‘Anti Women Alliance’ ने देश की आधी आबादी के हक पर चोट की’

एकजुट विपक्ष ने नारी शक्ति बिल पास नहीं होने दिया

54 वोट कम होने से पास नहीं हो पाया बिल




लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया. सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े. इस विषय को लेकर बीजेपी के नेताओं ने विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. भाजपा नेता बांसुरी स्वराज कहा है कि, विपक्ष ने महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है. चुनाव में विपक्ष को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

क्या बोले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन

‘आज का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो सकता था, लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस, DMK, TMC, समाजवादी पार्टी के ‘Anti Women Alliance’ ने देश की आधी आबादी के हक पर चोट की है. महिलाओं की हिस्सेदारी और भागीदारी की हकमारी कर उन्होंने अपनी महिला-विरोधी सोच का परिचय दिया है.’

संविधान संशोधन बिल के गिरने पर राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव का बयान:-

महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में संविधान बदलने के गलत इरादे से लाए गए संविधान संशोधन बिल का आज लोकसभा में गिरना प्रमाणित करता है कि बहुमत के बल पर आप जनभावना का गला घोंट, संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार कर, परिसीमन के नाम पर विपक्षी दलों के अधिकारों और क्षेत्रीय संतुलन को नहीं बिगाड़ सकते. तेजस्वी यादव ने कहा कि संविधान संशोधन बिल का गिरना दर्शाता है कि बिना सर्वदलीय आम सहमति और देशव्यापी विमर्श के, चालाकी से, अनमने से मन से राजनीतिक जल्दबाजी में लाए गए इस विधेयक के पक्ष में एनडीए सरकार के पास ठोस नैतिक और संवैधानिक तर्क भी नहीं थे. पहले से ही सर्वसम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पुन: संशोधन के लिए विशेष संसद सत्र बुलाकर उसे पेश करना केवल और केवल विभिन्न राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ के लिए किया गया एक निम्नस्तर का पाखंड, प्रपंच और प्रोपेगेंडा था.

pncb

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