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	<title>Shubh Muhurat &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>Shubh Muhurat &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<item>
		<title>मिथिला के विभिन्न पंचांगकारों ने तय किए साल भर के मुहूर्त</title>
		<link>https://www.patnanow.com/mithila-panchang-muhurta/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 May 2024 18:26:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[अखिल भारतीय मैथिल महासभा की विषद बैठक, धार्मिक कार्यों की तिथि में एकरूपता को ले पंडितों ने किया विमर्श विवाद से बचने के लिए हर वर्ष ऐसी बैठक करने पर बनी सहमति सौराठ सभा 28 मई से 6 जून के बीच होगी आयोजित उपनयन के 13 दिन, विवाह के 52 दिन और मुंडन के लिए 23 दिन निर्धारित संजय मिश्र, दरभंगा के लहेरियासराय के बलभद्रपुर स्थित अखिल भारतीय मैथिल महासभा भवन में शुक्रवार को पंडितों ने घोर मंथन किया. इसमें वर्ष 2024 &#8211; 25 में होनेवाले पर्व त्योहार और लग्न सहित अन्य शुभ कार्यों में एकरूपता रखने का निर्णय लिया गया. इस पंडित सभा की अध्यक्षता संस्कृत यूनिवर्सिटी के कुलपति लक्ष्मी निवास पांडे ने की. मिथिला से प्रकाशित होने वाले विश्वविद्यालय पंचांग के पंचांगकार पंडित रामचंद्र झा, पंडित वरुण कुमार झा, पंडित राकेश कुमार झा, विद्यापति पंचांग के पंचांगकार पंडित देवकीनंदन झा, वैदेही पंचांग के पंचांगकार पंडित अजय मिश्र, महावीर पंचांगकार पंडित शिवेंद्र झा, मिथिला पंचांगकार पंडित मुक्ति कुमार झा ने बैठक में भाग लिया. पंडित महासभा की हुई बैठक में गहन विचार विमर्श के बाद सर्वसम्मति से सभी पंचांगकारों ने अपने &#8211; अपने पंचांग में विविध पर्व &#8211; त्यौहारों एवं लग्न मूहर्त में एकरूपता रखने का निर्णय लिया. पंचांगकारों के लिए गये निर्णय के मुताबिक इस वर्ष सौराठ सभा का आयोजन 28 मई से 6 जून तक होगा. इसके अलावा उपनयन के 13 दिन, विवाह के लिए 52 दिन, द्विरागमन के 24 दिन, मुंडन के 23 दिन, गृहारंभ के 20 दिन तथा गृह प्रवेश के 28 दिन निर्धारित हुए. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>अखिल भारतीय मैथिल महासभा की विषद बैठक, धार्मिक कार्यों की तिथि में एकरूपता को ले पंडितों ने किया विमर्श</strong></p>



<p><strong>विवाद से बचने के लिए हर वर्ष ऐसी बैठक करने पर बनी सहमति</strong></p>



<p><strong>सौराठ सभा 28 मई से 6 जून के बीच होगी आयोजित</strong></p>



<p><strong>उपनयन के 13 दिन, विवाह के 52 दिन और मुंडन के लिए 23 दिन निर्धारित</strong></p>



<p>संजय मिश्र, दरभंगा के लहेरियासराय के बलभद्रपुर स्थित अखिल भारतीय मैथिल महासभा भवन में शुक्रवार को पंडितों ने घोर मंथन किया. इसमें वर्ष 2024 &#8211; 25 में होनेवाले पर्व त्योहार और लग्न सहित अन्य शुभ कार्यों में एकरूपता रखने का निर्णय लिया गया. इस पंडित सभा की अध्यक्षता संस्कृत यूनिवर्सिटी के कुलपति लक्ष्मी निवास पांडे ने की. मिथिला से प्रकाशित होने वाले विश्वविद्यालय पंचांग के पंचांगकार पंडित रामचंद्र झा, पंडित वरुण कुमार झा, पंडित राकेश कुमार झा, विद्यापति पंचांग के पंचांगकार पंडित देवकीनंदन झा, वैदेही पंचांग के पंचांगकार पंडित अजय मिश्र, महावीर पंचांगकार पंडित शिवेंद्र झा, मिथिला पंचांगकार पंडित मुक्ति कुमार झा ने बैठक में भाग लिया. पंडित महासभा की हुई बैठक में गहन विचार विमर्श के बाद सर्वसम्मति से सभी पंचांगकारों ने अपने &#8211; अपने पंचांग में विविध पर्व &#8211; त्यौहारों एवं लग्न मूहर्त में एकरूपता रखने का निर्णय लिया. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="552" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-mithila-saurath-pandit-shubh-muhurat-meeting-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84029" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-mithila-saurath-pandit-shubh-muhurat-meeting-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-mithila-saurath-pandit-shubh-muhurat-meeting-650x350.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<h2 class="wp-block-heading">पंचांगकारों के लिए गये निर्णय के मुताबिक इस वर्ष सौराठ सभा का आयोजन 28 मई से 6 जून तक होगा. इसके अलावा उपनयन के 13 दिन, विवाह के लिए 52 दिन, द्विरागमन के 24 दिन, मुंडन के 23 दिन, गृहारंभ के 20 दिन तथा गृह प्रवेश के 28 दिन निर्धारित हुए. यह जानकारी देते हुए ज्योतिष शोध केंद्र के निदेशक सह सचिव पंडित विश्वनाथ झा शास्त्री ने कहा कि पंडित महासभा की बैठक में पंडित मदन कुमार झा, पंडित देव नारायण झा, पंडित शशिनाथ झा, पंडित कुणाल झा, पंडित सुरेश्वर झा, पंडित भगलू झा, विद्यानाथ झा, पंडित मिथिलेश कुमार चौधरी सहित मिथिला के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वान एवं कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्वानों ने भाग लिया.</h2>



<p>विवाह के लिए नवंबर 2024 में 18, 22, 25 और 27 तथा दिसंबर में 1, 2, 5, 6 और 11 का तिथि निर्धारित हुआ है. इसके अलावा 2025 के जनवरी माह में 16, 19, 20, 23, 24, 29, 30<br>फरवरी में 2, 3, 6, 7, 16, 19, 20, 21, 24, 26<br>मार्च में 2, 3, 6, 7<br>अप्रैल में 16, 18, 20, 21, 23, 25, 30<br>मई में 1, 7, 8, 9, 11, 18, 19, 22, 23, 25, 28</p>



<h4 class="wp-block-heading">जून में 1, 2, 4 और 6 तय हुआ.</h4>



<p>द्विरागमन की तिथि</p>



<p>माह नवंबर &#8211; 18, 20<br>दिसंबर &#8211; 5, 6, 8, 11, 12<br>फरवरी 2025 &#8211; 16, 17<br>मार्च &#8211; 2, 3, 5, 6, 7, 9, 10<br>अप्रैल &#8211; 18</p>



<h2 class="wp-block-heading">मई &#8211; 1, 4, 7, 8, 9, 11, 12</h2>



<p>मुंडन की तिथि</p>



<p>नवंबर 2024 &#8211; 18, 20<br>दिसंबर &#8211; 5, 6, 11<br>जनवरी 2025 &#8211; 31<br>फरवरी &#8211; 3, 7, 10, 17<br>मार्च &#8211; 6, 10<br>अप्रैल &#8211; 17, 30<br>मई &#8211; 8, 9, 28<br>जून &#8211; 5, 6, 26, 27</p>



<h2 class="wp-block-heading">जुलाई &#8211; 2, 4</h2>



<p>गृहारंभ की तिथि</p>



<p>जुलाई &#8211; 22, 24<br>अगस्त &#8211; 15<br>अक्टूबर &#8211; 21<br>नवंबर &#8211; 14, 18, 20<br>दिसंबर &#8211; 7, 11, 12<br>फरवरी 2025 &#8211; 8, 15<br>मार्च &#8211; 10<br>अप्रैल &#8211; 16<br>मई &#8211; 3, 8, 10</p>



<h2 class="wp-block-heading">जून &#8211; 5, 6, 7</h2>



<p>गृहप्रवेश की तिथि</p>



<p>अगस्त 2024 &#8211; 10, 14, 15<br>नवंबर &#8211; 7, 8, 11, 13, 14<br>दिसंबर &#8211; 7, 11, 12<br>फरवरी &#8211; 3, 6, 7, 8, 10<br>मार्च &#8211; 6, 8, 10<br>मई &#8211; 3, 7, 8, 9, 10<br>जून &#8211; 4, 5, 6, 7</p>



<p>ऐसी बैठक हर वर्ष करने पर जोर दिया गया.</p>
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		<title>दीपावली महापर्व पर श्री महालक्ष्मी पूजन के श्रेष्ठ मुहूर्त</title>
		<link>https://www.patnanow.com/deepawali-ke-shubh-muhurat/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nikhil]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Nov 2018 22:30:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[सुख समृद्धि]]></category>
		<category><![CDATA[Deepawali]]></category>
		<category><![CDATA[diwali]]></category>
		<category><![CDATA[Shubh Muhurat]]></category>
		<category><![CDATA[दीपावली]]></category>
		<category><![CDATA[श्री महालक्ष्मी पूजन के श्रेष्ठ मुहूर्त]]></category>
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					<description><![CDATA[7 नवंबर 2018 बुधवार श्री शुभ संवत 2075 कार्तिक कृष्ण अमावस्या बुधवार दिनांक 7 नवंबर 2018 को सायंकाल सूर्यास्त समय 5:42 से रात्रि में 8:17 तक शास्त्र सम्मत स्पष्ट प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है. धर्म सिंधु के अनुसार &#8212; प्रदोषे दीपदानं लक्ष्मीपूजनादि विहितम्. इस प्रदोष काल के समय में शाम 6:11 से 8:09 तक वृषभ स्थिर लग्न में श्री महालक्ष्मी पूजन का विशिष्ट महत्व है. अन्य स्थिर लग्न में वृश्चिक लग्न प्रातः 7:21 से 9:00 बज कर 36 मिनट तक तथा सिंह लग्न मध्य रात्रि में 12:00 बज कर 39 मिनट से 2:51 तक रहेगा. चौघड़िया के मान से प्रातः 6:39 से 8:02 तक लाभ प्रातः 8:03 से 9:25 तक अमृत दिन में 10:48 से 12:01 तक शुभ का चौघड़िया रात्रि में 7:19 से 8:56 तक शुभ तथा रात्रि 8:57 से 10:33 तक अमृत का चौघड़िया रहेगा. शास्त्र प्रमाणित होरा को भी पूजन व अन्य शुभ कार्यों में प्रशस्त माना गया है तदनुसार प्रातः काल 6:39 से 8:37 तक बुध चंद्र की होरा दिन में 9:39 से 10:38 तक गुरु की होरा दिन में 12:00 बजकर 39 मिनट से 3:38 तक शुक्र बुध चंद्र की होरा सायंकाल 4:39 से 5:38 तक गुरु की होरा एवं रात्रि में 7:39 से 10:38 तक शुक्र बुध चंद्र की होरा रहेगी. ऊपर लिखित किसी भी लग्न चौघड़िया होरा के मुहूर्त समय में अपनी कुल परंपरा अनुसार श्रद्धा भक्ति तथा प्रसन्न चित्त होकर सहपरिवार महालक्ष्मी पूजन करें मध्य रात्रि निशिथ काल का समय 11:46 से 12:38 तक है जिसमें महालक्ष्मी की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><figure id="attachment_36654" aria-describedby="caption-attachment-36654" style="width: 650px" class="wp-caption aligncenter"><img decoding="async" class="size-full wp-image-36654" src="https://www.patnanow.com/assets/2018/11/Untitled-1-copy.png" alt="" width="650" height="366" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2018/11/Untitled-1-copy.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2018/11/Untitled-1-copy-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption id="caption-attachment-36654" class="wp-caption-text">श्री महालक्ष्मी पूजन के श्रेष्ठ मुहूर्त</figcaption></figure></p>
<p>7 नवंबर 2018 बुधवार श्री शुभ संवत 2075 कार्तिक कृष्ण अमावस्या बुधवार दिनांक 7 नवंबर 2018 को सायंकाल सूर्यास्त समय 5:42 से रात्रि में 8:17 तक शास्त्र सम्मत स्पष्ट प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है.<br />
<span style="text-decoration: underline;"><strong>धर्म सिंधु के अनुसार</strong></span> &#8212;<br />
प्रदोषे दीपदानं लक्ष्मीपूजनादि विहितम्.<br />
इस प्रदोष काल के समय में शाम 6:11 से 8:09 तक वृषभ स्थिर लग्न में श्री महालक्ष्मी पूजन का विशिष्ट महत्व है.<br />
अन्य स्थिर लग्न में<strong> वृश्चिक लग्न</strong> प्रातः 7:21 से 9:00 बज कर 36 मिनट तक<br />
तथा <strong>सिंह लग्न</strong> मध्य रात्रि में 12:00 बज कर 39 मिनट से 2:51 तक रहेगा.<br />
<span style="text-decoration: underline;"><strong>चौघड़िया के मान से</strong> </span><br />
प्रातः 6:39 से 8:02 तक <strong>लाभ</strong><br />
प्रातः 8:03 से 9:25 तक <strong>अमृत</strong><br />
दिन में 10:48 से 12:01 तक<strong> शुभ</strong> का चौघड़िया<br />
रात्रि में 7:19 से 8:56 तक <strong>शुभ</strong><br />
तथा<br />
रात्रि 8:57 से 10:33 तक <strong>अमृत</strong> का चौघड़िया रहेगा.<br />
शास्त्र प्रमाणित होरा को भी पूजन व अन्य शुभ कार्यों में प्रशस्त माना गया है तदनुसार प्रातः काल 6:39 से 8:37 तक बुध चंद्र की होरा<br />
दिन में 9:39 से 10:38 तक गुरु की होरा दिन में 12:00 बजकर 39 मिनट से 3:38 तक शुक्र बुध चंद्र की होरा सायंकाल 4:39 से 5:38 तक गुरु की होरा एवं रात्रि में 7:39 से 10:38 तक शुक्र बुध चंद्र की होरा रहेगी.<br />
ऊपर लिखित किसी भी लग्न चौघड़िया होरा के मुहूर्त समय में अपनी कुल परंपरा अनुसार श्रद्धा भक्ति तथा प्रसन्न चित्त होकर सहपरिवार महालक्ष्मी पूजन करें मध्य रात्रि निशिथ काल का समय 11:46 से 12:38 तक है जिसमें महालक्ष्मी की उपासना जप हवन आदि के लिए श्रेयस्कर होगा.<br />
उपर्युक्त समय अवधि में से किसी भी मुहूर्त काल में अपनी सुविधा एवं कुल परंपरा अनुसार शास्त्रोंक्त पद्धति से श्रद्धा अनुसार यथा विधि श्री गणेश महाकाली (मूर्ति कलम स्याही) महालक्ष्मी (मूर्ति श्री यंत्र आदि) कुबेर इंद्र तथा महासरस्वती (मूर्ति पुस्तक बहीखाता आदि) का पूजन अर्चन जप व पाठ आदि श्रद्धा भक्ति पूर्वक संपन्न करें दीपावली के शुभ अवसर पर श्री महालक्ष्मी मूर्ति अथवा चित्र आदि का ही पूजन करें सोना चांदी की मुद्रा तथा रुपैया नोटों की पूजा शास्त्र के विरुद्ध है मुद्रा तो श्री महालक्ष्मी का प्रसाद अनुग्रह है.<br />
जैसा कि शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है &#8212;<br />
<em><strong>प्रायः दीपमाला वसरे लोका: रजत स्वर्ण मुद्रा रुप्यादी पूजयन्ति तत्र सम्यक शास्त्र विरुद्धत्वात अत्राभिष्टा वर्तते श्री लक्ष्मी पूजा सा च मूर्ति विधाय तदैव श्रेयस्करम्.</strong></em> ( कर्मठ गुरु)<br />
आजकल महालक्ष्मी महासरस्वती आदि की छाप वाले चांदी के सिक्के उपलब्ध है इनका भी पूजन किया जा सकता है.<br />
<span style="color: #800000;"><strong>विशेष &#8211;</strong></span><br />
<em>प्रदोष समय लक्ष्मी पूजनानि कृत्वा भोजनं कार्यम्।</em><br />
<em>अत्र दर्शे बाल वृद्धादिर्भिन्ने दिवा न भोक्तव्यम् रात्रौ भोक्तव्यम्।।</em> (धर्मसिंधु)<br />
बाल वृद्ध को छोड़कर अन्य आस्तिक जनों को लक्ष्मी पूजन के दिन में भोजन नहीं करना चाहिए लक्ष्मी पूजा होने के बाद रात्रि में भोजन करना चाहिए.</p>
<p>जय श्री महाकाल<br />
ज्योतिषाचार्य पंडित अजय दुबे, उज्जैन</p>
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