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	<title>suman kumar &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>गाँठ नाटक का कला जागरण ने किया मंचन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/kala-jagran-ne-kiya-ganth-ka-manchan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Aug 2023 00:08:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दलित के आईपीएस बनने और जाति पॉलिटिक्स की कहानी है गाँठ पटना, 15 अगस्त(ओ पी पांडेय). कला जागरण के कलाकारों ने रामधारी सिंह दिवाकर की कहानी गाँठ नाटक का मंचन कालिदास रंगालय, पटना में किया. संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली के सौजन्य से आयोजित समारोह में विवेक कुमार नाट्य रूपांतरित नाटक गाँठ को परिकल्पित और निर्देशित सुमन कुमार ने किया. नाटक की शुरुआत दलितटोली में बच्चे के जन्म से शुरू होती है. बच्चे का जन्म होते ही नवजात की नाक छेदने की बात सुनकर पिता फगुनी राम बदहवास हो जाता है. लेकिन अंधविश्वास और सामाजिक जकड़न के कारण फगुनी इस हृदयविदारक घटना को रोक नहीं पाता. छोटी जाति में जन्म लेकर स्कूल जाने पर नकछेदी को बबुआन टोला का रामप्रताप सिंह उसके नाक में नथुनी डालकर प्रताड़ित करता है. नकछेदी को जाति और रंग साफ होने के कारण उसे जलील करता है. इधर नकछेदी अपने पिता फगुनी और मास्टर साहब की बात मानकर पढ़ाई-लिखाई में मन लगा रहा था. समय ने करवट बदला और नकछेदी मैट्रिक में जिला टॉप हो गया. यह खबर सुनते ही दलितटोली में उत्सव का माहौल हो जाता है तो बबुआन टोला में तो इस खबर ने ठनका ही गिरा दिया. वह यूपीएससी की परीक्षा में लगन और मेहनत से पढ़ाई कर पास हो जाता है और आईपीएस बन जाता है. इधर गांव में एक दिन खबर आती है कि एसपी नकछेदी आ रहा है. खबर आग के तरह पूरे इलाके में फैल जाती है. लेकिन इस बार बबुआन टोला में चन्द्रमा सिंह के यहाँ भी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दलित के आईपीएस बनने और जाति पॉलिटिक्स की कहानी है गाँठ</strong></p>



<p>पटना, 15 अगस्त(ओ पी पांडेय). कला जागरण के कलाकारों ने रामधारी सिंह दिवाकर की कहानी गाँठ नाटक का मंचन कालिदास रंगालय, पटना में किया. संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली के सौजन्य से आयोजित समारोह में विवेक कुमार नाट्य रूपांतरित नाटक गाँठ को परिकल्पित और निर्देशित सुमन कुमार ने किया.</p>



<p>नाटक की शुरुआत दलितटोली में बच्चे के जन्म से शुरू होती है. बच्चे का जन्म होते ही नवजात की नाक छेदने की बात सुनकर पिता फगुनी राम बदहवास हो जाता है. लेकिन अंधविश्वास और सामाजिक जकड़न के कारण फगुनी इस हृदयविदारक घटना को रोक नहीं पाता. छोटी जाति में जन्म लेकर स्कूल जाने पर नकछेदी को बबुआन टोला का रामप्रताप सिंह उसके नाक में नथुनी डालकर प्रताड़ित करता है. नकछेदी को जाति और रंग साफ होने के कारण उसे जलील करता है. इधर नकछेदी अपने पिता फगुनी और मास्टर साहब की बात मानकर पढ़ाई-लिखाई में मन लगा रहा था. समय ने करवट बदला और नकछेदी मैट्रिक में जिला टॉप हो गया. यह खबर सुनते ही दलितटोली में उत्सव का माहौल हो जाता है तो बबुआन टोला में तो इस खबर ने ठनका ही गिरा दिया. वह यूपीएससी की परीक्षा में लगन और मेहनत से पढ़ाई कर पास हो जाता है और आईपीएस बन जाता है. इधर गांव में एक दिन खबर आती है कि एसपी नकछेदी आ रहा है. खबर आग के तरह पूरे इलाके में फैल जाती है. लेकिन इस बार बबुआन टोला में चन्द्रमा सिंह के यहाँ भी जश्न की तैयारी होती है. नाच का इंतजाम किया जाता है क्योंकि बबुआन टोला का रामप्रताप सिंह शहर में नकछेदी नहीं एसपी एनसी राम का मित्र बन गया है. विदेश से वकीली की पढ़ाई करने के बाद वह भी उसी शहर के कोर्ट में प्रैक्टिस करता है. नकछेदी गांव आता है लेकिन वह बबुआन टोला के ड्योढ़ी पर ही ठहर जाता है. इधर फगुनी राम बेटे का इंतजार अपने मड़ईया में ही करता है. काफी मान मनौवल के बाद एसपी एन सी राम अपने घर अपनी पत्नी फगुनी के साथ तो जाता है लेकिन ड्योढ़ी का मान सम्मान दलितटोली पर भारी पड़ जाता है. नकछेदी फिर बाबूसाहब के पास ही चला जाता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_Ganth-Play-Patna-650x488.jpg" alt="" class="wp-image-77204" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_Ganth-Play-Patna-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_Ganth-Play-Patna-350x263.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_Ganth-Play-Patna-768x576.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_Ganth-Play-Patna.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मेघा किताबों में पढ़ी बातों को गांव में आकर जमीनी हक़ीक़त से वाकिफ होती है, लेकिन वह भी कश्मकश में कुछ कहने की स्थिति में नहीं होती है. घटरा और टेटनराम के जिद की वजह से मेघा नकछेदी को खाने के लिए घटरा के घर ले जाती है. लेकिन नई थाली देखकर नकछेदी चौंक जाता है और पुछने पर जो जवाब घटरा देता है उससे वह सन्न रह जाता है. एसपी एनसी राम को अपने जाति की सच्चाई और बबुआन टोला की असली पालिटिक्स का पता चल जाता है.</p>



<p>समाज में व्याप्त जाति प्रथा के कुरीतियों को दर्शाता गाँठ में मंच पर मिथिलेश कुमार सिन्हा, शशांक कुमार, कौशिक कुमार, संजय राय, रणविजय सिंह,चंद्रावती कुमारी,कुणाल कुमार,विभूति भूषण, अभिषेक कुमार, ऋतु कुमारी, परितोष कुमार, मनीष कुमार, नागेंद्र कुमार, अभय कुमार, सुनीत पाण्डेय, अरविन्द कुमार,रजनीकान्त,राजा बाबू, निरंजन कुमार,सहजानंद और हरि कृष्ण सिंह मुन्ना सहित सभी कलाकारों के सशक्त अभिनय दर्शकों को काफी प्रभावित किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="488" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_Ganth-Play-Patna-01-488x650.jpg" alt="" class="wp-image-77205" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_Ganth-Play-Patna-01-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_Ganth-Play-Patna-01-263x350.jpg 263w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_Ganth-Play-Patna-01-768x1024.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_Ganth-Play-Patna-01.jpg 960w" sizes="(max-width: 488px) 100vw, 488px" /></figure>



<p>मंच परे- पार्श्व स्वर- स्वाति जायसवाल, मंच व्यवस्था- सुनील कुमार, मंच सज्जा- आदर्श वैभव, रूप सज्जा-अंजू कुमारी,मनोज मयंक, संगीत निर्देशन-राहुल राज,ध्वनि नियंत्रण- उपेन्द्र कुमार, राजेश कुमार, प्रकाश परिकल्पना- राजीव रॉय, प्रकाश संचालन- राज कुमार शर्मा,वस्त्र विन्यास-रीना कुमारी, प्रस्तुति सहयोग- रणविजय सिंह, शैलेन्द्र कुमार,रोज सिंह, प्रस्तुति प्रभारी- रोहित कुमार और मार्गदर्शन-गणेश प्रसाद सिन्हा,अखिलेश्वर प्रसाद सिन्हा,डा.किशोर सिन्हा,नीलेश्वर मिश्रा, कन्हैया प्रासाद ने किया.</p>
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		<title>आज से तीन दिवसीय रंग आयोजन पटना में</title>
		<link>https://www.patnanow.com/aaj-se-3-divasiy-natak-ka-aarambh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Feb 2023 02:39:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[रावण के मंचन के साथ 14वां डा.चतुर्भुज स्मृति अखिल भारतीय ऐतिहासिक नाट्य महोत्सव -2023 का होगा आगाज पटना,24 फरवरी (ओ पी पांडेय).बिहार की राजधानी पटना में आज से शुरू हो रहा है तीन दिवसीय रंग आयोजन जसमें पटना के रंग दर्शक तीन दिनों तक ऐतिहासिक रंग में नजर आएंगे. डा.चतुर्भुज की स्मृति में 24 से 26 फरवरी तक पटना के कालिदास रंगालय में आयोजित हो रहे 14वां अखिल भारतीय ऐतिहासिक नाट्य महोत्सव का शुभारंभ 24 फरवरी को &#8216;रावण&#8217; के नाट्य मंचन से होगा. कला जागरण और मगध कलाकार द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय आयोजन में हर दिन एक ऐतिहासिक नाटक का मंचन किया जाने वाला है. इस अवसर पर डा.चतुर्भुज स्मृति नाट्य पत्रकारिता सम्मान चर्चित पत्रकार प्रीति सिंह को को प्रदान किया जाएगा. कला जागरण के कलाकारों द्वारा सुसज्जित इस नाटक का निर्देशन जहां वरिष्ठ नाट्य निर्देशक सुमन कुमार ने किया है वही इस नाटक को लिखा है डा.चतुर्भुज ने. 25 फरवरी को नाटक कर्ण और 26 को आजादी नाटक की प्रस्तुति होगी. PNCB]]></description>
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<p><strong>रावण के मंचन के साथ 14वां डा.चतुर्भुज स्मृति अखिल भारतीय ऐतिहासिक नाट्य महोत्सव -2023 का होगा आगाज</strong></p>



<p>पटना,24 फरवरी (ओ पी पांडेय).बिहार की राजधानी पटना में आज से शुरू हो रहा है तीन दिवसीय रंग आयोजन जसमें पटना के रंग दर्शक तीन दिनों तक ऐतिहासिक रंग में नजर आएंगे. डा.चतुर्भुज की स्मृति में 24 से 26 फरवरी तक पटना के कालिदास रंगालय में आयोजित हो रहे 14वां अखिल भारतीय ऐतिहासिक नाट्य महोत्सव का शुभारंभ 24 फरवरी को &#8216;रावण&#8217; के नाट्य मंचन से होगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="267" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_kala-jagaran-2023.jpg" alt="" class="wp-image-71791" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_kala-jagaran-2023.jpg 267w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_kala-jagaran-2023-156x350.jpg 156w" sizes="(max-width: 267px) 100vw, 267px" /></figure>



<p>कला जागरण और मगध कलाकार द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय आयोजन में हर दिन एक ऐतिहासिक नाटक का मंचन किया जाने वाला है. इस अवसर पर डा.चतुर्भुज स्मृति नाट्य पत्रकारिता सम्मान चर्चित पत्रकार प्रीति सिंह को को प्रदान किया जाएगा. कला जागरण के कलाकारों द्वारा सुसज्जित इस नाटक का निर्देशन जहां वरिष्ठ नाट्य निर्देशक सुमन कुमार ने किया है वही इस नाटक को लिखा है डा.चतुर्भुज ने. 25 फरवरी को नाटक कर्ण और 26 को आजादी नाटक की प्रस्तुति होगी.</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>37 वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 में जुटे देश के कलाकार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/artists-of-the-country-gathered-in-37th-pataliputra-natya-mahotsav-2022-23/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Feb 2023 04:36:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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					<description><![CDATA[राजधानी के लोगों को देखने मिल रहे हैं अच्छे नाटक तीसरे दिन दो मंचीय नाटक ‘खोया हुआ आदमी’ और आरा के कलाकारों ने ‘गंगा स्नान’ नाटक की प्रस्तुति रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता है : सुमन कुमार प्रांगण द्वारा आयोजित 37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन दो मंचीय 2 नुक्कड़ प्रस्तुतियों के साथ-साथ सुमन कुमार जी एवं स्थानीय कलाकार और दर्शकों के बीच खुली बातचीत हुई. केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के उप सचिव और वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार ने कहा है कि रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता हैं. वे 37वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के दौरान कालिदास रंगालय में &#8221; नाटक पर चर्चा &#8221; सत्र के दौरान पटना शहर के रंगकर्मियों से मुखातिब थे उन्होंने कहा कि बिहार सहित हिंदी पट्टी में रंगकर्मियों के लिए संभावनाओं के अनेक द्वार खुल रहे हैं . इसका लाभ बिहार के रंगकर्मियों को मिलने लगा है . कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी उषा वर्मा डॉ ध्रुव कुमार, नीलेश्वर मिश्रा, अभय सिन्हा, आशीष कुमार मिश्र, अभिषेक कुमार, सोमा चक्रवर्ती और मनीष महिवाल उपस्थित थे . काइट एक्टर स्टूडियो (कर्मयोगी क्रियेटिव ग्रुप), मुंबई नाटककार : रिशीष दुबे, खोया हुआ आदमी,निर्देशक : साहेब नितीश आज के दौर में पूरी इंसानियत तकनीक, महत्वाकांक्षाओं और पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर झूठा और दिखावटी जीवन व्यतीत करते हुए खुद को खुशियों से कोसों दूर करता जा रहा है. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>राजधानी के लोगों को देखने मिल रहे हैं अच्छे नाटक </strong></p>



<p><strong>तीसरे दिन दो मंचीय नाटक ‘खोया हुआ आदमी’ और आरा के कलाकारों ने ‘गंगा स्नान’ नाटक की प्रस्तुति</strong></p>



<p><strong>रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता है : सुमन कुमार</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="409" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1678e76a-2fed-4005-8d34-13a1c3d7e387.jpg" alt="" class="wp-image-71273" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1678e76a-2fed-4005-8d34-13a1c3d7e387.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1678e76a-2fed-4005-8d34-13a1c3d7e387-350x220.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>प्रांगण द्वारा आयोजित 37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन दो मंचीय 2 नुक्कड़ प्रस्तुतियों के साथ-साथ सुमन कुमार जी एवं स्थानीय कलाकार और दर्शकों के बीच खुली बातचीत हुई. केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के उप सचिव और वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार ने कहा है कि रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता हैं. वे 37वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के दौरान कालिदास रंगालय में &#8221; नाटक पर चर्चा &#8221; सत्र के दौरान पटना शहर के रंगकर्मियों से मुखातिब थे उन्होंने कहा कि बिहार सहित हिंदी पट्टी में रंगकर्मियों के लिए संभावनाओं के अनेक द्वार खुल रहे हैं . इसका लाभ बिहार के रंगकर्मियों को मिलने लगा है . कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी उषा वर्मा डॉ ध्रुव कुमार, नीलेश्वर मिश्रा, अभय सिन्हा, आशीष कुमार मिश्र, अभिषेक कुमार, सोमा चक्रवर्ती और मनीष महिवाल उपस्थित थे .</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/c5c5bd97-1d16-4263-a9fc-e035b9a90366-edited.jpg" alt="" class="wp-image-71277" width="549" height="309" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/c5c5bd97-1d16-4263-a9fc-e035b9a90366-edited.jpg 400w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/c5c5bd97-1d16-4263-a9fc-e035b9a90366-edited-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 549px) 100vw, 549px" /></figure>



<p><strong>काइट एक्टर स्टूडियो (कर्मयोगी क्रियेटिव ग्रुप), मुंबई नाटककार : रिशीष दुबे, खोया हुआ आदमी,निर्देशक : साहेब नितीश</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="301" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/5f2c843a-e111-4f54-9d97-65345f369233.jpg" alt="" class="wp-image-71271" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/5f2c843a-e111-4f54-9d97-65345f369233.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/5f2c843a-e111-4f54-9d97-65345f369233-350x162.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आज के दौर में पूरी इंसानियत तकनीक, महत्वाकांक्षाओं और पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर झूठा और दिखावटी जीवन व्यतीत करते हुए खुद को खुशियों से कोसों दूर करता जा रहा है. समस्त मानवता से झूठी और खोखली अपेक्षाओं के चलते जीवन के वास्तविक उद्देश्य को ही भुला बैठा है,सफलता के पीछे भागते हुए व्यक्तिगत भावनाओं, रिश्तो और अहसासों को भुला बैठा है. सफलता के पीछे रात-दिन भागने की इसी कोशिश में सही-गलत की भी परवाह नहीं जिसके कारण अंततः गलत दिशा और संगत में फंसकर अपने अस्तित्व को ही खो देता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="301" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1.jpg" alt="" class="wp-image-71278" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1-350x162.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> खोया हुआ आदमी&#8221; इसी मनोदशा मे जी रहे और मेट्रो शहर में रह रहे एक दंपति की कहानी है जिसके पास एक दूसरे के लिए न भावनाएं है न संवेदनाएँ. छोटी बातों को भी बड़ा समझने की मानिसकता और बेवजह की चिंता में डूबे रहने का अंततः परिणाम होता क्या है. यही इस नाटक का मूल उत्स है.</p>



<p>मंच पर-अमर रंधावा : साहेब नितीश, सीमा रंधावा : अंकिता दुबे, कुलजीत रंधावा / चोर : अनिल शर्मा ,डॉक्टर सिंह/चोर : चिरंजीवी जोशी</p>



<p>नेपथ्य-संगीत संचालन : शुभम जोशी, प्रकाश संचालन : अर्जुन ठाकुर,संयोजन : समर मेहदी.</p>



<p><strong>दुसरी प्रस्तुति मनोज कुमार सिंह निर्देशित और भिखारी ठाकुर लिखित गंगा स्नान की हुई</strong></p>



<p><strong> &#8220;गंगा पूजनीय तो वृद्ध भी पूजनीय बनें, उन्हें वृद्धाश्रम मत पहुँचाओ.</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/0b8df79d-cde4-45e6-8cca-42c7a4a8ef2f.jpg" alt="" class="wp-image-71298" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/0b8df79d-cde4-45e6-8cca-42c7a4a8ef2f.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/0b8df79d-cde4-45e6-8cca-42c7a4a8ef2f-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>नाटक में मलछु की शादी को सात साल हो गए है पर वह अबतक निःसंतान है. वह गाँव के लोगों के साथ सपरिवार गंगा स्नान के लिए जाना चाहता है. उसके साथ बूढ़ी माँ भी जाना चाहती है, जिसके लिए मलेछु की पत्नी तैयार नहीं है. वह इस पर तैयार होती है कि माँ उसकी भी गठरी ढोएगी. भीड-भाड़ और मेला के कारण माँ से गठरी गिर जाती है. उसमें रखा कपड़ा और सामान खराब हो जाता है. गुस्से में पति-पत्नी मिलकर माँ  को मारपीट कर भगा देते हैं. मेला में उसे ठग मिलता है ठग  साधु के भेष में है. ठग उसका सारा सामान, गहना आदि छीन लेता है. उसे पछतावा होता है. वह माँ को मेला में खोज कर निकालता है और गंगा स्नान कराकर घर लौट आता है. इस नाटक में गंगा और उसके घाटों के आसपास की संस्कृति तो है ही, साथ ही आज के समय की सबसे बड़ी समस्या &#8216;वृद्धजनों की उपेक्षा&#8217; को मार्मिक ढंग से उकेरा गया है. नाटक कहती है, &#8220;गंगा पूजनीय तो वृद्ध भी पूजनीय बनें, उन्हें वृद्धाश्रम मत पहुँचाओ.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/7161ebcb-6a85-4f9e-895f-1dbc17a43aee.jpg" alt="" class="wp-image-71299" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/7161ebcb-6a85-4f9e-895f-1dbc17a43aee.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/7161ebcb-6a85-4f9e-895f-1dbc17a43aee-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मंच पर-मलेछु : पंकज भट्ट, मलेछु बहू : रागिनी कश्यप ने अपने अभिनय की अमिट छाप छोडी.वहीँ अटपट : नीतीश पाण्डेय, माई : आशा पाण्डेय अटपट बहू : ऋतु पाण्डेय, ठग साधु : लवकुश सिंह, कोरस 1 साहेब लाल यादव कोरस-2 &#8211; मुकेश कुमार, कोरस-3 लड्डू भोपाली कोरस-4 रोहन पाठक, कोरस-5: राजा कोर्स, ओमजी पाठक, सखी-1 मीनाक्षी पाण्डेय, रात्री- 2 पम्मी कुमारी, गायन श्याम बाबू कुमार, संतोष तिवारी, हरिशंकर जी निराला, अंकिता, जागृति, ढोलक अभय ओझा भूमिकाओं में थे. तबला : सूरज कान्त पाण्डेय,संगीत: श्याम बाबू कुमार, रूपसज्जा व वस्त्र सज्जा : तिरुपति नाथ का था</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/d5b39a46-177b-49b1-b7c3-bb8de567b201.jpg" alt="" class="wp-image-71300" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/d5b39a46-177b-49b1-b7c3-bb8de567b201.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/d5b39a46-177b-49b1-b7c3-bb8de567b201-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/f5a5de6c-b98b-4b96-a6b6-fdbd44c18b16.jpg" alt="" class="wp-image-71301" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/f5a5de6c-b98b-4b96-a6b6-fdbd44c18b16.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/f5a5de6c-b98b-4b96-a6b6-fdbd44c18b16-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>नुक्कड़ नाटक </strong></p>



<p>नुक्कड़ नाटकों की श्रृंखला में क्रिएशन, पटना की प्रस्तुति कोमिता व जयंती लिखित और गौतम गुलाल निर्देशित ये दौड़ है किसकी की प्रस्तुति की गई.यह नाटक आज के युवाओं की भागदौड़ की जिंदगी, शिक्षा, रोजगार, महंगाई से जूझती जनता की परिस्थितियों को दर्शाता निजीकरण पर सवाल खड़ा करता है साथ ही मेहनतकश मजदूरों की समस्या को यह नाटक उजागर करता है.</p>



<p>पात्र परिचयहर्ष विजेता, दीपक सोनी, नैतिक केशरी, सोमेन मुखर्जी, रोहित कुमार, शिवम कुमार, जानवी सोनी, ऋषिकेश, सौरभ, अशरफ अली एवं राजन .</p>



<p>वहीँ नाद, पटना ने परिकल्पना एवं निर्देशन- मो. जानी व लेखक-:- विवेक कुमार की जनतागिरी नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति हुई. भौतिकवाद दौड़ में अपनी महत्वाकांक्षी इच्छाओं और पारिवारिक स्थिति को अपने में पूरा करने में, उसे यहाँ तक भी पता नही कि मनुष्य योनि में जन्म सभी प्राणी से श्रेष्ठ विवेकी क्यों माना गया है. कैसे अपने ही कुकर्मों द्वारा इस स्वर्ग सी सुंदर एवं सर्वव्यापी अद्भुत सृष्टि को विनाश की और ढकेलता जा रहा है. ऐसे ही इन्ही कुछ अनेक चरण बिन्दुओं को चिंहित करते हुए वास्तविक चेहरे को समाज में पर्दाफाश करता है. इस नाटक में धर्मराज द्वारा एक मनुष्य योनि को धरती लोक पर भेजा जाता है जिसका नाम है, आम आदमी, उसको जन्म सिर्फ इसलिए ही दी जाती है की वो इस पर हो रहे भ्रष्टाचार को देखे, महसूस कर सके, और समाज के प्रत्येक जनता को इन वास्तविक परिस्थितयों से भली भाँति अवगत कराए. एक ओर से ये नाटक जितना मनोरंजक एवं आकर्षक है तो दूसरी ओर से उतना ही समाज में व्यंगात्मक कटाक्ष</p>



<p>पात्र-परिचय-धर्मराज-रवि कश्यप, चित्रगुप्त-मो0 आसिफ, आम आदमी- नंद किशोर कुमार, व्यक्ति-अविनाश मिश्रा, प्रेमी-उज्जवल कुमार गुप्ता, प्रेमिका-आरती सिंह राजपूत, बाप-नितीश कुमार, रिपोर्टर- पूजा राज ढोलक मो0 इमरान, गायक एवं खंजरी-राजीव रॉय.</p>
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