पद, अधिकार, संसाधन और सेवा संबंधी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार की है मांग
पटना। अजीत।। बिहार पंचायत सेवा संघ के आह्वान पर सोमवार से पूरे राज्य में प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारियों सहित संबंधित संवर्गीय पदाधिकारियों ने काला बिल्ला लगाकर सांकेतिक विरोध शुरू कर दिया. पटना में भी पदाधिकारियों ने काला बिल्ला लगाकर सरकार और पंचायती राज विभाग के समक्ष अपनी वर्षों से लंबित मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया. संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर जल्द ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन के तहत सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया जा सकता है.

बिहार पंचायत सेवा संघ की ओर से अपनी मांगों को लेकर 8 सितंबर को पंचायती राज विभाग को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया था. इसके बाद 9 सितंबर को संघ की कार्यकारिणी की बैठक पटना में हुई, जिसमें मांगों और आगे की आंदोलनात्मक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई. 11 सितंबर को भी विभाग को पुनः मांग पत्र सौंपकर लंबित समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई.

संघ के अध्यक्ष सह वैशाली के प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी अजय कुमार चंद्र ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती है, तब तक संघ ने सांकेतिक विरोध शुरू किया है. उन्होंने कहा कि प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी पंचायती राज व्यवस्था को जमीन पर लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उनके पद, अधिकार, संसाधन और सेवा संबंधी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया है. उन्होंने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए पदाधिकारियों को भी मुख्यधारा का हिस्सा मानकर सम्मानजनक तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन करने का अवसर देने की अपील की.

उन्होंने कहा कि पटना सहित पूरे बिहार में सोमवार को काला बिल्ला लगाकर सांकेतिक प्रदर्शन किया गया. संघ का यह कार्यक्रम सरकार का ध्यान वर्षों से लंबित मांगों की ओर आकर्षित करने के लिए किया गया है. संघ ने संकेत दिया है कि यदि दो दिनों के सांकेतिक विरोध के बाद भी सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती है तो पूरे बिहार के पंचायत सेवा संवर्ग के पदाधिकारी सामूहिक अवकाश पर जाने पर विचार करेंगे.
संघ की प्रमुख मांगों में प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी के पद को राजपत्रित घोषित करना और उन्हें आवश्यक वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियां प्रदान करना शामिल है. इसके साथ ही प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी को पुनः पंचायत समिति का कार्यपालक पदाधिकारी बनाए जाने की मांग की गई है, ताकि पंचायत समिति के कार्यों के निष्पादन में विभागीय उत्तरदायित्व और स्पष्टता सुनिश्चित हो सके.

संघ ने पंचायत राज संवर्ग में वेतन और सेवा संबंधी विसंगतियों को दूर करने, प्रथम प्रोन्नति स्तर को लेवल-7 से लेवल-9 किए जाने, कैडर का पुनर्गठन करने और सभी लंबित प्रोन्नति मामलों का शीघ्र निष्पादन करने की मांग भी उठाई है. संघ का कहना है कि विभागीय कार्यों और जिम्मेदारियों में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन उसके अनुरूप पदाधिकारियों को अधिकार और संसाधन नहीं मिल सके हैं.
एसीईओ और एडीपीआरओ के पदों के संबंध में जारी विभागीय प्रावधानों को धरातल पर लागू करने, एडीपीआरओ को कार्यालय और वाहन उपलब्ध कराने तथा पंचायतों के निरीक्षण सहित पंचायत राज व्यवस्था से संबंधित कार्यों की स्पष्ट जिम्मेदारी देने की मांग की गई है. इसके अलावा विभागीय पदाधिकारियों को पर्याप्त प्रशासनिक एवं कार्यात्मक स्वतंत्रता देने और गैर-विभागीय पदाधिकारियों के अनावश्यक हस्तक्षेप को समाप्त करने की मांग भी शामिल है.
संघ ने विभागीय कर्मियों पर संबंधित विभागीय पदाधिकारी का पूर्ण एवं एकल प्रशासनिक नियंत्रण सुनिश्चित करने की मांग की है. प्रखंड पंचायत राज कार्यालयों के सुचारू संचालन के लिए उच्च वर्गीय लिपिक, निम्न वर्गीय लिपिक और अनुसेवक के पद सृजित कर पदस्थापना करने तथा कार्यालय संचालन के लिए अलग से कार्यालय व्यय की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है. वाहन भुगतान सहित अन्य लंबित समस्याओं के समाधान की मांग भी संघ ने उठाई है.
संघ का कहना है कि वर्ष 2010 में बिहार पंचायत सेवा संवर्ग के गठन के बाद से पदाधिकारी पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए लगातार जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं. समय के साथ विभागीय कार्यों का दायरा बढ़ा, लेकिन प्रशासनिक शक्तियों, संसाधनों, सुविधाओं और सेवा लाभों में उसी अनुपात में सुधार नहीं हुआ. इसी कारण संवर्ग के पदाधिकारियों में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है.
संघ ने सरकार से मांगों पर वार्ता के माध्यम से स्थायी समाधान निकालने की अपील की है. संघ का कहना है कि यदि सरकार की ओर से सकारात्मक पहल करते हुए प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की जाती है और मांगों के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं तो प्रस्तावित सामूहिक अवकाश सहित आगे के आंदोलनात्मक कार्यक्रम पर संघ पुनर्विचार कर सकता है.
