैकलॉग की परीक्षा (56-59वीं परीक्षा और 60-62वीं परीक्षा) लेता है. जिनका रिजल्ट आने में भी वर्षों लग जाते हैं. जरा सोचिए… जब तीन साल की परीक्षा एक साथ ली जा रही हो तो जाहिर है इस दौरान कई उम्मीदवारों की उम्रसीमा खत्म हो चुकी होती है या फिर उनके लिए  आखिरी अटेम्ट होता है. फिर भी अगर बीपीएससी जैसा आयोग पीटी परीक्षा में  बिना बताए एक्सपेरिमेंट(परीक्षा में 4 की बजाय 5 ऑप्सन दे) करे और रिजल्ट देने में भी कंजूसी करे तो अभ्यर्थी क्या

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