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	<title>WHO wants to tell the world &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>नई महामारी का खतरा! चाइना के अंदर बच्चों में फैल रही रहस्यमयी बीमारी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/danger-of-new-epidemic-mysterious-disease-spreading-among-children-in-china/</link>
		
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		<pubDate>Thu, 23 Nov 2023 04:39:57 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Mysterious disease spreading among children in China]]></category>
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		<category><![CDATA[WHO wants to tell the world]]></category>
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					<description><![CDATA[डब्ल्यूएचओ ने चीन से विस्तृत जानकारी माँगी स्कूल बंद करने की तैयारीचीन में बच्चों पर ही नजर आ रहा ज्यादा प्रभाव कोरोना का कहर देखने के बाद अब लोग महामारी के नाम से भी डरने लगे हैं. ऐसे समय एक नई महामारी का खतरा फिर सताने लगा है. इस बीमारी के फैलने की शुरुआत भी कोविड-19 की तरह चीन से ही हो रही है. चीन के कई अस्पतालों में इस रहस्यमयी बीमारी के मरीज देखे गए हैं, जो तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. इस पर रिपोर्ट्स आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चिंता भी बढ़ गई है. यह बीमारी खसतौर पर स्कूली बच्चों में देखी जा रही है. चीन सहित दुनिया के कई देश अब भी कोरोना से पूरी तरह नहीं उबर पाए हैं. ऐसे में अब लोगों को वह समय याद आने लगा है, जब कोरोना शुरुआती दौर में था. वैसे तो इस महामारी को निमोनिया से मिलता-जुलता बताया जा रहा है, लेकिन इसके कई लक्षण निमोनिया से अलग हैं. इसकी चपेट में आने वाले बच्चों के फेफड़ों में सूजन देखी जा रही है. वहीं, उन्हें तेज बुखार के साथ खांसी, फ्लू और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं को सामना भी करना पड़ रहा है. रहस्यमयी निमोनिया से जुड़े ज्यादातर मरीज चीन के उत्तर-पूर्वी बीजिंग और लियाओनिंग के अस्पतालों में देखे जा रहे हैं. हालत इतनी ज्यादा खराब है कि संसाधनों पर काफी दबाव पड़ने लगा है. बीमारी का प्रकोप इतना ज्यादा है कि सरकार ने यहां स्कूल बंद करने की तैयारी कर ली है. [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>डब्ल्यूएचओ ने  चीन से विस्तृत जानकारी माँगी </strong><br><strong>स्कूल बंद करने की तैयारी</strong><br><strong>चीन में बच्चों पर ही नजर आ रहा ज्यादा प्रभाव</strong><br><br>कोरोना का कहर देखने के बाद अब लोग महामारी के नाम से भी डरने लगे हैं. ऐसे समय एक नई महामारी का खतरा फिर सताने लगा है. इस बीमारी के फैलने की शुरुआत भी कोविड-19 की तरह चीन से ही हो रही है. चीन के कई अस्पतालों में इस रहस्यमयी बीमारी के मरीज देखे गए हैं, जो तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. इस पर रिपोर्ट्स आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चिंता भी बढ़ गई है. यह बीमारी खसतौर पर स्कूली बच्चों में देखी जा रही है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="365" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/11/चाइना-650x365.png" alt="" class="wp-image-80383" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/11/चाइना-650x365.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/11/चाइना-350x197.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/11/चाइना-768x432.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/11/चाइना.png 948w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><br>चीन सहित दुनिया के कई देश अब भी कोरोना से पूरी तरह नहीं उबर पाए हैं. ऐसे में अब लोगों को वह समय याद आने लगा है, जब कोरोना शुरुआती दौर में था. वैसे तो इस महामारी को निमोनिया से मिलता-जुलता बताया जा रहा है, लेकिन इसके कई लक्षण निमोनिया से अलग हैं. इसकी चपेट में आने वाले बच्चों के फेफड़ों में सूजन देखी जा रही है. वहीं, उन्हें तेज बुखार के साथ खांसी, फ्लू और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं को सामना भी करना पड़ रहा है.</p>



<p>रहस्यमयी निमोनिया से जुड़े ज्यादातर मरीज चीन के उत्तर-पूर्वी बीजिंग और लियाओनिंग के अस्पतालों में देखे जा रहे हैं. हालत इतनी ज्यादा खराब है कि संसाधनों पर काफी दबाव पड़ने लगा है. बीमारी का प्रकोप इतना ज्यादा है कि सरकार ने यहां स्कूल बंद करने की तैयारी कर ली है. इस बीमारी को लेकर एक ओपन-एक्सेस निगरानी प्रोमेड अलर्ट ने दुनियाभर में चेतावनी जारी की है. दरअसल, यह मंच पूरी दुनिया में इंसान और जानवरों में होने वाली बीमारियों पर नजर बनाए रखता है. चीन में सामने आए रहस्यमी निमोनिया के बारे में चेतावनी देते हुए इस संस्था ने कहा है कि इस बीमारी का प्रकोप खासतौर पर बच्चों पर ही देखा जा रहा है.</p>



<p>प्रोमेड अलर्ट ने ही दिसंबर 2019 के अंत में एक नए वायरस के बारे में शुरुआती चेतावनी जारी की थी, जिसे बाद में SARS-कोविड-2 के रूप में पहचाना गया. संस्था के अलर्ट से ही विश्व स्वास्थ्य संगठन के हाई-रैंकिंग ऑफिसर और मेडिकल प्रोफेशनल के साथ-साथ वैज्ञानिकों की एक बड़ी जमात अलर्ट हो गई थी. अलर्ट जारी करने वाली संस्था प्रोमेड अलर्ट ने बताया कि उन्होंने एक अज्ञात बीमारी के बारे में अलर्ट जारी किया है, जो खासतौर पर श्वसन क्रिया को प्रभावित करती है. हालांकि, एजेंसी ने यह भी कहा है कि उन्हें स्पष्ट नहीं है कि इस प्रकोप की शुरुआत कब से हुई. संस्था ने यह भी कहा कि इतने सारे बच्चे एक साथ इतनी जल्दी प्रभावित नहीं हो सकते. रिपोर्ट में यह भी नहीं कहा गया कि इस बच्चे से कोई वयस्क प्रभावित हुआ है.</p>



<p>विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस बीमारी की चौंकाने वाली रिपोर्ट्स सामने आने के बाद चीन से विस्तृत जानकारी देने का अनुरोध किया है. WHO ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि इस बीमारी के बारे में चीन ने 13 नवंबर 2023 को स्थानी मीडिया को बताया था. स्वास्थ्य एजेंसी ने चीन से इस बीमारी से जुड़े मामलों पर कड़ी निगरानी रखने के लिए कहा है. WHO ने बताया है कि 21 नवंबर को प्रोमेड ने उत्तरी चीन में फैल रही इस बीमारी के बारे में सूचना दी. WHO चीन से इस बीमारी के बारे में और अधिक जानकारी चाहता है.</p>



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		<title>कोरोना से भारत में 40 लाख की मौत,दुनिया को बताना चाहता है WHO</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Apr 2022 04:43:09 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Rahul Gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[WHO wants to tell the world]]></category>
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					<description><![CDATA[स्वास्थ्य मंत्रालय ने छह पत्र लिखकर जताई आपत्ति NYT की रिपोर्ट पर सरकार की सफाई रिपोर्ट त्रुटिपूर्ण, भ्रामक और अप्रमाणित मान्यताएं केंद्र की लापरवाही से गईं 40 लाख भारतीयों की जान- राहुल गांधी हर पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा दीजिए भारत सरकार ने कोविड-19 के चलते होने वाली मौत का आंकड़ा 5,21,000 बताया है, लेकिन वर्ल्&#x200d;ड हेल्&#x200d;थ ऑर्गनाइजेशन ने मरने वालों की संख्&#x200d;या इससे करीब 7 गुना ज्&#x200d;यादा यानी 40 लाख बताई है. भारत सरकार ने मौत के आंकड़े एकत्र करने के डब्ल्यूएचओ के तरीके पर सवाल उठाए हैं और इसके लिए छह लेटर लिखे हैं. भारत ने नवंबर 2021 से अब तक पांच वर्चुअल मीटिंगों के माध्यम से भी अपनी चिंता व्यक्त की है, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह बात द न्&#x200d;यूयॉर्क टाइम्&#x200d;स की उस रिपोर्ट के जवाब में कही है, जिसमें यह दावा किया है कि भारत कोविड-19 से मरने वालों के आंकड़े को सार्वजनिक के डब्ल्यूएचओ के प्रयासों को रोक रहा है. डब्ल्यूएचओ ने जनवरी में भारत के साथ-साथ अन्य देशों में कोविड -19 से होने वाली अधिक मौतों के अनुमानों को सार्वजनिक करने की योजना बनाई थी, लेकिन आंकड़े जारी करने का यह कार्य “भारत की आपत्तियों के कारण महीनों के लिए लंबित हो गया.  न्&#x200d;यूयॉर्क टाइम्&#x200d;स ने यह दावा पब्लिश की गई एक रिपोर्ट में किया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक मीडिया विज्ञप्ति में पहली बार उन आपत्तियों के कारणों को विस्तार से बताते हुए कहा कि भारत की “मूल आपत्ति रिजल्&#x200d;ट (मतलब आंकड़ों) के साथ नहीं है, उस तरीक पर है, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>स्वास्थ्य मंत्रालय ने छह पत्र लिखकर जताई आपत्ति</strong></p>



<p><strong>NYT की रिपोर्ट पर सरकार की सफाई</strong></p>



<p><strong>रिपोर्ट त्रुटिपूर्ण, भ्रामक और अप्रमाणित मान्यताएं</strong></p>



<p><strong>केंद्र की लापरवाही से गईं 40 लाख भारतीयों की जान- राहुल गांधी</strong></p>



<p><strong>हर पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा दीजिए</strong></p>



<p>भारत सरकार ने कोविड-19 के चलते होने वाली मौत का आंकड़ा 5,21,000 बताया है, लेकिन वर्ल्&#x200d;ड हेल्&#x200d;थ ऑर्गनाइजेशन ने मरने वालों की संख्&#x200d;या इससे करीब 7 गुना ज्&#x200d;यादा यानी<strong> 40 लाख</strong> बताई है. भारत सरकार ने मौत के आंकड़े एकत्र करने के डब्ल्यूएचओ के तरीके पर सवाल उठाए हैं और इसके लिए छह लेटर लिखे हैं.</p>



<p>भारत ने नवंबर 2021 से अब तक पांच वर्चुअल मीटिंगों के माध्यम से भी अपनी चिंता व्यक्त की है, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह बात द न्&#x200d;यूयॉर्क टाइम्&#x200d;स की उस रिपोर्ट के जवाब में कही है, जिसमें यह दावा किया है कि भारत कोविड-19 से मरने वालों के आंकड़े को सार्वजनिक के डब्ल्यूएचओ के प्रयासों को रोक रहा है. डब्ल्यूएचओ ने जनवरी में भारत के साथ-साथ अन्य देशों में कोविड -19 से होने वाली अधिक मौतों के अनुमानों को सार्वजनिक करने की योजना बनाई थी, लेकिन आंकड़े जारी करने का यह कार्य “भारत की आपत्तियों के कारण महीनों के लिए लंबित हो गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/India_Ganges_Covid1.jpg" alt="" class="wp-image-60945" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/India_Ganges_Covid1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/India_Ganges_Covid1-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> न्&#x200d;यूयॉर्क टाइम्&#x200d;स ने यह दावा पब्लिश की गई एक रिपोर्ट में किया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक मीडिया विज्ञप्ति में पहली बार उन आपत्तियों के कारणों को विस्तार से बताते हुए कहा कि भारत की “मूल आपत्ति रिजल्&#x200d;ट (मतलब आंकड़ों) के साथ नहीं है, उस तरीक पर है, जिसके जरिए आंकड़े जुटाए गए हैं.” स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रत्येक अध्ययन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है और यह कहा है कि स्&#x200d;टडी में जो निष्&#x200d;कर्ष निकाले गए हैं, उनका आधार त्रुटिपूर्ण, भ्रामक और अप्रमाणित मान्यताएं हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/210720-_virus_outbreak_india_mc-9292.jpg" alt="" class="wp-image-60946" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/210720-_virus_outbreak_india_mc-9292.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/210720-_virus_outbreak_india_mc-9292-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>स्वास्थ्य मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि भारत के पास कोरोना से होने वाली मौतों को रिपोर्ट करने के लिए एक मजबूत तंत्र हैं. भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक वर्ग का मानना ​​​​है कि अप्रैल-मई 2021 के दौरान जब दूसरी कोविड -19 लहर का पीक आया तब देश के भीतर कोविड -19 मरने वालों की वास्तविक संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/images-3.jpg" alt="" class="wp-image-60947" width="624" height="415"/></figure>



<p>“पब्लिक हेल्&#x200d;थ सेक्&#x200d;टर से जुड़े लोग यह जानते हैं की  वास्तविक मृत्यु दर अधिक है, लेकिन जब आप एक बार कुछ छिपाते हैं, तो आपको इसे बार-बार छिपाना पड़ता है. केंद्र सरकार के बारे में यह दावा करने वाले संक्रामक रोग महामारी विशेषज्ञ ने भी डब्ल्यूएचओ के मौत के आंकड़े जुटाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि डब्ल्यूएचओ की कार्यप्रणाली के बारे में भारत की चिंता इस बात से संबंधित है कि मौत के आंकड़े जुटाने के लिए कैसे भारत जैसे बड़े भौगोलिक आकार और जनसंख्या वाले देश में सांख्यिकीय मॉडल का इस्&#x200d;तेमाल किया गया है, जो कि केवल उन देशों में फिट बैठता है जहां बहुत कम आबादी है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/corona-death.jpg" alt="" class="wp-image-60948" width="630" height="421" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/corona-death.jpg 540w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/corona-death-350x234.jpg 350w" sizes="(max-width: 630px) 100vw, 630px" /></figure>



<p>मंत्रालय ने सांख्यिकीय मॉडल की वैधता और सटीकता के बारे में चिंताओं का हवाला देते हुए कहा, “यह मॉडल जो ट्यूनीशिया जैसे छोटे देशों के लिए सही हैं, इसे भारत में लागू नहीं किया जा सकता है.” मंत्रालय ने चिंता व्यक्त की है कि भारत के आंकड़े निकालने डब्ल्यूएचओ ने 61 देशों के रिपोर्ट किए गए डेटा के साथ स्&#x200d;टैंडर्ड पैटर्न निर्धारित किए और उन्हें भारत सहित अन्य देशों के लिए इस्&#x200d;तेमाल किया. मंत्रालय ने कहा, “इस दृष्टिकोण के आधार पर, भारत में अनुमानित मौतों का आंकड़ा उसी आधार पर किया गया जिसके जरिए कोस्टा रिका, इज़राइल, पराग्वे और ट्यूनीशिया का आंकड़ा निकाला गया.</p>



<p><strong>केंद्र की लापरवाही से गईं 40 लाख भारतीयों की जान- राहुल गांधी</strong></p>



<p>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने रविवार को एक रिपोर्ट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. इसमें दावा किया गया है कि कोविड मौतों को लेकर डब्लूएचओ के आंकड़े प्रकाशित करने के प्रयासों को केंद्र सरकार रोक रही है. रिपोर्ट के अनुसार, डब्ल्यूएचओ के अनुमान से पता चलता है कि भारत में कोरोना वायरस से संबंधित मामलों में मरने वालों की संख्या आधिकारिक संख्या से लगभग आठ गुना अधिक है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2018/07/pnc-rahul-gandhi-650x366.png" alt="" class="wp-image-34757" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2018/07/pnc-rahul-gandhi.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2018/07/pnc-rahul-gandhi-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इसी को लेकर राहुल गांधी ने ट्वीट करके कहा कि मोदी जी ना सच बोलते हैं, ना बोलने देते हैं. वो तो अब भी झूठ बोलते हैं कि ऑक्सीजन की कमी से कोई नहीं मरा! मैंने पहले भी कहा था – कोविड में सरकार की लापरवाहियों से 5 लाख नहीं, 40 लाख भारतीयों की मौत हुई. फर्ज निभाइये, <strong>मोदी जी – हर पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा दीजिए</strong>.” केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार ने कोविड-19 से हुई मौतों का आकलन करने के डब्ल्यूएचओ के तरीके पर आपत्ति जताई है. मंत्रालय ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश और छोटी आबादी वाले अन्य देशों के लिए कोविड मृत्यु दर की गणना के लिए एक ही गणितीय मॉडल का उपयोग नहीं किया जा सकता है.वहीं कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने कोविड से हुई मौतों के असली आंकड़े जारी नहीं किए हैं. सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा लोगों की मौत कोरोना से हुई है. कांग्रेस काफी पहले से मृतकों के परिवार के सदस्यों को चार लाख रुपये के मुआवजे की मांग कर रही है. रविवार को अपडेट किए गए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, आज के चार ताजा मौतों के साथ ही कोरोना से मरने वालों की संख्या 5,21,751 हो गई है.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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