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		<title>सुरों में नए साल ने ली अंगड़ाई, 100 पौधों को पाकर प्रकृति भी मुस्कुराई</title>
		<link>https://www.patnanow.com/suron-ne-li-naye-saal-mein-angdayi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Jan 2025 09:22:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मो. रफ़ी की 100वीं वर्षगाँठ 2025 में मनाई आरा, 15 जनवरी. कला एक ऐसी साधना है जिसके जादू से निकलते प्राण भी रुक जाते हैं. उसमें भी जब संगीत की बात हो तो उसका अलग ही जादू होता है. संगीत के ऐसे ही जादू को एक शदी तक कायम रखने वाले गायक मो. रफी की 100वीं वर्षगाँठ भोजपुर मुख्यालय आरा में पिछले दिनों &#8216;प्रेम का सुसाज&#8217; संस्था ने मनाई जहाँ सुरों की अठखेलियाँ घँटों समा बांधते रही और उन सुरों में 2025 अपने आगमन के साथ अंगड़ाई लेते रहा. इतना ही नही सुरों के सम्राट मो. रफी के चाहने वालों ने इस मौके पर 100 पौधे भी लगाए जिसे पाकर प्रकृति ने भी मुस्कान बिखेरी. हरदिल अजीज गायक मो. रफी के जन्म शताब्दी समारोह नागरी प्रचारिणी सभागार में मानाई गई जिसमें आरा, बक्सर और डाल्टेनगंज (झारखंड) के कलाकारों ने मो.रफी और उनके साथ गाए गायक-गायिकाओं के 100 गानों को प्रस्तुत किया. साथ ही मो.रफी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित सवालों के जवाब देने वालों को पुरस्कृत किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन गायक धर्मेन्द्र कुमार, शिक्षक रमेश कुमार, गायक मो. रफी, राजकुमार, गायिका सुनीता पांडेय और संगीत प्रेमी इकबाल इल्मी ने दीप जलाकर और मो.रफी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर किया. उद्घाटन सत्र के बाद धर्मेन्द्र कुमार और रजनी शाक्या ने सौ साल पहले के गीत मुझे तुमसे प्यार था…गीत को गाकर कार्यक्रम का शानदार आगाज किया. राजाराम शर्मा ने नाचे मन मोरा मगन…, डा.अमित जयसवाल ने तू कहां ये बता ये बता इस नशीली रात में…, मो.नौशाद ने एक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मो. रफ़ी की 100वीं वर्षगाँठ 2025 में मनाई</strong></p>





<p>आरा, 15 जनवरी. कला एक ऐसी साधना है जिसके जादू से निकलते प्राण भी रुक जाते हैं. उसमें भी जब संगीत की बात हो तो उसका अलग ही जादू होता है. संगीत के ऐसे ही जादू को एक शदी तक कायम रखने वाले गायक मो. रफी की 100वीं वर्षगाँठ भोजपुर मुख्यालय आरा में पिछले दिनों &#8216;प्रेम का सुसाज&#8217; संस्था ने मनाई जहाँ सुरों की अठखेलियाँ घँटों समा बांधते रही और उन सुरों में 2025 अपने आगमन के साथ अंगड़ाई लेते रहा. इतना ही नही सुरों के सम्राट मो. रफी के चाहने वालों ने इस मौके पर 100 पौधे भी लगाए जिसे पाकर प्रकृति ने भी मुस्कान बिखेरी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="462" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130447-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88706" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130447-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130447-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130447-1536x693.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130447-2048x924.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>हरदिल अजीज गायक मो. रफी के जन्म शताब्दी समारोह नागरी प्रचारिणी सभागार में मानाई गई जिसमें आरा, बक्सर और डाल्टेनगंज (झारखंड) के कलाकारों ने मो.रफी और उनके साथ गाए गायक-गायिकाओं के 100 गानों को प्रस्तुत किया. साथ ही मो.रफी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित सवालों के जवाब देने वालों को पुरस्कृत किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन गायक धर्मेन्द्र कुमार, शिक्षक रमेश कुमार, गायक मो. रफी, राजकुमार, गायिका सुनीता पांडेय और संगीत प्रेमी इकबाल इल्मी ने दीप जलाकर और मो.रफी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="674" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130432-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88705" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130432-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130432-650x428.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उद्घाटन सत्र के बाद धर्मेन्द्र कुमार और रजनी शाक्या ने सौ साल पहले के गीत मुझे तुमसे प्यार था…गीत को गाकर कार्यक्रम का शानदार आगाज किया. राजाराम शर्मा ने नाचे मन मोरा मगन…, डा.अमित जयसवाल ने तू कहां ये बता ये बता इस नशीली रात में…, मो.नौशाद ने एक न एक दिन कहानी…., सबीना अंसारी ने ऐ फूलों की रानी बहारों की मलिका…., कुमार अनुपम ने ये चांद सा रोशन चेहरा…., मो.रफी ने खुदा भी आस‌मां से जब जमीं…, अलका शरण ने न झटको जुल्फ से पानी…, अंबे शरण ने बाबुल की दु‌आएं लेती जा…, सृष्टि ने मधुबन में राधिका नाचे रे…गीत को प्रस्तुत किया. वहीं राजकुमार व आरती मौर्या ने छुप गए सारे नजारे ओय क्या बात….रमेश कुमार व सृष्टि ने झिलमिल सितारों का आंगन होगा…, धर्मेन्द्र कुमार व संजना सिह ने बेखुदी में सनम उठ गए…, शमशाद &#8216;प्रेम&#8217; व सरगम ने साथियां नहीं जाना कि दिल न लगे…, नवीन कुमार व सुनीता पांडेय ये परदा हटा दो ये मुखड़ा दिखा दो…, रमेश कुमार व मो. नौशाद ने सात अजूबे इस दुनिया मे… गानों को बखूबी प्रस्तुत किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="452" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130440-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88707" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130440-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130440-650x287.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130440-1536x678.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक शमशाद प्रेम ने कहा कि मो. रफी साहब एक अच्छे फनकार ही नहीं बल्कि एक अच्छे इंसान भी थे. फिल्म संगीत में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. निधन के वर्षों बाद भी आज विश्व में उनके चाहने वालों की एक अच्छी तादाद है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130446-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88708" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130446-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130446-650x365.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130446-1536x864.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>मंच संचालन रेड क्रॉस की सचिव डा.विभा कुमारी और कार्यक्रम के संयोजक शमशाद &#8216;प्रेम&#8217; ने किया. कार्यक्रम के अंत में इस आयोजन से जुड़े शिक्षक सह गायक मो.मनव्वर अंसारी के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई.</p>



<p><strong>देश के विभिन्न शहरों से मिले शुभकामना संदेश</strong></p>



<p>कार्यक्रम के दौरान चर्चित संगीतकार दिलीप सेन (मुम्बई),<br>एंकर, अभिनेता, कवि व व्लॉगर जावेद नसीम (हैदराबाद), अपने घरों में मो.रफी साहब का मंदिर व म्यूजियम बनाने वाले उमेश मखीजा (गुजरात), रफी अरुण गौतम (दिल्ली), संजीव दीक्षित (लखनऊ), अभिनेता घनश्याम उपाध्याय (मुम्बई) और दूरदर्शन केंद्र, भुवनेश्वर के हिंदी अधिकारी (प्रभारी) सह पुस्तकालय एवं सूचना सहायक राजेश तिवारी के शुभकामना संदेश को प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाया गया. वही आरा शहर के चंदवा में 2 जनवरी 2022 को आयोजित फिल्म संगीत के कार्यक्रम में शाहिद रफी के कार्यक्रम के प्रमुख हिस्से को भी प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाया गया.</p>



<p><strong>सम्मानित किये गए कलाकार</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130449-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88710" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130449-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130449-650x365.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130449-1536x864.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130448-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88709" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130448-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130448-650x365.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001130448-1536x864.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम में शामिल कलाकारों को सम्मान पत्र, अंग-वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. मो.रफी स्मृति सम्मान से गायिका सुनीता पांडेय और गायक धर्मेन्द्र कुमार को सम्मानित किया. साथ ही अन्य कलाकारों को भी सम्मानित किया गया.</p>



<p><strong>लगाए गए 100 पौधे</strong><br>मो.रफी जन्म शताब्दी को यादगार बनाने के लिए शहर के विभिन्न हिस्से में 100 पौधे लगाए गए. इस कार्य में विश्व पर्यावरण बचाओ संस्थान का सराहनीय सहयोग रहा. साथ ही रफी साहब की याद में कुरानखानी भी कराई गई.</p>
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		<title>के. एल. सहगल सचमुच संगीत के थे कुंदन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/k-l-sehgal-was-really-the-kundan-of-music/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Jan 2023 04:29:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[k l sahgal]]></category>
		<category><![CDATA[singer]]></category>
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					<description><![CDATA[पुण्यतिथि विशेष 185 गीत गाए, जिनमें 142 फ़िल्मी और 43 गैर-फ़िल्मी गीत शामिल कुन्दन लाल सहगल अथवा के. एल. सहगल हिन्दी फ़िल्मों में वैसे तो एक बेमिसाल गायक के रूप में विख्यात हैं लेकिन देवदास (1936) जैसी चंद फ़िल्मों में अभिनय के कारण उनके प्रशंसक उन्हें एक उम्दा अभिनेता भी करार देते हैं. कुन्दन लाल सहगल हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जा सकते हैं. 1930 और 40 के दशक की संगीतमयी फ़िल्मों की ओर दर्शक उनके भावप्रवण अभिनय और दिलकश गायकी के कारण खिंचे चले आते थे. कुंदन लाल सहगल अपने चहेतों के बीच के. एल. सहगल के नाम से मशहूर थे. उनका जन्म 11 अप्रैल 1904 को जम्मू के नवाशहर में हुआ था. उनके पिता अमरचंद सहगल जम्मू शहर में न्यायालय के तहसीलदार थे. बचपन से ही सहगल का रुझान गीत-संगीत की ओर था. उनकी माँ केसरीबाई कौर धार्मिक क्रिया-कलापों के साथ-साथ संगीत में भी काफ़ी रुचि रखती थीं.सहगल ने किसी उस्ताद से संगीत की शिक्षा नहीं ली थी, लेकिन सबसे पहले उन्होंने संगीत के गुर एक सूफ़ी संत सलमान युसूफ से सीखे थे. सहगल की प्रारंभिक शिक्षा बहुत ही साधारण तरीके से हुई थी. वर्ष 1930 में कोलकाता के न्यू थियेटर के बी. एन. सरकार ने उन्हें 200 रुपए मासिक पर अपने यहां काम करने का मौक़ा दिया. यहां उनकी मुलाकात संगीतकार आर.सी.बोराल से हुई, जो सहगल की प्रतिभा से काफ़ी प्रभावित हुए. शुरुआती दौर में बतौर अभिनेता वर्ष 1932 में प्रदर्शित एक उर्दू फ़िल्म ‘मोहब्बत के आंसू’ में उन्हें काम करने का मौक़ा मिला. वर्ष 1932 [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<h4 class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color wp-block-heading"><strong>पुण्यतिथि विशेष</strong></h4>



<p><strong>185 गीत गाए, जिनमें 142 फ़िल्मी और 43 गैर-फ़िल्मी गीत शामिल </strong></p>



<p>कुन्दन लाल सहगल अथवा के. एल. सहगल हिन्दी फ़िल्मों में वैसे तो एक बेमिसाल गायक के रूप में विख्यात हैं लेकिन देवदास (1936) जैसी चंद फ़िल्मों में अभिनय के कारण उनके प्रशंसक उन्हें एक उम्दा अभिनेता भी करार देते हैं. कुन्दन लाल सहगल हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जा सकते हैं. 1930 और 40 के दशक की संगीतमयी फ़िल्मों की ओर दर्शक उनके भावप्रवण अभिनय और दिलकश गायकी के कारण खिंचे चले आते थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="640" height="480" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/K-L-Saigal.jpg" alt="" class="wp-image-70867" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/K-L-Saigal.jpg 640w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/K-L-Saigal-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></figure>



<p><br>कुंदन लाल सहगल अपने चहेतों के बीच के. एल. सहगल के नाम से मशहूर थे. उनका जन्म 11 अप्रैल 1904 को जम्मू के नवाशहर में हुआ था. उनके पिता अमरचंद सहगल जम्मू शहर में न्यायालय के तहसीलदार थे. बचपन से ही सहगल का रुझान गीत-संगीत की ओर था. उनकी माँ केसरीबाई कौर धार्मिक क्रिया-कलापों के साथ-साथ संगीत में भी काफ़ी रुचि रखती थीं.सहगल ने किसी उस्ताद से संगीत की शिक्षा नहीं ली थी, लेकिन सबसे पहले उन्होंने संगीत के गुर एक सूफ़ी संत सलमान युसूफ से सीखे थे. सहगल की प्रारंभिक शिक्षा बहुत ही साधारण तरीके से हुई थी. वर्ष 1930 में कोलकाता के न्यू थियेटर के बी. एन. सरकार ने उन्हें 200 रुपए मासिक पर अपने यहां काम करने का मौक़ा दिया. यहां उनकी मुलाकात संगीतकार आर.सी.बोराल से हुई, जो सहगल की प्रतिभा से काफ़ी प्रभावित हुए. शुरुआती दौर में बतौर अभिनेता वर्ष 1932 में प्रदर्शित एक उर्दू फ़िल्म ‘मोहब्बत के आंसू’ में उन्हें काम करने का मौक़ा मिला. वर्ष 1932 में ही बतौर कलाकार उनकी दो और फ़िल्में ‘सुबह का सितारा’ और ‘जिंदा लाश’ भी प्रदर्शित हुई, लेकिन इन फ़िल्मों से उन्हें कोई ख़ास पहचान नहीं मिली.</p>



<p><br>वर्ष 1933 में प्रदर्शित फ़िल्म ‘पुराण भगत’ की कामयाबी के बाद बतौर गायक सहगल कुछ हद तक फ़िल्म उद्योग में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए. वर्ष 1933 में ही प्रदर्शित फ़िल्म ‘यहूदी की लड़की’, ‘चंडीदास’ और ‘रूपलेखा’ जैसी फ़िल्मों की कामयाबी से उन्होंने दर्शकों का ध्यान अपनी गायकी और अदाकारी की ओर आकर्षित किया.वर्ष 1935 में शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास पर आधारित पी.सी.बरूआ निर्देशित फ़िल्म ‘देवदास’ की कामयाबी के बाद बतौर गायक-अभिनेता सहगल शोहरत की बुलंदियों पर जा पहुंचे. कई बंगाली फ़िल्मों के साथ-साथ न्यू थियेटर के लिए उन्होंने 1937 में ‘प्रेंसिडेंट’, 1938 में ‘साथी’ और ‘स्ट्रीट सिंगर’ तथा वर्ष 1940 में ‘ज़िंदगी’ जैसी कामयाब फ़िल्मों को अपनी गायिकी और अदाकारी से सजाया. वर्ष 1941 में सहगल मुंबई के रणजीत स्टूडियो से जुड़ गए. वर्ष 1942 में प्रदर्शित उनकी ‘सूरदास’ और 1943 में ‘तानसेन’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता का नया इतिहास रचा. वर्ष 1944 में उन्होंने न्यू थियेटर की ही निर्मित फ़िल्म ‘मेरी बहन’ में भी काम किया.</p>



<p><br>अपने दो दशक के सिने करियर में सहगल ने 36 फ़िल्मों में अभिनय भी किया. हिंदी फ़िल्मों के अलावा उन्होंने उर्दू, बंगाली और तमिल फ़िल्मों में भी अभिनय किया. सहगल ने अपने संपूर्ण सिने करियर के दौरान लगभग 185 गीत गाए, जिनमें 142 फ़िल्मी और 43 गैर-फ़िल्मी गीत शामिल हैं. अपनी दिलकश आवाज़ से सिने प्रेमियों के दिल पर राज करने वाले के.एल.सहगल 18 जनवरी, 1947 को केवल 43 वर्ष की उम्र में इस संसार को अलविदा कह गए.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/Untitled.png" alt="" class="wp-image-70869" width="635" height="476" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/Untitled.png 540w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/Untitled-350x263.png 350w" sizes="(max-width: 635px) 100vw, 635px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="365" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/k-l-sahgal-1.png" alt="" class="wp-image-70868" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/k-l-sahgal-1.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/k-l-sahgal-1-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><br>सहगल की आवाज़ की लोकप्रियता का यह आलम था कि कभी भारत में सर्वाधिक लोकप्रिय रहा रेडियो सीलोन कई साल तक हर सुबह सात बज कर 57 मिनट पर इस गायक का गीत बजाता था. सहगल की आवाज़ लोगों की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन गई थी. सहगल रवीन्द्र संगीत गाने का सम्मान पाने वाले पहले गैर बांग्ला गायक और भारतीय सिनेमा के पहले सुपर स्टार थे. यह वह समय था जब भारतीय फ़िल्म उद्योग मुंबई में नहीं बल्कि कलकत्ता में केंद्रित था. उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस जमाने में उनकी शैली में गाना अपने आपमें सफलता की कुंजी मानी जाती थी. मुकेश और किशोर कुमार ने अपने कैरियर के आरंभ में सहगल की शैली में गायन किया भी था. कुंदन के बारे में कहा जाता है कि पीढ़ी दर पीढी इस्तेमाल करने के बाद भी उसकी आभा कम नहीं पड़ती . सहगल सचमुच संगीत के कुंदन थे.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>गायक भूपिंदर सिंह को देशवासियों ने दी नम आंखों से आखिरी विदाई</title>
		<link>https://www.patnanow.com/countrymen-gave-last-farewell-to-singer-bhupinder-singh-with-moist-eyes/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Jul 2022 02:30:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[  पंचतत्व में विलीन हुआ पार्थिव शरीर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी जताया दुःख मशहूर गायक भूपिंदर सिंह का सोमवार को 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वह पिछले कुछ समय से बीमार थे. उन्होंने मुंबई के क्रिटिकेयर एशिया अस्पताल में 18 जुलाई की शाम को 7:45 बजे अंतिम सांस ली. भूपिंदर के गुजर जाने से एक ओर जहां सितारों से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें याद किया तो दूसरी ओर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी. भूपिंदर, कोरोना संक्रमित भी थे, ऐसे में देर रात भूपिंदर सिंह का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए मुंबई के श्मशान घाट लाया गया और दिग्गज गायक पंचतत्व में विलीन हो गए. रात पौने दो पहुंचे श्मशान पहुंचा शव न्यूज एजेंसी एएनआई के ट्वीट के मुताबिक रात करीब पौने दो बजे गायक भूपिंदर सिंह का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए मुंबई के श्मशान घाट लाया गया. एएनआई ने ट्वीट में श्मशान घाट से कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं, जिसमें रोते बिलखते उनके परिजन भी नजर आ रहे हैं. अमर उजाला ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इसके बाद भूपिंदर का अंतिम संस्कार कर दिया गया. जानकारी के मुताबिक भूपिंदर सिंह का अंतिम संस्कार उनके बेटे निहाल सिंह ने रात में ही किया, क्योंकि वो कोविड संक्रमित थे. वहीं कोरोना की वजह से भूपिंदर का इलेक्ट्रिक क्रिमेशन किया गया.  नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक म्यूजिक डायरेक्टर उत्तम सिंह ने बताया था कि कोविड संक्रमित होने की वजह से भूपिंदर सिंह का अंतिम संस्कार ओशिवरा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पंचतत्व में विलीन हुआ पार्थिव शरीर</strong></p>



<p><strong>पीएम नरेंद्र मोदी ने भी जताया दुःख</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="385" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/1-650x385.png" alt="" class="wp-image-64604" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/1-650x385.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/1-350x208.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/1.png 700w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मशहूर गायक भूपिंदर सिंह का सोमवार को 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वह पिछले कुछ समय से बीमार थे. उन्होंने मुंबई के क्रिटिकेयर एशिया अस्पताल में 18 जुलाई की शाम को 7:45 बजे अंतिम सांस ली. भूपिंदर के गुजर जाने से एक ओर जहां सितारों से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें याद किया तो दूसरी ओर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी. भूपिंदर, कोरोना संक्रमित भी थे, ऐसे में देर रात भूपिंदर सिंह का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए मुंबई के श्मशान घाट लाया गया और दिग्गज गायक पंचतत्व में विलीन हो गए.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="597" height="308" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/bhupendar-singh-600x350-2.jpg" alt="" class="wp-image-64607" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/bhupendar-singh-600x350-2.jpg 597w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/bhupendar-singh-600x350-2-350x181.jpg 350w" sizes="(max-width: 597px) 100vw, 597px" /></figure>



<p><strong>रात पौने दो पहुंचे श्मशान पहुंचा शव</strong></p>



<p>न्यूज एजेंसी एएनआई के ट्वीट के मुताबिक रात करीब पौने दो बजे गायक भूपिंदर सिंह का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए मुंबई के श्मशान घाट लाया गया. एएनआई ने ट्वीट में श्मशान घाट से कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं, जिसमें रोते बिलखते उनके परिजन भी नजर आ रहे हैं. अमर उजाला ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इसके बाद भूपिंदर का अंतिम संस्कार कर दिया गया. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/bhupendra-singh.png" alt="" class="wp-image-64606" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/bhupendra-singh.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/bhupendra-singh-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जानकारी के मुताबिक भूपिंदर सिंह का अंतिम संस्कार उनके बेटे निहाल सिंह ने रात में ही किया, क्योंकि वो कोविड संक्रमित थे. वहीं कोरोना की वजह से भूपिंदर का इलेक्ट्रिक क्रिमेशन किया गया.  नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक म्यूजिक डायरेक्टर उत्तम सिंह ने बताया था कि कोविड संक्रमित होने की वजह से भूपिंदर सिंह का अंतिम संस्कार ओशिवरा इलेक्ट्रिक क्रिमेशन में किया गया.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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