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		<title>सुनिश्चित करें कि गंगा नदी से सटे निर्माण न हो: सुप्रीम कोर्ट</title>
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		<pubDate>Sat, 02 Dec 2023 09:47:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[BREAKING NEWS बिहार सरकार को दिये निर्माण कार्य बंद करने के निर्देश पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के पूर्ण उल्लंघन का आरोप नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि गंगा नदी के किनारे, खासकर पटना और उसके आसपास कोई और निर्माण न हो न्यायालय ने राज्य को निर्देश दिया कि वह 213 चिन्हित अवैध संरचनाओं को हटाने की प्रगति के बारे में उसे रिपोर्ट करे, जो कि पटना में गंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र में बनाई गई हैं. जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने एनजीटी के आदेश से उत्पन्न अपील में यह आदेश पारित किया, जिसमें 2020 में पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा के मूल आवेदन का निपटारा किया गया था. इसमें कॉलोनियों के अवैध निर्माण, ईंटों भट्टियां और अन्य संरचनाओं की स्थापना को चुनौती दी गई, जिनमें बिहार सरकार द्वारा बनाई गई 1.5 किलोमीटर की सड़क भी शामिल है, जो कि पटना में गंगा के पारिस्थितिक रूप से नाजुक बाढ़ के मैदानों पर है, जो उपमहाद्वीप में डॉल्फ़िन के सबसे समृद्ध आवासों में से एक है.पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के पूर्ण उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अपील दायर की गई.अपीलकर्ता की ओर से बहस करते हुए एडवोकेट आकाश वशिष्ठ ने खंडपीठ को बताया कि बिहार सरकार सक्रिय रूप से गंगा बाढ़ के मैदानों पर हर दिन अवैध निर्माण की अनुमति दे रही है. प्राथमिक चिंता [&#8230;]]]></description>
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<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>BREAKING NEWS </strong></p>



<p><strong>बिहार सरकार को दिये निर्माण कार्य बंद करने के निर्देश</strong></p>



<p><strong>पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के पूर्ण उल्लंघन का आरोप</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/j-pee-path-650x433.png" alt="" class="wp-image-80668" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/j-pee-path-650x433.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/j-pee-path-350x233.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/j-pee-path-768x512.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/j-pee-path.png 1200w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि गंगा नदी के किनारे, खासकर पटना और उसके आसपास कोई और निर्माण न हो न्यायालय ने राज्य को निर्देश दिया कि वह 213 चिन्हित अवैध संरचनाओं को हटाने की प्रगति के बारे में उसे रिपोर्ट करे, जो कि पटना में गंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र में बनाई गई हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/nitish-1-650x488.png" alt="" class="wp-image-80669" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/nitish-1-650x488.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/nitish-1-350x263.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/nitish-1-768x576.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/nitish-1.png 1137w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने एनजीटी के आदेश से उत्पन्न अपील में यह आदेश पारित किया, जिसमें 2020 में पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा के मूल आवेदन का निपटारा किया गया था. इसमें कॉलोनियों के अवैध निर्माण, ईंटों भट्टियां और अन्य संरचनाओं की स्थापना को चुनौती दी गई, जिनमें बिहार सरकार द्वारा बनाई गई 1.5 किलोमीटर की सड़क भी शामिल है, जो कि पटना में गंगा के पारिस्थितिक रूप से नाजुक बाढ़ के मैदानों पर है, जो उपमहाद्वीप में डॉल्फ़िन के सबसे समृद्ध आवासों में से एक है.पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के पूर्ण उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अपील दायर की गई.अपीलकर्ता की ओर से बहस करते हुए एडवोकेट आकाश वशिष्ठ ने खंडपीठ को बताया कि बिहार सरकार सक्रिय रूप से गंगा बाढ़ के मैदानों पर हर दिन अवैध निर्माण की अनुमति दे रही है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/je-pee-path-650x366.png" alt="" class="wp-image-80667" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/je-pee-path-650x366.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/je-pee-path-350x197.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/je-pee-path-768x432.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/je-pee-path.png 1200w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>प्राथमिक चिंता यह है कि वे सबसे अधिक प्रभावित और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों का सर्वेक्षण नहीं कर रहे हैं. पटना का लगभग पूरा भूजल आर्सेनिक संदूषण से प्रभावित है, जो अत्यधिक कैंसरकारी तत्व है. इसलिए पटना शहर की पीने के पानी की जरूरतें स्वास्थ्य पर निर्भर हैं.अदालत ने पश्चिम बंगाल और झारखंड में गंगा की स्थिति जानना चाहा और कहा कि वह दोनों राज्यों को शामिल करने के लिए अपील का दायरा बढ़ाएगी.</p>



<p><strong>यहां पढ़े आदेश </strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="350" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/order-350x650.png" alt="" class="wp-image-80673" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/order-350x650.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/order-188x350.png 188w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/order.png 485w" sizes="(max-width: 350px) 100vw, 350px" /></figure>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>समलैंगिक विवाह को सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की ना</title>
		<link>https://www.patnanow.com/cji-dy-chandrachuds-no-to-gay-marriage/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Oct 2023 06:38:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कहा- केंद्र को नहीं दे सकते निर्देशकेंद्र-राज्य को सेफ हाउस बनाने का आदेशकेंद्र सरकार को कमेटी बनाने का आदेशसंसद को बाध्य नहीं कर सकते नई दिल्ली: चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने समलैंगिक विवाह को मान्यता देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि ये संसद के अधिकार क्षेत्र का मामला है. उन्होंने समलैंगिकों को बच्चा गोद लेने का अधिकार दिया और केंद्र और राज्य सरकारों को समलैंगिकों के लिए उचित कदम उठाने का आदेश भी दिया.सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि एक सामाजिक संस्था के रूप में विवाह को विनियमित करने में राज्य का वैध हित है और अदालत विधायी क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकती है और उसे एक कानून के माध्यम से समलैंगिक विवाह को मान्यता देने का निर्देश नहीं दे सकती है.उधर, जस्टिस संजय किशन कौल ने भी सीजेआई के फैसले से सहमति जताई. उन्होंने कहा कि कोर्ट विशेष विवाह अधिनियम में बदलाव नहीं कर सकता, यह सरकार का काम है. समलैंगिक समुदाय की सुरक्षा के लिए उपयुक्त ढांचा लाने की जरूरत. सरकार, समलैंगिक समुदाय के खिलाफ भेदभाव रोकने के लिए सकारात्मक कदम उठाए. समलैंगिकों से भेदभाव पर अलग कानून बनाने की भी जरूरत है. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ने केंद्र सरकार को एक कमेटी बनाने का भी निर्देश दिया. यह कमेटी, राशन कार्ड में समलैंगिक जोड़ों को परिवार के रूप में शामिल करने, समलैंगिक जोड़ों को संयुक्त बैंक खाते के लिए नामांकन करने में सक्षम बनाने और उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी आदि से मिलने वाले अधिकार का अध्ययन करेगी.सीजेआई ने कहा कि अदालत केवल कानून की व्याख्या कर सकती [&#8230;]]]></description>
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<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><br><strong>कहा- केंद्र को नहीं दे सकते निर्देश<br>केंद्र-राज्य को सेफ हाउस बनाने का आदेश<br>केंद्र सरकार को कमेटी बनाने का आदेश<br>संसद को बाध्य नहीं कर सकते</strong></p>



<p class="has-black-color has-text-color"><br><strong>नई दिल्ली</strong>: <a href="https://www.patnanow.com/mahalaya-is-a-festival-to-connect-the-living-with-the-departed/" data-type="post" data-id="79320">चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़</a> ने समलैंगिक विवाह को मान्यता देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि <strong>ये संसद के अधिकार क्षेत्र का मामला है. उन्होंने समलैंगिकों को बच्चा गोद लेने का अधिकार दिया और केंद्र और राज्य सरकारों को समलैंगिकों के लिए उचित कदम उठाने का आदेश भी दिया.सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि एक सामाजिक संस्था के रूप में विवाह को विनियमित करने में राज्य का वैध हित है और अदालत विधायी क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकती है और उसे एक कानून के माध्यम से समलैंगिक विवाह को मान्यता देने का निर्देश नहीं दे सकती है.</strong><br>उधर, जस्टिस संजय किशन कौल ने भी सीजेआई के फैसले से सहमति जताई. उन्होंने कहा कि कोर्ट विशेष विवाह अधिनियम में बदलाव नहीं कर सकता, यह सरकार का काम है. समलैंगिक समुदाय की सुरक्षा के लिए उपयुक्त ढांचा लाने की जरूरत. सरकार, समलैंगिक समुदाय के खिलाफ भेदभाव रोकने के लिए सकारात्मक कदम उठाए. समलैंगिकों से भेदभाव पर अलग कानून बनाने की भी जरूरत है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="640" height="360" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/cji.png" alt="" class="wp-image-79486" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/cji.png 640w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/cji-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></figure>



<p class="has-black-color has-text-color">सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ने केंद्र सरकार को एक कमेटी बनाने का भी निर्देश दिया. यह कमेटी, राशन कार्ड में समलैंगिक जोड़ों को परिवार के रूप में शामिल करने, समलैंगिक जोड़ों को संयुक्त बैंक खाते के लिए नामांकन करने में सक्षम बनाने और उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी आदि से मिलने वाले अधिकार का अध्ययन करेगी.सीजेआई ने कहा कि अदालत केवल कानून की व्याख्या कर सकती है, कानून नहीं बना सकती. उन्होंने कहा कि अगर अदालत LGBTQIA+ समुदाय के सदस्यों को विवाह का अधिकार देने के लिए विशेष विवाह अधिनियम की धारा 4 को पढ़ती है या इसमें कुछ शब्द जोड़ती है, तो यह विधायी क्षेत्र में प्रवेश कर जाएगा.</p>



<p class="has-black-color has-text-color"><br>चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि होमोसेक्युअलिटी क्या केवल अर्बन कांसेप्ट है? इस विषय को हमने डील किया है. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ये कहना सही नहीं होगा कि केवल ये अर्बन यानी शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित है. ऐसा नहीं है कि ये केवल अर्बन एलिट तक सीमित है.चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सिर्फ अंग्रेजी बोलने वाले सफेदपोश आदमी नहीं हैं, जो समलैंगिक होने का दावा कर सकते हैं, बल्कि गांव में कृषि कार्य में लगी एक महिला भी समलैंगिक होने का दावा कर सकती है. यह छवि बनाना कि क्वीर लोग केवल शहरी और संभ्रांत स्थानों में मौजूद हैं, उन्हें खत्म करने जैसा है. शहरों में रहने वाले सभी लोगों को कुलीन नहीं कहा जा सकता. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि विवाह की संस्था बदल गई है जो इस संस्था की विशेषता है. सती और विधवा पुनर्विवाह से लेकर अंतरधार्मिक विवाह को देखें तो तमाम बदलाव हुए हैं. यह एक अटल सत्य है और ऐसे कई बदलाव संसद से आए हैं. कई वर्ग इन परिवर्तनों के विरोधी रहे लेकिन फिर भी इसमें बदलाव आया है, इसलिए यह कोई स्थिर या अपरिवर्तनीय संस्था नहीं है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="300" height="168" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/download-3.jpg" alt="" class="wp-image-79488" style="aspect-ratio:1.7857142857142858;width:835px;height:auto"/></figure>



<p class="has-black-color has-text-color">सीजेआई ने कहा कि <strong>हम संसद या राज्य विधानसभाओं को विवाह की नई संस्था बनाने के लिए बाध्य नहीं कर सकते</strong>. स्पेशल मैरिज एक्ट को सिर्फ इसलिए असंवैधानिक नहीं ठहरा सकते क्योंकि यह समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं देता है. क्या स्पेशल मैरिज एक्ट में बदलाव की जरूरत है, यह संसद को पता लगाना है और अदालत को विधायी क्षेत्र में प्रवेश करने में सावधानी बरतनी चाहिए.सीजेआई ने आगे कहा कि एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति विषमलैंगिक रिश्ते में है, ऐसे विवाह को कानून द्वारा मान्यता प्राप्त है. एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति विषमलैंगिक रिश्ते में हो सकता है, एक ट्रांसमैन और एक ट्रांसवुमन के बीच या इसके विपरीत संबंध को एसएमए के तहत पंजीकृत किया जा सकता है. सीजेआई ने कहा कि ट्रांसजेंडर शादी कर सकते हैं. एक ट्रांसजेंडर पुरुष किसी महिला से शादी कर सकता है और इसके विपरीत भी.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="365" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/samlangik-650x365.png" alt="" class="wp-image-79487" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/samlangik-650x365.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/samlangik-350x197.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/samlangik-768x432.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/samlangik.png 948w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p class="has-black-color has-text-color">सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सीएआरए और गोद लेने पर कहा कि अविवाहित जोड़ों को गोद लेने से बाहर नहीं रखा गया है, लेकिन नियम 5 यह कहकर उन्हें रोकता है कि जोड़े को 2 साल तक स्थिर वैवाहिक रिश्ते में रहना होगा. जेजे अधिनियम अविवाहित जोड़ों को गोद लेने से नहीं रोकता है, लेकिन केवल तभी जब सीएआरए इसे नियंत्रित करता है लेकिन यह जेजे अधिनियम के उद्देश्य को विफल नहीं कर सकता है. सीएआरए ने विनियम 5(3) द्वारा प्राधिकार को पार कर लिया है. सेम सेक्स मैरिज पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि समलैंगिकों के लिए सेफ हाउस और डॉक्टर की व्यवस्था करे. साथ ही एक फ़ोन नंबर भी हो, जिसपर वो अपनी शिकायत कर सकें. इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करें कि उनके साथ किसी तरह का सामाजिक भेदभाव न हो, पुलिस उन्हे परेशान न करे और जबरदस्ती घर न भेजे, अगर वो घर नहीं जाना चाहते हैं तो.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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