लोकभवन में ‘बिहार में उच्च शिक्षा का रूपांतरण’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला, राज्यपाल ने किया वाइस चांसलर्स हैंडबुक और यूजीसी रेगुलेशंस के कम्पेंडियम का विमोचन
पटना।। बिहार लोकभवन में गुरुवार को ‘बिहार में उच्च शिक्षा का रूपांतरण’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया.

कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और विकास की व्यापक संभावनाएं हैं. राज्य की प्रतिभा, क्षमता और युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देकर उच्च शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकता है. इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को सकारात्मक सोच, बेहतर समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई के साथ मिलकर काम करना होगा.

राज्यपाल ने कहा कि बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर बनी नकारात्मक धारणा को बदलने की जरूरत है. हर व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश होती है और चुनौतियों की पहचान कर प्रभावी ढंग से काम करने से उच्च शिक्षा में निरंतर सुधार संभव है.

राज्यपाल की बड़ी बातें:
1. बिहार की प्रतिभा और उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर सामने लाने और देश-दुनिया तक पहुंचाने पर जोर दिया.
2. नई पीढ़ी की अपेक्षाओं को समझने, छात्रों की बात सुनने और निरंतर संवाद बनाए रखने की आवश्यकता बताई.
3. शैक्षणिक कैलेंडर को व्यवस्थित करने, लंबित परीक्षाओं के समय आयोजन और परिणामों को समय पर प्रकाशित करने पर विशेष जोर दिया. निर्णयों में देरी से छात्रों में निराशा पैदा होती है.
4. शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। छात्रावास, मेस, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, सड़क, सुरक्षा और अन्य सुविधाएं भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. महिला छात्राओं की सुरक्षा और विश्वविद्यालय परिसरों में लैंगिक संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही.
5. उच्च शिक्षा के डिजिटलीकरण और ‘समर्थ’ प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन, मानव संसाधन विकसित करने, फीडबैक व्यवस्था, शिक्षक विकास कार्यक्रम, खेल कैलेंडर और पुस्तकालयों को रात 10 बजे तक खोलने और पर्याप्त पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया.
6. यूएमएस से ‘समर्थ’ में आंकड़ों के स्थानांतरण के दौरान डाटा की सुरक्षा और शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही.

कार्यशाला को उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर ने भी संबोधित किया. उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है.

राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना तथा विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं अन्य पदाधिकारियों को नियमों और नवाचारों से अवगत कराना है.
तकनीकी सत्रों में वित्त विभाग के संयुक्त आयुक्त अजय ठाकुर ने बजट, निविदा और वित्तीय प्रबंधन पर, सामान्य प्रशासन के संयुक्त सचिव सतीश तिवारी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया पर, उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एन.के. अग्रवाल ने नैक मान्यता की प्रक्रिया पर जानकारी दी.

कार्यक्रम का संचालन राजभवन में विशेष कार्य पदाधिकारी, अकादमिक, डॉ. गौरव सिक्का ने किया. कार्यशाला में राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, वित्त पदाधिकारी, अंगीभूत महाविद्यालयों के प्राचार्य और राजभवन के अधिकारी उपस्थित थे.
