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	<title>himanshu shekhar jourlnalist coloumn &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>महंगाई से बचाने वाली &#8221; वैक्सीन&#8217;!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Feb 2022 03:40:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[गांव -शहर]]></category>
		<category><![CDATA[himanshu shekhar jourlnalist coloumn]]></category>
		<category><![CDATA[himanshu shekher patna]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8216;अंगना&#8217;: हमारी- तुम्हारी कहानियां महंगाई से बचाने वाला &#8221; वैक्सीन&#8217; कब होगा इजाद ? ‘बाजार में गर्मी जेब में नरमी’ बढ़ती महंगाई कम हो,सिकुड़ती आमदनी बढ़े सुधि पाठकों, गुड मॉर्निंग,सुहानी सुबह हम सभी का स्वागत कर रही है. आलस मिटा हमारे पूरे शरीर में जोश, स्फूर्ति और शक्ति भर रही है.आइये, हम सभी सुहानी भोर का अभिवादन स्वीकार करें. नैन बिछाए, बाहें पसारे आज की सुबह बड़े प्यार से हमें आवाज दे रही है.. जागो, मोहन प्यारे, जागो ! जागो, उठकर देखो जीवन ज्योत उजागर है. वाकई, रात गई, फिर आयी नयी सुबह. ढेर सारी मुस्कराहट लिये, अथाह उमंग भरी ताजगी लिये. हमारी खुशी के लिए, हम पर मेहरबान होने के लिए, एक नयी &#8216;शुरुआत’ के लिए हमें &#8216;जागना&#8217; ही होगा. ठंड भी अब नहीं, आहिस्ता-आहिस्ता साथ छोड़ रही है.वासंती बयार हिलोरे, मार रही है. करवट &#160;बदल रहा मौसम पूरी तरह अनुकूल है. वाकई, कितनी अच्छी है आज की सुबह! ऐसे में क्यों न पवित्र मन, पवित्र हृदय से ईश को नमन कर शानदार शुरुआत की जाए ताकि पूरा दिन, रात इतना बेहतर बीते कि हम ‘तर’ हो जाएं. दोस्तों, दिल का भूले नहीं तो खुलकर कहें अपनी बात. कोई सुने, न सुने. परवाह नहीं. मैं हूँ ना! &#8216;हमारी-तुम्हारी कहानियाँ&#8217; &#160;कहने- सुनने वाला. मन की गांठे खोल सुनाइये दिल की बात. हर वह बात जो अनिवार्य लगे, अवश्य कहें. वैसी सभी बातें भी बेझिझक सुना ही दें जिसे कह देने को आपकी तबीयत मचलने लगे. सुनने-सुनाने लिए ही तो मैं हूँ. हर कदम हर मोड़ पर पायेंगे मुझे,सदा देता, सदा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<figure class="wp-block-pullquote"><blockquote><p><strong>&#8216;अंगना&#8217;: हमारी- तुम्हारी कहानियां</strong></p></blockquote></figure>



<p><strong>महंगाई से बचाने वाला &#8221; वैक्सीन&#8217; कब होगा इजाद ?</strong></p>



<p><strong>‘बाजार में गर्मी जेब में नरमी’</strong></p>



<p><strong>बढ़ती महंगाई कम हो,सिकुड़ती आमदनी बढ़े</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="395" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/4db6c7c1-52e5-476f-a05f-9dfb4070bd27-2.jpg" alt="" class="wp-image-59241" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/4db6c7c1-52e5-476f-a05f-9dfb4070bd27-2.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/02/4db6c7c1-52e5-476f-a05f-9dfb4070bd27-2-350x213.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सुधि पाठकों, गुड मॉर्निंग,सुहानी सुबह हम सभी का स्वागत कर रही है. आलस मिटा हमारे पूरे शरीर में जोश, स्फूर्ति और शक्ति भर रही है.आइये, हम सभी सुहानी भोर का अभिवादन स्वीकार करें. नैन बिछाए, बाहें पसारे आज की सुबह बड़े प्यार से हमें आवाज दे रही है.. जागो, मोहन प्यारे, जागो ! जागो, उठकर देखो जीवन ज्योत उजागर है. वाकई, रात गई, फिर आयी नयी सुबह. ढेर सारी मुस्कराहट लिये, अथाह उमंग भरी ताजगी लिये. हमारी खुशी के लिए, हम पर मेहरबान होने के लिए, एक नयी &#8216;शुरुआत’ के लिए हमें &#8216;जागना&#8217; ही होगा. ठंड भी अब नहीं, आहिस्ता-आहिस्ता साथ छोड़ रही है.वासंती बयार हिलोरे, मार रही है. करवट &nbsp;बदल रहा मौसम पूरी तरह अनुकूल है. वाकई, कितनी अच्छी है आज की सुबह! ऐसे में क्यों न पवित्र मन, पवित्र हृदय से ईश को नमन कर शानदार शुरुआत की जाए ताकि पूरा दिन, रात इतना बेहतर बीते कि हम ‘तर’ हो जाएं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="432" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/sunrise.jpeg" alt="" class="wp-image-59242" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/sunrise.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/02/sunrise-350x233.jpeg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>दोस्तों, दिल का भूले नहीं तो खुलकर कहें अपनी बात. कोई सुने, न सुने. परवाह नहीं. मैं हूँ ना! &#8216;हमारी-तुम्हारी कहानियाँ&#8217; &nbsp;कहने- सुनने वाला. मन की गांठे खोल सुनाइये दिल की बात. हर वह बात जो अनिवार्य लगे, अवश्य कहें. वैसी सभी बातें भी बेझिझक सुना ही दें जिसे कह देने को आपकी तबीयत मचलने लगे. सुनने-सुनाने लिए ही तो मैं हूँ. हर कदम हर मोड़ पर पायेंगे मुझे,सदा देता, सदा लेता मिल ही जाऊँगा मैं.</p>



<p>प्यारे दोस्तों, आपका यही मसला है न&#8230; कोरोना काल में कैसे जिंदा रहे? कैसे चले आर्थिक &#8216;चक्का&#8217; ? अब तक तो &#8216;बहुत कुछ गंवा जैसे-तैसे सलामत रह लिए आगे क्या होगा ! कैसे गुजर होगा बढ़ती जा रही महंगाई में, सीमित होती जा रही आमदनी में.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/Newscoviddepression.jpg" alt="" class="wp-image-59243" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/Newscoviddepression.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/02/Newscoviddepression-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>टेंशन ही टेंशन! न दिन को चैन, न रात को आराम.| सोते जागते, उठते-बैठते बस एक यही फ़िक्र. कोरोना, कोरोना, कोरोना ! कब खत्म होगा इसका रोना. कितना कुछ बदल डाला है इस काल ने. कुछ भी पहले जैसा सहज नहीं रहा. न मिलना जुलना सहज रहा, न हाथ मिलाना. न कोई महफिल पहले जैसी रही, न हाट-बाजार. बस, जब कहीं निकलो चेहरे पर मास्क लगाकर निकलो, शारीरिक दूरी बनाकर भीड़ में चलो. ये क्या हो गया, ये कैसे हो गया. हम सभी साक्षी है इस बदलाव के. पीढियां दर पीढियां प्रभावित होंगी इस अनचाहे बदलाव के कारण.</p>



<p>महंगाई तो पहले भी कम जुल्म नहीं ढा रही थी, कोरोना काल में सातवें आसमान से भी ऊपर जा पहुंची. आमदनी तो बढ़ नहीं रही, &nbsp;जरुरतें जरूर बढ़ती ही जा रही है. खर्चे भी रुकने का नाम नहीं ले रहे. कैसे चलेगी गृहस्थी, कैसे कटेगा ब्रह्मचर्य. रोटी&nbsp;, कपड़ा और मकान के बिना ना पहले कोई रह सका, ना आज के &#8216;फास्ट&#8217; तरक्की की ओर मेरे कदम बढ़ाते जमाने में. उस पर कयामत यह कि कोरोना काल पीछा ही नहीं छोड़ रहा. कोरोना काल, महाकाल, जालिम काल, आफत भरा काल, मौत का सौदागर काल!</p>



<p>अब तो तीन बुनियादी जरुरते कुछ यूं बदल गयी&#8230; <strong>महंगी रोटी, महंगा कपड़ा और महंगा मकान</strong>.| ऐसे में चौथी, पांचवी बुनियादी जरूरत किसी की होगी हुआ करे. हमारी- आपकी तीन बुनियादी जरूरतें भोजन, वस्त्र और आवास किसी तरह पूरी हो जाएँ बस यहीं बहुत है. हमें और की चाह नहीं, कुछ और दरकार नहीं. कहीं रोटी, कपड़ा और मकान के भी लाले न पड़ जाए. यहीं डर है, चिंता है, परेशानी है. पहले ही महंगाई ने क्या कम जुल्म ढाए है, जो अब ‘महा महंगाई&#8217; जान लेने पर आमादा है.</p>



<p>मौजूदा सरकार भले ही ना माने, कोई कारपोरेट घराना कितना ही नजर फेर ले. कितने भी धन कुबेर आकर बार-बार झुठलाते ही क्यों न रहें. इस सच को हरगिज नकारा नहीं जा सकता कि यह सिर्फ महंगाई का सितम नहीं, &#8216;महा महंगाई&#8217; का वह जानलेवा प्रहार है जो हमारी मौजूदा जिंदगी को तहस-नहस कर रहा है. अपने &#8216;चक्रव्यूह&#8217; में हमें जकड़ इसने हमारा जीना दुश्वार कर दिया है. इसकी मार से बचाने का कोई &#8220;वैक्सीन&#8221; क्यों कोई इजाद नहीं करता! &#8216;महा महंगाई&#8217; का सामना करने के लिए क्यों कोई किसी &#8216;इम्युनिटी&#8217; की बात नहीं करता &#8216;बाजार की &#8216;गरमी बढ़ती ही जा रही है, पाकेट की &#8216;गरमी&#8217; नरम पड़ती जा रही है.</p>



<p>हर आम, खास की एक ही समस्या&#8230; एक ही मांग. बढ़ती महंगाई कम हो, सिकुड़ती आमदनी बढ़े. मगर कैसे, कोई उपाय है ? कहीं कोई आस नहीं, कोई राह नहीं. महान शायर मिर्जा गालिब ने अपने जमाने में एक गजल की रचना की थी, जिसकी पंक्ति है ‘कोई उम्मीद नजर नहीं आती, कोई सूरत नज़र नहीं आती’ गालिब की ये पंक्ति आज की जिंदगी गुजार रहे हर शख्स&#8217; हर व्यक्ति के मौजूदा हालात से खूब मेल खा रही है. है, ना .</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="371" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/effect-of-inflation-650x371.jpg" alt="" class="wp-image-59244" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/effect-of-inflation-650x371.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/02/effect-of-inflation-350x200.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/02/effect-of-inflation.jpg 700w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>दोस्तों, क्या ऐसा नहीं लगता कि महंगाई का रोना&#8217; होते हुए भी इसके खिलाफ कोई रीयल आवाज, आम आवाज कहीं से नहीं उठ रही. अपने-अपने एजेंडा वाले तथाकथित आज के राजनीतिक दल चाहे लाख इसके खिलाफ बोलते हो,, यदा-कदा सड़कों पर &#8216;विरोध प्रदर्शन करते हैं. जिस तरह कभी डीजल-पेट्रोल, कभी रसोई गैस तो कभी यूरिया खाद की बढ़ती कीमतों को लेकर नारेबाजी करते नजर आया करते हों. अगर ऐसा क्या खास है, ऐसी क्या मजबूरी हैं जो मौजूदा व्यवस्था के &#8216;जनक&#8217; पर इसका कोई असर नहीं पड़ता. ना उनके &#8216;काम&#8217; पर जूँ रेंगती है, ना उनकी &#8216;सेहत&#8217; पर आफत आती है. उनका &#8216;व्यापार तो फलता जा रहा है, फूलता जा रहा है. वाकई, यह सोलह आने सच है.कुछ नहीं बदलने वाला, कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. महंगाई ना कभी कमी हैं, ना कभी कमेगी. इसके कम होने की आस हमें छोड़नी ही होगी, क्योंकि यह नक्कारखाना है, इस नगरी में तूती की आवाज भला कौन है सुनने वाला ! कुछ और ही करना होगा कोई और विकल्प की बात करनी होगी. किसी नए मार्ग पर चलना होगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/images-1.jpg" alt="" class="wp-image-59245" width="716" height="376"/></figure>



<p>हां दोस्तों, एक ही विकल्प है कुछ नया करें. एक्स्ट्रा माइल्स कवर करने वाला नया प्लान गढ़ें. एक और लकीर खींच कुछ नया करें जो हम कर सकते हैं. खुद पर भरोसा रख, टाइम मैनेजमेंट के गुर सीख ऐसी नयी शुरुआत करें जिसमें कि आने वाले दिनों में बहुत जल्द ना सिर्फ हमारी आमदनी बढ़े, बल्कि अपना भविष्य भी सुरक्षित रख सके. अगर ऐसा हुआ तो हम हर बदलते बाजार के &#8216;स्टार&#8217; बन अपना ही नहीं, औरों का भी भला कर सकेंगे. वैसे भी अपना भला हम खुद नहीं करेंगे तो और कौन है करने वाला. किसी अन्य से उम्मीद करना छोड़ अपना &#8216;स्टार्ट अप&#8217; खुद शुरू करें वह भी देर किये बिना. इसे बखूबी समझने के लिए गणित के किसी &#8216;फार्मूले&#8217; की तरह काम करने वाला एक सूत्र वाक्य प्रस्तुत कर रहा हूँ. मुझे यह सूत्र वाक्य एक ऐसी अनूठी पुस्तक में मिला जिसका नाम बेस्ट सीरीज की चर्चित पुस्तकों में दर्ज है. इस सूत्र वाक्य को अमल में लाकर बहुतों ने अपनी जिंदगी बेहतर बना ली. कोई भी इससे अपना फ्यूचर तक संवार सकता है.</p>



<p>हमारी, आपकी, हम सभी की मौजूदा कहानी में बदलाव लाने वाला सूत्रवाक्य है&#8230; &#8220;अगर आज भी हम वहीं काम कर रहे हैं जो करते आ रहे हैं तो परिणाम वही मिलेगा जो मिलता आ रहा है&#8230; इसे कुछ इस तरह से भी समझा जा सकता हेर अगर हमें परिणाम बदलना है तो हमें &#8216;वहीं&#8217; काम करते रहने के ढर्रे में थोड़ी तब्दीली करें अपने पहले वाले काम कें साथ ही वह &#8216;अतिरिक्त&#8217; काम भी करना होगा जो अब तक कभी नहीं किया, अथवा कम परिणाम देने वाले पुराने काम को छोड़ जल्द ही ज्यादा परिणाम देने वाला कोई ऐसा &#8216;नया&#8217; काम शुरू करना होगा जिसमें आपकी &#8216;काबिलियत&#8217; का शत-प्रतिशत निवेश हो ताकि आप हमेशा फायदे में रह सकें, आपका भरोसा, आपकी शाख मार्केट में बनी रहे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/adobe-stock-kindness-picture.jpg" alt="" class="wp-image-59246" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/adobe-stock-kindness-picture.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/02/adobe-stock-kindness-picture-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जी हां, दोस्तों, इस शुरुआत से ना सिर्फ सीमित आमदनी देने वाली हमारी अपनी कहानी का कायापलट हो जायेगा, बल्कि ऐसी खूबसूरत कहानी के हम नायक बन जायेंगे जिस पर हर कोई गर्व करने लगेगा. हमारी नयी शुरुआत की शानदार उपलब्धि से हमारी आने वाली पीढ़ियां हमेशा प्रेरित होती रहेंगी. हमें आदर्श मान हम पर नाज करेंगी.</p>



<p>तो दोस्तों, आज की दास्तान बस इतनी ही. अगली बार ‘हमारी-तुम्हारी कहानियां’ में रू-ब-रू हो कुछ और शेयर करने तक के लिए आज विदा,</p>



<p>&nbsp;ऑल द बेस्ट ! बस चलते &#8211; चलते यही कहना है</p>



<p>कभी तो मिलेगी, कहीं तो मिलेगी बहारों की मंजिल राही&#8230;!<br><strong>&nbsp;हिमांशु शेखर,वरिष्ठ पत्रकार &nbsp;&nbsp;&nbsp;</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अपनी कहो, कुछ मेरी सुनो-हिमांशु शेखर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/himanshu-shekhar-jourlnalist-coloumn/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Feb 2022 16:45:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[himanshu shekhar jourlnalist coloumn]]></category>
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					<description><![CDATA[अपनी कहो, कुछ मेरी सुनो सुधि पाठकों, शुभ हो . आज का दिन आपके लिए अच्छी यादगार बने, आपको असीम ऊर्जा दे . नये विचार दे,. सेहत अच्छी रखे. शारीरिक-मानसिक शक्ति दे, प्रकृति से आपका नाता सलामत रहे.सुख- शांति- समृद्धि आपके घर-आंगन में सदा बनी रहे. आपका &#8216;गुलदस्ता&#8217; आपके ईद-गिर्द खुशबू फैलाये, जिसमें सराबोर हो आप हर पल, हर क्षण निखरते चले जाएं. कामयाबी के रास्ते पर बढ़ते आपके कदम कभी लड़खड़ाये नहीं। आपकी आन बान-शान चौबीसों घंटे सलामत रहे, आपसे संवाद शुरू करने के&#160;लिए एक &#8216;स्तम्भ &#8216; शुरू करने का जब मैने विचार किया तो इसके नामकरण के लिए बहुत सोचा, मनन किया और तब जाकर &#8216;अंगना: हमारी-तुम्हारी कहानियां’ नाम रखने का आइडिया आया. मैंने , तत्क्षण इस नाम पर मुहर लगा दी. मेरा यह फैसला कितना उचित है, यह मैं आप ही पर छोड़ता हूँ. मेरा तो इस बारे में यही कहना है कि आज की &#8216;डिजिटल&#8217; होती जा रही हमारी जीवन शैली के साथ &#8216;अंगना&#8217; शब्द का कौंधना, उसे महसूस करना हमें गुजरे जमाने की उन खट्टी-मीठी यादों से जोड़ सुहाना कर देगा, जो पल कभी हमारी जिंदगी का हिस्सा थे. यूं कहें कि &#8216;अंगना&#8217; के बगैर हमारा जीवन अधूरा रहता. अपनी परंपरा, रीति-रिवाज से दूर होते जाते और फिर हम कहीं के ना होते. ऐसे में &#8221;अंगना: हमारी तुम्हारी कहानियाँ स्तंभ ना सिर्फ गुजरे दौर के &#8216;गौरव&#8217; से हमारी सांठ-गांठ बढ़ायेगा, बल्कि हमारी आज की महानगरीय सभ्यता-संस्कृति के संग हमारे जीने की विवशता नयी शक्ल पाएगी.&#160; नयी राह, नयी दिशा से नया आयाम ग्रहण करेगी. &#8216;अंगना&#8217; [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong><a href="https://www.patnanow.com/himanshu-shekhar-jourlnalist-coloumn/" data-type="post" data-id="59125">अपनी कहो, कुछ मेरी सुनो</a></strong></p>



<p><strong>सुधि पाठकों, शुभ हो . आज का दिन आपके लिए अच्छी यादगार बने, आपको असीम ऊर्जा दे . नये विचार दे,. सेहत अच्छी रखे. शारीरिक-मानसिक शक्ति दे, प्रकृति से आपका नाता सलामत रहे.सुख- शांति- समृद्धि आपके घर-आंगन में सदा बनी रहे. आपका &#8216;गुलदस्ता&#8217; आपके ईद-गिर्द खुशबू फैलाये, जिसमें सराबोर हो आप हर पल, हर क्षण निखरते चले जाएं. कामयाबी के रास्ते पर बढ़ते आपके कदम कभी लड़खड़ाये नहीं। आपकी आन बान-शान चौबीसों घंटे सलामत रहे,</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="395" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/4db6c7c1-52e5-476f-a05f-9dfb4070bd27.jpg" alt="" class="wp-image-59126" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/4db6c7c1-52e5-476f-a05f-9dfb4070bd27.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/02/4db6c7c1-52e5-476f-a05f-9dfb4070bd27-350x213.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आपसे संवाद शुरू करने के&nbsp;लिए एक &#8216;स्तम्भ &#8216; शुरू करने का जब मैने विचार किया तो इसके नामकरण के लिए बहुत सोचा, मनन किया और तब जाकर &#8216;अंगना: हमारी-तुम्हारी कहानियां’ नाम रखने का आइडिया आया. मैंने , तत्क्षण इस नाम पर मुहर लगा दी. मेरा यह फैसला कितना उचित है, यह मैं आप ही पर छोड़ता हूँ. मेरा तो इस बारे में यही कहना है कि आज की &#8216;डिजिटल&#8217; होती जा रही हमारी जीवन शैली के साथ &#8216;अंगना&#8217; शब्द का कौंधना, उसे महसूस करना हमें गुजरे जमाने की उन खट्टी-मीठी यादों से जोड़ सुहाना कर देगा, जो पल कभी हमारी जिंदगी का हिस्सा थे. यूं कहें कि &#8216;अंगना&#8217; के बगैर हमारा जीवन अधूरा रहता. अपनी परंपरा, रीति-रिवाज से दूर होते जाते और फिर हम कहीं के ना होते. ऐसे में &#8221;अंगना: हमारी तुम्हारी कहानियाँ स्तंभ ना सिर्फ गुजरे दौर के &#8216;गौरव&#8217; से हमारी सांठ-गांठ बढ़ायेगा, बल्कि हमारी आज की महानगरीय सभ्यता-संस्कृति के संग हमारे जीने की विवशता नयी शक्ल पाएगी.&nbsp; नयी राह, नयी दिशा से नया आयाम ग्रहण करेगी. &#8216;अंगना&#8217; की अनुभूति हमें सदा आनंद से तृप्त करती रहेगी&#8230;. यही मेरा विश्वास है.</p>



<p>आज की सुबह क्यों ना चाय की &#8216;चुस्की&#8217; लेते हुये दिवंगत सुर साम्राज्ञी, बुलबुले हिन्द, कोकिल कंठ -लता मंगेशकर की बात की जाए, उन्हें याद कर, उनको नमन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाए. लता दी अब हमारे बीच नहीं रहीं, मगर उनके कोकिल कंठ से गाये अनगिनत सदाबहार मधुर गाने सुनते हुए हम हमेशा सुकून पाते रहेंगे. लता दी को हम वाकई कभी भुला नहीं पाएंगे. जब कभी भी सुनेंगे उनके गीत, संग संग हम भी गुनगुनायेंगे. हां, हम उन्हें कभी भुला ना पायेंगे . दोस्तों, लता मंगेशकर को याद करते हुये उनके गाये दो युगल गीत का मैं जिक्र कर रहा हूं जिन्हें मैं अक्सर उनके जीते जी भी गुनगुनाया करता रहा और अनंत सफर पर उनके चले जाने के बाद आज भी गुनगुना रहा हूँ&#8230;. उन्हें नमन कर रहा हूं. पहला युगल गीत पार्श्व गायक तलत महमूद के साथ गाया संगीतकार सी. रामचन्द्र ( चितेलकर रामचंद्र )की कम्पोजिंग में ढली पुरानी फिल्म &#8216;परछाई&#8217; का है.</p>



<p>बहुत-बहुत प्यारे और मधुर इस गीत के बोल है&#8230;&#8217; अपनी कहो, कुछ मेरी सुनो, क्या दिल का लगाना भूल गये.. क्या भूल गये, रोने की आदत ऐसी पड़ी हंसने का तराना भूल गये, हां भूल गए&#8230;.. दूसरा युगल गीत पार्श्व गायक मोहम्मद रफी के साथ गाया फिल्म शोला और शबनम का है। संगीतकार खय्याम की कम्पोजिंग में बने इस मेलोडियस सांग के बोल है..&#8217;जीत ही लेंगे बाजी हम-तुम, खेल अधूरा छूटे ना, प्यार का बंधन, जनम का बंधन, जनम का बंधन छूटे ना, प्यार का बंधन टूटे ना &#8230;&#8217; पहले युगल गीत &#8220;अपनी कहो, कुछ मेरी सुनो&#8217; में तीन अंतरा हैं , जबकि दूसरे युगल गीत &#8216;जीत ही लेंगे बाजी हम-तुम में सिर्फ दो ही अंतरा हैं . मैं इन दोनों गीतों के अंतरा पेश कर रहा हूं जो आपको उनकी याद दिलायेंगे, मधुर स्मृतियों को तरोताजा कर देंगे. आपने इन्हें ना भी सुना हो तो भी आपको यकीनन अच्छे लगेंगे&#8230;.प्रेरणा देंगे.</p>



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<iframe loading="lazy" title="APNI KAHO KUCHH MERI SUNO - LATA -TALAT  -NOOR LUCKHNAVI -C RAMCHANDRA -PARCHHAIN ( 1952)" width="640" height="480" src="https://www.youtube.com/embed/33qih0ZRVs0?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe>
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<p>&nbsp;&#8216;अपनी कहो, कुछ मेरी सुनो ? गीत का पहला अंतरा है &#8230; काली रातें बीत गईं फिर चांदनी रातें आयी हैं, फिर चांदनी रातें आयी है, दिल में नहीं उजियारा मेरे, गम की घटायें छायी है, गम की घटायें छायी है, प्रीत के वादे याद करो, क्या प्रीत निभाना भूल गये, क्या भूल गये. दूसरा अंतरा है &nbsp;<em>‘भूला हुआ है राह मुसाफिर बिछड़ा हुआ है मंजिल से, बिछड़ा हुआ है मंजिल से, खोये हुए रस्ते का पता तुम पूछ लो खुद अपने दिल से, तुम पूछ लो खुद अपने दिल से&#8230; चलते-चलते इतना थके मंजिल का ठिकाना भूल गये</em>,<em> हां भूल गये</em>. तीसरा अंतरा है &#8230; नजदीक बढ़ो, नजदीक बढ़ो ये मौसम नहीं फिर आने का, ये मौसम नहीं फिर आने का .. नजदीक शमा के जाने से क्या हाल हुआ परवाने का, क्या हाल हुआ परवाने का&#8230;. मिटने का फसाना याद रहा, जलने का फसाना भूल गये, क्या भूल गये .. अपनी कहो कुछ मेरी सुनो, क्या दिल का लगाना भूल गये क्या भूल गये.</p>



<p>दूसरे युगल गीत &#8216;जीत ही लेंगे बाजी हम-तुम&#8217; का पहला अंतरा है&#8230;<em> मिलता है जहां धरती से गगन, आओ वहीं हम जाएं</em>। तू मेरे लिए मैं तेरे लिए, तू मेरे लिए मैं तेरे लिए इस दुनिया को ठुकरायें, इस दुनिया को ठुकरायें, दूर बसा लें दिल की जन्नत, जिसको जमाना लूटे ना ,प्यार का बंधन, जनम का बंधन, जनम का बंधन छूटे ना, प्यार का बंधन टूटे ना. दूसरा अंतरा है, मिलने&#8217; की खुशी, &#8216;ना मिलने&#8217; का गम, खत्म ये झगड़े हो जायें, मैं मैं ना रहूँ, तू-तू ना रहे, मैं मैं ना रहूँ, तू &#8211; तू ना रहें, एक-दूजे में खो जायें, एक दूजे में खो जायें, मैं भी ना छोडूं पल भर दामन, तू भी मुझसे रूठे ना,प्यार का बंधन जनम का बंधन, जनम का बंधन छूटे ना,प्यार का बंधन टूटे ना&#8230; जीत ही लेंगे बाजी हम- तुम, खेल अधूरा छूटे ना.</p>



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<iframe loading="lazy" title="PYAR KA BANDHAN JANAM KA BANDHAN CHHOOTE  ;BY LATA,M D KHAYYAM &amp;quot;SHOLA AUR SHABNAM 1961&amp;quot;" width="640" height="480" src="https://www.youtube.com/embed/r-_ASMRlhKg?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe>
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<p>दोस्तों आज आज की बातें,मुलाक़ात बस इतनी कर लेना बातें कल चाहे जितनी &#8230;.</p>



<p><strong>हिमांशु शेखर</strong></p>
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