अनुशासनिक कार्रवाई में सीसीए रूल से तय होगा नैसर्गिक न्याय का रास्ता: मुख्य जांच आयुक्त

  • सचिवालय में पदास्थापित बिहार प्रशासनिक सेवा के 249 पदाधिकारियों को मिला प्रशिक्षण
  • प्रशिक्षण में बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमावली 2005 के प्रावधानों से कराया गया रूबरू

पटना।। सरकारी सेवक के खिलाफ दर्ज अनुशासनिक कार्रवाई कई बार न्यायालय से प्रक्रिया में त्रुटि के कारण खारिज हो जाती है. इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि संचालन या प्रस्तुतिकरण अधिकारी प्रकरण की जांच और कार्रवाई में सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 2005 के प्रावधानों का ठीक ढंग से पालन नहीं करते. ये बातें गुरुवार को महानिदेशक-सह- मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने सरकारी विभागों और कार्यालयों में पदास्थापित बिहार प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कही. वह पुराना सचिवालय स्थित अधिवेशन भवन में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से आयोजित अनुशासनिक कार्यवाही से संबंधित उन्मुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.


दीपक कुमार सिंह ने कहा कि सरकारी सेवक के खिलाफ लगे आरोपों में न्यायालय अक्सर दो महत्वपूर्ण बातों को संज्ञान में लेते हैं. इसमें पहले उक्त सरकारी सेवक के खिलाफ नैसर्गिक न्याय का अनुपालन हुआ कि नहीं और दूसरा अनुशासनिक कार्रवाई में सरकारी सेवक वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील (सीसीए) नियमावली 2005 के तकनीकी पक्षों का ख्याल रखा गया है कि नहीं. उन्होंने बताया कि सरकारी सेवक के खिलाफ दर्ज प्रकरण में सीसीए रूल का पालन करने से नैसर्गिक न्याय का खुद-ब-खुद अनुपालन होगा.




महानिदेशक-सह- मुख्य जांच आयुक्त ने कहा कि सचिवालय में पदस्थापित पदाधिकारियों की भूमिका सामान्य रूप से बदलती रहती है. इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि सेवावार सभी पदाधिकारियों को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्मिलित किया जाए. इसी के तहत पहले चरण में सचिवालय में पदस्थापित भारतीय प्रशासनिक सेवा के 109 पदाधिकारियों को अनुशासनिक कार्यवाही को लेकर प्रशिक्षित किया गया. दूसरे फेज में गुरुवार को सचिवालय में पदास्थापित बिहार प्रशासनिक सेवा के 249 पदाधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया.

इस अवसर पर प्रशिक्षक सेवानिवृत्त संयुक्त सचिव सतीश तिवारी ने सीसीए रूल के संवैधानिक और उसके पृष्ठभूमि से प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों को रूबरू कराया. उन्होंने आपराधिक मामलों में विशेषतौर पर रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़े जाने एवं अनुप्रत्यानुपातिक धनोपार्जन के मामले में आरोप पत्र गठन की प्रक्रिया के साथ ही अनुशासनिक कार्रवाई के हर चरण को विस्तार से बताया. अन्य गणमान्य लोगों में प्रशिक्षक के रूप में सेवा निवृत्त संयुक्त सचिव शालिग्राम पांडेय, मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय से संयुक्त सचिव अमरेश कुमार अमर, उप सचिव आशुतोष कुमार आदि मौजूद रहे.

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