<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Wetland &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
	<atom:link href="https://www.patnanow.com/tag/wetland/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.patnanow.com</link>
	<description>Patna News Portal - हर ख़बर पर नज़र</description>
	<lastBuildDate>Tue, 03 Feb 2026 10:08:30 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.8.3</generator>

<image>
	<url>https://www.patnanow.com/assets/2022/08/cropped-PatnaNow_Logo_2022-32x32.png</url>
	<title>Wetland &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
	<link>https://www.patnanow.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026: रामसर मानचित्र पर और मजबूत हुई बिहार की पहचान</title>
		<link>https://www.patnanow.com/wetlands-award-to-bihar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Feb 2026 02:20:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Adra bhumi]]></category>
		<category><![CDATA[bihar news]]></category>
		<category><![CDATA[Bihar ramsar sight]]></category>
		<category><![CDATA[Ramsar sight]]></category>
		<category><![CDATA[Wetland]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=94706</guid>

					<description><![CDATA[तीन रामसर साइटों के लिए बिहार को दिया गया सर्टिफिकेट पटना।। इस वर्ष का विश्व आर्द्रभूमि दिवस बिहार के लिए ऐतिहासिक रहा. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से सोमवार को नई दिल्ली में राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के सदस्य सचिव एस. चंद्रशेखर को 3 रामसर साइट का विशेष सर्टिफिकेट प्रदान किया गया. राज्य में तीन नई रामसर साइटें घोषित की गई हैं, जिसके लिए ये तीन सर्टिफिकेट बिहार को मिले हैं. विश्व आर्द्रभूमि दिवस प्रत्येक वर्ष 2 फरवरी को ईरान के रामसर में वर्ष 1971 में हुए वेटलैंड्स कन्वेंशन की स्मृति में मनाया जाता है. वर्ष 2026 में इसका वैश्विक थीम “वेटलैंड्स और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का जश्न” रखा गया है. यह थीम इस बात पर जोर देता है कि किस तरह स्वदेशी और स्थानीय समुदाय सदियों से पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से आर्द्रभूमियों का संरक्षण और प्रबंधन करते आए हैं. यह दृष्टिकोण आर्द्रभूमियों को केवल पारिस्थितिक क्षेत्र नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व से जुड़े जीवंत सांस्कृतिक परिदृश्य के रूप में स्थापित करता है. ग्लोबल कंजर्वेशन मैप पर बिहार की बढ़ती पहचानबेगूसराय स्थित कांवरताल, जो बिहार का पहला रामसर साइट और एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की ऑक्स्बो झील है. आज भी 220 से अधिक पक्षी प्रजातियों का सुरक्षित आश्रय बनी हुई है. वहीं, वर्ष 2024 में रामसर सूची में शामिल जमुई के नागी और नकटी पक्षी अभ्यारण्य प्रवासी पक्षियों के साथ-साथ इको-टूरिज्म की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरे हैं. तीन नई आर्द्रभूमियों से मिला राष्ट्रीय सम्मानवर्ष 2025 में गोकुल जलाशय (बक्सर), [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>तीन रामसर साइटों के लिए बिहार को दिया गया सर्टिफिकेट</strong></p>



<p>पटना।। इस वर्ष का विश्व आर्द्रभूमि दिवस बिहार के लिए ऐतिहासिक रहा. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से सोमवार को नई दिल्ली में राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के सदस्य सचिव एस. चंद्रशेखर को 3 रामसर साइट का विशेष सर्टिफिकेट प्रदान किया गया. राज्य में तीन नई रामसर साइटें घोषित की गई हैं, जिसके लिए ये तीन सर्टिफिकेट बिहार को मिले हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="683" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-bihar-gets-ramsar-award-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-94754" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-bihar-gets-ramsar-award-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-bihar-gets-ramsar-award-650x433.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>विश्व आर्द्रभूमि दिवस प्रत्येक वर्ष 2 फरवरी को ईरान के रामसर में वर्ष 1971 में हुए वेटलैंड्स कन्वेंशन की स्मृति में मनाया जाता है. वर्ष 2026 में इसका वैश्विक थीम “वेटलैंड्स और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का जश्न” रखा गया है. यह थीम इस बात पर जोर देता है कि किस तरह स्वदेशी और स्थानीय समुदाय सदियों से पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से आर्द्रभूमियों का संरक्षण और प्रबंधन करते आए हैं. यह दृष्टिकोण आर्द्रभूमियों को केवल पारिस्थितिक क्षेत्र नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व से जुड़े जीवंत सांस्कृतिक परिदृश्य के रूप में स्थापित करता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="434" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-begusarai-kawar-lake-jheel-ramsar-site.jpg" alt="" class="wp-image-53474" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-begusarai-kawar-lake-jheel-ramsar-site.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-begusarai-kawar-lake-jheel-ramsar-site-350x234.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>ग्लोबल कंजर्वेशन मैप पर बिहार की बढ़ती पहचान</strong><br>बेगूसराय स्थित कांवरताल, जो बिहार का पहला रामसर साइट और एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की ऑक्स्बो झील है. आज भी 220 से अधिक पक्षी प्रजातियों का सुरक्षित आश्रय बनी हुई है. वहीं, वर्ष 2024 में रामसर सूची में शामिल जमुई के नागी और नकटी पक्षी अभ्यारण्य प्रवासी पक्षियों के साथ-साथ इको-टूरिज्म की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरे हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="900" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-wetlands-ramsar.jpg" alt="" class="wp-image-94720" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-wetlands-ramsar.jpg 900w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-wetlands-ramsar-650x416.jpg 650w" sizes="(max-width: 900px) 100vw, 900px" /></figure>



<p><strong>तीन नई आर्द्रभूमियों से मिला राष्ट्रीय सम्मान</strong><br>वर्ष 2025 में गोकुल जलाशय (बक्सर), उदयपुर झील (पश्चिम चंपारण) और गोगाबिल (कटिहार) के रामसर साइट सूची में शामिल होने के बाद भारत में कुल रामसर स्थलों की संख्या 98 और बिहार में छह हो गई है. ये ऑक्स्बो झीलें गंगा और गंडक नदियों के लिए प्राकृतिक बफर के रूप में कार्य करती हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="760" height="572" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-wetlands.jpg" alt="" class="wp-image-94722" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-wetlands.jpg 760w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-wetlands-650x489.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 760px) 100vw, 760px" /></figure>



<p><br><strong>यह होती है आर्द्रभूमि की खासियत</strong><br>आर्द्रभूमि वैसे क्षेत्र को कहते हैं, जो स्थायी या मौसमी रूप से जल से संतृप्त रहते हैं. मसलन दलदल, कीचड़ युक्त भूमि, झीलें और नदी तट. इन्हें ‘धरती की किडनी’ कहा जाता है, क्योंकि ये जल को शुद्ध करने, बाढ़ नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण में अहम भूमिका निभाती हैं. बिहार में 2.25 हेक्टेयर से बड़े कुल 4316 आर्द्रभूमियों का सत्यापन किया जा चुका है .</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वैशाली के बरैला झील में पानी लाने और निकासी के कार्य में तेजी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/baraila-jheel-renovation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Feb 2026 11:34:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Baraila jheel]]></category>
		<category><![CDATA[bihar news]]></category>
		<category><![CDATA[Vaishali jheel]]></category>
		<category><![CDATA[Wetland]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=94665</guid>

					<description><![CDATA[जल संसाधन विभाग ने कार्य कराने के लिए जारी किया है 53.35 करोड़ पटना ।। वैशाली जिले के बरैला झील को सलीम अली जुब्बा सहनी पक्षी अभ्यारण्य के रुप में विकसित करने को लेकर कार्य प्रगति पर है. राज्य सरकार के आदेश पर जल संसाधन विभाग ने इस झील में पानी लाने और अधिक जल स्तर होने पर उसकी निकासी करने के लिए कार्य कराने हेतु 53 करोड़ 35 लाख 21 हजार रुपये की स्वीकृत प्रदान किया था. प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वैशाली जिले के बरैला झील को सलीम अली जुब्बा सहनी पक्षी अभ्यारण्य के रुप में विकसित करने की घोषणा की थी. इसको लेकर राज्य सरकार ने उस झील में पानी लाने और अधिक जल स्तर होने पर उसकी निकासी करने के लिए कार्य कराने का आदेश दिया था. जिसके आलोक में जल संसाधन विभाग ने 53 करोड़ 35 लाख 21 हजार रुपये की लागत से कार्य कराने के लिए राशि आवंटित किया था. ताकि उसका कार्य कराया जा सके. सरकार का दावा है कि यह योजना जिले के लिए काफी लाभप्रद और जनपयोगी साबित होगी. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>जल संसाधन विभाग ने कार्य कराने के लिए जारी किया है 53.35 करोड़</strong></p>



<p><br>पटना ।। वैशाली जिले के बरैला झील को सलीम अली जुब्बा सहनी पक्षी अभ्यारण्य के रुप में विकसित करने को लेकर कार्य प्रगति पर है. राज्य सरकार के आदेश पर जल संसाधन विभाग ने इस झील में पानी लाने और अधिक जल स्तर होने पर उसकी निकासी करने के लिए कार्य कराने हेतु 53 करोड़ 35 लाख 21 हजार रुपये की स्वीकृत प्रदान किया था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="434" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-begusarai-kawar-lake-jheel-ramsar-site.jpg" alt="" class="wp-image-53474" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-begusarai-kawar-lake-jheel-ramsar-site.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-begusarai-kawar-lake-jheel-ramsar-site-350x234.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वैशाली जिले के बरैला झील को सलीम अली जुब्बा सहनी पक्षी अभ्यारण्य के रुप में विकसित करने की घोषणा की थी. इसको लेकर राज्य सरकार ने उस झील में पानी लाने और अधिक जल स्तर होने पर उसकी निकासी करने के लिए कार्य कराने का आदेश दिया था. जिसके आलोक में जल संसाधन विभाग ने 53 करोड़ 35 लाख 21 हजार रुपये की लागत से कार्य कराने के लिए राशि आवंटित किया था. ताकि उसका कार्य कराया जा सके. सरकार का दावा है कि यह योजना जिले के लिए काफी लाभप्रद और जनपयोगी साबित होगी.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
