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	<title>Shaileshkumarrai &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>…तो सिर्फ सोशल मीडिया तक ही &#8220;महिला दिवस&#8221; की सार्थकता !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Mar 2021 07:45:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पोस्टरों में जिन्हें समानता नही उनके जीवन मे कैसे आएगी समानता ? आरा, 8 मार्च. आज विश्व महिला दिवस है जिसपर अहले सुबह से ही सोशल मीडिया पर तमाम तरह के मैसेजेज और पोस्ट देखने को मिल रहे हैं. सोशल मीडिया अंधाधुंध पोस्ट शेयर की जैसे बाजी लगी हो वैसा प्रतीत हो रहा है. कोई किसी के मैसेज को फारवर्ड कर रहा है तो कोई शेयर कर रहा है. कोई कॉपी-पेस्ट से काम चला रहा है तो कोई सहित्यिक किताबो के पन्ने पलट अच्छी लाइनें खोज प्रभावी बातों को शेयर करने के लिए माथापच्ची कर रहा है. इन सबके बीच एक युवा और ऊर्जावान समाजिक कार्यकर्ता है जो बातें कम और काम पर अपने ध्यान को केंद्रित रखता है उसने बातें महिला दिवस को लेकर लिखी है। ऊर्जावान और युवाओं के बीच अपने कार्यों को लेकर चर्चित युवा कोई और नही बल्कि जिले के ही शैलेश कुमार राय हैं. शैलेश को सामाजिक कार्य के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक ने सम्मानित किया है. आइये जानते हैं क्या सोचते हैं शैलेश महिलाओं के लिए और उनके बारे में जो सालों तक चुप्पी के बाद सिर्फ महिलाओं के दिवस के दिन उनका हितैषी बनकर सोशल मीडिया पर मैसेजासुर बन जाते हैं. आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है,सुबह से ही सोशल मीडिया पर अनेकों शेरो-शायरी के साथ शुभकामनाएं मिल रहे है,अच्छा लगता है देखकर आज व्यस्ततम भरे दौर में हम कम-से-कम दिवसों को सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से मना कर अपनी प्रवृत्ति जाहिर कर देते है. लेकिन आज महिला दिवस है और सोशल मीडिया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पोस्टरों में जिन्हें समानता नही उनके जीवन मे कैसे आएगी समानता ?</strong></p>



<p class="has-drop-cap has-vivid-purple-color has-text-color">आरा, 8 मार्च. आज विश्व महिला दिवस है जिसपर अहले सुबह से ही सोशल मीडिया पर तमाम तरह के मैसेजेज और पोस्ट देखने को मिल रहे हैं. सोशल मीडिया अंधाधुंध पोस्ट शेयर की जैसे बाजी लगी हो वैसा प्रतीत हो रहा है. कोई किसी के मैसेज को फारवर्ड कर रहा है तो कोई शेयर कर रहा है. कोई कॉपी-पेस्ट से काम चला रहा है तो कोई सहित्यिक किताबो के पन्ने पलट अच्छी लाइनें खोज प्रभावी बातों को शेयर करने के लिए माथापच्ची कर रहा है. इन सबके बीच एक युवा और ऊर्जावान समाजिक कार्यकर्ता है जो बातें कम और काम पर अपने ध्यान को केंद्रित रखता है उसने बातें महिला दिवस को लेकर लिखी है। ऊर्जावान और युवाओं के बीच अपने कार्यों को लेकर चर्चित युवा कोई और नही बल्कि जिले के ही <strong>शैलेश कुमार राय </strong>हैं. शैलेश को सामाजिक कार्य के लिए <strong><em>राष्ट्रपति</em></strong> और <strong><em>प्रधानमंत्री</em></strong> तक ने सम्मानित किया है. आइये जानते हैं क्या सोचते हैं <strong>शैलेश</strong> महिलाओं के लिए और उनके बारे में जो सालों तक चुप्पी के बाद सिर्फ महिलाओं के दिवस के दिन उनका हितैषी बनकर सोशल मीडिया पर मैसेजासुर बन जाते हैं. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="565" height="480" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/03/IMG-20210308-WA0008.jpg" alt="" class="wp-image-51186" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/03/IMG-20210308-WA0008.jpg 565w, https://www.patnanow.com/assets/2021/03/IMG-20210308-WA0008-350x297.jpg 350w" sizes="(max-width: 565px) 100vw, 565px" /></figure>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color">आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है,सुबह से ही सोशल मीडिया पर अनेकों शेरो-शायरी के साथ शुभकामनाएं मिल रहे है,अच्छा लगता है देखकर आज व्यस्ततम भरे दौर में हम कम-से-कम दिवसों को सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से मना कर अपनी प्रवृत्ति जाहिर कर देते है. लेकिन आज महिला दिवस है और सोशल मीडिया चलाने वाले प्रत्येक व्यक्ति एक दूसरे के पोस्ट पर इससे संबंधित मैसेज चिपकाये जा रहे है, दिवसों को सोशल मीडिया पर मनाते हुए देखने के पश्चात तो यह प्रतीत होता है कि हम 21 वी सदी में प्रवेश कर गए है जहाँ सभी को एक समान अधिकार प्राप्त होते है. इसी कड़ी में महिलाओं को भी उनके अधिकार दूसरों के अपेक्षा प्राप्त होते है,लेकिन हमारा समाज इस सोच को कहाँ तक अपनाता है? क्या इस देश की आधी आबादी आज अपने अधिकारों की सही पुनरावृत्ति कर जी पाती है?</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color">मैं किसी पर सवाल खड़ा नही करना चाहता,अभी बिहार में पंचायती चुनाव होने वाले है जहाँ-जहाँ महिला आरक्षित सीट है उन जगहों पर लगे पोस्टरों पर उस महिला प्रत्याशी से बड़ा फ़ोटो उसके पति का लगा हुआ है. यही नही, अगर वो महिला चुनाव जीत भी गई तो प्रधानी उसके पति ही करते है. मेरा कहने का तात्पर्य साफ है हम दिवसों को सही ढंग से तो मनाते है लेकिन जब अधिकारों व विचारों की बात आती है तो हमारे समाज का एक हिस्सा आज भी पुरुषवादी सोच को अपनाकर महिलाओं के उनके अधिकारो को दबा देता है. इसका गुनहगार हम,आप और कोई एक व्यक्ति नही है. इसका गुनाहगार हमारे समाज की विकृत सोच है और इस सोच को जब तक हम अपने मन से नही निकाल पायेंगे, तब तक महिलाओं के सम्मान व अधिकार की बड़ी बात करना हमारे लिए गलत है. आज हमारे समाज की कोई महिला अकेले घरों से एक जगह से दूसरे जगह नही जा सकती. उन्हें जब भी अपने घरों से निकलना पड़ता है तो उन्हें हमेशा किसी पुरुष को साथ रखना पड़ता है? क्या ये समानता है? जिसे हम अपने सोशल मीडिया पर दिखाते है.</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color">आप सभी से विनती है आइये इस महिला दिवस पर एक संकल्प ले सबसे पहले अपने घर की महिलाओं को उनके अधिकार व सम्मान को आगे रखकर कार्य करें. यकीन मानिये, वह दिन अपने देश के भविष्य लिए दुर्गामी साबित होगा.</p>



<p class="has-cyan-bluish-gray-color has-text-color">संकलन : <strong>ओ पी पांडेय</strong>   </p>



<p class="has-cyan-bluish-gray-color has-text-color">प्रस्तुति: <strong>पटना नाउ</strong></p>
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