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	<title>supreme court &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<item>
		<title>सड़क से हटेंगे आवारा कुत्ते, सुप्रीम कोर्ट का आदेश- स्कूल, अस्पताल में लगाएं घेरा, हाइवे से आवारा जानवर भी हटाएं</title>
		<link>https://www.patnanow.com/sc-on-street-dogs/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 17:08:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश देशभर में लागू होगा ये फैसला बिहार समेत पूरे देश के लिए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा आदेश जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और बस स्टैंड से दूर रखने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि स्कूल-कॉलेज और अस्पतालों में बाड़ लगाई जाए, ताकि कुत्ते वहां न पहुंच सकें.कोर्ट ने कहा कि पकड़े गए आवारा कुत्तों को उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें उठाया गया था बल्कि उन्हें शेल्टर होम में रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने सभी नेशनल और स्टेट हाइवे से आवारा पशु हटाने का आदेश भी दिया है. कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने को कहा है. इस मामले में 3 हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट और हलफनामा मांगी गई है. अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी. दरअसल राजस्थान हाईकोर्ट ने 3 महीने पहले यही आदेश दिया था. कार्रवाई को प्रभावित करने वालों के खिलाफ FIR के आदेश भी दिए थे. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला पूरे देश में लागू होगा. क्या है कोर्ट के आदेश में &#8211; सभी राज्य सरकारें और केन्द्र शासित प्रदेश 2 हफ्ते में ऐसे सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेज, अस्पतालों की पहचान करेंगे, जहां आवारा जानवर और कुत्ते घूमते हैं. उनकी एंट्री रोकने के लिए बाड़ लगाई जाएगी. अस्पताल और स्कूल कैंपस और बाड़ के रखरखाव के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त होगा. नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत 3 [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश </strong></p>



<p><strong>देशभर में लागू होगा ये फैसला</strong> </p>



<p>बिहार समेत पूरे देश के लिए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा आदेश जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और बस स्टैंड से दूर रखने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि स्कूल-कॉलेज और अस्पतालों में बाड़ लगाई जाए, ताकि कुत्ते वहां न पहुंच सकें.<br>कोर्ट ने कहा कि पकड़े गए आवारा कुत्तों को उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें उठाया गया था बल्कि उन्हें शेल्टर होम में रखा जाएगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="353" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-650x353.jpg" alt="" class="wp-image-22534" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-350x190.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने सभी नेशनल और स्टेट हाइवे से आवारा पशु हटाने का आदेश भी दिया है. कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने को कहा है. इस मामले में 3 हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट और हलफनामा मांगी गई है. अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="635" height="407" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/01/pnc-straydogs.jpg" alt="" class="wp-image-11383" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/01/pnc-straydogs.jpg 635w, https://www.patnanow.com/assets/2017/01/pnc-straydogs-350x224.jpg 350w" sizes="(max-width: 635px) 100vw, 635px" /></figure>



<p>दरअसल राजस्थान हाईकोर्ट ने 3 महीने पहले यही आदेश दिया था. कार्रवाई को प्रभावित करने वालों के खिलाफ FIR के आदेश भी दिए थे. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला पूरे देश में लागू होगा.</p>



<p><strong>क्या है कोर्ट के आदेश में </strong>&#8211;</p>



<p>सभी राज्य सरकारें और केन्द्र शासित प्रदेश 2 हफ्ते में ऐसे सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेज, अस्पतालों की पहचान करेंगे, जहां आवारा जानवर और कुत्ते घूमते हैं. उनकी एंट्री रोकने के लिए बाड़ लगाई जाएगी. अस्पताल और स्कूल कैंपस और बाड़ के रखरखाव के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त होगा. नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत 3 महीने में कम से कम एक बार इन कैंपस की जांच करें. पकड़े गए आवारा कुत्तों को उसी जगह वापस नहीं छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें उठाया गया था. सभी नेशनल हाइवे पर आवारा पशुओं की मौजूदगी की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर लगाने होंगे. सभी राज्यों के मुख्य सचिव निर्देशों का सख्ती से पालन कराएंगे. स्टेटस रिपोर्ट और हलफनामा 3 हफ्ते में दायर किया जाए.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>&#8216;मुफ्त में मिल रहा राशन, तो कोई क्यों करे काम&#8217;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/supreme-court-on-free-ration/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Feb 2025 15:10:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[MONEY MATTERS]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त की योजनाओं पर तल्ख टिप्पणी की है. बुधवार को दो जजों की पीठ ने चुनाव से पहले मुफ्त में दिए जाने वाले योजनाओं की घोषणा करने की प्रथा पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि लोग काम करने को तैयार नहीं हैं क्योंकि उन्हें मुफ्त में राशन और पैसे मिल रहे हैं. जस्टिस बीआर गवई और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ शहरी क्षेत्रों में बेघर व्यक्तियों के आश्रय के अधिकार से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी. जस्टिस गवई ने कहा कि दुर्भाग्य से, इन मुफ्त उपहारों के कारण… लोग काम करने को तैयार नहीं हैं. उन्हें मुफ्त में राशन मिल रहा है. उन्हें बिना कोई काम किए ही पैसे मिल रहे हैं. पीठ ने कहा कि हम उनके लिए आपकी चिंता की सराहना करते हैं, लेकिन क्या यह बेहतर नहीं होगा कि उन्हें समाज की मुख्यधारा का हिस्सा बनाया जाए. उन्हें राष्ट्र के विकास में योगदान करने की अनुमति दी जाए. अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार शहरी गरीबी उन्मूलन मिशन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है, जिसमें शहरी बेघरों के लिए आश्रय के प्रावधान सहित विभिन्न मुद्दों का समाधान किया जाएगा. पीठ ने अटॉर्नी जनरल से केंद्र से यह सत्यापित करने को कहा कि शहरी गरीबी उन्मूलन मिशन कितने समय के भीतर लागू किया जाएगा. शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त की योजनाओं पर तल्ख टिप्पणी की है. बुधवार को दो जजों की पीठ ने चुनाव से पहले मुफ्त में दिए जाने वाले योजनाओं की घोषणा करने की प्रथा पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि लोग काम करने को तैयार नहीं हैं क्योंकि उन्हें मुफ्त में राशन और पैसे मिल रहे हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="353" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-650x353.jpg" alt="" class="wp-image-22534" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-350x190.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जस्टिस बीआर गवई और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ शहरी क्षेत्रों में बेघर व्यक्तियों के आश्रय के अधिकार से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी. जस्टिस गवई ने कहा कि दुर्भाग्य से, इन मुफ्त उपहारों के कारण… लोग काम करने को तैयार नहीं हैं. उन्हें मुफ्त में राशन मिल रहा है. उन्हें बिना कोई काम किए ही पैसे मिल रहे हैं. पीठ ने कहा कि हम उनके लिए आपकी चिंता की सराहना करते हैं, लेकिन क्या यह बेहतर नहीं होगा कि उन्हें समाज की मुख्यधारा का हिस्सा बनाया जाए. उन्हें राष्ट्र के विकास में योगदान करने की अनुमति दी जाए.</p>



<p>अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार शहरी गरीबी उन्मूलन मिशन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है, जिसमें शहरी बेघरों के लिए आश्रय के प्रावधान सहित विभिन्न मुद्दों का समाधान किया जाएगा. पीठ ने अटॉर्नी जनरल से केंद्र से यह सत्यापित करने को कहा कि शहरी गरीबी उन्मूलन मिशन कितने समय के भीतर लागू किया जाएगा. शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>NEET का रिजल्ट जारी, 22 को तय होगा रिजल्ट का भविष्य</title>
		<link>https://www.patnanow.com/neet-controversy-update/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Jul 2024 11:14:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी( NTA ) ने 20 जुलाई को NEET UG एग्‍जाम का सिटी और सेंटरवाइज रिजल्‍ट जारी कर दिया. NTA की ऑफिशियल वेबसाइट nta.ac.in पर रिजल्ट रिलीज हुआ है. इसमें कैंडिडेट्स की पहचान जाहिर नहीं की गई है. दरअसल, गुरुवार 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में NEET विवाद पर CJI की बेंच के सामने तीसरी सुनवाई हुई थी. कोर्ट ने NTA को निर्देश दिया था कि सभी कैंडिडेट्स के रिजल्ट शनिवार दोपहर 12 बजे तक वेबसाइट पर अपलोड किए जाएं और रिजल्ट अपलोड करते वक्त उम्मीदवार की पहचान जाहिर ना की जाए. सोमवार 22 जुलाई को सुबह 10.30 बजे अगली सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस रिपोर्ट की एक कॉपी भी मांगी है. अब देखना है कि सुप्रीम कोर्ट 22 जुलाई को क्या फैसला करता है. पेपर लीक की वजह से इस परीक्षा को रद्द करने की मांग हो रही है. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी( NTA ) ने 20 जुलाई को NEET UG एग्‍जाम का सिटी और सेंटरवाइज रिजल्‍ट जारी कर दिया. NTA की ऑफिशियल वेबसाइट <a href="http://nta.ac.in/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">nta.ac.in</a> पर रिजल्ट रिलीज हुआ है. इसमें कैंडिडेट्स की पहचान जाहिर नहीं की गई है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="558" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/pnc-nta-website-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85675" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/pnc-nta-website-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/pnc-nta-website-650x354.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>दरअसल, गुरुवार 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में NEET विवाद पर CJI की बेंच के सामने तीसरी सुनवाई हुई थी. कोर्ट ने NTA को निर्देश दिया था कि सभी कैंडिडेट्स के रिजल्ट शनिवार दोपहर 12 बजे तक वेबसाइट पर अपलोड किए जाएं और रिजल्ट अपलोड करते वक्त उम्मीदवार की पहचान जाहिर ना की जाए. सोमवार 22 जुलाई को सुबह 10.30 बजे अगली सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस रिपोर्ट की एक कॉपी भी मांगी है. अब देखना है कि सुप्रीम कोर्ट 22 जुलाई को क्या फैसला करता है. पेपर लीक की वजह से इस परीक्षा को रद्द करने की मांग हो रही है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सुप्रीम कोर्ट का फैसला, देनी ही होगी सक्षमता परीक्षा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/supreme-court-on-sakshamta-pariksha/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Jun 2024 03:02:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[जॉब/करियर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[BIHAR TEACHER]]></category>
		<category><![CDATA[NIYOJIT SHIKSHAK]]></category>
		<category><![CDATA[Sakshamta pariksha]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार विशिष्ट शिक्षक नियमावली 2023 में सक्षमता परीक्षा के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ और बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने सक्षमता परीक्षा के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कह दिया है कि अगर शिक्षक की नौकरी करनी है सक्षमता परीक्षा पास करनी ही होगी. आपको बता दें कि बिहार के लगभग 1.87 लाख नियोजित शिक्षक सक्षमता परीक्षा पास कर चुके हैं और अन्य 85 हजार नियोजित शिक्षक अगली सक्षमता परीक्षा के लिए आवेदन कर चुके हैं. लेकिन अब भी लगभग 70,000 से ज्यादा शिक्षक सक्षमता परीक्षा नहीं देने की जिद पर अड़े हैं. ऐसे नियोजित शिक्षकों ने ही पहले पटना हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. अब पटना हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर शिक्षक की नौकरी करनी है तो सक्षमता परीक्षा पास करनी पड़ेगी. क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नियोजित शिक्षकों को सरकार के बनाए गए नियम के मुताबिक सक्षमता परीक्षा देनी होगी. जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जवल भुईयां की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र के निर्माण में मदद करते हैं. उन्हें अपने कौशल को बेहतर बनाने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए. पीठ ने कहा कि हम देश भर और खासकर बिहार के बच्चों की शिक्षा के प्रति गंभीर हैं. अदालत ने कहा कि अगर नियोजित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>बिहार विशिष्ट शिक्षक नियमावली 2023 में सक्षमता परीक्षा के प्रावधान </strong>को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. <strong>परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ और बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ </strong>ने सक्षमता परीक्षा के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कह दिया है कि अगर शिक्षक की नौकरी करनी है सक्षमता परीक्षा पास करनी ही होगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="278" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/11/Delhi-SupremeCourt-pnc.jpeg" alt="" class="wp-image-57142" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/11/Delhi-SupremeCourt-pnc.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/11/Delhi-SupremeCourt-pnc-350x150.jpeg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आपको बता दें कि बिहार के लगभग 1.87 लाख नियोजित शिक्षक सक्षमता परीक्षा पास कर चुके हैं और अन्य 85 हजार नियोजित शिक्षक अगली सक्षमता परीक्षा के लिए आवेदन कर चुके हैं. लेकिन अब भी लगभग 70,000 से ज्यादा शिक्षक सक्षमता परीक्षा नहीं देने की जिद पर अड़े हैं. ऐसे नियोजित शिक्षकों ने ही पहले पटना हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. अब पटना हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर शिक्षक की नौकरी करनी है तो सक्षमता परीक्षा पास करनी पड़ेगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="384" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-sakshamta-exam-सक्षमता-परीक्षा-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84007" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-sakshamta-exam-सक्षमता-परीक्षा-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-sakshamta-exam-सक्षमता-परीक्षा-650x243.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने </strong></p>



<p>गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नियोजित शिक्षकों को सरकार के बनाए गए नियम के मुताबिक सक्षमता परीक्षा देनी होगी. जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जवल भुईयां की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र के निर्माण में मदद करते हैं. उन्हें अपने कौशल को बेहतर बनाने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए. पीठ ने कहा कि हम देश भर और खासकर बिहार के बच्चों की शिक्षा के प्रति गंभीर हैं. अदालत ने कहा कि अगर नियोजित शिक्षक नियम नहीं मानते तो उन्हें नौकरी छोड़ देनी चाहिए.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शिक्षकों की आपत्ति पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/supreme-court-on-bihar-slp/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Feb 2024 08:40:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Bihar education Department]]></category>
		<category><![CDATA[SLP]]></category>
		<category><![CDATA[supreme court]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली/पटना ।। बिहार के लाखों नियोजित शिक्षकों की आपत्ति को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी पटना हाईकोर्ट के आदेश पर मुहर लगा दी है. मामला वर्ष 2016 का है जब शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव ने संयुक्त रूप से आदेश जारी कर स्कूलों की जांच में जीविका दीदियों को लगा दिया था और 75 प्रतिशत से कम छात्र की उपस्थिति पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के वेतन से 50 प्रतिशत तक कटौती करने का आदेश दे दिया था. इसे परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर ब्रजवासी ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इस बारे में वंशीधर ब्रजवासी ने बताया कि इसकी सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने दो अगस्त, 2018 को आदेश पारित करते हुए सरकार के इस आदेश को निरस्त कर दिया और स्पष्ट किया कि बच्चों की उपस्थिति के लिए शिक्षक जिम्मेदार नहीं हैं और यह भी कहा कि जीविका दीदियां गैरसरकारी संगठन की सदस्य मात्र हैं, जिन्हें स्कूलों के निरीक्षण का कोई अधिकार नहीं है. ब्रजवासी ने बताया कि उसके बाद पटना हाईकोर्ट के फैसले को सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा दायर एसएलपी को शुक्रवार 23 फरवरी को खारिज कर दिया. फैसले से शिक्षा विभाग के उस आदेश पर सवाल खड़े हो गए हैं जिसमें छात्रों की कम उपस्थिति के लिए शिक्षकों को दोषी ठहराया जाता है. यही नहीं अब जीविका दीदी या समकक्ष से विद्यालय निरीक्षण भी सरकार नहीं करवा सकेगी. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>दिल्ली/पटना ।। बिहार के लाखों नियोजित शिक्षकों की आपत्ति को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी पटना हाईकोर्ट के आदेश पर मुहर लगा दी है. मामला वर्ष 2016 का है जब शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव ने संयुक्त रूप से आदेश जारी कर स्कूलों की जांच में जीविका दीदियों को लगा दिया था और 75 प्रतिशत से कम छात्र की उपस्थिति पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के वेतन से 50 प्रतिशत तक कटौती करने का आदेश दे दिया था. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/pnc-ppss-banshidhar-brijwasi-teacher-sangh.jpg" alt="" class="wp-image-64478" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/pnc-ppss-banshidhar-brijwasi-teacher-sangh.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/pnc-ppss-banshidhar-brijwasi-teacher-sangh-350x263.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इसे परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर ब्रजवासी ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इस बारे में वंशीधर ब्रजवासी ने बताया कि इसकी सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने दो अगस्त, 2018 को आदेश पारित करते हुए सरकार के इस आदेश को निरस्त कर दिया और स्पष्ट किया कि बच्चों की उपस्थिति के लिए शिक्षक जिम्मेदार नहीं हैं और यह भी कहा कि जीविका दीदियां गैरसरकारी संगठन की सदस्य मात्र हैं, जिन्हें स्कूलों के निरीक्षण का कोई अधिकार नहीं है. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="437" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/PNC-sc-order-on-school-inspection-and-attendance-437x650.jpg" alt="" class="wp-image-82786" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/PNC-sc-order-on-school-inspection-and-attendance.jpg 437w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/PNC-sc-order-on-school-inspection-and-attendance-235x350.jpg 235w" sizes="auto, (max-width: 437px) 100vw, 437px" /></figure>



<p>ब्रजवासी ने बताया कि उसके बाद पटना हाईकोर्ट के फैसले को सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा दायर एसएलपी को शुक्रवार 23 फरवरी को खारिज कर दिया. फैसले से शिक्षा विभाग के उस आदेश पर सवाल खड़े हो गए हैं जिसमें छात्रों की कम उपस्थिति के लिए शिक्षकों को दोषी ठहराया जाता है. यही नहीं अब जीविका दीदी या समकक्ष से विद्यालय निरीक्षण भी सरकार नहीं करवा सकेगी.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे एनआइओएस शिक्षक</title>
		<link>https://www.patnanow.com/nios-d-el-ed-sangh-taiyari/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Nov 2023 17:12:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[जॉब/करियर]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[BIHAR TEACHER]]></category>
		<category><![CDATA[Nios d el ed]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान से डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन करने वाले शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी कर ली है. एनआईओएस डीएलएड शिक्षकों की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड से जुड़े एक मामले में एनआईओएस डीएलएड को लेकर जो सुनवाई हुई उसमें बिहार के अभ्यर्थी अपना पक्ष नहीं रख पाए जिसकी वजह से भविष्य में होने वाली बहालियों में उन्हें वंचित होना पड़ सकता है. आपको याद दिला दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उत्तराखंड से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है कि एनआईओएस से डीएलएड करने वाले अभ्यर्थियों की डिग्री रेगुलर डी एल एड के बराबर नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनआईओएस डीएलएड अभ्यर्थी पुनर्विचार याचिका के लिए तैयार हैं. इन अभ्यर्थियों का मानना है कि केंद्र सरकार के आदेश पर एनआईओएस ने एनसीटीई की सहमति से उन्हें 2 साल का डीएलएड करने का मौका दिया था. प्रधानमंत्री की तस्वीर के साथ एनआईओएस ने विज्ञापन जारी किया था जिसमें यह साफ-साफ कहा गया था कि यह डिप्लोमा 2 साल का है. इस बात की पुष्टि एन आइओएस के तत्कालीन चेयरमैन सी बी शर्मा ने भी की है. उन्होंने फिर से कहा कि ये डिप्लोमा सभी बहालियों के लिए पूरी तरह वैध है. pncb]]></description>
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<p>पटना।। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान से डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन करने वाले शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी कर ली है. एनआईओएस डीएलएड शिक्षकों की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड से जुड़े एक मामले में एनआईओएस डीएलएड को लेकर जो सुनवाई हुई उसमें बिहार के अभ्यर्थी अपना पक्ष नहीं रख पाए जिसकी वजह से भविष्य में होने वाली बहालियों में उन्हें वंचित होना पड़ सकता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="278" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/11/Delhi-SupremeCourt-pnc.jpeg" alt="" class="wp-image-57142" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/11/Delhi-SupremeCourt-pnc.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/11/Delhi-SupremeCourt-pnc-350x150.jpeg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आपको याद दिला दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उत्तराखंड से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है कि एनआईओएस से डीएलएड करने वाले अभ्यर्थियों की डिग्री रेगुलर डी एल एड के बराबर नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनआईओएस डीएलएड अभ्यर्थी पुनर्विचार याचिका के लिए तैयार हैं. इन अभ्यर्थियों का मानना है कि केंद्र सरकार के आदेश पर एनआईओएस ने एनसीटीई की सहमति से उन्हें 2 साल का डीएलएड करने का मौका दिया था.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="421" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/11/IMG-20231130-WA0005-421x650.jpg" alt="" class="wp-image-80574" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/11/IMG-20231130-WA0005-421x650.jpg 421w, https://www.patnanow.com/assets/2023/11/IMG-20231130-WA0005-227x350.jpg 227w, https://www.patnanow.com/assets/2023/11/IMG-20231130-WA0005.jpg 540w" sizes="auto, (max-width: 421px) 100vw, 421px" /></figure>



<p>प्रधानमंत्री की तस्वीर के साथ एनआईओएस ने विज्ञापन जारी किया था जिसमें यह साफ-साफ कहा गया था कि यह डिप्लोमा 2 साल का है. इस बात की पुष्टि एन आइओएस के तत्कालीन चेयरमैन सी बी शर्मा ने भी की है. उन्होंने फिर से कहा कि ये डिप्लोमा सभी बहालियों के लिए पूरी तरह वैध है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, तीन जुलाई तक करना होगा इंतजार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/supreme-court-rejects/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 May 2023 12:12:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Caste Census]]></category>
		<category><![CDATA[supreme court]]></category>
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					<description><![CDATA[जाति आधारित गणना पर पटना हाइकोर्ट की अंतरिक रोक फिलहाल जारी रहेगी. बिहार सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद राहत देने से इंकार कर दिया है. अब 3 जुलाई को पटना हाईकोर्ट में ही इस मामले की अगली सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के द्वारा लगाई गई जाति गणना पर रोक हटाने से इंकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला ऐसा नहीं है कि इस पर तुरंत सुनवाई की जाए. अगर 14 जुलाई तक इस मामले पर पटना हाई कोर्ट में कोई सुनवाई नहीं होती है तो सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की अंतरिम रोक को हटाने से इंकार करते हुए कहा कि इस बात की जांच करनी होगी कि कहीं यह कवायद सर्वेक्षण की आड़ में जनगणना तो नहीं है. बता दें कि पटना हाइकोर्ट ने जातीय गणना को असंवैधानिक बताते हुए रोक लगाने का आदेश दिया था और 3 जुलाई को सुनवाई की तारीख तय की थी. जिसके बाद बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>जाति आधारित गणना पर पटना हाइकोर्ट की अंतरिक रोक फिलहाल जारी रहेगी. बिहार सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद राहत देने से इंकार कर दिया है. अब 3 जुलाई को पटना हाईकोर्ट में ही इस मामले की अगली सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के द्वारा लगाई गई जाति गणना पर रोक हटाने से इंकार कर दिया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="353" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-650x353.jpg" alt="" class="wp-image-22534" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-350x190.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला ऐसा नहीं है कि इस पर तुरंत सुनवाई की जाए. अगर 14 जुलाई तक इस मामले पर पटना हाई कोर्ट में कोई सुनवाई नहीं होती है तो सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="340" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jati1.png" alt="" class="wp-image-73928" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jati1.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jati1-350x183.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की अंतरिम रोक को हटाने से इंकार करते हुए कहा कि इस बात की जांच करनी होगी कि कहीं यह कवायद सर्वेक्षण की आड़ में जनगणना तो नहीं है. बता दें कि पटना हाइकोर्ट ने जातीय गणना को असंवैधानिक बताते हुए रोक लगाने का आदेश दिया था और 3 जुलाई को सुनवाई की तारीख तय की थी. जिसके बाद बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. </p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सुप्रीम कोर्ट से मिलेगी राहत!</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bihar-govt-in-supreme-court/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 May 2023 00:57:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Caste Census]]></category>
		<category><![CDATA[Jati ganana]]></category>
		<category><![CDATA[supreme court]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। बिहार सरकार ने जाति गणना पर पटना हाईकोर्ट के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है. हाईकोर्ट के चार मई के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर बिहार सरकार की अपील में कहा गया है कि रोक से पूरी कवायद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. राज्य सरकार ने कहा कि जाति आधारित डेटा का संग्रह संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत एक संवैधानिक आदेश है. कुछ जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है. पूरी मशीनरी जमीनी स्तर पर काम कर रही है. समय अधिक लगने से सर्वेक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. इधर, पटना हाईकोर्ट में अर्जी दायर करने वाले आवेदक अखिलेश कुमार और यूथ फॉर इक्वलिटी की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में केवियट दायर किया है. बता दें कि पटना हाईकोर्ट ने चार मई के अपने आदेश में राज्य सरकार को जातीय गणना तत्काल बंद करने का निर्देश दिया था. मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन जुलाई की तारीख तय की थी. बिहार सरकार ने पटना हाईकोर्ट में मामले की जल्द सुनवाई की याचिका दायर की थी जिसे पटना हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था. अब देखना है कि बिहार सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलती है या नहीं. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। बिहार सरकार ने जाति गणना पर पटना हाईकोर्ट के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है. हाईकोर्ट के चार मई के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर बिहार सरकार की अपील में कहा गया है कि रोक से पूरी कवायद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="467" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/pnc-bihar-sarkar-sachivalaya.jpg" alt="" class="wp-image-65680" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/pnc-bihar-sarkar-sachivalaya.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/08/pnc-bihar-sarkar-sachivalaya-350x251.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>राज्य सरकार ने कहा कि जाति आधारित डेटा का संग्रह संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत एक संवैधानिक आदेश है. कुछ जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है. पूरी मशीनरी जमीनी स्तर पर काम कर रही है. समय अधिक लगने से सर्वेक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. </p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jatijanganana.png" alt="" class="wp-image-73927" width="342" height="222" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jatijanganana.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jatijanganana-350x228.png 350w" sizes="auto, (max-width: 342px) 100vw, 342px" /></figure>



<p>इधर, पटना हाईकोर्ट में अर्जी दायर करने वाले आवेदक अखिलेश कुमार और यूथ फॉर इक्वलिटी की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में केवियट दायर किया है. बता दें कि पटना हाईकोर्ट ने चार मई के अपने आदेश में राज्य सरकार को जातीय गणना तत्काल बंद करने का निर्देश दिया था. मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन जुलाई की तारीख तय की थी. बिहार सरकार ने पटना हाईकोर्ट में मामले की जल्द सुनवाई की याचिका दायर की थी जिसे पटना हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था. अब देखना है कि बिहार सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलती है या नहीं.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>&#8216;सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ेगी चुनाव आयोग की विश्वसनीयता&#8217;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/sc-on-ec/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Mar 2023 14:06:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[chunav ayog]]></category>
		<category><![CDATA[ELECTION COMMISSION]]></category>
		<category><![CDATA[supreme court]]></category>
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					<description><![CDATA[चुनाव आयोग के सदस्यों के चयन की प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने बदल दिया है. अब चुनाव आयोग के सदस्यों का चयन तीन सदस्यों की कमिटी द्वारा किया जाएगा. प्रधानमंत्री, लोकसभा में विरोधी दल या सबसे बड़े विरोधी दल के नेता तथा उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कमिटी के सदस्य होंगे. अभी तक चुनाव आयोग के सदस्य भारत सरकार द्वारा नामित होते थे. इस बारे में राजद के वरिष्ठ नेता शिवानन्द तिवारी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि सरकारों द्वारा आयोग में सदस्यों की नियुक्ति पर हमेशा उंगली उठती रही है. इधर तो आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर शंका उठाई गई है. आयोग की अविश्वसनियता से चुनावों की निष्पक्षता पर भी संदेह होने लगता है. यह लोकतंत्र के लिए घातक स्थिति है. उन्होंने कहा कि बहुत पहले से चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया को बदलने की माँग उठाई जा रही थी.शिवानन्द तिवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से आयोग की विश्वसनीयता तो बढ़ेगी ही. साथ ही इस फ़ैसले के द्वारा सुप्रीम कोर्ट ने यह संदेश भी दिया है कि वह सरकार के दबाव में आने वाली नहीं है. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="278" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/11/Delhi-SupremeCourt-pnc.jpeg" alt="" class="wp-image-57142" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/11/Delhi-SupremeCourt-pnc.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/11/Delhi-SupremeCourt-pnc-350x150.jpeg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>चुनाव आयोग के सदस्यों के चयन की प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने बदल दिया है. अब चुनाव आयोग के सदस्यों का चयन तीन सदस्यों की कमिटी द्वारा किया जाएगा. प्रधानमंत्री, लोकसभा में विरोधी दल या सबसे बड़े विरोधी दल के नेता तथा उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कमिटी के सदस्य होंगे. अभी तक चुनाव आयोग के सदस्य भारत सरकार द्वारा नामित होते थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-rjd-shivanand-tiwari.jpg" alt="" class="wp-image-62330" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-rjd-shivanand-tiwari.jpg 600w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-rjd-shivanand-tiwari-350x350.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-rjd-shivanand-tiwari-250x250.jpg 250w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<p><br>इस बारे में राजद के वरिष्ठ नेता शिवानन्द तिवारी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि सरकारों द्वारा आयोग में सदस्यों की नियुक्ति पर हमेशा उंगली उठती रही है. इधर तो आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर शंका उठाई गई है. आयोग की अविश्वसनियता से चुनावों की निष्पक्षता पर भी संदेह होने लगता है. यह लोकतंत्र के लिए घातक स्थिति है. उन्होंने कहा कि बहुत पहले से चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया को बदलने की माँग उठाई जा रही थी.<br>शिवानन्द तिवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से आयोग की विश्वसनीयता तो बढ़ेगी ही. साथ ही इस फ़ैसले के द्वारा सुप्रीम कोर्ट ने यह संदेश भी दिया है कि वह सरकार के दबाव में आने वाली नहीं है. </p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बड़ी मुश्किल है निगम चुनाव की राह !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/badi-mushkil-hai-nigam-chunav-ki-raah/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Dec 2022 13:31:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[BHOJPUR]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[ELECTION COMMISSION]]></category>
		<category><![CDATA[Nigam chunav]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
		<category><![CDATA[State Election commission]]></category>
		<category><![CDATA[supreme court]]></category>
		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=69290</guid>

					<description><![CDATA[क्या घोषित तिथि पर हो पायेगा चुनाव? पटना, 1 दिसम्बर. निकाय चुनाव की तिथिर्यो के पुनः घोषणा के बाद उम्मीदवारों से लेकर राज्य सरकार तक जहाँ खुश नजर आ रहे हैं वही इसके कानूनी पहलुओं पर नजर डालने पर ऐसा लगता है कि निगम चुनाव फिर से अधर में लटक सकता है. चुनाव करना अभी भी राज्य सरकार के लिए आसान नही है. पिछड़ों को आरक्षण देने में नीतीश सरकार की जल्दबाजी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले फिर से सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाने जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट अगर तत्काल सुनवाई पर राजी हो जाता है तो घोषित तिथि पर नगर निकाय चुनाव करा पाना बेहद मुश्किल होगा. बताते चलें किबिहार में नगर निकाय चुनाव में पिछड़ों के आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश सार्वजनिक होने के बाद एक ही दिन में रिपोर्ट लेकर चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया गया. लेकिन घोषित तिथि के बाद भी नगर निकाय चुनाव कराना आसान नहीं होगा. बिहार निर्वाचन आयोग ने बिहार में नगर निकाय चुनाव की नयी तारीखों का एलान बुधवार की शाम किया था. तारिख एलान के 12 घंटे भी नही बीते कि कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की बाजीगरी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने की बात सामने आ गयी. आयोग की अधिसूचना के अनुसार 30 नवंबर को ही पिछड़ों के आरक्षण को लेकर राज्य सरकार के नगर विकास विभाग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. रिपोर्ट मिलने के साथ ही आयोग ने 18 दिसंबर औऱ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>क्या घोषित तिथि पर हो पायेगा चुनाव?</strong></p>



<p>पटना, 1 दिसम्बर. निकाय चुनाव की तिथिर्यो के पुनः घोषणा के बाद उम्मीदवारों से लेकर राज्य सरकार तक जहाँ खुश नजर आ रहे हैं वही इसके कानूनी पहलुओं पर नजर डालने पर ऐसा लगता है कि निगम चुनाव फिर से अधर में लटक सकता है. चुनाव करना अभी भी राज्य सरकार के लिए आसान नही है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="268" height="244" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/pnc-bihar-state-election-commission.jpg" alt="" class="wp-image-67320" /></figure>



<p>पिछड़ों को आरक्षण देने में नीतीश सरकार की जल्दबाजी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले फिर से सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाने जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट अगर तत्काल सुनवाई पर राजी हो जाता है तो घोषित तिथि पर नगर निकाय चुनाव करा पाना बेहद मुश्किल होगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="598" height="299" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/sambhavana-9.jpg" alt="" class="wp-image-66799" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/sambhavana-9.jpg 598w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/sambhavana-9-350x175.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 598px) 100vw, 598px" /></figure>



<p>बताते चलें किबिहार में नगर निकाय चुनाव में पिछड़ों के आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश सार्वजनिक होने के बाद एक ही दिन में रिपोर्ट लेकर चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया गया. लेकिन घोषित तिथि के बाद भी नगर निकाय चुनाव कराना आसान नहीं होगा.</p>



<p>बिहार निर्वाचन आयोग ने बिहार में नगर निकाय चुनाव की नयी तारीखों का एलान बुधवार की शाम किया था. तारिख एलान के 12 घंटे भी नही बीते कि कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की बाजीगरी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने की बात सामने आ गयी.</p>



<p>आयोग की अधिसूचना के अनुसार 30 नवंबर को ही पिछड़ों के आरक्षण को लेकर राज्य सरकार के नगर विकास विभाग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. रिपोर्ट मिलने के साथ ही आयोग ने 18 दिसंबर औऱ 28 दिसंबर को दो फेज में नगर निकाय चुनाव कराने का एलान कर दिया.</p>



<p>राज्य निर्वाचन आय़ोग के अनुसार अक्टूबर में घोषित चुनाव के मुताबिक ही आऱक्षण की व्यवस्था रहेगी. न तो उम्मीदवारों को नए सिरे से नामांकन करना होगा और न ही नए चुनाव चिन्ह का इंतजार. पिछले समय मिले चुनाव चिन्ह पर ही वे चुनाव लड़ेंगे. बस सिर्फ तिथियां बदल गयी हैं यानि जो चुनाव पहले 10 अक्टूबर को होने वाला था वह अब 18 दिसंबर को होगा और 20 अक्टूबर वाला चुनाव 28 दिसंबर को होगा.</p>



<p><strong>ये है कानूनी मामला</strong><br>अति पिछड़ों को आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि बिहार राज्य अति पिछडा वर्ग आयोग को डेडिकेटेड कमीशन नहीं माना जा सकता.</p>



<p>दिलचस्प बात ये है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव को लेकर जो अधिसूचना जारी की है उसमें अति पिछड़ा वर्ग आयोग को डेडिकेटेड कमीशन कहा गया है. चुनाव की अधिसूचना में ये कहा गया है कि डेडिकेटेड कमीशन की रिपोर्ट पर चुनाव की घोषणा की जा रही है.</p>



<p>यह सब तब हो रहा है जब 32 दिनों पहले ही यानि 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने अति पिछड़ा आय़ोग को डेडिकेटेड कमीशन नहीं माना था जिसके बाद चुनाव की तिथियाँ राज्य निर्वाचन आयोग ने रद्द किया था.</p>



<p>लेकिन बावजूद इसके राज्य सरकार से लेकर निर्वाचन आय़ोग ने आनन-फानन में एक ही दिन में आरक्षण को लेकर रिपोर्ट भेजने से लेकर चुनाव का डेट तक घोषित कर दी.</p>



<p><strong>सुप्रीम कोर्ट में दायर होगी फिर से अर्जी</strong></p>



<p>इस मामले को ले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले सुनील कुमार अब कोर्ट में फिर से शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाने जा रहे हैं. पटना नाउ को मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार तक सुप्रीम कोर्ट में फिर से अर्जी लगा सकती है. अगर सुप्रीम कोर्ट ने उस अर्जी पर संज्ञान लिया तो बिहार में नगर निकाय चुनाव एक बार फिर से टल जाएगा. चुनाव की डगर आसान नही होगी. न तो राज्य सरकार के लिए, न ही आयोग के लिए और न ही उन उम्मीदवारों के लिए जो अपनी जीत की आस लगाए हुए हैं.</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
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