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	<title>shivani tondon &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>पुष्पा इम्पॉसिबल में ​​उर्वशी ढोलकिया की वापसी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/urvashi-dholakia-returns-in-pushpa-impossible/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 Sep 2023 02:00:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
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					<description><![CDATA[सोनी सब &#160;पर आ रहा है बेजोड़ मनोरंजन सोनी सब के पुष्पा इम्पॉसिबल में देवी सिंह शेखावत उर्फ ​​उर्वशी ढोलकिया की वापसी के साथ, संरक्षण की गहन लड़ाई के लिए मंच तैयार हो गया है.सोनी सब का पुष्पा इम्पॉसिबल एक सिंगल मां पुष्पा (करुणा पांडे) के असाधारण जीवन पर प्रकाश डालता है, जो दृढ़ संकल्प और सकारात्मकता के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करती है. हाल के एपिसोड में, शो में एक अप्रत्याशित मोड़ आता है जब आयुषी (गुंजन भाटिया) सामने आती है और खुलासा करती है कि वह गोलू (हंस असलोट) की बायोलॉजिकल मां है और उसकी कस्टडी पाने के लिए कानूनी कार्रवाई करना चाहती है. यह बात उजागर होने पर महेंद्र (अमीश तन्ना) इसका कड़ा विरोध करता है, जो काफी समय से गोलू का अभिभावक रहा है. आगामी एपिसोड्स में, उर्वशी ढोलकिया दमदार वकील देवी सिंह शेखावत के रूप में शानदार वापसी करती दिखाई देंगी, जो इस नए उद्देश्य से प्रेरित है. शुरुआत में संरक्षण के इस मामले को लेने से झिझकते हुए, देवी देखती है कि महेंद्र और पुष्पा कितनी परेशानी में हैं, और वह उनका मामला लेने केलिए सहमत हो जाती है. अपनी विशेषज्ञता के साथ, वह एक ऐसे परिवार में गोलू का भविष्य सुरक्षित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है, जहां उसे वह प्यार और देखभाल मिले जिसका वह हकदार है. देवी की वापसी आने वाले दिनों में संरक्षण की एक गहन लड़ाई का मार्ग प्रशस्त करती है.क्या देवी आयुषी के खिलाफ लड़ाई में पुष्पा और महेंद्र को जीत दिला सकती है? देवी सिंह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><em><strong>सोनी सब &nbsp;पर आ रहा है बेजोड़ मनोरंजन</strong></em></p>



<p>सोनी सब के पुष्पा इम्पॉसिबल में देवी सिंह शेखावत उर्फ ​​उर्वशी ढोलकिया की वापसी के साथ, संरक्षण की गहन लड़ाई के लिए मंच तैयार हो गया है.सोनी सब का पुष्पा इम्पॉसिबल एक सिंगल मां पुष्पा (करुणा पांडे) के असाधारण जीवन पर प्रकाश डालता है, जो दृढ़ संकल्प और सकारात्मकता के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करती है. हाल के एपिसोड में, शो में एक अप्रत्याशित मोड़ आता है जब आयुषी (गुंजन भाटिया) सामने आती है और खुलासा करती है कि वह गोलू (हंस असलोट) की बायोलॉजिकल मां है और उसकी कस्टडी पाने के लिए कानूनी कार्रवाई करना चाहती है. यह बात उजागर होने पर महेंद्र (अमीश तन्ना) इसका कड़ा विरोध करता है, जो काफी समय से गोलू का अभिभावक रहा है. आगामी एपिसोड्स में, उर्वशी ढोलकिया दमदार वकील देवी सिंह शेखावत के रूप में शानदार वापसी करती दिखाई देंगी, जो इस नए उद्देश्य से प्रेरित है. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="432" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/Urvashi-Dholakia_Pushpa-Impossible-1-2-650x432.jpg" alt="" class="wp-image-78526" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/Urvashi-Dholakia_Pushpa-Impossible-1-2-650x432.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/Urvashi-Dholakia_Pushpa-Impossible-1-2-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/Urvashi-Dholakia_Pushpa-Impossible-1-2-768x510.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/Urvashi-Dholakia_Pushpa-Impossible-1-2-1536x1020.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/Urvashi-Dholakia_Pushpa-Impossible-1-2.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>शुरुआत में संरक्षण के इस मामले को लेने से झिझकते हुए, देवी देखती है कि महेंद्र और पुष्पा कितनी परेशानी में हैं, और वह उनका मामला लेने केलिए सहमत हो जाती है. अपनी विशेषज्ञता के साथ, वह एक ऐसे परिवार में गोलू का भविष्य सुरक्षित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है, जहां उसे वह प्यार और देखभाल मिले जिसका वह हकदार है. देवी की वापसी आने वाले दिनों में संरक्षण की एक गहन लड़ाई का मार्ग प्रशस्त करती है.क्या देवी आयुषी के खिलाफ लड़ाई में पुष्पा और महेंद्र को जीत दिला सकती है? देवी सिंह का किरदार निभाने वाली उर्वशी ढोलकिया ने कहा, “पुष्पा इम्पॉसिबल एक प्रभावशाली शो है जो पारिवारिक संबंधों की ताकत को खूबसूरती से दर्शाता है, जहां मुश्किल भरे समय में व्यक्ति हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं. मैं शो में वापसी करके बेहद उत्साहित हूं क्योंकि दर्शकों ने मुझे इस भूमिका में वापस देखने की तीव्र इच्छा व्यक्त की है. ऐसे शो का हिस्सा बनना खुशी की बात है जो अपने दर्शकों को गहराई से प्रभावित करता है और समाज के भीतर समर्थन के महत्व पर जोर देता है.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>मैं हूँ ना !!                   &#8211; अतुल मलिकराम</title>
		<link>https://www.patnanow.com/i-am-here-atul-malikram/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 17 Sep 2023 04:30:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[सुख समृद्धि]]></category>
		<category><![CDATA[ATUL MALIKRAM]]></category>
		<category><![CDATA[shivani tondon]]></category>
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					<description><![CDATA[आप सिर्फ काम पर फोकस करें, बाकी टेंशन कंपनी पर छोड़ दीजिए एक कामकाजी आम नागरिक सबसे ज्यादा वक्त कहाँ बिताता है? घर, मार्केट या रिश्तेदारों में? शायद इनमें से कहीं नहीं… क्योंकि दिन में उसका सबसे अधिक समय उसके ऑफिस या काम की जगह पर ही जाता है. अब एक सामान्य कामकाजी इंसान के पास कितनी तरह की दिक्कतें या चिंताएँ होती हैं, इसका अंदाजा, इस लेख को पढ़ने वाले ज्यादातर लोग लगा सकते हैं. चिंताएँ भी विभिन्न प्रकार की होती हैं, जैसे परिवार की, परिजनों के भविष्य की, समय से पगार न मिलने की, अचानक छुट्टी की दरकार पूरी न होने की या सपनों की लम्बी कतार अधर में लटके होने की आदि. अब यदि एक व्यक्ति इन सभी चिंताओं के बीच कार्यस्थल पर काम करता है, तो क्या वह अपना सौ फीसदी दे पाने में सक्षम होता है? अधिकतर लोगों का जवाब न ही होगा. लेकिन यदि उसे कोई ऐसी कंपनी मिले, जहाँ ये सारी चिंताएँ, उसकी होकर भी उसकी न हो और सभी की जिम्मेदारी उसकी कंपनी ही उठाए.. तो! जी हाँ… सुनने में यह जितना खूबसूरत दिख रहा है, धरातल पर देखने में और भी खास नजर आ सकता है. यदि एक कंपनी का संस्थापक अपने कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों से जुड़ जाता है, तो वह उनके सुख-दुःख को समझता है और कई प्रकार से उन्हें सुलझाने की कोशिश करता है, जिससे उस कर्मचारी का बोझ काफी हद तक कम हो जाता है और वह ज्यादा लगन और प्रोडक्टिविटी के साथ काम कर पाता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<h3 class="wp-block-heading"><br><br><em>आप सिर्फ काम पर फोकस करें, बाकी टेंशन कंपनी पर छोड़ दीजिए</em></h3>



<p>एक कामकाजी आम नागरिक सबसे ज्यादा वक्त कहाँ बिताता है? घर, मार्केट या रिश्तेदारों में? शायद इनमें से कहीं नहीं… क्योंकि दिन में उसका सबसे अधिक समय उसके ऑफिस या काम की जगह पर ही जाता है. अब एक सामान्य कामकाजी इंसान के पास कितनी तरह की दिक्कतें या चिंताएँ होती हैं, इसका अंदाजा, इस लेख को पढ़ने वाले ज्यादातर लोग लगा सकते हैं. <strong>चिंताएँ भी विभिन्न प्रकार की होती हैं, जैसे परिवार की, परिजनों के भविष्य की, समय से पगार न मिलने की, अचानक छुट्टी की दरकार पूरी न होने की या सपनों की लम्बी कतार अधर में लटके होने की आदि. अब यदि एक व्यक्ति इन सभी चिंताओं के बीच कार्यस्थल पर काम करता है, तो क्या वह अपना सौ फीसदी दे पाने में सक्षम होता है? </strong>अधिकतर लोगों का जवाब न ही होगा. लेकिन यदि उसे कोई ऐसी कंपनी मिले, जहाँ ये सारी चिंताएँ, उसकी होकर भी उसकी न हो और सभी की जिम्मेदारी उसकी कंपनी ही उठाए.. तो!</p>



<p>जी हाँ… सुनने में यह जितना खूबसूरत दिख रहा है, धरातल पर देखने में और भी खास नजर आ सकता है. यदि <strong><em>एक कंपनी का संस्थापक अपने कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों से जुड़ जाता है, तो वह उनके सुख-दुःख को समझता है और कई प्रकार से उन्हें सुलझाने की कोशिश करता है, जिससे उस कर्मचारी का बोझ काफी हद तक कम हो जाता है और वह ज्यादा लगन और प्रोडक्टिविटी के साथ काम कर पाता है. इससे उसके और उसकी कंपनी, दोनों की उन्नति के रास्ते खुल जाते हैं.</em></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/atul-sir-2-431x650.jpg" alt="" class="wp-image-78246" width="363" height="547" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/atul-sir-2-431x650.jpg 431w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/atul-sir-2-232x350.jpg 232w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/atul-sir-2-768x1159.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/atul-sir-2-1017x1536.jpg 1017w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/atul-sir-2-1357x2048.jpg 1357w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/atul-sir-2-scaled.jpg 1696w" sizes="(max-width: 363px) 100vw, 363px" /></figure>



<p>हम जानते हैं, आजकल दोस्त और रिश्तेदार सिर्फ कहने के लिए रह गए हैं. यह भी सच है कि कई लोग जो यह लेख पढ़ रहे हैं उन्हें बुरा लगेगा, पर यह एक कटु सत्य है. जब आप खुश हैं, तब सब आपके दरवाजे पर आएँगे, लेकिन जब आप दुखी होंगे, तब कोई नहीं आएगा और आता भी है तो बस दिखावे के लिए और कई बार तो दस बातें ऐसी कर जाने के लिए, जिससे आप और दुखी हो जाएँ. ऐसे में यदि कोई आपके दरवाजे आकर आपकी ओर अपनापन दिखाता है, तो उस दुःख से लड़ने की ताकत तो उसी वक़्त मिल जाती है, लेकिन यदि वह शुभचिंतक आपका बॉस हो, तो आप उस दुःख या पीड़ा से ऊपर आ जाते हैं. और यदि एक बॉस, जिसे आप न जाने कितने ही कारणों से कोसते हैं, उससे दूर भागते हैं, वही यदि आपका मसीहा बन जाए, तो फिर बात ही क्या&#8230;!</p>



<p>इसलिए मैं पहल करना चाहता हूँ कि<strong> हर एक कंपनी के संस्थापक को अपनी कंपनी के कर्मचारियों से व्यक्तिगत रूप से जुड़ना चाहिए, ताकि उसके छत्रछाया में जो लोग भी काम कर रहे हैं, वो पूरे मन से काम कर सकें और एक अच्छा माहौल बनाएँ, ताकि काम के लिए एक अच्छा वातावरण तैयार हो सके. इससे आपके ऑफिस में कार्यरत लोगों के परिजनों को भी तसल्ल्ली रहती है कि उनका बेटा या बेटी एक सुरक्षित और अच्छे वातावरण में काम कर रहा है और उसकी तरक्की पर भी कोई आशंका नहीं होती</strong>. कुल मिलाकर देखें, तो एक सफल व्यवसाय के लिए, कामगारों के साथ संबंध विकसित करना बहुत आवश्यक होता है. एक ऐसी कंपनी जो अपने कर्मचारियों को समझती है, उनकी समस्याओं का समाधान करती है, उनके जीवन में उन्हें उत्तम बनाने के लिए संबंधों को मजबूत बनाती है, तो ज़ाहिर तौर पर ऐसी कंपनी हमेशा अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होती है. जब एक संस्थापक अपने कर्मचारियों के परिवार से मिलते हैं, तो उनके द्वारा दिए गए प्यार और समर्थन से सभी लोग आपस में एक समूह बन जाते हैं.</p>



<p><em>एक अच्छे संबंध के साथ, लोग बेहतर काम करने के लिए मोटिवेट होते हैं, उनकी संभावनाओं को समझा जाता है, और वे अपनी क्षमताओं को बढ़ा पाते हैं. इससे कंपनी को उनके भरोसे, उत्साह, और निष्ठा का फायदा मिलता है</em> और इससे कर्मचारियों के लिए कंपनी के प्रति लंबी अवधि तक की निष्ठा बनाए रखना भी आसान हो जाता है.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>&#8216;सर्कस’ एक फैमिली एंटरटेनर है, जिसमें कॉमेडी और बेमिसाल धमाल का ऑक्सीजन है : जॉनी लीवर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/circus-is-a-family-entertainer-which-has-oxygen-of-comedy-and-unmatched-drama-johnny-lever/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 17 Sep 2023 03:20:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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					<description><![CDATA[एंड फिल्म के ‘सर्कस’ के प्रीमियर पर जॉनी लीवर से एक खास बातचीत ‘सर्कस’ में काम करने की एकमात्र वजह रोहित शेट्टी • फिल्म सर्कस में अपने किरदार के बारे में बताइए? किस खूबी ने आपको इस रोल के प्रति आकर्षित किया? ‘सर्कस’ में काम करने की एकमात्र वजह रोहित शेट्टी हैं. हमारे रिश्ते बहुत लंबे समय से हैं और मैं उन पर आंख बंद करके विश्वास करता हूं. इसलिए मैं उनके द्वारा ऑफर किए गए हर प्रोजेक्ट में काम करूंगा. इस फिल्म को चुनने की दूसरी वजह थी इसकी दो जुड़वा लोगों की अनोखी कहानी, जो आपस में बदल जाते हैं. यह फिल्म गुलज़ार की फिल्म ‘अंगूर’ से प्रेरित है. • रोहित शेट्टी के साथ काम करना हमेशा एक रोमांचक अनुभव होता है. इस बार उनके साथ जुड़कर कैसा लगा? रोहित शेट्टी के साथ काम करना हमेशा एक खुशनुमा अनुभव रहता है. निजी तौर पर मैं उनके साथ काम करने के लिए एक पैर पर तैयार रहता हूं क्योंकि सेट पर बड़ी मजेदार चीजें होती हैं और मुझे एक एक्टर के रूप में खुद को एक्सप्रेस करने की पूरी आज़ादी मिलती है. • रणवीर सिंह, जैकलीन फर्नांडिस, पूजा हेगड़े और वरुण शर्मा जैसे नए ज़माने के कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? आपने उनमें और इंडस्ट्री के बाकी सीनियर एक्टर्स के बीच क्या फर्क देखा? निजी तौर पर मुझे तो कोई फर्क महसूस नहीं होता. उनके साथ रोज काम करते हुए हमारे बीच साथ काम करने का एक अनोखा और दोस्ताना तालमेल बन गया. असल में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



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<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color"><strong>एंड फिल्म के ‘सर्कस’ के  प्रीमियर पर जॉनी लीवर से एक खास बातचीत</strong></p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color"><strong>‘सर्कस’ में काम करने की एकमात्र वजह रोहित शेट्टी</strong></p>



<p><strong>• फिल्म सर्कस में अपने किरदार के बारे में बताइए? किस खूबी ने आपको इस रोल के प्रति आकर्षित किया?</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="591" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/jhony-lever-650x591.png" alt="" class="wp-image-78232" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/jhony-lever-650x591.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/jhony-lever-350x318.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/jhony-lever-768x698.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/jhony-lever.png 812w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>‘सर्कस’ में काम करने की एकमात्र वजह रोहित शेट्टी हैं. हमारे रिश्ते बहुत लंबे समय से हैं और मैं उन पर आंख बंद करके विश्वास करता हूं. इसलिए मैं उनके द्वारा ऑफर किए गए हर प्रोजेक्ट में काम करूंगा. इस फिल्म को चुनने की दूसरी वजह थी इसकी दो जुड़वा लोगों की अनोखी कहानी, जो आपस में बदल जाते हैं. यह फिल्म गुलज़ार की फिल्म ‘अंगूर’ से प्रेरित है.</p>



<p><strong>• रोहित शेट्टी के साथ काम करना हमेशा एक रोमांचक अनुभव होता है. इस बार उनके साथ जुड़कर कैसा लगा?</strong></p>



<p>रोहित शेट्टी के साथ काम करना हमेशा एक खुशनुमा अनुभव रहता है. निजी तौर पर मैं उनके साथ काम करने के लिए एक पैर पर तैयार रहता हूं क्योंकि सेट पर बड़ी मजेदार चीजें होती हैं और मुझे एक एक्टर के रूप में खुद को एक्सप्रेस करने की पूरी आज़ादी मिलती है.</p>



<p><strong>• रणवीर सिंह, जैकलीन फर्नांडिस, पूजा हेगड़े और वरुण शर्मा जैसे नए ज़माने के कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? आपने उनमें और इंडस्ट्री के बाकी सीनियर एक्टर्स के बीच क्या फर्क देखा?</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/0df23577-32dc-4db3-baa7-9c785de0c30f.jpg" alt="" class="wp-image-78231" width="711" height="407"/></figure>



<p>निजी तौर पर मुझे तो कोई फर्क महसूस नहीं होता. उनके साथ रोज काम करते हुए हमारे बीच साथ काम करने का एक अनोखा और दोस्ताना तालमेल बन गया. असल में नए ज़माने के कलाकार अपने ताजातरीन आइडियाज़ लेकर आते हैं, जिससे हमें भी सीखने और आगे बढ़ने में मदद मिलती है.</p>



<p><strong>• कॉमेडी आपकी खासियत है. अपने फिल्म सर्कस में हास्य को अनोखा और यादगार बनाने के लिए किस तरह का रुख अपनाया?</strong></p>



<p>रोहित शेट्टी सचमुच कॉमेडी के मास्टर हैं और उनके साथ इस प्रोजेक्ट पर काम करना बेहद खुशनुमा अनुभव था. निजी तौर पर मुझे अपना किरदार बहुत पसंद आया, जिसमें मासूमियत भी है और शरारत भी! इसमें अपना बेस्ट देने के लिए सिद्धार्थ जाधव और संजय मिश्रा जैसे कलाकारों की मदद से एक मजेदार माहौल बन गया.</p>



<p><strong>• इस फिल्म में बहुत-से कलाकार हैं. क्या आप सेट से जुड़े कुछ मजेदार किस्सों या यादगार पलों के बारे में बता सकते हैं?</strong></p>



<p>मेरे लिए रणवीर हमेशा ‘सर्कस’ का सबसे यादगार हिस्सा रहेंगे. वो बेहद उत्साह और जोश से भरे हैं, इसीलिए वो इस रोल के लिए बिल्कुल सही हैं. मुझे याद है ‘सर्कस’ के सेट पर जब भी वो शूटिंग लोकेशन पर आते थे तो उनके बेमिसाल जोश से सारा माहौल जगमगा उठता था. आगे भी उनके साथ काम करने का अनुभव हमेशा खुशनुमा रहेगा. उनके साथ काम करते हुए कभी कोई बोर नहीं हो सकता. इसके अलावा, हमने सेट पर एक शानदार केक काटकर जैकलीन का बर्थडे भी मनाया. कुल मिलाकर, ‘सर्कस’ सबसे यादगार अनुभव था.</p>



<p><strong>• आपके हिसाब से कौन-सी खासियत ‘सर्कस’ को बॉलीवुड की बाकी कॉमेडी फिल्मों से अलग बनाती है?</strong></p>



<p>इस फिल्म की कहानी ‘सर्कस’ को बाकी कॉमेडी फिल्मों से अलग बनाती है.</p>



<p><strong>• इंडस्ट्री के एक अनुभवी कलाकार होने के नाते आप भारतीय सिनेमा में इन वर्षों में हुए कॉमेडी के विकास को लेकर क्या महसूस करते हैं?</strong></p>



<p>पिछले कई वर्षों के दौरान कॉमेडी फिल्मों में एक बड़ा बदलाव आया. पहले हम फिल्मों में बाकी भावनाओं के साथ बीच कॉमेडी की लाइंस देखा करते थे, लेकिन अब स्क्रिप्ट में इस तरह बदलाव आया है कि यह एक संपूर्ण कॉमेडी-पैक्ड फिल्म होती है. लगातार बदलते ट्रेंड्स और दर्शकों को आकर्षित करने के नए-नए तरीकों ने यह बदलाव लाया ताकि दर्शकों के बीच यह हमेशा बरकरार रहे. अपने 44 साल के करियर में मैंने बहुत-से बदलाव देखे, जिसने मुझे काफी चीजें सिखाई हैं.</p>



<p><strong>• क्या आप इस फिल्म में अपने को-स्टार्स के साथ अपनी केमिस्ट्री और तालमेल के बारे में कुछ बताएंगे?</strong></p>



<p>यह एक शानदार अनुभव था, खासतौर से रणवीर सिंह के साथ. वो हर बार अपने सभी शॉट्स के लिए इस तरह तैयार रहते थे, मानो वो अपनी पहली फिल्म की शूटिंग कर रहे हों. वो वक्त के पाबंद और जोश से भरे एक्टर हैं, जो हम सभी को अपना बेस्ट देने के लिए प्रेरित करते हैं.</p>



<p><strong>• अंत में आप हमें यह बताएं कि दर्शकों को इस वीकेंड एंड पिक्चर्स पर सर्कस क्यों देखनी चाहिए? आपके हिसाब से दर्शकों को इससे क्या संदेश या एहसास मिलेगा?</strong></p>



<p>‘सर्कस’ एक फैमिली एंटरटेनर है, जिसमें कॉमेडी और बेमिसाल धमाल का ऑक्सीजन है. मैं सभी से गुजारिश करूंगा कि इस वीकेंड एंड पिक्चर्स पर यह फिल्म जरूर देखें और इसे अपने दोस्तों और फैमिली के साथ एंजॉय करें.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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