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	<title>shivanand tiwari &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>&#8220;प्रधानमंत्री धीरे-धीरे इंडिया गठबंधन की जीत की संभावना देखने लगे हैं&#8221;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Apr 2024 14:57:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[यह चुनाव नरेंद्र मोदी की राजनीति का उपसंहार है... विपक्ष के निशाने पर पीएम मोदी प्रधानमंत्री धीरे-धीरे इंडिया गठबंधन की जीत की संभावना देखने लगे हैं. प्रधानमंत्री कौन होगा ! गठबंधन की सरकार में स्थिरता नहीं होगी. मोदी मतदाताओं को डरा रहे हैं. पाँच साल में पाँच प्रधानमंत्री होंगे. अमित शाह पूछ रहे हैं कि इंडिया का प्रधानमंत्री कौन होगा. राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा कि दोनों के सवालों से ही स्पष्ट है कि उन्हें अपनी हार और गठबंधन की जीत की संभावना दिखने लगी है. उन्होंने कहा कि जब नरेन्द्र मोदी पाँच साल में पाँच प्रधानमंत्री की बात कह रहे हैं तो अनजाने में मोदी गठबंधन की प्रशंसा कर रहे हैं. वे प्रमाण दे रहे हैं कि गठबंधन में पाँच ऐसे नेता हैं जो प्रधानमंत्री बनने की क़ाबिलियत रखते हैं. वरिष्ठ राजद नेता ने कहा कि नरेन्द्र मोदी ने भाजपा की जो हालत बना दी है वह हालत गठबंधन की नहीं है. यहाँ सब का क़द बराबर है. पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने कहा कि मोदी तो भाजपा के लिए अकेले भगवान स्वरूप हैं. पंचायतों से लेकर दिल्ली तक का चुनाव भाजपा मोदी का चेहरा लगाकर लड़ती है. बिहार सहित अन्य राज्यों में क्या हो रहा है ! वोट पार्टी के लिए नहीं मोदी के लिए माँगा जा रहा है. उन्होंने कहा कि मोदी भारतीय राजनीति के इतिहास में अनूठे उदाहरण हैं. पार्टी में कोई और नहीं उभर जाए इस पर बराबर उनकी नज़र रहती है. लोकप्रिय नितिन गड़करी इसके उदाहरण हैं. पहली लिस्ट [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>यह चुनाव नरेंद्र मोदी की राजनीति का उपसंहार है.</strong>..</p>



<p><strong>विपक्ष के निशाने पर पीएम मोदी </strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="455" src="https://www.patnanow.com/assets/2018/09/pnc-pm-modi-ranchi-jan-arogya-yojna-shubharambh-650x455.jpg" alt="" class="wp-image-36141" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2018/09/pnc-pm-modi-ranchi-jan-arogya-yojna-shubharambh.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2018/09/pnc-pm-modi-ranchi-jan-arogya-yojna-shubharambh-350x245.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2018/09/pnc-pm-modi-ranchi-jan-arogya-yojna-shubharambh-130x90.jpg 130w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>प्रधानमंत्री धीरे-धीरे इंडिया गठबंधन की जीत की संभावना देखने लगे हैं. प्रधानमंत्री कौन होगा ! गठबंधन की सरकार में स्थिरता नहीं होगी. मोदी मतदाताओं को डरा रहे हैं. पाँच साल में पाँच प्रधानमंत्री होंगे. अमित शाह पूछ रहे हैं कि इंडिया का प्रधानमंत्री कौन होगा. राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा कि दोनों के सवालों से ही स्पष्ट है कि उन्हें अपनी हार और गठबंधन की जीत की संभावना दिखने लगी है. उन्होंने कहा कि जब नरेन्द्र मोदी  पाँच साल में पाँच प्रधानमंत्री की बात कह रहे हैं तो अनजाने में मोदी गठबंधन की प्रशंसा कर रहे हैं. वे प्रमाण दे रहे हैं कि गठबंधन में पाँच ऐसे नेता हैं जो प्रधानमंत्री बनने की क़ाबिलियत रखते हैं. वरिष्ठ राजद नेता ने कहा कि नरेन्द्र मोदी ने भाजपा की जो हालत बना दी है वह हालत गठबंधन की नहीं है. यहाँ सब का क़द बराबर है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="600" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-rjd-shivanand-tiwari.jpg" alt="" class="wp-image-62330" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-rjd-shivanand-tiwari.jpg 600w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-rjd-shivanand-tiwari-350x350.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-rjd-shivanand-tiwari-250x250.jpg 250w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<p><br>पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने कहा कि मोदी तो भाजपा के लिए अकेले भगवान स्वरूप हैं. पंचायतों से लेकर दिल्ली तक का चुनाव भाजपा मोदी का चेहरा लगाकर लड़ती है. बिहार सहित अन्य राज्यों में क्या हो रहा है ! वोट पार्टी के लिए नहीं मोदी के लिए माँगा जा रहा है. उन्होंने कहा कि मोदी भारतीय राजनीति के इतिहास में अनूठे उदाहरण हैं. पार्टी में कोई और नहीं उभर जाए इस पर बराबर उनकी नज़र रहती है. लोकप्रिय नितिन गड़करी इसके उदाहरण हैं. पहली लिस्ट में उनका नाम नहीं था. उसके बाद वे दौड़े दौड़े मोदी से मिलने हवाई अड्डा पर पहुँचे. तब जाकर गर्दन बची और टिकट मिला. </p>



<p>शिवानंद तिवारी ने कहा कि संपूर्ण भाजपा एक व्यक्ति पर आश्रित हो गई है. &#8216;मोदी की गारंटी&#8217; और &#8216;मोदी है तो मुमकिन &#8216; यह नारा तो मोदी स्वयं लगवाते हैं. लेकिन अब मोदी स्वयं महसूस कर रहे हैं यह चुनाव उनके अति व्यक्तिवादी राजनीति का उपसंहार है. भारतीय लोकतंत्र के लिए शुभ होने का यह संकेत है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>&#8216;नीतीश कुमार के ऐसे बयानों से हमें चिंता होती है&#8217;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/shivanand-on-nitish-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Nov 2023 06:24:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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		<category><![CDATA[नीतीश]]></category>
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					<description><![CDATA[राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानन्द तिवारी का बयान 1990 के मार्च में उन्होंने एक योजना की शुरुआत हुई लालू जी ने दलितों को ही लक्ष्य बना कर शुरू किया 1996 तक तो ग़रीबों के तीन लाख घर बन गए उन आवासों को विस्तारित करें और वैसे, बल्कि उनसे बेहतर नये आवास का निर्माण कराएं. पटना। भीम सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान से राजद नेताओं में खलबली मची है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भीम सम्मेलन के दौरान कहा था कि वर्ष 2005 से पहले बिहार में दलितों की स्थिति अच्छी नहीं थी. नीतीश कुमार के बयान को लेकर राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि भीम सम्मेलन बहुत सफल रहा. आयोजक इसके लिए बधाई के पात्र हैं. नीतीश कुमार सम्मेलन की सफलता से अभिभूत थे. गदगद नीतीश जी ने झोंक में कह दिया कि 2005 के पहले दलितों के उत्थान पर कोई ध्यान नहीं देता था. नीतीश जी हमारे पुराने साथी हैं. आजकल झोंक में ऐसा भी बोल जाते हैं जिसकी उम्मीद उनके जैसे व्यक्ति से नहीं की जाती है. मेरे जैसे उनके पुराने सहयोगी को उनमें आये इस परिवर्तन को लेकर कभी-कभी चिंता भी होती है. नीतीश जी यह क्यों भूल जाते हैं कि इसी बिहार में कर्पूरी ठाकुर जैसे नेता को खुले आम कैसी कैसी गलियाँ दी गई थीं. उस दृश्य को याद कर शर्म से सिर झुक जाता है. बहुत हद तक वैसे दबे हुए समाज में लालू यादव मुख्यमंत्री बने थे. वह समय था जब जाति से बड़े [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानन्द तिवारी का बयान</strong></p>



<p><strong>1990 के मार्च में उन्होंने एक योजना की शुरुआत हुई </strong></p>



<p><strong>लालू जी ने दलितों को ही लक्ष्य बना कर शुरू किया</strong></p>



<p><strong>1996 तक तो ग़रीबों के तीन लाख घर बन गए</strong></p>



<p><strong>उन आवासों को विस्तारित करें और वैसे, बल्कि उनसे बेहतर नये आवास का निर्माण कराएं.</strong></p>



<p><br>पटना। भीम सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान से राजद नेताओं में खलबली मची है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भीम सम्मेलन के दौरान कहा था कि वर्ष 2005 से पहले बिहार में दलितों की स्थिति अच्छी नहीं थी. नीतीश कुमार के बयान को लेकर राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि भीम सम्मेलन बहुत सफल रहा. आयोजक इसके लिए बधाई के पात्र हैं. नीतीश कुमार सम्मेलन की सफलता से अभिभूत थे. गदगद नीतीश जी ने झोंक में कह दिया कि 2005 के पहले दलितों के उत्थान पर कोई ध्यान नहीं देता था. नीतीश जी हमारे पुराने साथी हैं. आजकल झोंक में ऐसा भी बोल जाते हैं जिसकी उम्मीद उनके जैसे व्यक्ति से नहीं की जाती है. मेरे जैसे उनके पुराने सहयोगी को उनमें आये इस परिवर्तन को लेकर कभी-कभी चिंता भी होती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="365" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/11/shivanand-650x365.png" alt="" class="wp-image-80508" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/11/shivanand-650x365.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/11/shivanand-350x197.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/11/shivanand.png 739w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><br>नीतीश जी यह क्यों भूल जाते हैं कि इसी बिहार में कर्पूरी ठाकुर जैसे नेता को खुले आम कैसी कैसी गलियाँ दी गई थीं. उस दृश्य को याद कर शर्म से सिर झुक जाता है. बहुत हद तक वैसे दबे हुए समाज में लालू यादव मुख्यमंत्री बने थे. वह समय था जब जाति से बड़े लोगों के सामने, दलितों को कौन कहे, अधिकांश पिछड़ों को खटिया या कुर्सी पर बैठे रहने को उदंडता माना जाता था. जहाँ तहाँ इस अपराध की सजा तक मिलती थी. बिहार के वैसे सामंती समाज में लालू यादव की सरकार बनी थी. ऐसे समाज को बदलने की शुरुआत लालू जी ने दलितों को ही लक्ष्य बना कर शुरू किया था.</p>



<p>1990 के मार्च में उन्होंने एक योजना की शुरुआत की. इस योजना से दलित समाज के जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई थी. उसके अंतर्गत इंदिरा आवास योजना के तहत दो वर्षों में साठ हज़ार घर बनाये गये. 1996 तक तो ग़रीबों के तीन लाख घर बन गए. यहाँ से वहाँ हटाये जाने वालों को सुरक्षित पक्का आवास मिल गया. उनके जीवन में तब्दीली की शुरुआत हुई. इसका रिकॉर्ड ग्रामीण विकास विभाग में उपलब्ध होगा. यह काम सिर्फ़ गाँवों तक ही सीमित नहीं रहा. राजधानी पटना में ही नज़र दौड़ाइए. राजा बाज़ार का भोला पासवान शस्त्री भवन सबकी नज़र में है. एक ज़माने में जिनके साये से लोग परहेज़ करते थे वे पक्का मकान में पहुँच गए. राजधानी पटना में केवल एक ही भवन नहीं है. मीठापुर , कदमकुआं, शेखपुरा, राजेंद्र नगर, लोहानी पुर. चितकोहरा पुल के नीचे दलितों के पक्के घर बनाये गये. उन मुहल्लों में पुराने घर को ख़ाली करकर नया निर्माण बहुत ही कठिन था. उनका पुराना घर ख़ाली करा कर उनके लिए पक्का घर बनाया जाएगा, इस पर उनको कैसे यक़ीन होता ! यह तो लालू यादव थे जिनकी बात पर भरोसा कर उनलोगों ने जैसे तैसे बना अपना पुराना घर ख़ाली किया था. आभिजात्य लोग लालू यादव को इस अपराध के लिए आज भी गरियाते है. कहाँ हमारे मुहल्ले में ललुआ ने गंदे लोगों को बैठा दिया.<br>लालू जी ने राजधानी में जिन दलित परिवारों को पक्का मकान में पहुँचाया था उनका परिवार अब बड़ा हो गया है. उनको पैर फैलाने की जगह नहीं मिल रही है. इसलिए हम तो नीतीश जी से नम्रतापूर्वक अनुरोध करेंगे कि उन आवासों को विस्तारित करें और वैसे, बल्कि उनसे बेहतर नये आवास का निर्माण कराएं.</p>



<p><strong>PNCDESK </strong></p>



<p></p>
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			</item>
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		<title>किताब उत्सव के बहाने याद किये जा रहे हैं दिग्गज</title>
		<link>https://www.patnanow.com/veterans-are-being-remembered-on-the-pretext-of-book-festival/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Nov 2022 02:56:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[हरिमोहन झा मैथिली के करुण रस के सम्राट : कमलानंद झा हरिमोहन झा मैथिली नवजागरण के अग्रदूत भारतीय नृत्य कला मंदिर, पटना में, किताब उत्सव का पांचवां दिन कला, संस्कृति एवं युवा विभाग बिहार सरकार पटना के सहयोग से भारतीय नृत्य कला मंदिर में राजकमलप्रकाशन समूह द्वारा आयोजित किताब उत्सव के पांचवें दिन विभिन्न सत्रों का आयोजन हुआ.अपराह्न 4 बजे से आयोजित पहला सत्र कार्यक्रम हमारा शहर-हमारे गौरव हरिमोहन झा : कृतित्व स्मरण में वक्ता : तारानंद वियोगी, कमलानंद झा, रूपा झा उपस्थित थे. हमारा शहर, हमारे गौरव की श्रृंखला में मैथिली नवजागरण के अग्रदूत हरिमोहन झा का कृतित्व स्मरण किया गया. इस सत्र में तारानंद वियोगी, कमलानंद झा और रूपा झा वक्ता के तौर पर मौजूद रहे. इस सत्र में तारानंद वियोगी ने कहा कि बिहार के, खास तौर पर मिथिला के समाज में हरिमोहन झा नवजागरण के अग्रदूत के रूप में समादृत हैं. अंधविश्वास और पाखंड में जकड़े समाज में चेतना के प्रसार के लिए ही उन्होंने साहित्य-लेखन को माध्यम बनाया था. उन्होंने इक्कीस साल की उम्र में अपने प्रसिद्ध उपन्यास कन्यादान के लेखन से रचनाकर्म की शुरुआत की थी और बाद में कहानी और वार्ता-साहित्य के क्षेत्र में अनूठालेखन किया. उन्होंने हरिमोहन झा की रचनाओं की लोकप्रियता को रेखांकित करते हुए बताया कि वे मूलत: मैथिली के लेखक थे लेकिन समूचे देश के पाठकों में इतने लोकप्रिय थे कि उन्हें पढ़ने के लिए लोगों ने मैथिली सीखी. खट्टर काका का पहला संस्करण 1948 में मैथिली में छपा था था जिसकी वार्ताओं का अनुवाद विभिन्न देशी-विदेशी भाषाओं में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>हरिमोहन झा मैथिली के करुण रस के सम्राट : कमलानंद झा</strong></p>



<p><strong>हरिमोहन झा मैथिली नवजागरण के अग्रदूत</strong></p>



<p><strong>भारतीय नृत्य कला मंदिर, पटना में, किताब उत्सव का पांचवां दिन</strong></p>



<p>कला, संस्कृति एवं युवा विभाग बिहार सरकार पटना के सहयोग से भारतीय नृत्य कला मंदिर में राजकमलप्रकाशन समूह द्वारा आयोजित किताब उत्सव के पांचवें दिन विभिन्न सत्रों का आयोजन हुआ.अपराह्न 4 बजे से आयोजित पहला सत्र कार्यक्रम हमारा शहर-हमारे गौरव हरिमोहन झा : कृतित्व स्मरण में वक्ता : तारानंद वियोगी, कमलानंद झा, रूपा झा उपस्थित थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="431" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/1st-session-1.jpg" alt="" class="wp-image-68582" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/1st-session-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/1st-session-1-350x232.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>हमारा शहर, हमारे गौरव की श्रृंखला में मैथिली नवजागरण के अग्रदूत हरिमोहन झा का कृतित्व स्मरण किया गया. इस सत्र में तारानंद वियोगी, कमलानंद झा और रूपा झा वक्ता के तौर पर मौजूद रहे. इस सत्र में तारानंद वियोगी ने कहा कि बिहार के, खास तौर पर मिथिला के समाज में हरिमोहन झा नवजागरण के अग्रदूत के रूप में समादृत हैं. अंधविश्वास और पाखंड में जकड़े समाज में चेतना के प्रसार के लिए ही उन्होंने साहित्य-लेखन को माध्यम बनाया था. उन्होंने इक्कीस साल की उम्र में अपने प्रसिद्ध उपन्यास कन्यादान के लेखन से रचनाकर्म की शुरुआत की थी और बाद में कहानी और वार्ता-साहित्य के क्षेत्र में अनूठालेखन किया. उन्होंने हरिमोहन झा की रचनाओं की लोकप्रियता को रेखांकित करते हुए बताया कि वे मूलत: मैथिली के लेखक थे लेकिन समूचे देश के पाठकों में इतने लोकप्रिय थे कि उन्हें पढ़ने के लिए लोगों ने मैथिली सीखी. खट्टर काका का पहला संस्करण 1948 में मैथिली में छपा था था जिसकी वार्ताओं का अनुवाद विभिन्न देशी-विदेशी भाषाओं में प्रकाशित हुआ. </p>



<p>खट्टर काका को हरिमोहन झा की रचनाशीलता की;सहसा एक उछली हुई बूंद बताते हुए वियोगी जी का कहना था कि उनके समूचे साहित्य को पढ़ना आज भी रोमांच से भर देता है. वहीं कमलानंद झा ने उनको याद करते हुए साहित्य की दुनिया में उनको सही स्थान नहीं देने की बात कही. कमलानंद झा ने बताया कि मैथिली आलोचना ने हरिमोहन झा को पहचानने में भूल की और उन्हें हास्य व्यंग्य के उपाधि से विभूषित कर दिया. हम सभी जानते हैं हास्य रचनाकार दोयम दर्जे का होता है और जो बड़े रचनाकार होते हैं चाहे वाल्मीकि से लेकर कालिदास, भवभूति से शेक्सपियर तक सभी करुणा के रचनाकार है. मेरा मानना है कि हरिमोहन झा मैथिली के करुण रस के सम्राट है. उनकी रचनाओं में जो हास्य है उसे मैं उनके लेखन की शैली मानता हूं, वो उपादान है,उनके कहने का स्टाइल है. आगे उन्होंने हरिमोहन झा के उपन्यास कन्यादान का उदाहरण देते हुए कहा कि उपन्यास में जो पीड़ा है, उस पर कोई समाज हँस कैसे सकता है. जो कहानी है उनकी उसके जीवन पर तो मतलब सन्न रह सकता है हंसी नहीं आ सकती है. मेरी ये स्थापना है कि हरिमोहन झा करुण रस के रचनाकार है और जहां हास्य हैं वो उनकी शैली ली है. हरिमोहन झा मैथिली नवजागरण के अग्रदूत है. पूरे भारतीय नवजागरण और बंगाल नवजागरण, मराठी नवजागरण सब जगह देखें तो शिक्षा के मुद्दों पर, धार्मिक कूपमंडूकता पर लड़ाई चल रही थी उस समय हरिमोहन झा की रचनाओं में इन सभी मुद्दों पर बात हुई. </p>



<p> अपने अंदर की लड़ाई है उससे लड़ना मुश्किल होता है. तीसरी उनकी जो महत्वपूर्ण बात है कि उनमें जो विश्व दृष्टि थी वो अद्भुत थी. किसी रचनाकार की महत्ता विश्व दृष्टि सेबनती है. 1945में सिमोन दी बोउवार की किताब आती है द सेकंड सेक्स और 1929 में हरिमोहन झा का उपन्यास कन्यादान आता है. सिमोन दी बोउवार ने जो सैद्धांतिक बातें अपनी किताब में की है जो हरिमोहन झा पहले ही अपनी किताबों कन्यादान और निरागमनमें कर चुके होते हैं. इस तरह उनकी जो विश्व दृष्टि थी वहअत्यंत महत्वपूर्ण है. लेकिन जो हास्य की बात मैं कह रहा हूं वो इसलिए कि वह जानबूझकर उनकी बातों को हंसी मजाक में उड़ा गया है. इसलिए उन पर आलोचकों ने वर्ण व्यवस्था और मिथिलांचल की धार्मिक कूपमण्डूकता के जो समर्थक थे उन लोगों ने हास्य सम्राट कह दिया कि इनकी बातों को गंभीरता से ना ली जाए.</p>



<p>वहीं सत्र की अन्य वक्ता रूपा झा ने उनके संस्मरणों को याद करते हुए कहा कि उन्हें हमसे दिल्ली पटना की रेलयात्रा वृतांत सुनने के बड़ा शौक रहता, और हमारी लिखी चिठ्ठियों को पढ़ने का भी. उन्हें प्रणाम करने पर हमेशा यही आशीर्वाद देते शिवानी बनो. रानीघाट का क्वार्टर की हर शाम, दादाजी और उनके गणमान्य मित्रों के ठहाकों से गुंजायमान रहा करती थी, जिसमें दादीजी का भी बैठना अनिवार्य होता था. दादाजी अख़बार पढ़ते और दादीजी उनकी एकमात्र श्रोता&#8230; हमारे दार्शनिक दादाजी के लोगों को भूलने के किस्से तो किंवदंती बन चुके हैं.इस सत्र का संचालन प्रभात रंजन ने किया.</p>



<h2 class="wp-block-heading">सच्चिदानंद सिन्हा विकल्प के नहीं बल्कि मूल की खोज के लेखक: प्रभात रंजन</h2>



<p><strong>दूसरा सत्र― सच्चिदानंद सिन्हा : विकल्प का विचार</strong></p>



<p><strong>(वक्ता : शिवानंद तिवारी, श्रीकांत, प्रभात रंजन)</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="431" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/2nd-session-1.jpg" alt="" class="wp-image-68583" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/2nd-session-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/2nd-session-1-350x232.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="431" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/2nd-session-2.jpg" alt="" class="wp-image-68584" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/2nd-session-2.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/2nd-session-2-350x232.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कार्यक्रम का दूसरा सत्र प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक सच्चिदानंद सिन्हा रचनावली पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ. जिसमें प्रसिद्ध समाजवादी शिवानन्द तिवारी ने समाजवादी आंदोलन में उनके अवदानों की चर्चा की. प्रसिद्ध लेखक पत्रकार श्रीकान्त ने उनकी बौद्धिकी की चर्चा की और यह बताया कि वे अपनी परंपरा के अकेले लेखक थे. श्रीकांत ने कहा कि सच्चिदानंद बाबू ने एक दार्शनिक का जीवन जिया है. बिहार में ऐसे समाजवादी जिन्होंने गांधी और समाजवादी दर्शन को अपने जीवन में उतारा है. उन्होंने जाति, सामाजिक जीवन, समाजवाद पर बहुत कुछ लिखा.प्रभात रंजन ने उनकी मौलिकता को रेखांकित किया और बताया कि वे विकल्प के नहीं बल्कि मूल की खोज के लेखक हैं. उनका शब्द आत्मानुशासन बहुत कुछ सिखाने वाला है.</p>



<p><strong>तीसरा सत्र― राजा मोमो और बुलबुल</strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color">विकास कुमार झा से निवेदिता की बातचीत</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="431" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/3rd-session-1.jpg" alt="" class="wp-image-68585" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/3rd-session-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/3rd-session-1-350x232.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>तीसरे सत्र में विकास कुमार झा के नए उपन्यास राजा मोमो और पीली बुलबुल पर निवेदिता ने उनसे बातचीत की.राजा मोमो और बुलबुल का कथानक गोवा राज्य के सामाजिक परिवेश और उसकी संस्कृति के इर्दगिर्द बुना गया है. यह उस गोवा का साक्षात्कार कराता है, जिसे आपने अब तक न देखा है, न ही उसके बारे में सुना है—दुनियाभर के सैलानियों की नजर में स्वर्ग सरीखे सैरगाह के रूप में चर्चित गोवा के रहवासियों की निजी सामाजिक ज़िन्दगी की अब तक अनदेखी तस्वीरें इस उपन्यास के ज़रिए सामने आई हैं. हिन्दी में गोवा को आधारबनाकर लिखा गया ‘राजा मोमो और पीली बुलबुल’ पहला उपन्यास है जिसमें उसकी सामाजिक, सांस्कृतिक और नैसर्गिक विशिष्टता अपने पूरे वैभव के साथ उपस्थित है. ‘राजा मोमो और पीली बुलबुल’ में लोगों के बेहिसाब बढ़ रहेवजन की समस्या केन्द्र में है, जिस मामले में गोवा भारत के सभी प्रान्तों से आगे है. इस प्रकार संभवत: यह हिन्दी समेत सभी भारतीय भाषाओं में पहली कृति होगी जिसमें मोटापे, अधिक वजन की समस्या को विषय बनाया गया है. प्राचीन काल से परम्परावादी इस प्रान्त को निरन्तर सामाजिक-सांस्कृतिक पतन ने भीतर से क्षयग्रस्त कर रखा है. ज़माने से वैश्विक अय्याशी का केन्द्र रहा गोवा खनन मा​फ़िया, ड्रग माफ़िया, गोवा को कंक्रीट का जंगल बनानेवाले भवन माफ़िया और वन-माफ़िया के करतबों से चुपचाप ख़ून के आँसू टपका रहा है. हिन्दी साहित्य में गोवा सदैव से हाशिये पर रहा है. पहली बार हिन्दी साहित्य में गोवा को लेकर बड़े फ़लक पर लिखा गया यह बृहत् उपन्यास देश के सबसे छोटे प्रान्त को केन्द्रीय विमर्श में लाने की पेशकश करता है.</p>



<p><strong>चौथा सत्र― लोग जो मुझमें रह गए</strong></p>



<p><strong>अनुराधा बेनीवाल से दिव्या गौतम की बातचीत</strong></p>



<p>चौथे सत्र में अनुराधा बेनीवाल की यायावरी-आवारगी की किताब लोग जो मुझमें रह गएपर दिव्या गौतम ने उनसे बातचीत की. अनुराधा बेनीवाल ने अपनी किताब ‘लोग जो मुझमें रह गए’ पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मैं दूर बसे लोगों के बाराए में कहानियाँ लिखना चाहता हूँ, उन लोगों की संस्कृति के बारे में बताना चाहता हूँ. उन्होंने आगे कहा कि हम जिस समाज में हैं, उसमें दूसरों के बारे में जानने का प्रयास करना चाहिए. और दूसरी संस्कृति का भी सम्मान करना चाहिए. दिव्या से बातचीत में अनुराधा ने बताया कि जैसा कि हम यूरोप या पश्चिम देशों के बारे में अवधारणाएँ बना लेते हैं, यूरोप उससे बहुत अलग है. वहाँ भी हर तरह की संस्कृति के लोग रहते हैं. उन्होंने यूरोप,पोलेंड, यूके लात्विया के बारे में श्रोताओं को बताने का प्रयास किया.यह किताब उन्होंने यूरोप की यात्राओं के दौरान मिले लोगों को आधार बनाकर लिखी है. </p>



<p>अनुराधा मानती है कि जब भी हम किसी से मिलते हैं, नए लोग, नई जगह नया परिवेश तो उन सबका का कुछ-कुछ हिस्सा हमेशा के लिए हमारे अंदर रह जाता है. ऐसे ही तमाम अनुभवों को एक करके इस किताब के रूप में उन्होंने हमारे सामने रखा है. एक लड़की जो अलग-अलग देशों में जाती है और अलग-अलग जींस और जज़्बात के लोगों से मिलती है. कहीं गे, कहीं लेस्बियन, कहीं सिंगल, कहीं तलाक़शुदा, कहीं भरे-पूरे परिवार, कहीं भारत से भी ‘बन्द समाज’ के लोग. कहीं जनसंहार का रोंगटे खड़े करने और सबक देने वाला—स्मारक भी वह देखती है जिसमें क्रूरता और यातना की छायाओं के पीछे ओझल बेशुमार चेहरे झलकते हैं. उनसे मुख़ातिब होते हुए उसे लगता है, सब अलग हैं लेकिन सब ख़ास हैं. दुनिया इन सबके होने से ही सुन्दर है. क्योंकि सबकी अपनी अलहदा कहानी है. इनमें से किसी के भी नहीं होने से दुनिया से कुछ चला</p>



<p>जाएगा. अलग-अलग तरह के लोगों से कटकर रहना हमें बेहतर या श्रेष्ठ मनुष्य नहीं बनाता. उनसे जुड़ना, उनको जोड़ना ही हमें बेहतर मनुष्य बनाता है; हमारी आत्मा के पवित्र और श्रेष्ठ के पास हमें ले जाता है. ऐसे में उस लड़की को लगता है—मेरे भीतर अब सिर्फ़ मैं नहीं हूँ, लोग हैं. लोग—जो मुझमें रह गए! लोग जो मुझमें रह गए—‘आज़ादी मेरा ब्रांड’ कहने और जीने वाली अनुराधा बेनीवाल की दूसरी किताब है. यह कई यात्राओं के बाद की एक वैचारिक और रूहानी यात्रा का आख्यान है जो यात्रा-वृत्तान्त के तयशुदा फ्रेम से बाहर छिटकते शिल्प में तयशुदा परिभाषाओं और मानकों के साँचे तोड़ते जीवन का दर्शन है. ‘यायावरी आवारगी’ श्रृंखला की यह दूसरी किताब अपनी कंडीशनिंग से आज़ादी की एक भरोसेमन्द पुकार है.</p>



<p><strong>किताब उत्सव में सर्वाधिक बिकने वाली किताबें-</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221109_151637.jpg" alt="" class="wp-image-68586" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221109_151637.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221109_151637-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ठक्कन से नागार्जुन – शोभाकान्त, कौन तार से बीनी चदरिया &#8211; व्यास मिश्र, पानी जैसा देश &#8211; विनय कुमार , आधुनिक भारत के ऐतिहासिक यथार्थ &#8211; हितेन्द्र पटेल, कौन</p>



<p>है भारत माता &#8211; पुरुषोत्तम अग्रवाल, लोग जो मुझमें रह गए &#8211; अनुराधा बेनीवाल, कच्छ कथा &#8211; अभिषेक श्रीवास्तव, रेत समाधि &#8211; गीतांजलि श्री, एकाकीपन के सौ वर्ष &#8211; गेब्रियल गार्सिया मार्ख़ेस, सोफी का संसार – जॉस्टिन गार्डर</p>



<p><strong>आज के कार्यक्रम 10/11/22, गुरुवार</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221109_151625.jpg" alt="" class="wp-image-68588" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221109_151625.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221109_151625-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अपराह्न 4:00 से 4:45 बजे- हमारा शहर हमारे गौरव, राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह : कृतित्व स्मरण (वक्ता : कमलानंद झा, तरुण कुमार, प्रभात रंजन)</p>



<p>अपराह्न 4:45 से 5:30 बजे- तानी कथाएँ : आदिवासी समाज की विश्वदृष्टि लोकार्पण (जोराम यालाम नाबाम की नई किताब का लोकार्पण और उनसे अश्विनी कुमार पंकज की बातचीत)</p>



<p>अपराह्न 5:30 से 6:15 बजे- संगरंग हृषीकेश सुलभ की नई पुस्तक के बहाने रंग दुनिया पर चर्चा लोकार्पणकर्ता : जावेद अख़्तर वक्ता : मोना झा, पुंज प्रकाश, रणधीर कुमार, प्रवीण कुमार गुंजन)</p>



<p>सायं 6:15 से 7:00 बजे- भारतीय काव्यशास्त्र : एक परिचर्चा (वक्ता : महेन्द्र मधुकर, तरुण कुमार)</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>बिहार में साहित्य लिखने पढ़ने वाले की फ़ौज तैयार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/acharya-nalin-made-a-platoon-army-of-those-who-read-literature-in-bihar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Nov 2022 07:11:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[day 4]]></category>
		<category><![CDATA[kitab utsav]]></category>
		<category><![CDATA[nalin vilochan sharma]]></category>
		<category><![CDATA[shivanand tiwari]]></category>
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					<description><![CDATA[पहला सत्र कार्यक्रम हमारा शहर-हमारे गौरव नलिन विलोचन शर्मा:कृतित्व स्मरण दूसरा सत्र― राममनोहर लोहिया : विचार की प्रासंगिकता तीसरा सत्र― पानी जैसा देस : लोकार्पण और बातचीत प्रथम सत्र वक्ता : तरुण कुमार, विनोद तिवारी, अजय आनंद पटना, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग बिहार सरकार पटना के सहयोग से भारतीय नृत्य कला मंदिर में राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा आयोजित किताब उत्सव के चौथे दिन विभिन्न सत्रों का आयोजन हुआ. किताब उत्सव के चौथे दिन हमारा शहर, हमारे गौरव की श्रृंखला में बिहार स्कूल के यशस्वी आलोचक, रचनाकार, अध्यापक और सम्पादक का कृतित्व स्मरण किया गया. वक्ताओं ने नलिन विलोचन शर्मा की रचनाओं और व्यक्तित्व के बारे में चर्चा की. नलिन जी का महत्व रेखांकित करते हुए अजय आनंद ने कहा कि नलिन जी अपने समय में पटना के साहित्य प्रेमियों और विद्यार्थियों के लिए बेकन लाइट जैसे थे. उन्होंने बिहार में साहित्य लिखने पढ़ने वाले का पलटन तैयार कर दिया था, जिसमें से कई लोग राष्ट्रीय स्तर साहित्य जगत में जगह बनाई. दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली के प्रो. विनोद तिवारी और पक्षधर पत्रिका के सम्पादक ने नलिन जी की आलोचना और उनके अध्यापकीय व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला. पटना विश्वविद्यालय, पटना के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो.तरुण कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. मंच का संचालन धर्मेंद्र सुशांत ने किया. कार्यक्रम में पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. तरुण कुमार ने कहा कि नलिन विलोचन शर्मा हिंदी के गंभीर आलोचक, कवि-कहानीकार, तात्विक शोधकर्ता, हिंदी साहित्येतिहास के पुनर्निर्माण की चिंता करने वाले, अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों के उद्धारक-संपादक, साहित्य-संगठन कर्ता, पुराने-नये देशी-विदेशी साहित्य के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पहला सत्र कार्यक्रम हमारा शहर-हमारे गौरव नलिन विलोचन शर्मा:कृतित्व स्मरण</strong></p>



<p><strong>दूसरा सत्र― राममनोहर लोहिया : विचार की प्रासंगिकता</strong></p>



<p><strong>तीसरा सत्र― पानी जैसा देस : लोकार्पण और बातचीत</strong></p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color">प्रथम सत्र वक्ता : तरुण कुमार, विनोद तिवारी, अजय आनंद</p>



<p>पटना, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग बिहार सरकार पटना के सहयोग से भारतीय नृत्य कला मंदिर में राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा आयोजित किताब उत्सव के चौथे दिन विभिन्न सत्रों का आयोजन हुआ. किताब उत्सव के चौथे दिन हमारा शहर, हमारे गौरव की श्रृंखला में बिहार स्कूल के यशस्वी आलोचक, रचनाकार, अध्यापक और सम्पादक का कृतित्व स्मरण किया गया. वक्ताओं ने नलिन विलोचन शर्मा की रचनाओं और व्यक्तित्व के बारे में चर्चा की. नलिन जी का महत्व रेखांकित करते हुए अजय आनंद ने कहा कि नलिन जी अपने समय में पटना के साहित्य प्रेमियों और विद्यार्थियों के लिए बेकन लाइट जैसे थे. उन्होंने बिहार में साहित्य लिखने पढ़ने वाले का पलटन तैयार कर दिया था, जिसमें से कई लोग राष्ट्रीय स्तर साहित्य जगत में जगह बनाई. दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली के प्रो. विनोद तिवारी और पक्षधर पत्रिका के सम्पादक ने नलिन जी की आलोचना और उनके अध्यापकीय व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला. पटना विश्वविद्यालय, पटना के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो.तरुण कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. मंच का संचालन धर्मेंद्र सुशांत ने किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="431" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/1st-session.jpg" alt="" class="wp-image-68555" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/1st-session.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/1st-session-350x232.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कार्यक्रम में पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. तरुण कुमार ने कहा कि नलिन विलोचन शर्मा हिंदी के गंभीर आलोचक, कवि-कहानीकार, तात्विक शोधकर्ता, हिंदी साहित्येतिहास के पुनर्निर्माण की चिंता करने वाले, अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों के उद्धारक-संपादक, साहित्य-संगठन कर्ता, पुराने-नये देशी-विदेशी साहित्य के गंभीर अध्येता, रंगमंच और चित्रकला के प्रेमी, एक सफल साहित्य-अध्यापक के साथ अत्यंत सुरुचि सम्पन्न व्यक्तित्व के धनी थे.आगे उन्होंने बताया कि 1940 से 1960 का दौर हिंदी में प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नयी कविता का दौर था और यही नलिन जी का अपना दौर था. उस समय की हिंदी आलोचना शीतयुद्ध की छाया से ग्रस्त थी. नलिन जी को भलीभांति समझने की कोशिश नहीं की गई और उनपर कलावादी, रूपवादी, निराधार शास्त्रीयतावादी होने के साथ प्रगति विरोधी होने के आरोप लगाए गए.उन्होंने कहा कि वे प्रगतिवाद के प्रशंसकों में थे लेकिन जब उनमें वैचारिक आग्रह प्रबल होता गया तो उन्होंने उसकी संकीर्णता की उचित आलोचना भी की. अपनी आलोचना के द्वारा उन्होंने हिंदी में मैला आंचल को प्रतिष्ठित किया और प्रेमचंद के गोदान के शिल्प पर बिल्कुल नए ढंग से विचार किया. हिंदी में अभी उनका समय का मूल्यांकन बाकी है.</p>



<p>वहीं अन्य वक्ता विनोद तिवारी ने कहा कि आचार्य नलिन विलोचन शर्मा हिंदी आलोचना की पांडित्य परंपरा के आलोचक थे. वे पंडित, प्रोफ़ेसर और आचार्य एक साथ थे. संस्कृत, हिंदी, अंग्रेज़ी के साथ-साथ फ्रेंच भाषा का भी ज्ञान उन्हें था. वे हिंदी के इलियट कहे जाते हैं. साहित्य को साहित्य के ही मानदंडों और मूल्यों पर विवेचित व्याख्यायित किए जाने पर जोर दिया. आगे उन्होंने बताया कि गोदान, मैला आंचल आदि उपन्यासों की व्याख्या जिस तरह से नलिन जी ने प्रस्तुत की उन पर आगे बहस और चर्चाएं होती रहीं. मैला आंचल के प्रकाशन के एक साल बाद ही उसकी जो व्याख्या और विवेचन नलिन जी ने किया वह आज तक आलोचकों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है. वे हिंदी में एक नई काव्य धारा प्रपद्यवाद अथवा नकेनवाद के प्रवर्तकों में से रहे. नलिन जी का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान साहित्येतिहास दर्शन के क्षेत्र में है. हिंदी शोध और दर्शन के क्षेत्र में उनकी पुस्तक साहित्येतिहास दर्शन का योगदान मूल्यवान है.</p>



<p class="has-vivid-green-cyan-color has-text-color">दूसरा सत्र― राममनोहर लोहिया : विचार की प्रासंगिकता</p>



<p class="has-vivid-purple-color has-text-color">वक्ता : शिवानंद तिवारी, श्रीकांत, नरेन्द्र पाठक</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="431" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/2nd-session.jpg" alt="" class="wp-image-68556" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/2nd-session.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/2nd-session-350x232.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कार्यक्रम के दूसरे सत्र में वक्ताओं ने राममनोहर लोहिया के गरीब, किसान और मजदूर हितैषी व्यक्तित्व पर रोशनी डालते हुए उनके द्वारा किए गए आंदोलनों की चर्चा की. श्रीकांत ने 5-6 दिसम्बर 1936 को पटना में उनके दिए भाषण को याद करते हुए बताया कि लोहिया आज़ादी के संघर्ष में गरीब, किसान और मजदूर की भूमिका को अहम मानते थे. आगे उन्होंने बताया कि लोहिया जी ने बिहार में सिविल नाफ़रमानी के प्रयोग किए. उनका नहर रेट विरोधी आंदोलन और विधानसभा के सामने किया गया प्रदर्शन उल्लेखनीय है. वहीं श्रीकांत ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि लोहिया जी अभिव्यक्ति की आज़ादी के प्रबल समर्थक थे और अंतिम व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए उनकी कही गई बातें और उनके विचार आज भी मौजू है. इस सत्र में नरेंद्र पाठक ने बताया कि लोहिया जी की समाजवाद की विचारधारा किसी लिखित वैचारिकी में खोजना, उसके साथ अन्याय है. उन्होंने पिछड़ी और पिछड़ गई जातियों को व्यवस्था में वाजिब हक दिलाने का जो आंदोलन शुरू किया और उसी कोभारतीय संदर्भ में समाजवादी आंदोलन कहा गया. इसकी शुरुआत 1930 के आरंभ में बकाश्त आंदोलनसे होते हुए, अंग्रेजी में फेल वह भी पास, मुंगेरी लाल कमीशन के आधार पर आरक्षण और सप्त क्रांति से संपूर्ण क्रांति तक गया. वहीं सत्र के अन्य वक्ता शिवानंद तिवारी ने बताया कि लोहिया ने बिहार के किसान आंदोलनों को रास्ता दिखाने का काम किया.</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color">तीसरा सत्र― पानी जैसा देस : लोकार्पण और बातचीत</p>



<p class="has-luminous-vivid-amber-color has-text-color"><strong>वक्ता : आलोक धन्वा, अरुण कमल, प्रेमकुमार मणि; कविता पाठ : विनय कुमार; सूत्रधार: नताशा</strong></p>



<p></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="431" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/4th-session.jpg" alt="" class="wp-image-68558" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/4th-session.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/4th-session-350x232.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="431" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/3rd-session.jpg" alt="" class="wp-image-68557" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/3rd-session.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/3rd-session-350x232.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कार्यक्रम के तीसरे सत्र में विनय कुमार की नई किताब पानी जैसा देस का लोकार्पण हुआ. इस सत्र की शुरुआत में विनय कुमार ने अपने नए कविता संग्रह से कविता पाठ किया. वहीं सत्र के वक्ताओं ने विनय की कविताओं पर चर्चा की. इस दौरान प्रेमकुमार मणि ने हिंदी कविता की पूरी यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि बीसवीं सदी के अंतिम दो दशकों में न केवल हिंदी कविता, बल्कि दुनिया की दूसरी जुबानों में भी काव्य प्रवृतियों ने एक नया मोड़ लिया. शीतयुद्ध के दौरान कविता में राजनीतिक प्रश्न प्रधान हो गए थे और उसके अनुरूप ही भाषा, तेवर और उसके अंतर- राग विकसित हुए थे. रोटी और आज़ादी के सवाल प्रमुख थे.इन सवालों के किंचित हल होते ही मनुष्य फिर अपनी दुनिया में लौटा. 1980 के बाद मनुष्य का असली जीवन एक बार फिर से कविता में लौटा. रोटी और क्रांति की जगह फूल,बच्चे और नदियां कविता के विषय बनने लगे. जब नई सदी आई तब फिर एक मोड़ आया. अंधाधुंध विकास ने प्राकृतिक संसाधनों और प्रकृति को इतना दयनीय बना दिया किमनुष्य को लगा इसविकृत दुनिया के साथ वह जी नहीं सकेगा. कविता अब मिटटी, हवा और पानी की चिंता में शामिल हुई.. विनय कुमार का यह कविता संकलन पानी जैसा देस इसी चिंता से हमें जोड़ता है.नदियां, ताल-तलैये, आहर-पोखर हमारे जीवन से अलग हो रहे हैं. ऐसे में मनुष्य के समक्ष न केवल पर्यावरण का संकट घनीभूत हो रहा है, बल्कि वह एक सांस्कृतिक संकट से भी घिर रहा है. यदि कविताओं में पानी सुरक्षित होगा, तब जीवन में भी होगा. कवि विनय की कविताएं बस यही बात बहुत हौले से हमारे कानों में बुदबुदाती हैं. इसी क्रम ने अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>शर्त मान लें हम गले लगाने के लिए तैयार: शिवानंद</title>
		<link>https://www.patnanow.com/accept-the-condition-that-we-are-ready-to-embrace-shivanand/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Aug 2022 17:02:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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		<category><![CDATA[we are ready to embrace: Shivanand]]></category>
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					<description><![CDATA[नीतीश कुमार के सामने बड़ी शर्त बिहार में एनडीए के घटक दलों, जनता दल-यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी में ‘मनमुटाव’ की अटकलों के बीच प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने बड़ी शर्त रख दी है. राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने सोमवार को कहा कि अगर नीतीश कुमार भाजपा के साथ संबंध तोड़ देते हैं तो वह उन्हें और उनकी पार्टी को गले लगाने के लिए तैयार हैं. शिवानंद तिवारी ने कहा कि मंगलवार को दोनों दलों द्वारा विधायकों की बैठक बुलाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि स्थिति असाधारण है. उन्होंने कहा कि मुझे मौजूदा घटनाक्रम के बारे में व्यक्तिगत रूप से कुछ पता नहीं है.लेकिन, हम इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं कि दोनों दलों ने उस समय ऐसी बैठकें बुलाई हैं, जब विधानसभा का सत्र संचालन में नहीं है. PNCDESK]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>नीतीश कुमार के सामने बड़ी शर्त</strong></p>



<p>बिहार में एनडीए के घटक दलों, जनता दल-यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी में ‘मनमुटाव’ की अटकलों के बीच प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने बड़ी शर्त रख दी है. राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने सोमवार को कहा कि अगर नीतीश कुमार भाजपा के साथ संबंध तोड़ देते हैं तो वह उन्हें और उनकी पार्टी को गले लगाने के लिए तैयार हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-rjd-shivanand-tiwari.jpg" alt="" class="wp-image-62330" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-rjd-shivanand-tiwari.jpg 600w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-rjd-shivanand-tiwari-350x350.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-rjd-shivanand-tiwari-250x250.jpg 250w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<p><br>शिवानंद तिवारी ने कहा कि मंगलवार को दोनों दलों द्वारा विधायकों की बैठक बुलाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि स्थिति असाधारण है. उन्होंने कहा कि मुझे मौजूदा घटनाक्रम के बारे में व्यक्तिगत रूप से कुछ पता नहीं है.लेकिन, हम इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं कि दोनों दलों ने उस समय ऐसी बैठकें बुलाई हैं, जब विधानसभा का सत्र संचालन में नहीं है.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>&#8216;भाजपा के इशारे पर नीतीश ने की मुकेश सहनी की राजनीतिक हत्या&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 Mar 2022 15:31:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा है कि भाजपा के इशारे पर नीतीश कुमार ने मुकेश सहनी की राजनीतिक हत्या की है. उन्होंने कहा कि बदली हुए सियासी हालात में बोचहां से मुकेश सहनी को अपना उम्मीदवार वापस लेकर राजद के उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए. दरअसल भाजपा के कहने पर आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार में मुकेश साहनी को मंत्रिमंडल से हटाने की सिफारिश राज्यपाल से की है. pncb]]></description>
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<p>राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा है कि भाजपा के इशारे पर नीतीश कुमार ने मुकेश सहनी की राजनीतिक हत्या की है. उन्होंने कहा कि बदली हुए सियासी हालात में बोचहां से मुकेश सहनी को अपना उम्मीदवार वापस लेकर राजद के उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/12/shivanand_pnc.jpg" alt="" class="wp-image-57686" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/12/shivanand_pnc.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/12/shivanand_pnc-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>दरअसल भाजपा के कहने पर आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार में मुकेश साहनी को मंत्रिमंडल से हटाने की सिफारिश राज्यपाल से की है.</p>



<p></p>



<p></p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>&#8220;कुर्सी अस्थायी है, लेकिन बैठने वाले को गलतफहमी हो जाती है&#8221;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/shivanand-tiwari-on-nitish/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Dec 2021 04:13:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[CM NITISH]]></category>
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					<description><![CDATA[बात पुरानी है लेकिन बहुत दिलचस्प है. चंद्रशेखर सिंह बिहार के थे. उन्हीं दिनों पटना में जनता पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन होना तय हुआ था. कंकड़बाग कॉलोनी में सरकार का हाउसिंग बोर्ड आवास बना रहा था. कॉलोनी लगभग तैयार थी. थोड़ा बहुत काम बाक़ी था. फ़्लैट वग़ैरह अभी ख़ाली थे. बाहर से आने वाले प्रतिनिधियों के ठहरने की समस्या का वहाँ आसानी से समाधान हो जाता था. इसलिए तय हुआ कि सम्मेलन के लिए सबसे उपयुक्त स्थल यही होगा. लेकिन सड़क और पानी का थोड़ा बहुत काम बाक़ी था. संभवतः सच्चिदा बाबू स्वागत समिति के अध्यक्ष थे. 77 में वे कर्पूरी जी के मंत्रिमंडल में सिंचाई मंत्री थे. उनकी सोहरत थी. बहुत साफ और बेलौस बोलते थे.सम्मेलन का समय पास आ रहा था. लेकिन सम्मेलन स्थल यानी कॉलोनी का बचाखुचा काम पूरा करने में अफ़सर तत्परता नहीं दिखा रहे थे. तय हुआ कि मुख्यमंत्री से मिला जाए. उनसे अनुरोध किया जाए कि वे बाक़ी बचे हुए काम को समय सीमा के अंदर पूरा करा देने के लिए अधिकारियों को सक्रिय करें.मुख्यमंत्री से मुलाक़ात का समय लिया गया. वशिष्ठ भाई (वशिष्ठ नारायण सिंह, सांसद) भी सच्चिदा बाबू के साथ थे. उन्होंने ही यह क़िस्सा सुनाया था.जब ये लोग सीएम चैंबर में दाखिल हुए तो देखा कि मुख्यमंत्री जी फ़ाइल देखने में मशगूल हैं. उन्होंने इन लोगों की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखा. जबकि समय लेकर उनसे मिलने ये लोग गए थे.सच्चिदा बाबू इस उपेक्षा को कहाँ बर्दाश्त करने वाले थे ! उन्होंने चंद्रशेखर बाबू को सुनाने के लिए वशिष्ठ भाई [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="499" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/05/pnc-cm-nitish-in-vc-meet.jpg" alt="" class="wp-image-52530" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/05/pnc-cm-nitish-in-vc-meet.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/05/pnc-cm-nitish-in-vc-meet-350x269.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>CM Nitish</strong></figcaption></figure>



<p>बात पुरानी है लेकिन बहुत दिलचस्प है. चंद्रशेखर सिंह बिहार के थे. उन्हीं दिनों पटना में जनता पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन होना तय हुआ था. कंकड़बाग कॉलोनी में सरकार का हाउसिंग बोर्ड आवास बना रहा था. कॉलोनी लगभग तैयार थी. थोड़ा बहुत काम बाक़ी था. फ़्लैट वग़ैरह अभी ख़ाली थे. बाहर से आने वाले प्रतिनिधियों के ठहरने की समस्या का वहाँ आसानी से समाधान हो जाता था. इसलिए तय हुआ कि सम्मेलन के लिए सबसे उपयुक्त स्थल यही होगा. लेकिन सड़क और पानी का थोड़ा बहुत काम बाक़ी था. संभवतः सच्चिदा बाबू स्वागत समिति के अध्यक्ष थे. 77 में वे कर्पूरी जी के मंत्रिमंडल में सिंचाई मंत्री थे. उनकी सोहरत थी. बहुत साफ और बेलौस बोलते थे.<br>सम्मेलन का समय पास आ रहा था. लेकिन सम्मेलन स्थल यानी कॉलोनी का बचाखुचा काम पूरा करने में अफ़सर तत्परता नहीं दिखा रहे थे. तय हुआ कि मुख्यमंत्री से मिला जाए. उनसे अनुरोध किया जाए कि वे बाक़ी बचे हुए काम को समय सीमा के अंदर पूरा करा देने के लिए अधिकारियों को सक्रिय करें.<br>मुख्यमंत्री से मुलाक़ात का समय लिया गया. वशिष्ठ भाई (वशिष्ठ नारायण सिंह, सांसद) भी सच्चिदा बाबू के साथ थे. उन्होंने ही यह क़िस्सा सुनाया था.<br>जब ये लोग सीएम चैंबर में दाखिल हुए तो देखा कि मुख्यमंत्री जी फ़ाइल देखने में मशगूल हैं. उन्होंने इन लोगों की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखा. जबकि समय लेकर उनसे मिलने ये लोग गए थे.<br>सच्चिदा बाबू इस उपेक्षा को कहाँ बर्दाश्त करने वाले थे ! उन्होंने चंद्रशेखर बाबू को सुनाने के लिए वशिष्ठ भाई से कहा &#8216;जानते हो वशिष्ठ, यह जो कुर्सी है, है तो अस्थायी. लेकिन इस पर बैठने वाले को ग़लतफ़हमी हो जाती है कि यह स्थायी है&#8217;. सच्चिदा बाबू की यह बात चंद्रशेखर बाबू को करेंट की तरह लगी. तुरंत कुर्सी से उठ कर खड़े हुए. इन लोगों को बैठाया. समस्या पूछी. विभाग के संबंधित पदाधिकारियों को बुलाकर सारी समस्याओं का तय सीमा के अंदर समाधान का निर्देश दिया.<br>इस प्रकार जनता पार्टी का वह राष्ट्रीय सम्मेलन बहुत बढ़िया से संपन्न हो गया.. लेकिन सच्चिदा बाबू ने कुर्सी को लेकर जो बात कही थी वह तो लगभग शाश्वत है. पता नहीं वशिष्ठ भाई ने यह कहानी कभी नीतीश को सुनाई है या नहीं ! </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="547" src="https://www.patnanow.com/assets/2018/01/pnc-shivanand-tiwari-650x547.jpg" alt="" class="wp-image-28150" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2018/01/pnc-shivanand-tiwari-650x547.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2018/01/pnc-shivanand-tiwari-350x294.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2018/01/pnc-shivanand-tiwari.jpg 660w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong><em>शिवानन्द तिवारी</em></strong></figcaption></figure>



<p><strong><em>शिवानन्द तिवारी</em></strong></p>
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		<title>नीतीश सरकार में बढ़ रहा अंतर्विरोध-शिवानन्द</title>
		<link>https://www.patnanow.com/shivanand-on-nitish/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Dec 2021 16:56:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[shivanand on nitish]]></category>
		<category><![CDATA[shivanand tiwari]]></category>
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					<description><![CDATA[उप मुख्यमंत्री के लिए विशेष राज्य का दर्जा कोई मायने नहीं भाजपा विधायक की सड़क पर नमाज़ पढ़ने पर प्रतिबंध की मांग ऐसी आक्रात्मकता अभी और बढ़ेगी अब देखना है नीतीश में कितनी है सहन शक्ति यहाँ सुने &#8211; नीतीश सरकार में अंतर्विरोध दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है. अंतर्विरोध सामान्य प्रकृति का नहीं है. बल्कि कुछ मूल मान्यताओं को लेकर है. नीतीश जी के एक नज़दीकी मंत्री का बयान है कि बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में ले आने के लिए विशेष राज्य का दर्जा ज़रूरी है. दूसरी ओर सरकार की उप मुख्यमंत्री कह रहीं हैं कि विशेष राज्य का दर्जा कोई मायने नहीं रखता है. उनके अनुसार केंद्र की सरकार बिहार को विशेष राज्य के दर्जे से ज़्यादा सहायता दे रही है. पैसे से लेकर योजनाओं के मामले में केंद्र सरकार बिहार को भरपूर राशि दे रही है. उनके कहना है कि विशेष राज्य का दर्जा मिलने से जितनी राशि बिहार को मिलती उससे अधिक राशि अभी मिल रही है. ऐसे में उनके लिए विशेष राज्य के दर्जा का कोई मतलब नहीं है. सरकार में गंभीर अंतर्विरोध की दूसरी ख़बर नीतीश मंत्रिमंडल के एक सदस्य के बयान से भी मिल रही है. उक्त मंत्री ने सड़क पर नमाज़ पढ़ने को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री के फ़ैसले का समर्थन किया है . उनका मानना है कि सड़क पर नमाज़ पढ़ने से अराजकता फैलती है और इसकी अनुमति किसी को नहीं मिलनी चाहिए. वहीं भाजपा के एक विधायक, जो अपने सांप्रदायिक बयानों को लेकर सुर्ख़ीयों में रहते हैं, उन्होंने भी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>उप मुख्यमंत्री के लिए विशेष राज्य का दर्जा कोई मायने नहीं</strong></p>



<p><strong>भाजपा विधायक की सड़क पर नमाज़ पढ़ने पर प्रतिबंध की मांग</strong></p>



<p><strong>ऐसी आक्रात्मकता अभी और बढ़ेगी</strong></p>



<p><strong>अब देखना है नीतीश में कितनी है सहन शक्ति</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/12/shivanand_pnc.jpg" alt="" class="wp-image-57686" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/12/shivanand_pnc.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/12/shivanand_pnc-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>यहाँ सुने &#8211;</p>



<figure class="wp-block-audio"><audio controls src="https://www.patnanow.com/assets/2021/12/shivanand.mp3"></audio><figcaption><strong>शिवानन्द तिवारी के आलेख का ऑडियो</strong></figcaption></figure>



<p>नीतीश सरकार में अंतर्विरोध दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है. अंतर्विरोध सामान्य प्रकृति का नहीं है. बल्कि कुछ मूल मान्यताओं को लेकर है. नीतीश जी के एक नज़दीकी मंत्री का बयान है कि बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में ले आने के लिए विशेष राज्य का दर्जा ज़रूरी है. दूसरी ओर सरकार की उप मुख्यमंत्री कह रहीं हैं कि विशेष राज्य का दर्जा कोई मायने नहीं रखता है. उनके अनुसार केंद्र की सरकार बिहार को विशेष राज्य के दर्जे से ज़्यादा सहायता दे रही है. पैसे से लेकर योजनाओं के मामले में केंद्र सरकार बिहार को भरपूर राशि दे रही है. उनके कहना है कि विशेष राज्य का दर्जा मिलने से जितनी राशि बिहार को मिलती उससे अधिक राशि अभी मिल रही है. ऐसे में उनके लिए विशेष राज्य के दर्जा का कोई मतलब नहीं है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="548" height="255" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/12/shivanand-1.png" alt="" class="wp-image-57687" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/12/shivanand-1.png 548w, https://www.patnanow.com/assets/2021/12/shivanand-1-350x163.png 350w" sizes="(max-width: 548px) 100vw, 548px" /></figure>



<p>सरकार में गंभीर अंतर्विरोध की दूसरी ख़बर नीतीश मंत्रिमंडल के एक सदस्य के बयान से भी मिल रही है. उक्त मंत्री ने सड़क पर नमाज़ पढ़ने को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री के फ़ैसले का समर्थन किया है . उनका मानना है कि सड़क पर नमाज़ पढ़ने से अराजकता फैलती है और इसकी अनुमति किसी को नहीं मिलनी चाहिए. वहीं भाजपा के एक विधायक, जो अपने सांप्रदायिक बयानों को लेकर सुर्ख़ीयों में रहते हैं, उन्होंने भी सड़क पर नमाज़ पढ़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है.</p>



<p>लेकिन इन बयानों के विपरीत मुख्यमंत्रीजी कि आज छपी एक तस्वीर अलग संदेश दे रही है. मुख्यमंत्री जी एक दरगाह पर चादर चढ़ाने जा रहे हैं. चादर टोकरी में है और ठोकरी मुख्यमंत्रीजी के सर पर. यह तस्वीर जो संदेश दे रही है वह उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी, जो सड़क पर नमाज़ पढ़ने से अराजकता फैलने की बात कर रहे हैं, इसके बिलकुल विपरीत है. नीतीश जी जिस गठबंधन की सरकार चला रहे हैं उसमें विचारों में मूल मतभेद नया नहीं है. नयापन विचारों को प्रकट करने के आक्रामक अंदाज़ में है. आगे यह आक्रामकता बढ़ने वाली है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सत्ता में बने रहने के लिए नीतीश जी में सहन शक्ति कितनी है. </p>



<p><strong>पूर्व राज्य सभा सदस्य शिवानन्द तिवारी के फेसबुक वाल से साभार</strong></p>



<p></p>
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		<title>आरोप हमेशा तर्क हीन और बेमलतब होते हैं -शिवानन्द तिवारी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/shivanand-speaks/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Jul 2021 08:40:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[rjd]]></category>
		<category><![CDATA[shivanand tiwari]]></category>
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					<description><![CDATA[सत्ता में बैठे लोगों को प्रतिपक्ष के आरोप हमेशा तर्क हीन और बेमतलब लगते हैं. जैसे वशिष्ठ भाई को तेजस्वी के आरोप तर्कहीन लगते हैं. लेकिन तेजस्वी की बात को फिलहाल दरकिनार भी कर दीजिए तो मदन साहनी, रामप्रीत पासवान और ज्ञानू की बात पर वशिष्ठ भाई क्या कहेंगे ! ये तो आपकी सरकार के लोग हैं. मदन साहनी तो बता रहे हैं कि अपनी बात को सार्वजनिक करने के पहले उन्होंने हर दरवाजे को खटखटाया. जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तब उन्होंने अपनी पीड़ा सार्वजनिक की है.मदन साहनी कमजोर समाज से आते हैं. अगर कमजोर समाज से आने वाले मंत्रिमंडल के सदस्य अपनी पीड़ा सार्वजनिक करने का साहस करें तो उनकी व्यथा भी मदन साहनी जी से अलग नहीं होगी.अस्पतालों में ब्लैक फंगस का इंजेक्शन नहीं मिल रहा है. इंजेक्शन के अभाव में लोग मर जा रहे हैं. यह खबर तो प्रमुखता से अखबारों में छपी है. इंजेक्शन क्यों नहीं मिल रहा है यह बताने वाला कोई नहीं है. न विभागीय मंत्री न विभागीय पदाधिकारी. यह तो आपराधिक कृत्य है. इस खबर पर बशिष्ठ भाई क्या कहेंगे !जानकारी मिली कि महाराष्ट्र में भी ब्लैक फंगस का उत्पात है. लेकिन इसके उपचार के लिए जिस इंजेक्शन की जरूरत है उसको बनाने वाली कंपनी से वहां की सरकार ने सीधे बात की और अपनी जरूरत के हिसाब से उन्होंने इंजेक्शन आपूर्ति का आदेश दिया. लेकिन बिहार की सरकार केंद्र के भरोसे हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है.कोरोना के टीकाकरण का महा अभियान शुरू होने की खबर छपती है. अगले ही [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>सत्ता में बैठे लोगों को प्रतिपक्ष के आरोप हमेशा तर्क हीन और बेमतलब लगते हैं. जैसे वशिष्ठ भाई को तेजस्वी के आरोप तर्कहीन लगते हैं. लेकिन तेजस्वी की बात को फिलहाल दरकिनार भी कर दीजिए तो मदन साहनी, रामप्रीत पासवान और ज्ञानू की बात पर वशिष्ठ भाई क्या कहेंगे ! ये तो आपकी सरकार के लोग हैं. मदन साहनी तो बता रहे हैं कि अपनी बात को सार्वजनिक करने के पहले उन्होंने हर दरवाजे को खटखटाया. जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तब उन्होंने अपनी पीड़ा सार्वजनिक की है.<br><strong>मदन साहनी कमजोर समाज से आते हैं. अगर कमजोर समाज से आने वाले मंत्रिमंडल के सदस्य अपनी पीड़ा सार्वजनिक करने का साहस करें तो उनकी व्यथा भी मदन साहनी जी से अलग नहीं होगी.<br>अस्पतालों में ब्लैक फंगस का इंजेक्शन नहीं मिल रहा है. इंजेक्शन के अभाव में लोग मर जा रहे हैं. यह खबर तो प्रमुखता से अखबारों में छपी है. इंजेक्शन क्यों नहीं मिल रहा है यह बताने वाला कोई नहीं है. न विभागीय मंत्री न विभागीय पदाधिकारी. यह तो आपराधिक कृत्य है. इस खबर पर बशिष्ठ भाई क्या कहेंगे !<br>जानकारी मिली कि महाराष्ट्र में भी ब्लैक फंगस का उत्पात है. लेकिन इसके उपचार के लिए जिस इंजेक्शन की जरूरत है उसको बनाने वाली कंपनी से वहां की सरकार ने सीधे बात की और अपनी जरूरत के हिसाब से उन्होंने इंजेक्शन आपूर्ति का आदेश दिया. लेकिन बिहार की सरकार केंद्र के भरोसे हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है.<br>कोरोना के टीकाकरण का महा अभियान शुरू होने की खबर छपती है. अगले ही दिन पता चलता है कि टीका के अभाव में टीकाकरण के कई केंद्र बंद हो चुके हैं. क्यों कि केंद्र की सरकार समय पर वैक्सीन की आपूर्ति नहीं कर पाती है. लेकिन कभी भी यह बात सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री या स्वास्थ्य मंत्री कबूल नहीं करते हैं. एक समय तो नीतीश जी नरेंद्र मोदी जी के सामने नहला पर दहला मारा करते थे. आजकल तो उनका व्यवहार भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्रियों की तरह हो गया है. इसलिए वशिष्ठ भाई से तो अपेक्षा होती है कि कम से कम वे सही सही बात बोला करें</strong>. वरीय नेता हैं. सरकार की गलतियों पर टोकाटोकी करें. दिल्ली सरकार बिहार के साथ जो भेदभाव करती है उसको भी सार्वजनिक ढंग से उठाया करें. </p>



<p>फेसबुक वॉल से साभार </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="640" height="480" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/images-29.jpeg" alt="" class="wp-image-53684" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/images-29.jpeg 640w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/images-29-350x263.jpeg 350w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /><figcaption><a href="https://www.patnanow.com/subscribe-to-patnanow-on-youtube/" data-type="post" data-id="28062">Subscribe to PatnaNow on YouTube</a></figcaption></figure>
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		<title>&#8216;राजनीतिक वजूद बचाने के लिए नीतीश फिर उठा रहे विशेष राज्य की मांग&#8217;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/shivanand-attacks-nitish-again/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 May 2018 05:50:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[NITISH]]></category>
		<category><![CDATA[shivanand tiwari]]></category>
		<category><![CDATA[vishesh rajya]]></category>
		<category><![CDATA[नीतीश कुमार]]></category>
		<category><![CDATA[विशेष राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[शिवानंद तिवारी]]></category>
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					<description><![CDATA[राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला है. शिवानंद ने कहा कि जदयू को अब अहसास हो रहा है कि बिहार के साथ अन्याय हो रहा है. अब तक हुए अन्याय और शोषण के प्रतिकार के रूप में ही बिहार के लिए विशेष श्रेणी के राज्य की माँग है. हमें याद है कि जब मनमोहन सिंह जी की सरकार थी तब विशेष राज्य के एवज़ में नीतीश कुमार उनको समर्थन देने के लिए तैयार थे. राजद नेता ने पूछा है कि इस बार जब महागठबंधन छोड़कर वे पुन: जब नीतीश कुमार भाजपा के साथ गए तो उसी समय नरेंद्र मोदी से विशेष श्रेणी के राज्य का क़रार उन्होने क्यों नहीं करवा लिया था. महागठबंधन छोड़कर जाने के बाद नीतीश मौन थे. इधर अचानक सामाजिक सदभाव और विशेष श्रेणी के राज्य की चिंता उनको सताने लगी है. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी से नीतीश कुमार को जो अपेक्षा थी वह पूरी नहीं हो रही है. राजनीतिक वजूद का संकट है. उपचुनावों का नतीजा बता रहा है कि वोट का जो भी उनका आधार था वह खिसक चुका है. राजनीतिक वजूद बचाने के लिए यह सब दिखावा हो रहा है. लेकिन अब नीतीश जी चाहे जो भी क़वायद कर लें इसका कोई नतीजा नहीं निकलने वाला है. &#160; राजेश तिवारी]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला है. शिवानंद ने कहा कि जदयू को अब अहसास हो रहा है कि बिहार के साथ अन्याय हो रहा है. अब तक हुए अन्याय और शोषण के प्रतिकार के रूप में ही बिहार के लिए विशेष श्रेणी के राज्य की माँग है. हमें याद है कि जब मनमोहन सिंह जी की सरकार थी तब विशेष राज्य के एवज़ में नीतीश कुमार उनको समर्थन देने के लिए तैयार थे.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-28150" src="http://www.patnanow.com/assets/2018/01/pnc-shivanand-tiwari-350x294.jpg" alt="" width="350" height="294" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2018/01/pnc-shivanand-tiwari-350x294.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2018/01/pnc-shivanand-tiwari-650x547.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2018/01/pnc-shivanand-tiwari.jpg 660w" sizes="(max-width: 350px) 100vw, 350px" /><br />
राजद नेता ने पूछा है कि इस बार जब महागठबंधन छोड़कर वे पुन: जब नीतीश कुमार भाजपा के साथ गए तो उसी समय नरेंद्र मोदी से विशेष श्रेणी के राज्य का क़रार उन्होने क्यों नहीं करवा लिया था. महागठबंधन छोड़कर जाने के बाद नीतीश मौन थे. इधर अचानक सामाजिक सदभाव और विशेष श्रेणी के राज्य की चिंता उनको सताने लगी है.</p>
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उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी से नीतीश कुमार को जो अपेक्षा थी वह पूरी नहीं हो रही है. राजनीतिक वजूद का संकट है. उपचुनावों का नतीजा बता रहा है कि वोट का जो भी उनका आधार था वह खिसक चुका है. राजनीतिक वजूद बचाने के लिए यह सब दिखावा हो रहा है. लेकिन अब नीतीश जी चाहे जो भी क़वायद कर लें इसका कोई नतीजा नहीं निकलने वाला है.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राजेश तिवारी</p>
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