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		<title>खतरे में पड़े VKSU के अस्तित्व को मिला हाथों का सहारा, बनी मानव श्रृंखला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Feb 2023 03:32:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जनता ने थामा एक दूसरे का हाथ, विश्वविद्यालय को बचाने के लिए एकजुट हुए आम जन कृषि विभाग स्काडा की भूमि प्राप्ति के लिए आयोजित हुई विशाल मानव श्रृंखला आरा,21 फरवरी. विश्विद्यालय की जमीन को बन्दरबाँट कर अलग-अलग महाविद्यालयों के लिए भूमि को आवंटन के बाद अब VKSU के पास तय मानक के अनुसार विवि की अपनी भूमि नही बच गयी है जिसके बाद VKSU के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है. अब विवि के लिए तय पैमाने पर अगर विवि ही नही रहेगा तो इसके अधीन महाविद्यालयों के पैमाने का क्या होगा इसकी कल्पना की जा सकती है. विवि को आवंटित भूमि पर मेडिकल और कृषि विवि बनाने का आदेश तो पारित हो गया जिसमें मेडिकल कॉलेज के लिए काम भी शुरू हो गया. आलम ये है कि उस भूमि पर पहले से लगे 6200 पेड़ों को बिना वन विभाग की अनुमति के बगैर काट भी दिया गया. जब छात्रों ने पर्यावरण के इस मुद्दे पर आवाज उठाया तो इसे मेडिकल कॉलेज के विरोध का स्वर सरकार द्वारा माना जाने लगा. जबकि हकीकत यह है कि भोजपुर जिले में मेडिकल, इंजीनियरिंग या कृषि महाविद्यालय के निर्माण के लिए सभी उसके पक्ष में हैं लेकिन क्या पर्यावरण और विवि के अस्तित्व को नजरअंदाज कर नए निर्माण का होना सही है? इन्ही मुद्दों पर जिले के आम जन और बुद्धिजीवियों ने सोमवार को VKSU के अस्तित्व को बचाने के लिए एक दूसरे का हाथ थाम मानव श्रृंखला बनाया. मानव श्रृंखला में जुटे लोगों ने पटना नाउ को बताया कि सरकार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जनता ने थामा एक दूसरे का हाथ, विश्वविद्यालय को बचाने के लिए एकजुट हुए आम जन</strong></p>



<p><strong>कृषि विभाग स्काडा की भूमि प्राप्ति के लिए आयोजित हुई विशाल मानव श्रृंखला</strong></p>



<p>आरा,21 फरवरी. विश्विद्यालय की जमीन को बन्दरबाँट कर अलग-अलग महाविद्यालयों के लिए भूमि को आवंटन के बाद अब VKSU के पास तय मानक के अनुसार विवि की अपनी भूमि नही बच गयी है जिसके बाद VKSU के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है. अब विवि के लिए तय पैमाने पर अगर विवि ही नही रहेगा तो इसके अधीन महाविद्यालयों के पैमाने का क्या होगा इसकी कल्पना की जा सकती है. विवि को आवंटित भूमि पर मेडिकल और कृषि विवि बनाने का आदेश तो पारित हो गया जिसमें मेडिकल कॉलेज के लिए काम भी शुरू हो गया. आलम ये है कि उस भूमि पर पहले से लगे 6200 पेड़ों को बिना वन विभाग की अनुमति के बगैर काट भी दिया गया. जब छात्रों ने पर्यावरण के इस मुद्दे पर आवाज उठाया तो इसे मेडिकल कॉलेज के विरोध का स्वर सरकार द्वारा माना जाने लगा. जबकि हकीकत यह है कि भोजपुर जिले में मेडिकल, इंजीनियरिंग या कृषि महाविद्यालय के निर्माण के लिए सभी उसके पक्ष में हैं लेकिन क्या पर्यावरण और विवि के अस्तित्व को नजरअंदाज कर नए निर्माण का होना सही है? इन्ही मुद्दों पर जिले के आम जन और बुद्धिजीवियों ने सोमवार को VKSU के अस्तित्व को बचाने के लिए एक दूसरे का हाथ थाम मानव श्रृंखला बनाया. मानव श्रृंखला में जुटे लोगों ने पटना नाउ को बताया कि सरकार से हमारी मांग इतनी ही है कि विवि के लिए निर्धारित भूमि को सरकार कायम रखे ताकि वर्षों आंदोलन के बाद बने VKSU के अस्तित्व पर कोई आंच नही आये. लोगों की मांग थी कि कृषि विभाग की भूमि से कुछ हिस्से विवि को आवंटित किया जाए ताकि VKSU का अस्तित्व बरकरार रहे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="346" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Manav-shrikhla-for-VKSU.jpg" alt="" class="wp-image-71687" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Manav-shrikhla-for-VKSU.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Manav-shrikhla-for-VKSU-350x186.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सोमवार को वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पुराने परिसर में कृषि विभाग स्काडा की भूमि को विश्वविद्यालय के नाम हस्तांतरित करने की माँग को लेकर मानव श्रृंखला आयोजित की गयी. वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा पर सुबह से ही शिक्षकों, छात्रों और आम नागरिकों का जुटान शुरु हो गया. पूर्व से निर्धारित 11 बजे से शुरु हुई इस मानव श्रृंखला में धीरे-धीरे शाहाबाद के विभिन्न जिलों से आये अंगीभूत एवं सम्बद्ध कॉलेजों के शिक्षक, छात्र, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं आम नागरिकों ने एक दूसरे का हाथ थामा और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों के समर्थन में खड़े हो गए. विरोध के मानक के रूप में वे इस तरह आधे घण्टे तक मानव श्रृंखला के रूप में साथ खड़े रहे. इस सर्वदलीय मानव श्रृंखला का आयोजन वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय भूमि प्राप्ति अभियान समिति के बैनर तले हुआ.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="357" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Manav-shrikhla-for-VKSU-1.jpg" alt="" class="wp-image-71688" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Manav-shrikhla-for-VKSU-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Manav-shrikhla-for-VKSU-1-350x192.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अभियान समिति की मांग है कि मेडिकल कॉलेज को जीरो माईल पर दी गयी भूमि के बदले विश्वविद्यालय को पुराने परिसर से सटे जापानी फॉर्म की भूमि दे दी जाये ताकि विश्वविद्यालय का स्वरूप क़ायम रहे. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="361" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Dr-Vinod-singh-senator-VKSU.jpg" alt="" class="wp-image-71690" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Dr-Vinod-singh-senator-VKSU.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Dr-Vinod-singh-senator-VKSU-350x194.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अभियान समिति के सदस्य सीनेटर डॉ विनोद कुमार सिंह ने कहा कि हम ना तो मेडिकल कॉलेज का विरोध कर रहे हैं और ना ही केंद्र एवं राज्य सरकार का. उन्होंने कहा कि हम लम्बे संघर्ष के बाद स्थापित विश्वविद्यालय के अस्तित्व को बचाने के समर्थन में हैं. जापानी फॉर्म की भूमि विश्वविद्यालय को केंद्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से ही मिलेगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="384" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_prof.-Baliraj-Thakur-VKSU.jpg" alt="" class="wp-image-71689" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_prof.-Baliraj-Thakur-VKSU.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_prof.-Baliraj-Thakur-VKSU-350x207.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अध्यक्षता कर रहे प्रो बलिराज ठाकुर ने कहा कि शाहाबाद का विकास तभी सम्भव है जब विश्वविद्यालय की गरिमा बची रहेगी.</p>



<p>सामाजिक कार्यकर्ता विजय मेहता और भोजपुरिया जन मोर्चा के कुमार शीलभद्र ने आह्वान किया कि विश्वविद्यालय के अस्तित्व पर आये संकट के समाधान के लिए शाहाबाद के जन प्रतिनिधियों की पहल आवश्यक है.</p>



<p>मानव श्रृंखला में विश्वविद्यालय के शिक्षक दिवाकर पाण्डेय, के के सिंह, अवध बिहारी चौधरी, जमील अख्तर, दूधनाथ चौधरी, उमेश कुमार, कुंदन कुमार, सुधा निकेतन रंजनी, निलंबुज सिंह, प्रसूंजय सिन्हा, अंकुर त्रिपाठी, प्रसूंजय सिन्हा, आनंद भूषण पाण्डेय आदि के साथ विभिन्न छात्र संगठनों में आइसा के शबीर कुमार, पप्पू कुमार, एन एस यू आई के मुनमुन तिवारी, नवीन शंकर पाठक, छात्र जदयू के कृष्णा तिवारी, मुन्नू यादव, अभिषेक मेहता, ए बी वी पी के सोहित सिन्हा के अलावा, अमित सम्राट, गुड्डू बबुआन, रिज़वान, अविनाश मिश्र, रवि शंकर सिंह आदि शामिल थे.</p>



<p>मानव श्रृंखला की समाप्ति के बाद अभियान समिति की आम बैठक भोजपुरी विभाग में हुई. बैठक को सम्बोधित करते हुए भाई दिनेश ने कहा कि यह मांग बिल्कुल उचित है तथा इस अभियान को उन्होंने अपना समर्थन दिया. बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि चरणबद्ध तरीके से गांधीवादी स्वरूप में यह आंदोलन तब तक चलता रहेगा जब तक केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान इस मुद्दे पर आकृष्ट ना हो जाये और वे छात्रहित में जापानी फॉर्म की भूमि विश्वविद्यालय को हस्तांतरित ना कर दे. बैठक में जदयू के प्रदेश महासचिव मुकेश सिंह, कुंवर वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष धीरज कुमार सिंह उर्फ़ लव जी ने शिक्षा के इस संघर्ष में जन-जन को जुड़ने का आह्वान किया.</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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