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	<title>sars mela 2022 patna &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>आत्मनिर्भरता के विविध रंग से रूबरू होना चाहते हैं तो  देखें सरस मेला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Dec 2022 17:40:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मेला प्रबंधन का कार्य जीविका दीदियों ने है संभाला पटना में 15 दिसंबर से 29 दिसंबर 2022 तक है आयोजित अब तक हो चुकी है 5 करोड़ 13  लाख रुपये की बिक्री आत्मनिर्भरता के विविध रंग और स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिलाओं की स्वावलंबन की झलक बिहार सरस मेला में प्रदर्शित है. विभिन्न स्टॉल पर देश भर से आई ग्रामीण शिल्पकार अपने हुनर को स्वावलंबन से जोड़कर महिला सशक्तिकरण की बानगी पेश कर रही हैं वहीँ मेला प्रबंधन का कार्य जीविका दीदियों ने संभाल रखा है . यह बड़ी बात है कि देश के बड़े आयोजनों में से एक बिहार सरस मेला की कमान ग्रामीण महिलाओं के हाथ में है . बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका के तत्वाधान में बिहार सरस मेला गाँधी मैदान, पटना में 15 दिसंबर से 29 दिसंबर 2022 तक आयोजित है.  वर्ष  2014 से जीविका के तत्वाधान में आयोजित बिहार सरस मेला ग्रामीण भारत की कला एवं संस्कृति का एक अनूठा संगम है.सरस मेला एक ऐसा मंच है जो स्वदेशी उत्पादों एवं इससे जुड़े लोगों को बाज़ार उपलब्ध कराने हेतु प्रोत्साहन देता है. बिहार समेत 20 राज्यों की ग्रामीण महिला उद्धमी शिरकत कर रही हैं. ग्राम शिल्प और उत्पाद के प्रति आगंतुकों का क्रेज ही है कि सरस मेला नित प्रगति की और अग्रसर है. महज 6 दिनों में खरीद-बिक्री का आंकड़ा लगभग 5 करोड़ 13 लाख रूपया रहा. मंगलवार को 98 लाख 23 हजार रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई. खरीद-बिक्री का यह आंकड़ा स्टॉल धारकों से लिए गए आकंड़ो [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मेला प्रबंधन का कार्य जीविका दीदियों ने है संभाला</strong></p>



<p><strong>पटना में 15 दिसंबर से 29 दिसंबर 2022 तक है आयोजित</strong></p>



<p><strong>अब तक हो चुकी है 5 करोड़ 13  लाख रुपये की बिक्री</strong></p>



<p>आत्मनिर्भरता के विविध रंग और स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिलाओं की स्वावलंबन की झलक बिहार सरस मेला में प्रदर्शित है. विभिन्न स्टॉल पर देश भर से आई ग्रामीण शिल्पकार अपने हुनर को स्वावलंबन से जोड़कर महिला सशक्तिकरण की बानगी पेश कर रही हैं वहीँ मेला प्रबंधन का कार्य जीविका दीदियों ने संभाल रखा है . यह बड़ी बात है कि देश के बड़े आयोजनों में से एक बिहार सरस मेला की कमान ग्रामीण महिलाओं के हाथ में है .</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/9de40c11-160f-4fe1-bab2-ffb66672d7c3.jpg" alt="" class="wp-image-69899" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/9de40c11-160f-4fe1-bab2-ffb66672d7c3.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/9de40c11-160f-4fe1-bab2-ffb66672d7c3-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका के तत्वाधान में बिहार सरस मेला गाँधी मैदान, पटना में 15 दिसंबर से 29 दिसंबर 2022 तक आयोजित है.  वर्ष  2014 से जीविका के तत्वाधान में आयोजित बिहार सरस मेला ग्रामीण भारत की कला एवं संस्कृति का एक अनूठा संगम है.सरस मेला एक ऐसा मंच है जो स्वदेशी उत्पादों एवं इससे जुड़े लोगों को बाज़ार उपलब्ध कराने हेतु प्रोत्साहन देता है. बिहार समेत 20 राज्यों की ग्रामीण महिला उद्धमी शिरकत कर रही हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/773bd4fb-bdf0-41b7-a488-7fa2557c97d5.jpg" alt="" class="wp-image-69900" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/773bd4fb-bdf0-41b7-a488-7fa2557c97d5.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/773bd4fb-bdf0-41b7-a488-7fa2557c97d5-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ग्राम शिल्प और उत्पाद के प्रति आगंतुकों का क्रेज ही है कि सरस मेला नित प्रगति की और अग्रसर है. महज 6 दिनों में खरीद-बिक्री का आंकड़ा लगभग 5 करोड़ 13 लाख रूपया रहा. मंगलवार को 98 लाख 23 हजार रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई. खरीद-बिक्री का यह आंकड़ा स्टॉल धारकों से लिए गए आकंड़ो पर आधारित होता है. मंगलवार को लगभग 90 हजार से ज्यादा मेला के कद्रदान आये. बुधवार को भी 90 हजार से ज्यादा लोग आये.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/37f80018-eb79-4aa8-997d-36317507a207.jpg" alt="" class="wp-image-69901" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/37f80018-eb79-4aa8-997d-36317507a207.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/37f80018-eb79-4aa8-997d-36317507a207-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सीतामढ़ी जिला के सुरसंड प्रखंड से आई जीविका दीदी सुदामा देवी. सुदामा देवी सरस्वती जीविकास्वयं सहायता समूह के संबल से सिक्की आर्ट और लकड़ी के बुरादे से बनी कलाकृतियों को लेकर मेला में आई हैं . सुदामा देवी प्रतिवर्ष सरस मेला में अपने हस्तशिल्प को प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए लेकर आती है. उनके द्वारा बनाये गए हस्त शिल्प की मांग है . मेला में वो 20 हजार से 50 हजार रुपये का उत्पाद की बिक्री हो जाती है. 59 वर्षीय सुदामा देवी अब तक 3 हजार से ज्यादा लड़कियों एवं महिलाओं को सिक्की कला पर प्रशिक्षण दे चुकी हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/2c4fe2ba-556d-438c-8e94-3c9d233a9987.jpg" alt="" class="wp-image-69904" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/2c4fe2ba-556d-438c-8e94-3c9d233a9987.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/2c4fe2ba-556d-438c-8e94-3c9d233a9987-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>विभिन्न स्टॉल पर सिल्क एवं कड़ी की साड़ियाँ, सूट, लहठी, चूड़ियां, खादी के परिधान , सीप,कास्यं, पीतल, पत्थर,घास एवं जुट आदि से बनी कलाकृतियाँ, टेराकोटा, लकड़ी से फर्नीचर, झूले, दरी-कालीन, चादर और बचपने के खिलौने आदि आगंतुकों को लुभा रहे हैं.  ओपन एरिया में गर्म कपड़ों के निर्माण की प्रकिया का सजीव प्रदर्शन होता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/1ef7fb2e-6516-430d-b469-848cdbc6a6b7.jpg" alt="" class="wp-image-69903" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/1ef7fb2e-6516-430d-b469-848cdbc6a6b7.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/1ef7fb2e-6516-430d-b469-848cdbc6a6b7-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मुख्य मंच पर प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक कुरीतियों के प्रति जन जागरूकता हेतु लघु नाटकों की प्रस्तुति हो रही है . मेला के सातवें दिन दोपहर में महिला बाल विकास निगम के तत्वाधान में विद्या केंद्र के कलाकारों द्वारा “दहेज़ से करो परहेज” लघु नाटक की प्रस्तुति की गई . नाटक के माध्यम से शादी और दहेज़ को लेकर पिता और पुत्री के बीच हो रहे संवाद को दिखाया गया . और दर्शकों को दहेज़ मुक्त विवाह के लिए आग्रह किया गया . कलाकारों में मनोहर पंडित, शिल्पी , शालू , संजय, मनोज एव गुड्डू रहे . संध्या समय में मुस्कान सांस्कृतिक मंच द्वारा लोक गीत, गजल एवं सूफी अंदाज में गीतों की प्रस्तुति की गई . कमलेश कुमार ने “पहुना एही मिथिला में रहू ना” मैथिली लोक गीत से शमा बांधा वहीँ गुडिया गिरी ने भोजपुरी लोक गीत “सैयां मिले लड़कइयां और जईसन सोचले रहनी ओईसन पियावा मोर बाड़े हो” जैसे गीतों पर दर्शकों को झुमायाँ . वाद्य यंत्रो पर अनुज, काली राज एवं राजन ने सुमधुर संगीत से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया .</p>



<p>महुआ राय चौधरी ने बताया कि सेमिनार हॉल में बिहार सरकार द्वारा जीविका के माध्यम से संचालित सतत जीविकोपार्जन योजना अंतर्गत लाभुकों की स्थिति एवं उनके जीवन में आये बदलाव पर चर्चा की गई . इस कार्यक्रम में पटना जिला के विभिन्न प्रखंडों से आई सतत जीविकोपार्जन योजना की कैडर ने शिरकत की .  इस सेमिनार में जीविका के अधिकारियों ने कैडरों को सतत जीविकोपार्जन योजना के सफल संचालन के गुर बताये और उनके तरफ से आये सवालों का जवाब भी दिया . मनीष कुमार, राहुल कुमार और पंकज कुमार ने उन्मुखीकरण किया . प्रतिदिन आयोजित सेमिनार का सयोजन, अंशु सिंह एवं स्मिता भारती कर रही हैं.</p>



<p><strong>रवीन्द्र भारती ,PNCDESK</strong></p>
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		<title>शिल्प और शिल्पकारों को प्रोत्साहन देने में सरस मेला एक बड़ा बाजार : आमिर सुबहानी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/saras-mela-is-a-big-market-in-promoting-crafts-and-craftsmen-aamir-subhani/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Sep 2022 03:08:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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		<category><![CDATA[sars mela 2022 patna]]></category>
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					<description><![CDATA[दिसम्बर में गांधी मैदान में होगा बड़े पैमाने पर सरस मेला का आयोजन: राहुल कुमार सरस मेला का हुआ समापन हस्तशिल्प,स्वाद और संस्कृति के साथ ही विभिन्न तरह की कलाकृतियों से रंग से सजे और लोगों की उम्मीद और अपने आयोजन के उदेश्य पर शत-प्रतिशत खरा उतरते हुए सरस मेला का समापन रविवार को हो गया.ग्रामीण उधमिता को बढ़ावा देने के उदेश्य से ज्ञान भवन ,पटना में 2 सितम्बर से 11 सितम्बर सरस मेला आयोजित की गई थी.सरस मेला के समापन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि आमिर सुबहानी, बिहार सरकार ने शिरकत की. समापन समारोह के दौरान अतिथियों ने स्टॉल पर भ्रमण किया और सरस मेला के आयोजन की सराहना की. सरस मंच पर आयोजित समापन कार्यक्रम के अवसर पर अपने स्वागत संबोधन में राहुल कुमार, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी,जीविका ने आगत अतिथियों का स्वागत करे हुए कहा कि सरस के इस प्रथम संस्करण के सफल आयोजन के बाद दिसंबर माह में गांधी मैदान में बड़े स्तर पर आयोजन होगा। इसके साथ ही उन्होंने सरस मेला के आयोजन,उदेश्य और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरस मेला के माध्यम से ग्रामीण शिल्प और उत्पाद को बड़ा बाज़ार और एक नई पहचान मिली है. इस अवसर पर बाला मुरुगन डी. सचिव, ग्रामीण विकास विभाग ने कहा कि सरस मेला ग्रामीण उत्पादों को प्रोत्साहन देने के साथ ही महिला सशक्तिकरण को भी गति देनी है.बाला मुरुगन डी ने कहा कि कोरोना काल के बाद यह राज्य के लिए बड़ा आयोजन है और तीन करोड़ से ज्यादा की खरीद बिक्री इसकी सफलता बताती [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिसम्बर में गांधी मैदान में होगा बड़े पैमाने पर सरस मेला का आयोजन</strong>: <strong>राहुल कुमार</strong></p>



<p><strong>सरस मेला का हुआ समापन</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="594" height="414" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/CS.jpg" alt="" class="wp-image-66553" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/CS.jpg 594w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/CS-350x244.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/CS-130x90.jpg 130w" sizes="(max-width: 594px) 100vw, 594px" /></figure>



<p>हस्तशिल्प,स्वाद और संस्कृति के साथ ही विभिन्न तरह की कलाकृतियों से रंग से सजे और लोगों की उम्मीद और अपने आयोजन के उदेश्य पर शत-प्रतिशत खरा उतरते हुए सरस मेला का समापन रविवार को हो गया.ग्रामीण उधमिता को बढ़ावा देने के उदेश्य से ज्ञान भवन ,पटना में 2 सितम्बर से 11 सितम्बर सरस मेला आयोजित की गई थी.सरस मेला के समापन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि आमिर सुबहानी, बिहार सरकार ने शिरकत की. समापन समारोह के दौरान अतिथियों ने स्टॉल पर भ्रमण किया और सरस मेला के आयोजन की सराहना की. सरस मंच पर आयोजित समापन कार्यक्रम के अवसर पर अपने स्वागत संबोधन में राहुल कुमार, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी,जीविका ने आगत अतिथियों का स्वागत करे हुए कहा कि सरस के इस प्रथम संस्करण के सफल आयोजन के बाद दिसंबर माह में गांधी मैदान में बड़े स्तर पर आयोजन होगा। इसके साथ ही उन्होंने सरस मेला के आयोजन,उदेश्य और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरस मेला के माध्यम से ग्रामीण शिल्प और उत्पाद को बड़ा बाज़ार और एक नई पहचान मिली है. इस अवसर पर बाला मुरुगन डी. सचिव, ग्रामीण विकास विभाग ने कहा कि सरस मेला ग्रामीण उत्पादों को प्रोत्साहन देने के साथ ही महिला सशक्तिकरण को भी गति देनी है.बाला मुरुगन डी ने कहा कि कोरोना काल के बाद यह राज्य के लिए बड़ा आयोजन है और तीन करोड़ से ज्यादा की खरीद बिक्री इसकी सफलता बताती है. मुख्य अतिथि आमिर सुबहानी ने अपने संबोधन में जीविका टीम को सबसे पहले आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि ग्रामीण शिल्प और शिल्पकारों को प्रोत्साहन देने के लिए सरस मेला एक बड़ा बाजार है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="344" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Stage.jpg" alt="" class="wp-image-66554" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Stage.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Stage-350x185.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मंच पर आगत अतिथियों को &nbsp;समापन कार्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ बिक्री करनेवाली, बेहतर स्वच्छता एवं साज-सज्जा के लिए स्टॉल धारकों को प्रशस्ति- पत्र देकर आगत अतिथियों ने सम्मानित किया. सम्मानित होने वालों में सर्वश्रेष्ठ बिक्री के लिए सहेली स्वयं सहायता समूह,स्वच्छता के लिए दीदी की रसोई एवं सज-सज्जा के लिए शिल्प ग्राम को पुरष्कृत किया गया. धन्यवाद् ज्ञापन राम निरंजन प्रसाद, निदेशक, जीविका ने किया. मंच संचालन संतोष कुमार, प्रबंधक, संचार, जीविका ने किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Stall-1.jpg" alt="" class="wp-image-66555" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Stall-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Stall-1-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मेला में बिहार समेत 17 राज्यों की शिल्पकार 135 स्टॉल पर ग्रामीण शिल्प, संस्कृति एवं परंपरा को लेकर उपस्थित आयोजित हुआ.बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हरियाणा, गुजरात, आन्ध्र प्रदेश, आसाम, मध्य प्रदेश, महारष्ट्र, उड़ीसा,पंजाब, राजस्थान,सिक्किम एवं प. बंगाल से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ग्रामीण शिल्प कार अपने यहाँ की शिल्प,संस्कृति,परंपरा एवं व्यंजन को लेकर उपस्थित हुए. मेला में कैशलेश खरीददारी की भी व्यवस्था की गई थी.</p>



<p>जीविका दीदियों द्वारा संचालित शिल्प ग्राम, मधुग्राम एवं सोलर स्टॉल के प्रति लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे.मेला परिसर की स्वच्छता काबिले तारीफ़ रही और आगंतुकों ने भी टीम जीविका के कुशल प्रबंधन को सराहा.2 सितंबर से जारी सरस मेला के अंतिम दिन खरीद बिक्री का आंकड़ा लगभग सवा तीन करोड़ रूपया पार कर गया. अंतिम दिन रविवार को पचास हजार से ज्यादा लोग आये और खरीददारी की . इस सरस मेला में सबसे ज्यादा खरीद-बिक्री हाजी अली उत्पादक समूह ,ओड़िसा के स्टॉल से हुई . हाजी अली के स्टॉल से 6 लाख से ज्यादा परिधान की बिक्री हुई. तारा जीविका स्वयं सहायता समूह ,कैमूर,बिहार के स्टॉल से लगभग पांच लाख के हस्तशिल्प की बिक्री हुई. जीविका द्वारा संचालित दीदी की रसोई के स्टॉल से साढ़े 4 लाख से ज्यादा के व्यंजनों की बिक्री हुई.हजारों वर्षों के स्वर्णिम इतिहास और समृद्ध संस्कृति को अपने आँचल में समेटे भारत के गाँवों की मिट्टी की खुशबु से सराबोर एक सतरंगी मंच “सरस मेला” जो शहर वासियों को अपने धरोहर से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है. वर्ष 2014 से जीविका के तत्वाधान में आयोजित बिहार सरस मेला ग्रामीण भारत की कला एवं संस्कृति का एक अनूठा संगम है . विगत 2 वर्षं से कोरोना महामारी की त्रासदी से परेशान लोगों को एक बार पुनः आनंद का अनुभव प्राप्त करने का एक अवसर प्रदान करने की दिशा में इस वर्ष 02 सितंबर से 11 सितंबर 2022 तक पटना के ज्ञान भवन में सरस मेला का सफल आयोजन किया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Stall-5.jpg" alt="" class="wp-image-66556" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Stall-5.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Stall-5-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सरस मेला के आयोजन का मुख्य उद्देश्य धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही कला एवं संस्कृति को पुनर्जीवित करना और लोगों को अपनी मूल संस्कृति से जोड़ना है. हर वर्ष सरस मेला में भारत के विभिन्न राज्यों से छोटे-छोटे शिल्पकारों और ग्रामीण उद्यमियों को आमंत्रित्त किया जाता है और पूरे 10 दिनों तक उनकी कला का प्रदर्शन सह बिक्री का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है. मेले में आनेवाले सभी आगंतुक मेले में मौजूद उत्पादों को देख कर भावविभोर हुए बिना नहीं रह पाते.बिहार के मिथिलांचल की ओर से मधुबनी चित्रकला, सिक्की कला और मखाना, भागलपुर से सिल्क से बने मनोरम परिधान, कैमूर से दरी और कालीन, मुजफ्फरपुर से लहठी और चूड़ी , पूर्वी चंपारण से आये सीप से बनी कलाकृतियों के साथ-साथ कटिहार के आये बांस से बने गृह सज्जा के उत्पाद, पटना जिले से कांस्य एवं पीतल धातु से बने बर्तन, भोजपुर से क्रोसिया कला, दरभंगा और मधेपुरा से आये चमरे केउत्पाद, पूर्णिया से आये मलबरी के धागों से बनी सुन्दर साड़ियाँ, गया जिले के पत्थारकट्टी कलाएवं लकड़ियों से बने से बने गृह सज्जा के उत्पादों के सस्थ-साथ भागलपुर के कतरनी चावल और चुडा ने पूरे सरस मेला को अपनी सुन्दरता और खुशबु से सराबोर कर दिया.</p>



<p>अन्य राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश से आये शिल्पकारों द्वारा निर्मित मनमोहक दरी और कालीन के साथ-साथ चादर और सोफे पे बिछाए जानेवाले सुन्दर कलाकृतियों और चमरे के उत्पादों के साथ मध्य प्रदेश से आये बाटिक प्रिंट की साड़ियाँ, आन्ध्र प्रदेश से आये लकड़ी के गृह सज्जा के उत्पाद, ओड़िसा से आये सवाई घांस से बने साज-सज्जा के उत्पाद एवं सांस्कृतिक परिधान, हरियाणा से एप्लिक कला से सुसज्जित चादर और साड़ियाँ, गुजरात के कच्छ के रण से आये कच्छी कला से बने परिधान और हाश्त्शिल्प उत्पाद, झारखंड से आये जन जातीय कबीलों से आये हुए शिल्पकारों द्वारा निर्मित हर्बल औषधियों के साथ साथ मनमोहक आदीवा गहने और जूट से बने अन्य उत्पाद अपने आप में एक कहानी बयान करते हैं. झारखण्ड के जनजातीय कबीलों द्वारा बनाए गए इन गहनों की मांग पूरे देश के जाने-माने संस्थान करते हैं और उन्हें अपने मंच से प्रोत्साहित करते हैं. असाम से आये बांस से बने उत्पाद, पंजाब से आये फुलकारी कला से बने परिधान, सिक्किम से आये हस्तनिर्मित परिधान, पश्चिम बंगाल से आये खजूर के पत्तों से बने मनमोहक कृत्रिम फूलों एवं पत्थर तथा बांस के बने उत्पाद, तेलंगाना से छोटे बच्चों के हस्तनिर्मित परिधान एवं जूट तथा चमरे से बने उत्पाद, छत्तीसगढ़ से आये अत्यंत मनमोहक सलवार-सूट और साड़ियों ने इस सरस मेला को पूर्ण रूप से जीवंत कर दिया.</p>



<p>सरस मेला 2022 में जहाँ हस्तशिल्प के वर्गीकृत स्टाल्स से पूरे मेले में कुल 78 लाख रुपयों का कारोबार हुआ तो वहीँ कपड़ों और अन्य परिधानों के स्टाल्स से लगभग 1 करोड़ 25 लाख रुपयों का कारोबार हुआ. मेले के अन्य हस्तनिर्मित कलाकृतियों एवं उत्पादों के स्टाल्स से 40 लाख रुपयों की बिक्री हुई .मेले के एक विशेष भाग ने मेले में आये आगंतुकों को खाने-पीने के स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ़ उठाने का अवसर भी प्रदान किया जहाँ बिहार और महाराष्ट्र के पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ जीविका द्वारा संचालित “दीदी की रसोई” की दीदियों ने लोगों को अपनी उंगलिया चाटने को विवश कर दिया. रोहतास की गोड़ई मिठाई, बाढ़ जिले का पेड़ा और लाइ, सुपौल का खाजा, पटना का चनाजोर गरम, किसान चाची का मशहूर अचार, और दीदी की रसोई के लिट्टी चोखा, ढोकला, दही बड़ा और ऐसे ही अनन्य स्वादिष्ट व्यंजनों ने आगंतुकों का भरपूर मनोरंजन किया. व्यंजनों के इस भाग में दिनांक 2 सितंबर से 11 सितमबर तक लगभग 37 लाख रूपये का कारोबार हुआ.ग्रामीण संस्कृति के हर एक पहलु को जीवंत और उजागर करता यह सरस मेला हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी इस मेले में आये आगंतुकों केसाथ-साथ मेले में भाग लेने वाले ग्रामीण उद्यमियों के जीवन पे एक अमित छाप छोड़ने में सफल रहा.</p>



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		<title>अगर आप सरस मेला नहीं गए तो खो देंगे बढ़िया मौका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Sep 2022 04:16:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[jivika patna]]></category>
		<category><![CDATA[sars mela 2022 patna]]></category>
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					<description><![CDATA[दीदी की रसोई के स्वाद लेने को आतुर दिखे लोग तसर सिल्क की साड़ी और मधुबनी पेंटिंग से उकेरे गए उत्पादों की बिक्री महिला उद्यमियों की लगन और मेहनत दिख रही है सरस मेला में सरस मेला अब पुरे परवान पर है. मेला का समापन 11 सितम्बर को होना है, लिहाजा लोग जरूरत के अनुसार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा उत्पादित अचार, पापड़, सत्तू, लीची–आम जूस, कतरनी और सोनाचुर चावल, गुड़ई मिठाई, सीप से बने श्रृंगार के सामान, कालीन-पायदान, परिधान एवं हैंडी क्राफ्ट की खरीदारी कर रहे हैं. साथ ही प्राकृतिक वस्तुओं से निर्मित कलाकृतियाँ भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं. यानी सबकुछ एक ही छत के नीचे लोगों को मिल रही है. लिहाजा आगंतुक खरीदारी का मौका गवाना नहीं चाहते हैं. बिहार समेत 17 राज्यों से आई ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा बनाये गए ग्रामीण शिल्प और उत्पाद को हर उम्र के आगंतुक अपने जरुरत के हिसाब से खरीद रहे हैं . सरस मेला में आई ग्रामीण महिला उद्यमी महिला सशक्तिकरण की एक बानगी है .मेला के पांचवे दिन मंगलवार को भी आगंतुक आये और अपने मनपसंद उत्पादों की खरीददारी की और स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ़ उठाया. जीविका द्वारा सरस मेला पटना के ज्ञान भवन में ग्रामीण शिल्प और उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के उदेश्य से 2सितम्बर से 11 सितंबर तक आयोजित है . बिहार समेत 17 राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पाद और कलाकृतियों की खरीद- बिक्री सह प्रदर्शनी 135 स्टॉल से हो रही है. सरस मेला में बिहार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दीदी की रसोई के स्वाद लेने को आतुर दिखे लोग</strong></p>



<p><strong>तसर सिल्क की साड़ी और मधुबनी पेंटिंग से उकेरे गए उत्पादों की बिक्री</strong></p>



<p><strong>महिला उद्यमियों की लगन और मेहनत दिख रही है सरस मेला में</strong></p>



<p>सरस मेला अब पुरे परवान पर है. मेला का समापन 11 सितम्बर को होना है, लिहाजा लोग जरूरत के अनुसार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा उत्पादित अचार, पापड़, सत्तू, लीची–आम जूस, कतरनी और सोनाचुर चावल, गुड़ई मिठाई, सीप से बने श्रृंगार के सामान, कालीन-पायदान, परिधान एवं हैंडी क्राफ्ट की खरीदारी कर रहे हैं. साथ ही प्राकृतिक वस्तुओं से निर्मित कलाकृतियाँ भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं. यानी सबकुछ एक ही छत के नीचे लोगों को मिल रही है. लिहाजा आगंतुक खरीदारी का मौका गवाना नहीं चाहते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Croud-4.jpg" alt="" class="wp-image-66234" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Croud-4.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Croud-4-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार समेत 17 राज्यों से आई ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा बनाये गए ग्रामीण शिल्प और उत्पाद को हर उम्र के आगंतुक अपने जरुरत के हिसाब से खरीद रहे हैं . सरस मेला में आई ग्रामीण महिला उद्यमी महिला सशक्तिकरण की एक बानगी है .मेला के पांचवे दिन मंगलवार को भी आगंतुक आये और अपने मनपसंद उत्पादों की खरीददारी की और स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ़ उठाया. जीविका द्वारा सरस मेला पटना के ज्ञान भवन में ग्रामीण शिल्प और उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के उदेश्य से 2सितम्बर से 11 सितंबर तक आयोजित है .</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Saras-1.jpg" alt="" class="wp-image-66235" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Saras-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Saras-1-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> बिहार समेत 17 राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पाद और कलाकृतियों की खरीद- बिक्री सह प्रदर्शनी 135 स्टॉल से हो रही है. सरस मेला में बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हरियाणा, गुजरात, आन्ध्र प्रदेश, आसाम, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान,सिक्किम एवं पच्छिम बंगाल से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ग्रामीण शिल्प कार अपने यहाँ की शिल्प , संस्कृति, परंपरा एवं व्यंजन को लेकर उपस्थित हैं. 2 सितंबर से जारी सरस मेला में चार दिन में लगभग 84 लाख रूपये के उत्पादों और देशी खाद्य- व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है . मेला के आयोजन के चौथे दिन सोमवार को बड़ी संख्या में लोग आये और खरीददारी की . सोमवार को लगभग 23 हजार लोग आये और लगभग 18 लाख रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद बिक्री हुई . उत्तर प्रदेश से आई उवेश स्वयं सहायता समूह के स्टॉल से सर्वाधिक 60 हजार रुपये के खादी के खरीद बिक्री हुई . जीविका दीदियों द्वारा संचालित दीदी की रसोई से लगभग 35 हजार रुपये के व्यंजनों का स्वाद लोगों ने चखा . खरीद-बिक्री का आंकड़ा मेला में आये ग्रामीण उधमियों से लिए गए बिक्री रिपोर्ट पर आधारित होती है .</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/saras-3-1.jpg" alt="" class="wp-image-66236" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/saras-3-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/saras-3-1-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>स्वच्छता एवं बेहतर साज-सज्जा एवं बेहतर बिक्री को बढ़ावा देने के उदेश्य से जीविका द्वारा प्रतिदिन स्टॉल धारकों को सम्मानित भी किया जा रहा है . सोमवार को स्वच्छता के लिए अफरोज जहाँ, महावीर जीविका महिला स्वयं सहायता समूह , बिहार , साज-सज्जा के लिए उर्मिला देवी, चमेली जीविका स्वयं सहायता समूह, बिहार एवं सबसे ज्यादा उत्पाद की बिक्री के लिए उत्तर प्रदेश की उवेश स्वयं सहायता समूह के स्टॉल को सम्मानित किया गया .</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="403" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Narmada-Devi.jpg" alt="" class="wp-image-66237" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Narmada-Devi.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Narmada-Devi-350x217.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>नर्मदा देवी अपने स्टाल पर </strong></figcaption></figure>



<p>सरस मेला में आई महिला उद्यमियों में से एक नर्मदा देवी बिहार राज्य की महिला शख्सियतों में से एक हैं . वर्ष 2008 में जीविका से जुड़कर उन्होंने मधुबनी पेंटिंग को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है . मधुबनी के रांटी गाँव की रहनेवाली नर्मदा देवी ने वर्ष 2009 में शिल्प संघ उत्पादक समूह की स्थापना की. मधुबनी पेंटिंग को बड़ा आकार एवं बाज़ार देने के उद्देश्य से इन्होने सैकड़ो ग्रामीण महिलाओं को अपने साथ जोड़ा. कारवां बढ़ता गया. बर्ष 2018 शिल्प ग्राम महिला उत्पादक कंपनी लिमिटेड की स्थापना की. कंपनी का मुख्यालय दरभंगा, बिहार में है. पुरे राज्य से ग्रामीण महिला शिल्पकारों के उत्पाद को विभिन्न माध्यमों से बिक्री की जाने लगी. चार साल से भी कम समय में शिल्प ग्राम में 450 शेयर होल्डर हैं. एक हजार से ज्यादा शिल्पकार जुड़ी हुई हैं. महज चार साल में कंपनी ने लगभग नौ करोड़ रुपये का व्यवसाय किया है. नर्मदा देवी कंपनी की निदेशक हैं. एक ग्रामीण महिला होने के नाते यह उनकी बड़ी उपलब्धि है. नर्मदा देवी अब राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में बतौर अतिथि शिरकत करती हैं और महिलों को सफल उद्यमी बनने के गुर बताती हैं. शिल्प ग्राम महिला उत्पादक कंपनी लिमिटेड से जुड़ी महिलाएं आर्थिक एवं सामाजिक तौर पर सशक्त हुई हैं. सरस मेला में आई नर्मदा देवी और उनके शिल्प ग्राम महिला उत्पादक कंपनी लिमिटेड का स्टॉल और उस पर सजे उत्पाद आगंतुकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इस स्टॉल से डेढ़ सौ रुपये से लेकर 18 हजार की तसर सिल्क की साड़ी और मधुबनी पेंटिंग से उकेरे गए उत्पादों की बिक्री खूब हो रही है.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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