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	<title>suprim court &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>आनंद मोहन की रिहाई पर बिहार सरकार को नोटिस</title>
		<link>https://www.patnanow.com/notice-to-the-bihar-government-on-the-release-of-anand-mohan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 May 2023 05:05:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Crime]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस,अब 2 हफ्ते में देना होगा जवाब&#160; बिहार के पूर्व बाहुबली आनंद मोहन सिंह की रिहाई के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. बिहार सरकार और आनंद मोहन को नोटिस जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2 हफ्तों में जवाब मांगा है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से रिहाई से जुड़ा रिकॉर्ड देने को कहा. सुप्रीम कोर्ट के इस नोटिस के बाद अब आनंद मोहन और बिहार सरकार को 2 हफ्तों के अंदर जवाब देना होगा. इसके साथ ही बिहार सरकार को भी रिहाई से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड जमा करना होगा. दिवंगत आईएएस जी कृष्णैया की पत्नी उमा देवी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. उमा देवी ने दायर की गई याचिका में फिर से आनंद मोहन को जेल भेजे जाने की मांग की और याचिका को कोर्ट में पहले ही स्वीकार कर लिया गया था. याचिका से पहले उमा देवी ने सीधा कहा था कि आनंद मोहन की रिहाई इसलिए की गई है ताकि वोट मिल सके. वहीं उमा देवी सीएम नीतीश कुमार से भी अपील कर चुकी हैं कि इस फैसले को रद्द किया जाए. उमा देवी ने यह भी कहा है कि चीफ मिनिस्टर फील्ड में जाकर काम नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा निर्णय लेना चाहिए कि आईएएस और आईपीएस का मनोबल बढ़े.]]></description>
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<h4 class="wp-block-heading"><strong>सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस,अब 2 हफ्ते में देना होगा जवाब&nbsp;<br></strong></h4>



<p><a rel="noreferrer noopener" href="https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/anand-mohan-case-gopalganj-dm-g-krishnaiah-murder-case-sc-hearing-update-131247436.html" target="_blank"></a>बिहार के पूर्व बाहुबली आनंद मोहन सिंह की रिहाई के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. बिहार सरकार और आनंद मोहन को नोटिस जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2 हफ्तों में जवाब मांगा है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से रिहाई से जुड़ा रिकॉर्ड देने को कहा. सुप्रीम कोर्ट के इस नोटिस के बाद अब आनंद मोहन और बिहार सरकार को 2 हफ्तों के अंदर जवाब देना होगा. इसके साथ ही बिहार सरकार को भी रिहाई से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड जमा करना होगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/aanand-mohan-and-nitish.png" alt="" class="wp-image-73727" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/aanand-mohan-and-nitish.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/04/aanand-mohan-and-nitish-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><br>दिवंगत आईएएस जी कृष्णैया की पत्नी उमा देवी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. उमा देवी ने दायर की गई याचिका में फिर से आनंद मोहन को जेल भेजे जाने की मांग की और याचिका को कोर्ट में पहले ही स्वीकार कर लिया गया था. याचिका से पहले उमा देवी ने सीधा कहा था कि आनंद मोहन की रिहाई इसलिए की गई है ताकि वोट मिल सके. वहीं उमा देवी सीएम नीतीश कुमार से भी अपील कर चुकी हैं कि इस फैसले को रद्द किया जाए. उमा देवी ने यह भी कहा है कि चीफ मिनिस्टर फील्ड में जाकर काम नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा निर्णय लेना चाहिए कि आईएएस और आईपीएस का मनोबल बढ़े.</p>
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		<title>फर्जी फार्मासिस्टों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/supreme-court-reprimanded-bihar-government-for-fake-pharmacists/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Dec 2022 03:39:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार में फर्जी फार्मासिस्ट चला रहे हैं अस्पताल और मेडिकल स्टोर फर्जी फार्मासिस्ट मिले मेडिकल स्टोर पर तो होगी कार्रवाई बिहार में इस महीने निकलने वाली है वैकेंसी बिहार में फर्जी फार्मासिस्टों के बढ़ते तंत्र को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को नागरिकों की जीवन से खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार में फर्जी फार्मासिस्ट अस्पताल और मेडिकल स्टोर चला रहे हैं. इस पर कार्रवाई होनी चाहिए. जस्टिस एमआर शाह और एमएम सुंदरेश ने कहा कि राज्य सरकार और बिहार राज्य फार्मेसी परिषद को नागरिक के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. फर्जी फार्मासिस्ट द्वारा मेडिकल स्टोर या अस्पताल चलाने से नागरिक के स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा. &#160;कोर्ट ने कहा कि फार्मेसी काउंसिल और राज्य सरकार का यह कर्तव्य है कि यह सुनिश्चित करे कि अस्पताल/मेडिकल स्टोर केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट द्वारा चलाए लाएं. कोर्ट ने कहा कि अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने जिस तरह से जनहित याचिका का निस्तारण किया है वह ठीक नहीं है. नागरिक के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करने के मामले में हाई कोर्ट का रवैया कामचलाऊ था. उसने मामले की तह में जाने के बजाए मामले का निस्तारण कर दिया. हाई कोर्ट को बिहार राज्य फार्मेसी परिषद को मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहना चाहिए था. हाई कोर्ट को यह भी रिपोर्ट मांगनी चाहिए थी कि बिहार राज्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बिहार में फर्जी फार्मासिस्ट चला रहे हैं अस्पताल और मेडिकल स्टोर</strong></p>



<p><strong>फर्जी फार्मासिस्ट मिले मेडिकल स्टोर पर तो होगी कार्रवाई</strong></p>



<p><strong>बिहार में इस महीने निकलने वाली है वैकेंसी </strong></p>



<p>बिहार में फर्जी फार्मासिस्टों के बढ़ते तंत्र को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को नागरिकों की जीवन से खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार में फर्जी फार्मासिस्ट अस्पताल और मेडिकल स्टोर चला रहे हैं. इस पर कार्रवाई होनी चाहिए.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="364" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/nitish-kumar-1-650x364.jpeg" alt="" class="wp-image-69266" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/nitish-kumar-1-650x364.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/nitish-kumar-1-350x196.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/nitish-kumar-1-768x430.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/nitish-kumar-1.jpeg 770w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जस्टिस एमआर शाह और एमएम सुंदरेश ने कहा कि राज्य सरकार और बिहार राज्य फार्मेसी परिषद को नागरिक के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. फर्जी फार्मासिस्ट द्वारा मेडिकल स्टोर या अस्पताल चलाने से नागरिक के स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा. &nbsp;कोर्ट ने कहा कि फार्मेसी काउंसिल और राज्य सरकार का यह कर्तव्य है कि यह सुनिश्चित करे कि अस्पताल/मेडिकल स्टोर केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट द्वारा चलाए लाएं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="630" height="420" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/suprime-court.png" alt="" class="wp-image-65935" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/suprime-court.png 630w, https://www.patnanow.com/assets/2022/08/suprime-court-350x233.png 350w" sizes="(max-width: 630px) 100vw, 630px" /></figure>



<p>कोर्ट ने कहा कि अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने जिस तरह से जनहित याचिका का निस्तारण किया है वह ठीक नहीं है. नागरिक के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करने के मामले में हाई कोर्ट का रवैया कामचलाऊ था. उसने मामले की तह में जाने के बजाए मामले का निस्तारण कर दिया. हाई कोर्ट को बिहार राज्य फार्मेसी परिषद को मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहना चाहिए था. हाई कोर्ट को यह भी रिपोर्ट मांगनी चाहिए थी कि बिहार राज्य फार्मेसी परिषद द्वारा प्रस्तुत तथ्यान्वेषी समिति की रिपोर्ट पर राज्य सरकार द्वारा कोई कार्रवाई की गई है या नहीं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="612" height="408" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/faramasist.png" alt="" class="wp-image-69262" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/faramasist.png 612w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/faramasist-350x233.png 350w" sizes="(max-width: 612px) 100vw, 612px" /></figure>



<p>शीर्ष अदालत ने नौ दिसंबर, 2019 को पारित हाई कोर्ट के आदेश को यह कहते हुए रद कर दिया और चार सप्ताह के भीतर मुद्दों पर नए सिरे से फैसला करने के लिए मामले को वापस हाई कोर्ट में भेज दिया है. पीठ ने हाई कोर्ट से यह भी कहा कि फर्जी फार्मासिस्टों पर राज्य सरकार और बिहार राज्य फार्मेसी परिषद से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाए. हाई कोर्ट ने मामले का कर दिया था निस्तारण हाई कोर्ट में बिहार स्टेट फार्मेसी की ओर से कहा गया कि तथ्यान्वेषी समिति बनाकर इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है. इसके बाद हाई कोर्ट ने जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया था.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>कौन से आधार पर की थी शराबबंदी, सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार से पूछा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/sc-on-nitish-kumar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Feb 2022 04:39:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[ बताया- 26 में से 16 जजों के पास इसी से जुड़े केस 8 मार्च तक राज्य सरकार अपना जवाब रखे कानून लागू करने से पहले किए गए अध्ययन भी लायें जेलों में भी बढ़ रही है भीड़ बिहार सरकार के शराबबंदी कानून से न्यायालयों में लगे जमानत याचिकाओं के अंबार के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार से सवाल पूछा है कि आपने किस आधार पर शराबबंदी लागू की थी. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटना हाईकोर्ट के 26 में से 16 जजों के पास शराबबंदी कानून से ही जुड़े मामले हैं.सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजय किशन कौल और एमएम सुंदरेश की पीठ ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के लगभग हर बेंच में बिहार शराबबंदी कानून से जुड़ी याचिकाएं हैं. इसलिए हमें यह जानना अनिवार्य है कि क्या बिहार सरकार ने इन कानूनों को लागू करने से पहले कोई अध्ययन किया था और बुनियादी न्यायिक ढांचों को ध्यान में रखा था.   सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पटना हाईकोर्ट के 26 में से 16 जज बिहार में लागू शराबबंदी कानून से जुड़े मसले ही देखने में व्यस्त हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस कानून से जुड़े कई मामलें न्यायालय में आ रहे हैं. निचली अदालत और उच्च न्यायालय दोनों में जमानत याचिकाओं की बाढ़ आ गई है जिसकी वजह से हाई कोर्ट के 16 जजों को इसकी सुनवाई करनी पड़ रही है. अगर इन मामलों में जमानत याचिकाओं को खारिज किया जाता है तो इससे जेलों में भी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
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<p></p>



<p><strong> बताया- 26 में से 16 जजों के पास इसी से जुड़े केस</strong></p>



<p><strong>8 मार्च तक राज्य सरकार अपना जवाब रखे</strong></p>



<p><strong>कानून लागू करने से पहले किए गए अध्ययन भी लायें</strong></p>



<p><strong>जेलों में भी बढ़ रही है भीड़</strong></p>



<p>बिहार सरकार के शराबबंदी कानून से न्यायालयों में लगे जमानत याचिकाओं के अंबार के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार से सवाल पूछा है कि आपने किस आधार पर शराबबंदी लागू की थी. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटना हाईकोर्ट के 26 में से 16 जजों के पास शराबबंदी कानून से ही जुड़े मामले हैं.सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजय किशन कौल और एमएम सुंदरेश की पीठ ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के लगभग हर बेंच में बिहार शराबबंदी कानून से जुड़ी याचिकाएं हैं. इसलिए हमें यह जानना अनिवार्य है कि क्या बिहार सरकार ने इन कानूनों को लागू करने से पहले कोई अध्ययन किया था और बुनियादी न्यायिक ढांचों को ध्यान में रखा था.  </p>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पटना हाईकोर्ट के 26 में से 16 जज बिहार में लागू शराबबंदी कानून से जुड़े मसले ही देखने में व्यस्त हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस कानून से जुड़े कई मामलें न्यायालय में आ रहे हैं. निचली अदालत और उच्च न्यायालय दोनों में जमानत याचिकाओं की बाढ़ आ गई है जिसकी वजह से हाई कोर्ट के 16 जजों को इसकी सुनवाई करनी पड़ रही है. अगर इन मामलों में जमानत याचिकाओं को खारिज किया जाता है तो इससे जेलों में भी भीड़ बढ़ेगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="359" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/sc.png" alt="" class="wp-image-59305" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/02/sc.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/02/sc-350x193.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कोर्ट ने नीतीश सरकार को शराबबंदी कानून लागू करने से पहले किए गए अध्ययन को भी अदालत में पेश करने को कहा है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हम इस बात की जांच करना चाहते हैं कि बिहार सरकार शराबबंदी कानून के प्रभाव के आकलन को लेकर क्या कदम उठा रही है और साथ ही कानून को लागू करने से पहले किस तरह का अध्ययन किया गया था. अदालत ने 8 मार्च तक राज्य सरकार को अपना जवाब रखने के लिए कहा है.</p>



<p>बिहार में 2016 से ही शराबबंदी कानून लागू है. जिसके तहत शराब की बिक्री, पीने और बनाने पर प्रतिबंध है. इस कानून में पहले संपत्ति कुर्क करने और उम्र कैद तक का प्रावधान किया गया था. लेकिन 2018 में इस कानून में संशोधन किया गया था और सजा में थोड़ी छूट दी गई थी. हालांकि पिछले दिनों जहरीली शराब से हुई मौत के बाद कानून में थोड़ी और ढील देने की चर्चा सामने आई थी. माना जा रहा है कि शराबबंदी संशोधन बिल जल्दी ही विधानसभा में पेश किया जा सकता है.</p>
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