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	<title>Usha kiran khan &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>Usha kiran khan &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>पद्मश्री उषा किरण खान का निधन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/usha-kiran-khan-died/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 11 Feb 2024 13:00:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Usha kiran khan]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। सुप्रसिद्ध लेखिका प्रो. डाॅ. उषाकिरण खान का पटना की एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वे 82 साल की थीं. हिंदी और मैथिली साहित्य में लंबे समय से उपन्यासों-कथाओं-नाटकों के जरिए उल्लेखनीय योगदान करती आ रहीं उषाकिरण खान को पद्मश्री समेत कई सम्मान/पुरस्कार मिले. मुख्यमंत्री ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ० उषा किरण खान के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है. मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि स्व. डॉ उषा किरण खान प्रसिद्ध साहित्यकार एवं लेखिका थीं. उन्होंने हिन्दी एवं मैथिली साहित्य में कई उपन्यासों, कथाओं की रचना की थी. डॉ उषा किरण खान को पद्मश्री तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. डॉ उषा किरण खान के निधन से हिन्दी एवं मैथिली साहित्य जगत् को अपूरणीय क्षति हुयी है. मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शांति तथा उनके परिजनों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है. pncb]]></description>
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<p>पटना।। सुप्रसिद्ध लेखिका प्रो. डाॅ. उषाकिरण खान का पटना की एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वे 82 साल की थीं. हिंदी और मैथिली साहित्य में लंबे समय से उपन्यासों-कथाओं-नाटकों के जरिए उल्लेखनीय योगदान करती आ रहीं उषाकिरण खान को पद्मश्री समेत कई सम्मान/पुरस्कार मिले. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="412" height="292" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000085063.jpg" alt="" class="wp-image-82516" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000085063.jpg 412w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000085063-350x248.jpg 350w" sizes="(max-width: 412px) 100vw, 412px" /></figure>



<p><strong>मुख्यमंत्री ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की</strong></p>



<p>मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ० उषा किरण खान के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है. मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि स्व. डॉ उषा किरण खान प्रसिद्ध साहित्यकार एवं लेखिका थीं. उन्होंने हिन्दी एवं मैथिली साहित्य में कई उपन्यासों, कथाओं की रचना की थी. डॉ उषा किरण खान को पद्मश्री तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. डॉ उषा किरण खान के निधन से हिन्दी एवं मैथिली साहित्य जगत् को अपूरणीय क्षति हुयी है.</p>



<p>मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शांति तथा उनके परिजनों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>&#8216;आयाम&#8217; साहित्य का स्त्री स्वर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/aayam-patna-literature-unit/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Sep 2021 08:59:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[2015]]></category>
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		<category><![CDATA[Veena amrit]]></category>
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					<description><![CDATA[पद्मश्री उषाकिरण खान है संस्थापिका प्रतिभा संपन्न रचनाकार स्त्रियों को एक मंच मुहैया कराता है आयाम पटना: &#8216;आयाम&#8217; संस्था मुख्यतः उन रचनाशील स्त्रियों के लिए हैं जिनकी साहित्यिक प्रतिभा और लेखनी घर की चहारदिवारी एवं अनेक जिम्मेदारियों के भीतर दबी रहती है. &#8216;आयाम&#8217; इन्हीं प्रतिभा संपन्न रचनाकार स्त्रियों को एक मंच मुहैया कराता है जो इसकी हकदार हैं. इसकी शुरुआत पद्मश्री उषाकिरण खान ने किया और आयाम पद्मश्री उषा किरण खान द्वारा स्थापित एक रजिस्टर्ड साहित्यिक संख्या है. संस्थापक अध्यक्ष पद्मश्री उषा किरण खान कहती हैं कि स्त्री जो चाहत की, सेवा की और बुढ़ों की सेवा करती है घर बनाती है, किसी भी मकान में उसकी सहभागिता मात्र कला कौशल दिखाने की नहीं है बल्कि वह भी सोचती भी है. हजारों सालों से दबी कुचली वह अपना स्वर नहीं सुना पानी । शिक्षित समाज में भी स्त्री साहित्य सभाओं में नहीं दिखतीं। दिखती भी हैं तो दाल में नमक बराबर। स्पष्ट है कि आयाम&#8217; की परिकल्पना को आकार देना इसी सोच का प्रतिफल है। यह स्त्रियों के साहित्यिक फलक को एक विस्तृत आयाम और गति प्रदान करता है। यही कारण है कि आज आयाम न सिर्फ बिहार में बल्कि संपूर्ण भारत का स्त्री स्वर बनकर परचम लहरा रहा है। आयाम की सचिव वीणा अमृत बताती है कि आयाम का गठन 22 जुलाई 2015 में हुआ था.इन &#8211; छः सालों के भीतर आयाम ने साहित्य और संस्कृति से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण आयोजन किये गए और महिलाओं ने देश में अपना एक विशेष मुकाम हासिल किया और पहचान बनाई। घरेलु स्त्रियां [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>पद्मश्री उषाकिरण खान है संस्थापिका </strong></p>



<p><strong>प्रतिभा संपन्न रचनाकार स्त्रियों को एक मंच मुहैया कराता है आयाम</strong></p>



<p>पटना: &#8216;आयाम&#8217; संस्था मुख्यतः उन रचनाशील स्त्रियों के लिए हैं जिनकी साहित्यिक प्रतिभा और लेखनी घर की चहारदिवारी एवं अनेक जिम्मेदारियों के भीतर दबी रहती है. &#8216;आयाम&#8217; इन्हीं प्रतिभा संपन्न रचनाकार स्त्रियों को एक मंच मुहैया कराता है जो इसकी हकदार हैं. इसकी शुरुआत पद्मश्री उषाकिरण खान ने किया और आयाम पद्मश्री उषा किरण खान द्वारा स्थापित एक रजिस्टर्ड साहित्यिक संख्या है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="367" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141514.jpg" alt="" class="wp-image-55671" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141514.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141514-350x198.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>पद्मश्री उषा किरण खान आयाम के कार्यक्रम में </strong></figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="397" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141502.jpg" alt="" class="wp-image-55672" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141502.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141502-350x214.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>आयाम के कार्यक्रम में शिरकत करते सहित्यकार </strong></figcaption></figure>



<p><br>संस्थापक अध्यक्ष पद्मश्री उषा किरण खान कहती हैं कि स्त्री जो चाहत की, सेवा की और बुढ़ों की सेवा करती है घर बनाती है, किसी भी मकान में उसकी सहभागिता मात्र कला कौशल दिखाने की नहीं है बल्कि वह भी सोचती भी है. हजारों सालों से दबी कुचली वह अपना स्वर नहीं सुना पानी । शिक्षित समाज में भी स्त्री साहित्य सभाओं में नहीं दिखतीं। दिखती भी हैं तो दाल में नमक बराबर। स्पष्ट है कि आयाम&#8217; की परिकल्पना को आकार देना इसी सोच का प्रतिफल है। यह स्त्रियों के साहित्यिक फलक को एक विस्तृत आयाम और गति प्रदान करता है। यही कारण है कि आज आयाम न सिर्फ बिहार में बल्कि संपूर्ण भारत का स्त्री स्वर बनकर परचम लहरा रहा है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="514" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141443.jpg" alt="" class="wp-image-55673" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141443.jpg 514w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141443-300x350.jpg 300w" sizes="(max-width: 514px) 100vw, 514px" /><figcaption><strong>आयाम की सचिव वीणा अमृत</strong></figcaption></figure>



<p>आयाम की सचिव वीणा अमृत बताती है कि आयाम का गठन 22 जुलाई 2015 में हुआ था.इन &#8211; छः सालों के भीतर आयाम ने साहित्य और संस्कृति से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण आयोजन किये गए और महिलाओं ने देश में अपना एक विशेष मुकाम हासिल किया और पहचान बनाई। घरेलु स्त्रियां जो प्रतिभावान थी, उनके विचारों, भावों एवं लेखनी को एक स्थान पर एकजुट होकर बैठने और अपने साहित्य के एक आयाम देने की पहल की है जिसकी शुरुआत पद्मश्री उषाकिरण ने ही किया। संभवत: देश की यह इकलौती सोच है जो सिर्फ स्त्रियों की है और खासकर उन स्त्रियों की जो नामचीन नहीं बल्कि घरेलु हैं पर जिनमें साहित्यिक अभिरुचि है।</p>



<p>आयाम का संकल्प है घरों में बैठी साहित्य चेता स्त्रियाँ मिल बैठे, कुछ अपनी करें और कुछ सुने । ये स्त्रियाँ जो बड़े- बड़े साहित्यिक उत्सवों में नहीं जा पाती, उनकी सकुचाहट उन्हें रोकती है. ऐसे में आयाम उन्हें एक व मजबूत संबल प्रदान करता है। और आज आयाम में कई ऐसी त्रियाँ है जो घरों से निकलकर लिख रही है, मंचों पर जा रही हैं और साहित्यिक जगत में अपना नाम और स्थान बना रही हैं।</p>



<p>आयाम का उद्देश्य बेहतर साहित्य बेहतर समाज बनाने का है उनकी विसंगतियों को दूर करने का है. आयाम उन सभी स्त्रियों की वह आवाज है जो वे अपने कलम के माध्यम से कुछ गढ़ना चाहती हैं कुछ कहना चाहती हैं। मुलतः आयाम का यही उद्देश्य है कि साहित्य में उनका स्वर बुलन्द हो ताकि समाज को एक नई दिशा और  नई गति मिल सके। साथ ही आयाम बिहार की उन दिवंगत लेखिकाओं कवयित्रियों की रचनाओं और साहित्यिक योगदान को पुनः सामने लाने को प्रयासरत है।इसके तहत &#8216;आयाम&#8217; द्वारा दिवगंत लेखिका बिंदू सिन्ध पर पहला संग्रह लाने जा रहा है इसके बाद प्रकाश वी नारायण इत्यादि पर अनेक किताब प्रकशित करने की योजना पर काम कर रहा है आयाम न सिर्फ साहित्य पर ऐसे मसले भी हैं जो महिलाओं से जुड़ें है उन पर भी कार्य करने की योजना है. समाज को नई दिशा देने की इच्छा रखने वाली कोई भी महिला सदस्य बन सकती है . कोई भी स्त्री जिनकी साहित्यिक रूचि हो वो आयाम से जुड़ सकती हैं.</p>



<p>आयाम लगातार साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रहता है। आयाम का अपना एक फेसबुक पेज भी है जिसपर महामारी के बाद समय समय पर में भी वर्चुअल माध्यम से अनेक साहित्यिक गतिविधियों चर्चाओं इत्यादि में काम करता रहा है । वर्तमान में अध्यक्ष पद्मश्री उषा किरण खान के अलावे सचिव वीणा अमृत, संयुक्त सचिव सुनीता सृष्टि, कोषाध्यक्ष सौम्या सुमन हैं जो इस अभियान को आगे ले जाने में सतत प्रयत्नशील हैं.</p>



<p>PNC DESK</p>
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			</item>
		<item>
		<title>रंग जलसा 21 में &#8220;कहां गए मोरे उगना&#8221; का मंचन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/rang-jalsa-21-kahan-gaye-more-ugna/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Sep 2021 16:51:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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		<category><![CDATA[Usha kiran khan]]></category>
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					<description><![CDATA[एक शाम पद्मश्री मालिनी अवस्थी के नाम का होगा आयोजन -त्रिपुरारी शरण ,मुख्य सचिवबिहार मेरे लिए भावनात्मक घर जैसा -मालिनी अवस्थी पटना: रंग जलसा 21 निर्माण कला मचं पटना की ओर से रंग जलसा 21 का आयोजन प्रेमचन्द रंगशाला में 17 सितम्बर से 21 दिसम्बर तक किया गया है. इस आयोजन के दूसरे दिन रंग संगीत और नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया .इस अवसर पर बेगूसराय के रंग दर्शन आर्ट की ओर से रंग संगीत की प्रस्तुति शशिकांत और टीम ने की वहीं जहांगीर खान निर्देशित नुक्कड़ नाटक भोले राम का जीव का भी मंचन किया गया । प्रेमचंद रंगशाला में मुख्य कार्यक्रम में रंग शांति सम्मान समारोह 2020 का सम्मान जानी मानी गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी को मुख्य अथिति बिहार के मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण ने अंग वस्त्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मालिनी अवस्थी ने कहा बिहार में मेरे कई कार्यक्रम हुए हैं मेरा जुड़ाव बिहार के लोगों के साथ है बिहार के लोग जब भी बुलाते हैं मैं आ जाती हूँ 25 -30 सालों से यह सिलसिला चलता आ रहा है। बिहार के मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण ने इस मौके पर युवा रंगकर्मियों से आग्रह किया वे अपने अंदर सेंस मेमोरी को डेवलप करें जिसका फायदा उन्हें आने वाले दिनों में मिलेगा। इस सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि जल्द ही पटना में एक शाम मालिनी अवस्थी के नाम का आयोजन किया जाएगा।इस मौके पर उपस्थित प्रतिष्ठित साहित्यकार और पद्मश्री उषा किरण खान ने कहा कि नाटको के मंचन होते रहने चाहिए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>एक शाम पद्मश्री मालिनी अवस्थी के नाम का होगा आयोजन -त्रिपुरारी शरण ,मुख्य सचिव</strong><br><strong>बिहार मेरे लिए भावनात्मक घर जैसा -मालिनी अवस्थी</strong><br></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="361" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/nirman-pnc.jpg" alt="" class="wp-image-55525" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/nirman-pnc.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/nirman-pnc-350x194.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>कार्यक्रम का उद्घाटन करते मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण ,उषा किरण खान ,मालिनी अवस्थी ,और संजय उपाध्याय </strong></figcaption></figure>



<p>पटना: रंग जलसा 21 निर्माण कला मचं पटना की ओर से रंग जलसा 21 का आयोजन प्रेमचन्द रंगशाला में 17 सितम्बर से 21 दिसम्बर तक किया गया है. इस आयोजन के दूसरे दिन रंग संगीत और नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया .इस अवसर पर बेगूसराय के रंग दर्शन आर्ट की ओर से रंग संगीत की प्रस्तुति शशिकांत और टीम ने की वहीं जहांगीर खान निर्देशित नुक्कड़ नाटक भोले राम का जीव का भी मंचन किया गया । </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="332" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210918_221945.jpg" alt="" class="wp-image-55530" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210918_221945.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210918_221945-350x179.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>पद्मश्री मालिनी अवस्थी को सम्मानित करते त्रिपुरारी शरण और संजय उपाध्याय</strong></figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="365" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0918_220411.jpg" alt="" class="wp-image-55529" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0918_220411.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0918_220411-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>प्रेमचंद रंगशाला में मुख्य कार्यक्रम में रंग शांति सम्मान समारोह 2020 का सम्मान जानी मानी गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी को मुख्य अथिति बिहार के मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण ने अंग वस्त्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मालिनी अवस्थी ने कहा बिहार में मेरे कई कार्यक्रम हुए हैं मेरा जुड़ाव बिहार के लोगों के साथ है बिहार के लोग जब भी बुलाते हैं मैं आ जाती हूँ 25 -30 सालों से यह सिलसिला चलता आ रहा है। बिहार के मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण ने इस मौके पर युवा रंगकर्मियों से आग्रह किया वे अपने अंदर सेंस मेमोरी को डेवलप करें जिसका फायदा उन्हें आने वाले दिनों में मिलेगा। </p>



<p>इस सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि जल्द ही पटना में एक शाम मालिनी अवस्थी के नाम का आयोजन किया जाएगा।इस मौके पर उपस्थित प्रतिष्ठित साहित्यकार और पद्मश्री उषा किरण खान ने कहा कि नाटको के मंचन होते रहने चाहिए इससे समाज के लोगों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है।</p>



<p><br>उषा किरण खान लिखित और संजय उपाध्याय निर्देशित नाटक कहां गए मोरे उगना की प्रस्तुति निर्माण कला मंच के कलाकारों ने किया।<br>छह सौ साल पहले के विद्यापति और उनके समाज को आज के बाबा नागार्जुन, राजकमल और रेणु के साथ जोड़कर ले चलने का नाटकीय प्रयोग किया गया है।महाकवि विद्यापति द्वारा लिखित गीतों में से कुछ गीतों को चुनकर उन्हें दर्शकों तक पहुंचाने का सफल प्रयोग निर्देशक संजय उपाध्याय ने किया है । नाटक &#8216;कहां गए मेरे उगना में निर्देशन, पार्श्व संगीत , प्रॉप्स एंड प्रॉपर्टी समेत संवादों की बेहतरीन प्रस्तुति ने लोगों का मन मोह लिया। नाटक की कहानी कुछ इस प्रकार से है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="550" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0918_220350.jpg" alt="" class="wp-image-55528" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0918_220350.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0918_220350-350x296.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>नाटक कहाँ गए मोरे उगना का एक दृश्य</strong></figcaption></figure>



<p>चौदहवीं शताब्दी में मिथिला में ओइनवार वंश का राज्य था,जो दिल्ली और जौनपुर के सुल्तान के अधीन था, राजा शिव सिंह उसी वंश के राजा थे.कवि विद्यापति पांच राजाओं के राज पंडित होते हुए भी राजा शिव सिंह के सखा थे. सुल्तान को कर नहीं देने पर शिव सिंह कैद हुए तो विद्यापति ने उन्हें मुक्त कराया. लेकिन क्रोधित शिव सिंह ने विद्रोह कर दिया जिस पर सुल्तान ने चढ़ाई कर दी और शिव सिंह भाग निकले. विद्यापति और रानी लखिमा जो शिव सिंह की पत्&#x200d;‌नी थी नेपाल नरेश की शरण में चले गए. उसी दौरान उनकी मदद के लिए भगवान शिव स्वयं उगना ग्रामीण का वेश धारण कर उनकी सेवा करने लगे. कवि ता उम्र उस वंचित पीड़ित दलित शिव स्वरूप उगना को खोजते रहे.नाटक में कई पात्रों को शामिल कर लेखक ने नाटक की गति को बढ़ाने में बहुमूल्य योगदान दिया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="361" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0918_220444-1.jpg" alt="" class="wp-image-55527" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0918_220444-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0918_220444-1-350x194.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>नाटक कहां गए मोर उगना</figcaption></figure>



<p> निर्देशक संजय उपाध्याय ने अपनी कल्पनाशीलता से रंग संगीत पर बेहतरीन कार्य किया है। विद्यापति की भूमिका में रजनीश रंजन और शारदा सिंह ने अपने अभिनय प्रतिभा से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।विद्यापति की भूमिका में सुमन कुमार,नागार्जुन की भूमिका में स्वरम उपाध्याय रेणु की भूमिका में विवेक कुमार राजकमल की भूमिका में आदर्श रंजन ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया .पदम् सिंह संजू कुमार नर्तक कुमार उदय सिंह ,कवि पत्नी बिनीता सिंह के अभिनय को भी लोगों में पसन्द किया। संगीत परिकल्पना और निर्देशन संजय उपाध्याय ने किया।<br>स्व .शांति उपाध्याय की स्मृति में आयोजित रंग जलसा के तीसरे दिन विदेशिया का मंचन होगा।</p>
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