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	<title>SDO Ara &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>न क्लर्क, न स्टेनो…फिर भी 15 साल तक SDO ऑफिस का करता रहा मैनेजमेंट !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/neither-a-clerk-nor-a-stenographer-yet-managed-the-sdo-office-for-15-years/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 08:20:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[SDO कार्यालय में नियमों की धज्जियां! प्रतिनियुक्ति पर कार्य करने वाले सभी कार्यालयों में विकास मित्रों की प्रतिनियुक्ति हुई रद्दविकास मित्र अब अपने वार्ड और पंचायतों में ही करेंगे कार्य आरा, 2 फरवरी। आरा सदर SDO कार्यालय में नियमों और प्रशासनिक मर्यादाओं को खुलेआम ताक पर रखे जाने का एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वार्ड नंबर 24 के विकास मित्र के पद से जुड़े रवि कुमार बीते लगभग डेढ़ दशक (15 वर्ष) तक लगातार SDO कार्यालय में जमे रहे, जबकि उनकी तैनाती से संबंधित आज तक कोई वैध विभागीय आदेश, डेप्युटेशन पत्र या आधिकारिक रिकॉर्ड सामने नहीं आ सका है। मामला मीडिया में आने के बाद अब प्रतिनियुक्ति पर कार्य करने वाले सभी कार्यालयों में विकास मित्रों की प्रतिनियुक्ति SDO शिप्रा विजय चौधरी ने रद्द करते हुए उन्हें अपने वार्ड और पंचायतों में ही कार्य करने का आदेश जारी किया है। सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी का डेप्युटेशन सामान्यतः तीन वर्ष के लिए होता है और विशेष परिस्थितियों में इसे अधिकतम सात वर्ष तक ही बढ़ाया जा सकता है। इसके बावजूद रवि कुमार इन सभी नियमों और सीमाओं को धता बताते हुए लगभग 15 वर्षों तक एक ही कार्यालय और एक ही कुर्सी पर काबिज रहे। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक न तो उनकी तैनाती पर कोई ठोस सवाल उठा और न ही किसी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई हुई। कल्याण विभाग ने झाड़ा पल्लामामले में स्थिति स्पष्ट करने पर जिला कल्याण पदाधिकारी नवीन कुमार ने साफ तौर पर कहा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>SDO कार्यालय में नियमों की धज्जियां!<br></strong><br><br><strong>प्रतिनियुक्ति पर कार्य करने वाले सभी कार्यालयों में विकास मित्रों की प्रतिनियुक्ति हुई रद्द<br></strong><br><strong>विकास मित्र अब अपने वार्ड और पंचायतों में ही करेंगे कार्य</strong><br><br>आरा, 2 फरवरी। आरा सदर SDO कार्यालय में नियमों और प्रशासनिक मर्यादाओं को खुलेआम ताक पर रखे जाने का एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वार्ड नंबर 24 के विकास मित्र के पद से जुड़े रवि कुमार बीते लगभग डेढ़ दशक (15 वर्ष) तक लगातार SDO कार्यालय में जमे रहे, जबकि उनकी तैनाती से संबंधित आज तक कोई वैध विभागीय आदेश, डेप्युटेशन पत्र या आधिकारिक रिकॉर्ड सामने नहीं आ सका है। मामला मीडिया में आने के बाद अब प्रतिनियुक्ति पर कार्य करने वाले सभी कार्यालयों में विकास मित्रों की प्रतिनियुक्ति SDO शिप्रा विजय चौधरी ने रद्द करते हुए उन्हें अपने वार्ड और पंचायतों में ही कार्य करने का आदेश जारी किया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="566" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941760-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-94702" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941760-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941760-650x359.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941760-1536x848.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br><br>सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी का डेप्युटेशन सामान्यतः तीन वर्ष के लिए होता है और विशेष परिस्थितियों में इसे अधिकतम सात वर्ष तक ही बढ़ाया जा सकता है। इसके बावजूद रवि कुमार इन सभी नियमों और सीमाओं को धता बताते हुए लगभग 15 वर्षों तक एक ही कार्यालय और एक ही कुर्सी पर काबिज रहे। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक न तो उनकी तैनाती पर कोई ठोस सवाल उठा और न ही किसी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई हुई।<br><br><strong>कल्याण विभाग ने झाड़ा पल्ला</strong><br>मामले में स्थिति स्पष्ट करने पर जिला कल्याण पदाधिकारी नवीन कुमार ने साफ तौर पर कहा कि कल्याण विभाग की ओर से रवि कुमार का SDO कार्यालय में कोई डेप्युटेशन आदेश जारी ही नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि रवि कुमार के खिलाफ पहले भी विभागीय स्तर से शिकायत भेजी गई थी, लेकिन उस पर आज तक कोई जवाब नहीं मिला। ऐसे में बड़ा और सीधा सवाल यह खड़ा होता है कि<br>जब विभाग ने भेजा ही नहीं, तो रवि कुमार किस हैसियत से SDO कार्यालय में वर्षों तक काम करता रहा?</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="462" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941761-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-94704" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941761-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941761-650x294.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941761-1536x694.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941761-2048x925.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br><strong>अफसरों की चुप्पी&#8230; जांच सिर्फ आश्वासन तक</strong><br>मामले को लेकर जब जिलाधिकारी और सदर SDO से सवाल किए गए, तो दोनों ही अधिकारी खुलकर कुछ भी कहने से बचते नजर आए। हर बार सिर्फ यही कहा गया कि “मामले की जांच कराई जाएगी”। हालांकि इसके बाद भी न तो जांच की कोई समय-सीमा तय की गई, और न ही यह स्पष्ट किया गया कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी किस अधिकारी की बनती है।<br><br><strong>पूर्व SDO पर ‘फिक्स पोस्टिंग’ का आरोप</strong><br>सूत्रों की मानें तो रवि कुमार की SDO कार्यालय में तैनाती पूर्व के एक SDO द्वारा ‘फिक्स’ कर दी गई थी। हालांकि इस बेहद संवेदनशील दावे पर कल्याण विभाग के अधिकारी भी खुलकर कुछ कहने से बचते रहे और बार-बार यही दोहराते रहे कि “हमारे विभाग से कोई डेप्युटेशन नहीं भेजा गया है”।<br><br><strong>दबाव, धौंस और खामोशी का माहौल</strong><br>सूत्र बताते हैं कि कार्यालय के भीतर जो भी कर्मचारी रवि कुमार की भूमिका या तैनाती पर सवाल उठाने की कोशिश करता, उस पर इतना दबाव बनाया जाता कि मामला वहीं ठंडे बस्ते में चला जाता। सूत्र यह भी बताते हैं कि जब दबाव से काम नहीं बनता, तो रवि कुमार अपना आखिरी हथियार ST/SC का केस करने का दबाव देकर सामने वाले को चुप करा देते। यही वजह रही कि वर्षों तक कोई भी कर्मचारी खुलकर शिकायत दर्ज कराने का साहस नहीं जुटा सका।<br><br><strong>मीडिया पर भी आरोप, लोक शिकायत में शिकायत</strong><br>इतना ही नहीं, जब यह मामला मीडिया में सामने आया तो रवि कुमार ने मीडियाकर्मियों पर पैसे मांगने का आरोप लगाया। इस आरोप की सच्चाई उजागर करने के लिए पत्रकार मनोज कुमार सिंह ने 29 दिसंबर 2025 को लोक शिकायत पदाधिकारी के समक्ष लिखित आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="576" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941751-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-94699" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941751-scaled.jpg 576w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941751-366x650.jpg 366w" sizes="(max-width: 576px) 100vw, 576px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="576" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941752-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-94698" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941752-scaled.jpg 576w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941752-366x650.jpg 366w" sizes="auto, (max-width: 576px) 100vw, 576px" /></figure>



<p><strong>मीडिया में मामला आया, तो बदली तस्वीर</strong><br>मामला मीडिया और लोक शिकायत पदाधिकारी तक पहुंचने के बाद प्रशासन हरकत में आया। 15 जनवरी 2026 को SDO की ओर से लोक शिकायत पदाधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा गया कि विकास मित्र रवि कुमार को विभाग द्वारा आशुलिपिक उपलब्ध नहीं होने के कारण गोपनीय शाखा में विधि-व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सहयोग के लिए रखा गया था अर्थात, साधारण शब्दों में कहें तो गोपनीय शाखा के मैनेजमेंट में सहयोग की जिम्मेदारी रवि कुमार के पास थी। हालांकि अगर इस तर्क को मान भी लिया जाए, तो सवाल उठता है कि रवि कुमार रोज़ाना SDO कार्यालय में आखिर किस भूमिका में काम कर रहे थे?</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941730-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-94700" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941730-scaled.jpg 400w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941730-254x650.jpg 254w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941730-799x2048.jpg 799w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /></figure>



<p><strong><br>14 दिन बाद विमुक्ति, नए सवाल</strong><br>लेकिन ठीक 14 दिन बाद, यानी 29 जनवरी 2026 को ज्ञापांक 392 के जरिए सदर SDO द्वारा रवि कुमार सहित सभी कार्यालयों में विकास मित्रों की प्रतिनियुक्ति SDO ने रद्द करते हुए उन्हें अपने वार्ड और पंचायतों में ही कार्य करने का आदेश जारी किया है। रवि की जगह तत्काल लिपिक अविनाश कुमार और कंप्यूटर डेटा एंट्री ऑपरेटर हरिनारायण पंडित को प्रतिनियुक्त करने का आदेश जारी किया गया है।<br>इस अचानक हुई कार्रवाई ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं कि अगर रवि कुमार नियमों के तहत सही था, तो उसे आनन-फानन में हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? आरोपों की जांच करने के बजाय उसे “मैनेजर” के रूप में पेश क्यों किया गया?<br><br><strong>सिस्टम पर बड़ा सवाल</strong><br>सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना डेप्युटेशन, बिना रिकॉर्ड और बिना जवाबदेही के एक व्यक्ति 15 वर्षों तक एक ही कार्यालय और एक ही भूमिका में कैसे जमा रहा?<br>और अगर यह तैनाती नियम विरुद्ध थी, तो अब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="601" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941762-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-94701" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941762-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941762-650x382.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1000941762-1536x902.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br></p>



<p>यह मामला सिर्फ एक विकास मित्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।</p>



<p>अब देखना यह है कि यह प्रकरण भी “जांच जारी है” की फाइलों में दबा दिया जाएगा या वाकई किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई होगी।</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी</strong> <strong>पाण्डेय</strong> की रिपोर्ट </p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>…और &#8220;अजगर&#8221; लौट गया अपने घर!</title>
		<link>https://www.patnanow.com/aur-ajgar-ghar-laut-gaya/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 May 2021 09:30:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[कॉपरेटिव कॉलोनी में दिखा अजगर, वन विभाग ने दिखाया उसे उसका घर आरा. रविवार को को-कॉपरेटिव कॉलनी आरा में उस वक्त हड़कम्प मच गया जब एक एक घर मे अजगर निकलने की खबर फैली. जहाँ कॉलोनी के नरेन्द्र पाठक एवं अजय मौआर अपने घर के पास अजगर देखने के बाद दहशत में थे. उनके चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई थी. वैसे में लोगों की जमात भी आसपास उस अजगर को देखने के लिए ऐसे जमा हो गयी जैसे बारात में कोई नाच का प्रोग्राम हो. खैर हो-हल्ला, दिल की बढ़ी धड़कनों और अजगर को देखने आई जमात के बीच कुछ स्थानीय लोगों की शानदार भूमिका फिल्मों के उस नायक की तरह रही जो सही वक्त पर आ सबकुछ सही कर देते हैं. इस स्थानीय लोगों में विशेष भूमिका रही अभिषेक तिवारी का,जिन्होंने अपनी सूझ-बूझ से अजगर को पकड़ कर अपने पार्षद प्रतिनिधि अमरेन्द्र चौबे को सूचना दिया. सूचना मिलते ही अमरेन्द्र चौबे ने त्वरित गति से सदर अनुमंडल पदाधिकारी आरा को इसकी जनकारी दी और वन विभाग के लोगो की मांग की. सदर अनुमंडल पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने इसे गम्भीरता से लेते हुए अविलंब वन विभाग के टीम को स्थल पर जाने का निर्देश दिया. फिर मौके पर शमशेर सिंह व चन्दन कुमार के नेतृत्व में वन विभाग के टीम पहुंची. जब टीम ने पकड़े हुए साँप का जायजा लिया तो उन्होंने उक्त साँप को अजगर ही पाया. इसके बाद वन विभाग की टीम लोगों द्वारा पकड़े गए अजगर को अपने साथ ले गयी और अजगर को सूझ-बूझ और तत्परता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>कॉपरेटिव कॉलोनी में दिखा अजगर, वन विभाग ने दिखाया उसे उसका घर</strong></p>



<p class="has-drop-cap has-black-color has-vivid-green-cyan-background-color has-text-color has-background">आरा. रविवार को को-कॉपरेटिव कॉलनी आरा में उस वक्त हड़कम्प मच गया जब एक एक घर मे अजगर निकलने की खबर फैली. जहाँ कॉलोनी के नरेन्द्र पाठक एवं अजय मौआर अपने घर के पास अजगर देखने के बाद दहशत में थे. उनके चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई थी. वैसे में लोगों की जमात भी आसपास उस अजगर को देखने के लिए ऐसे जमा हो गयी जैसे बारात में कोई नाच का प्रोग्राम हो.</p>



<p class="has-vivid-green-cyan-background-color has-background">खैर हो-हल्ला, दिल की बढ़ी धड़कनों और अजगर को देखने आई जमात के बीच कुछ स्थानीय लोगों की शानदार भूमिका फिल्मों के उस नायक की तरह रही जो सही वक्त पर आ सबकुछ सही कर देते हैं. इस स्थानीय लोगों में विशेष भूमिका रही अभिषेक तिवारी का,जिन्होंने अपनी सूझ-बूझ से अजगर को पकड़ कर अपने पार्षद प्रतिनिधि अमरेन्द्र चौबे को सूचना दिया. सूचना मिलते ही अमरेन्द्र चौबे ने त्वरित गति से सदर अनुमंडल पदाधिकारी आरा को इसकी जनकारी दी और वन विभाग के लोगो की मांग की. सदर अनुमंडल पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने इसे गम्भीरता से लेते हुए अविलंब वन विभाग के टीम को स्थल पर जाने का निर्देश दिया. फिर मौके पर शमशेर सिंह व चन्दन कुमार के नेतृत्व में वन विभाग के टीम पहुंची. जब टीम ने पकड़े हुए साँप का जायजा लिया तो उन्होंने उक्त साँप को अजगर ही पाया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="332" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/05/PNC_cooperative-colony-bow-Ara.jpg" alt="" class="wp-image-52537" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/05/PNC_cooperative-colony-bow-Ara.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/05/PNC_cooperative-colony-bow-Ara-350x179.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p class="has-vivid-green-cyan-background-color has-background">इसके बाद वन विभाग की टीम लोगों द्वारा पकड़े गए अजगर को अपने साथ ले गयी और अजगर को सूझ-बूझ और तत्परता</p>



<p class="has-vivid-green-cyan-background-color has-background"> से पकड़ने के लिए सभी स्थानीय लोगो को धन्यवाद दिया. जंगल से भटके इस अजगर को अपना घर शायद नही मिल पा रहा था. अब वजह यह है कि इंसानों ने जंगल काट कर हर जगह घर बना लिया है. ऐसे में वन्य जीवों के लिए उनका घर पहचानना किसी आफत से कम नही है. क्योंकि हर रोज बनते कॉन्क्रीट के ये जंगल वन्य जीवों के वर्तमान के निवास को भी पहचानने में दिक्कत दे रहे हैं. वो तो भला हो कॉपरेटिव कॉलोनी के ऐसे समझदार लोगों का जिन्होंने अजगर को मारा नही बल्कि उसे पकड़कर वन विभाग को उसे सौंप दिया. अब उम्मीद है अजगर को उसे अपना आशियाना मिल ही जायेगा.</p>



<p class="has-vivid-green-cyan-background-color has-background">स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले को गंभीरता से ले त्वरित कार्रवाई करने के लिए स्थानीय पार्षद प्रतिनिधि सह चुनाव आयोग सेल भाजपा के संयोजक अमरेन्द्र को धन्यवाद दिया. साथ ही सभी लोगो ने सदर अनुमंडल पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव को भी धन्यवाद दिया.</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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