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	<title>theater &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<description>Patna News Portal - हर ख़बर पर नज़र</description>
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		<title>38वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव आज से</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Feb 2024 06:37:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देशभर से जुटेंगे लगभग 400 कलाकार पटना, 2 फरवरी. बहुचर्चित सांस्कृतिक संस्था प्रांगण द्वारा पांच दिवसीय 38 वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2024 का आयोजन आज (2 फरवरी) से प्रारम्भ हो रहा है जो 6 फरवरी 2024 तक स्थानीय कालिदास रंगालय में चलेगा. इस महोत्सव में बिहार के अतिरिक्त 9 राज्यों की से 17 नाट्य दल शामिल होंगे. लगभग देश भर से इस दौरान 300-400 कलाकारों के जुटने की संभावना है जो अपनी कला से बिहार वासियों का दिल जीतेंगे. महोत्सव के दौरान6 फरवरी तक हर दिन शाम 4 बजे से नुक्कड़ नाटक तथा संध्या 6 बजे से मंचीय नाटकों का प्रदर्शन देशभर से जुटे कलाकार करेंगे. आज से प्रारंभ हो रहे महोत्सव का उद्घाटन संध्या 6 बजे से होगा जिसमें बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की अपर मुख्य सचिव,हरजोत कौर उ‌द्घाटनकर्त्ता के रूप में और मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी, विशिष्ठ अतिथि के रूप में रूबी, निदेशक, सांस्कृतिक कार्य, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार उपस्थित रहेंगे. उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता माननीय पूर्व मंत्री बिहार सरकार, सह महोत्सव के अध्यक्ष श्याम रजक करेंगे. pncb]]></description>
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<p><strong>देशभर से जुटेंगे लगभग 400 कलाकार</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/IMG-20220913-WA0035.jpg" alt="" class="wp-image-66656" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/IMG-20220913-WA0035.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/IMG-20220913-WA0035-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पटना, 2 फरवरी. बहुचर्चित सांस्कृतिक संस्था प्रांगण द्वारा पांच दिवसीय 38 वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2024 का आयोजन आज (2 फरवरी) से प्रारम्भ हो रहा है जो 6 फरवरी 2024 तक स्थानीय कालिदास रंगालय में चलेगा. इस महोत्सव में बिहार के अतिरिक्त 9 राज्यों की से 17 नाट्य दल शामिल होंगे. लगभग देश भर से इस दौरान 300-400 कलाकारों के जुटने की संभावना है जो अपनी कला से बिहार वासियों का दिल जीतेंगे. महोत्सव के दौरान<br>6 फरवरी तक हर दिन शाम 4 बजे से नुक्कड़ नाटक तथा संध्या 6 बजे से मंचीय नाटकों का प्रदर्शन देशभर से जुटे कलाकार करेंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="492" height="369" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000463115.jpg" alt="" class="wp-image-82359" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000463115.jpg 492w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000463115-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 492px) 100vw, 492px" /></figure>



<p>आज से प्रारंभ हो रहे महोत्सव का उद्घाटन संध्या 6 बजे से होगा जिसमें बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की अपर मुख्य सचिव,हरजोत कौर उ‌द्घाटनकर्त्ता के रूप में और मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी, विशिष्ठ अतिथि के रूप में रूबी, निदेशक, सांस्कृतिक कार्य, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार उपस्थित रहेंगे. उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता माननीय पूर्व मंत्री बिहार सरकार, सह महोत्सव के अध्यक्ष श्याम रजक करेंगे.</p>



<p><strong>pncb</strong></p>
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		<title>हिन्दी रंगमंच में अभिनेता स्थायी नहीं -परवेज अख्तर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Jul 2021 05:57:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[दुर्भाग्यवश हिन्दी रंगमंच में अभिनेता स्थायी नहीं है, जबकि यह उसी का माध्यम है चन्द रंगकर्मी ही औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं कितने प्रतिशत कलाकार संस्थानों से प्रशिक्षित होते हैं, 5% या उससे भी कम किसी व्यक्ति द्वारा कला-सृजन, उस व्यक्ति के रचनात्मक रुझान और उसकी नैसर्गिक* कला-प्रतिभा पर निर्भर करता है। कलात्मकता का प्रशिक्षण कदाचित सम्भव नहीं है। रंगमंच में प्रशिक्षण दरअसल शिल्प का ही होता है। फिर भी रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय कितने प्रतिशत कलाकार संस्थानों से प्रशिक्षित होते हैं, 5% या उससे भी कम। लेकिन प्रशिक्षण केन्द्र कुछ इस तरह का माहौल या हाइप बनाते हैं, गोया औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त नाट्यकर्मी ही रंगमंच के वास्तविक नायक हैं। जबकि वस्तुस्थिति यह है कि बहुत बड़ी संख्या में अप्रशिक्षित या अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षित कलाकर्मी रचनात्मक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करते और अति-महत्वपूर्ण रचते हुए दिखते हैं और कला-जगत उनका उच्च-मूल्यांकन भी करता है। हालाँकि सभी कलाओं में शिल्प-के-प्रशिक्षण का अत्यधिक महत्व है; इसका विकल्प नहीं है लेकिन कितने हैं, जिन्हें औपचारिक प्रशिक्षण का अवसर मिल पाता है ? वैसे देखें, तो आप पाएँगे कि अप्रशिक्षित कोई होता नहीं। चन्द रंगकर्मी ही औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं; जबकि अधिकांश हिन्दी-नाट्यकर्मी, नाट्य-दल में अपनी सक्रियता के क्रम में अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षित होते रहते हैं।कला प्रशिक्षण केन्द्र, वास्तव में &#8216;शिल्प&#8217; या &#8216;क्राफ़्ट&#8217; तथा &#8216;तकनीक&#8217; का प्रशिक्षण देते हैं, कला अथवा कलात्मकता का नहीं। रंगमंच कला में, अंतर्शिल्पीय दक्षता की आवश्यकता होती है। नाट्य-शिल्प के अन्तर्गत स्टेज-क्राफ़्ट, लाइटिंग, म्यूजिक, मेक-अप, कास्ट्यूम, सीनिक-डिजाईन आदि-इत्यादि रंगमंच-कला के मुख्य-सर्जक अभिनेता और [&#8230;]]]></description>
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<p><em><strong>दुर्भाग्यवश हिन्दी रंगमंच में अभिनेता स्थायी नहीं है, जबकि यह उसी का माध्यम है</strong></em></p>



<p><strong>चन्द रंगकर्मी ही औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं</strong></p>



<p><strong>कितने प्रतिशत कलाकार संस्थानों से प्रशिक्षित होते हैं, 5% या उससे भी कम</strong></p>



<p>किसी व्यक्ति द्वारा कला-सृजन, उस व्यक्ति के रचनात्मक रुझान और उसकी नैसर्गिक* कला-प्रतिभा पर निर्भर करता है। कलात्मकता का प्रशिक्षण कदाचित सम्भव नहीं है। रंगमंच में प्रशिक्षण दरअसल शिल्प का ही होता है। फिर भी रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय कितने प्रतिशत कलाकार संस्थानों से प्रशिक्षित होते हैं, 5% या उससे भी कम। लेकिन प्रशिक्षण केन्द्र कुछ इस तरह का माहौल या हाइप  बनाते हैं, गोया औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त नाट्यकर्मी ही रंगमंच के वास्तविक नायक हैं। जबकि वस्तुस्थिति यह है कि बहुत बड़ी संख्या में अप्रशिक्षित या अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षित कलाकर्मी रचनात्मक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करते और अति-महत्वपूर्ण रचते हुए दिखते हैं और कला-जगत उनका उच्च-मूल्यांकन भी करता है। हालाँकि सभी कलाओं में शिल्प-के-प्रशिक्षण का अत्यधिक महत्व है; इसका विकल्प नहीं है लेकिन कितने हैं, जिन्हें औपचारिक प्रशिक्षण का अवसर मिल पाता है ?</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/90692943_1068117303564768_2086601734959923200_n.jpg" alt="" class="wp-image-54288" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/90692943_1068117303564768_2086601734959923200_n.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/90692943_1068117303564768_2086601734959923200_n-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> वैसे देखें, तो आप पाएँगे कि अप्रशिक्षित कोई होता नहीं। चन्द रंगकर्मी ही औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं; जबकि अधिकांश हिन्दी-नाट्यकर्मी, नाट्य-दल में अपनी सक्रियता के क्रम में अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षित होते रहते हैं।कला प्रशिक्षण केन्द्र, वास्तव में &#8216;शिल्प&#8217; या &#8216;क्राफ़्ट&#8217; तथा &#8216;तकनीक&#8217; का प्रशिक्षण देते हैं, कला अथवा कलात्मकता का नहीं। रंगमंच कला में, अंतर्शिल्पीय दक्षता की आवश्यकता होती है। <strong>नाट्य-शिल्प के अन्तर्गत स्टेज-क्राफ़्ट, लाइटिंग, म्यूजिक, मेक-अप, कास्ट्यूम, सीनिक-डिजाईन आदि-इत्यादि रंगमंच-कला के मुख्य-सर्जक अभिनेता और उसकी कला को उत्प्रेरित करते हैं, उसे सजाते-सँवारते हैं। रंगमंच कला सृजन में चूँकि शिल्प और तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिये प्रशिक्षण का अत्यधिक महत्त्व है</strong>। अप्रशिक्षित नाट्यकर्मी &#8216;ट्रायल एंड एरर&#8217; के ज़रिये शिल्प का ज्ञान प्राप्त करता है, जिसमें समय का अपव्यय होता है। जबकि प्रशिक्षण के दौरान इस समझ को विकसित करने में समय की बचत होती है और शिल्प में दक्षता तथा पेशेवर तकनीक जानने का अवसर नाट्यकर्मी को मिलता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="496" height="618" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_mask.jpg" alt="" class="wp-image-54289" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_mask.jpg 496w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_mask-281x350.jpg 281w" sizes="(max-width: 496px) 100vw, 496px" /></figure>



<p><strong>रंगमंच में शिल्प-तकनीक-डिजाईन के प्रशिक्षण के साथ, जो कुछ महत्वपूर्ण कार्य प्रशिक्षण केन्द्र द्वारा किये जाने होते हैं – वे हैं, उचित परिप्रेक्ष्य में रंगमंच-कला के मूल्यांकन करने की क्षमता विकसित करना और इस समझ को विकसित करना, जो ‘कथ्य’ और ‘शिल्प’ के संतुलन के बुनियादी उसूल से प्रशिक्षुओं को परिचित कराये।आशु-रचना (improvisation) की कला, रंगमंच का सबसे विशिष्ट कौशल है। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न छवि, ध्वनि, विचार, भावना (emotion, sentiment), शब्द और अन्य सभी दृश्य-श्रव्य अवयवों के रंगमंचीय उपयोग के प्रसंग में आशु-रचना के अभ्यास करवाये जाते हैं</strong>। इसी क्रम में यह भी बताया जाता है कि परिस्थिति के अनुसार किस प्रकार अपनी नाट्य-रचना को संयोजित किया जाए।सांकेतिकता, प्रतीकात्मकता और कल्पनाशीलता नाट्य-कला की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। यह, वह विशिष्टता है, जो नाट्य-सृजन को काव्यात्मक ऊँचाई देती है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_parvez_akhtar.jpg" alt="" class="wp-image-54290" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_parvez_akhtar.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_parvez_akhtar-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong><em>वरिष्ठ निर्देशक परवेजअख्तर</em></strong></figcaption></figure>



<p>यह स्पष्ट है कि नाट्य-प्रशिक्षण संस्थान; शिल्प कौशल, डिजाईन और तकनीक के प्रशिक्षण के साथ; नाट्य-कला की विशिष्टताओं से प्रशिक्षुओं को परिचित कराते हैं। उनका यह दायित्व भी है कि भावी नाट्य नेतृत्व अपने क्षेत्र के दर्शकों के रंगमंच की ज़रूरत का अनुमान लगाने और अपने दर्शकों की आशाओं-आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति, उनकी नाट्य-भाषा में करने में सक्षम हों।लेकिन स्थिति ऐसी है नहीं। दुर्भाग्यवश हिन्दी रंगमंच में अभिनेता स्थायी नहीं है, जबकि यह उसी का माध्यम है। हाँ, निर्देशक का वर्चस्व हिन्दी रंगमंच में बढ़ता गया है। इसलिए <strong>रंगमंच की त्रयी &#8211; नाटककार, दर्शक और अभिनेता के दबाव से मुक्त निर्देशक, ‘शिल्प’ और ‘तकनीक’ के अतिरेक या आतंक के माध्यम से अपनी सत्ता की स्थापना की दिशा में प्रयासरत दिखता है।</strong> यह रंगमंच और दर्शकों दोनों के हित में नहीं है।इस विरोधाभास की तुलना फ़िल्म की उस विडम्बना से की जा सकती है, जिसमें वर्चस्व &#8216;स्टार-एक्टर&#8217; का है और निर्देशक को, फ़िल्म जिसका माध्यम है, वैसा महत्त्व नहीं मिलता। उसी तरह; अभिनेता-का-माध्यम रंगमंच, निर्देशक के नाम से जाना जाने लगा है।</p>



<p>*(यहाँ &#8216;नैसर्गिक&#8217; से मेरा तात्पर्य प्रकृति द्वारा प्रदत्त उन क्षमताओं से है, जो हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती हैं, बल्कि होती हैं। अभ्यास से मेरे जैसा बेसुरा-व्यक्ति, कोरस गायक तो शायद बन जाए; किन्तु स्वतन्त्र गायक; एक ऐसा गायक जो संगीत-कला में योगदान देने में सक्षम हो, नहीं बन सकता।) </p>



<p><strong> वरिष्ठ निर्देशक परवेज अख्तर के  FB वाल से साभार </strong></p>
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		<title>उषा गांगुली के निधन से रंग जगत मर्माहत</title>
		<link>https://www.patnanow.com/usha-ganguli-death/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Apr 2020 15:20:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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					<description><![CDATA[संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित प्रख्यात रंगकर्मी उषा गांगुली का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. उषा गांगुली ने अपनी आखिरी सांस कोलकाता में ली. करीबियों के अनुसार उषा गांगुली का निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ है. उषा गांगुली रीढ़ की हड्डी की समस्या से लंबे वक्त से परेशान थीं. उषा गांगुली का जन्म 1945 में राजस्थान में हुआ था, जबकि उनकी पढ़ाई कोलकाता में हुई. रंगमंच में उषा गांगुली के अतुल्य योगदान के चलते उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।&#160; साल 1976 में उषा ने ‘रंगकर्मी’ नामक एक संस्था का गठन कर महाभोज, होली, रुदाली, कोट मार्शल जैसे नाटकों के मंचन किया. अपने नाटकों के लिए उषा हमेशा याद रखी जाएंगी. उषा गांगुली का पहला नाटक &#8216;मिट्टी की गाड़ी&#8217; था. उषा गांगुली कोलकाता के एक कॉलेज में हिंदी की शिक्षिका भी थीं. उषा गांगुली के निधन से पूरा रंगजगत स्तब्ध है. उन्होंने कोलकाता स्थित श्री शिक्षायतन कॉलेज से स्नातक किया था. बाद में उन्होंने कोलकाता को अपना कार्यक्षेत्र बनाया. कोलकाता जहां बंगाली थियेटर का बोलबाला था वहां उन्होंने हिंदी थियेटर को स्थापित किया और देश विदेश में ख्याति अर्जित की. उषा गांगुली के निधन पर बिहार के रंगकर्मियों ने भी शोक व्यक्त किया है .निर्माण कला मंच के संजय उपाध्याय ने कहा कि उनके देहावसान से समस्त रंग-विरादरी, सांस्कृतिक-समाज, एवं साहित्यिक-महकमा बेहद मर्मांन्तिक है. उषा दी के रूप में मशहूर उषा गांगुली को निर्माण कला मंच,पटना की तरफ़ से सादर श्रद्धांजलि देते हैं. नाटककार हृषिकेश सुलभ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित प्रख्यात रंगकर्मी उषा गांगुली का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. उषा गांगुली ने अपनी आखिरी सांस कोलकाता में ली. करीबियों के अनुसार उषा गांगुली का निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-usha-3-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-44603" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-usha-3-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-usha-3-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-usha-3.jpg 720w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उषा गांगुली रीढ़ की हड्डी की समस्या से लंबे वक्त से परेशान थीं. उषा गांगुली का जन्म 1945 में राजस्थान में हुआ था, जबकि उनकी पढ़ाई कोलकाता में हुई. रंगमंच में उषा गांगुली के अतुल्य योगदान के चलते उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।&nbsp;</p>



<p>साल 1976 में उषा ने ‘रंगकर्मी’ नामक एक संस्था का गठन कर महाभोज, होली, रुदाली, कोट मार्शल जैसे नाटकों के मंचन किया. अपने नाटकों के लिए उषा हमेशा याद रखी जाएंगी. उषा गांगुली का पहला नाटक &#8216;मिट्टी की गाड़ी&#8217; था. उषा गांगुली कोलकाता के एक कॉलेज में हिंदी की शिक्षिका भी थीं. उषा गांगुली के निधन से पूरा रंगजगत स्तब्ध है. उन्होंने कोलकाता स्थित श्री शिक्षायतन कॉलेज से स्नातक किया था. बाद में उन्होंने कोलकाता को अपना कार्यक्षेत्र बनाया. कोलकाता जहां बंगाली थियेटर का बोलबाला था वहां उन्होंने हिंदी थियेटर को स्थापित किया और देश विदेश में ख्याति अर्जित की.</p>



<figure class="wp-block-gallery columns-1 is-cropped wp-block-gallery-1 is-layout-flex wp-block-gallery-is-layout-flex"><ul class="blocks-gallery-grid"><li class="blocks-gallery-item"><figure><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="607" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-usha-1-650x607.jpg" alt="" data-id="44604" data-full-url="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-usha-1.jpg" data-link="https://www.patnanow.com/?attachment_id=44604" class="wp-image-44604" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-usha-1-650x607.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-usha-1-350x327.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-usha-1.jpg 720w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure></li></ul></figure>



<p>उषा गांगुली के निधन पर बिहार के रंगकर्मियों ने भी शोक व्यक्त किया है .निर्माण कला मंच के संजय उपाध्याय ने कहा कि उनके देहावसान से समस्त रंग-विरादरी, सांस्कृतिक-समाज, एवं साहित्यिक-महकमा बेहद मर्मांन्तिक है. उषा दी के रूप में मशहूर उषा गांगुली को निर्माण कला मंच,पटना की तरफ़ से सादर श्रद्धांजलि देते हैं. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-usha.jpg" alt="" class="wp-image-44605" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-usha.jpg 450w, https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-usha-263x350.jpg 263w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /></figure>



<p>नाटककार हृषिकेश सुलभ ने कहा की उनका जाना बेहद दुखी कर गया. भोजपुर के रंगकर्मी निर्देशक श्री धर शर्मा ,रवींद्र भारती,चंद्र्भूषण पाण्डेय, और अशोक मानव ने भी उनके निधन को रंग जगत के लिए दुखद बताया है.</p>



<p><strong> ओ पी पाण्डेय</strong></p>
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