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	<title>saras mela 2023 &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>धरोहरों को बचाने एवं उन्हें पुनर्जीवित करने में बड़ा प्लेटफार्म है सरस मेला</title>
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		<pubDate>Thu, 28 Dec 2023 02:43:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[29 दिसम्बर तक चलेगा सरस मेला 12 दिनों में लगभग 12 करोड़ 47 लाख 72 हजार रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद– बिक्री शिल्प, कलाकृतियाँ , लोक कला एवं देशी व्यंजनों की बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री पटना- सरस मेला अब समापन की ओर अग्रसर है। 15 दिसंबर 2023 से जारी बिहार सरस मेला का 29 दिसंबर को समापन होना है।लिहाजा लोग जमकर खरीददारी कर रहे हैं। मेला में लोग अपनी संस्कृति, शिल्प, लोक कला , परंपरा एवं देशी स्वाद से रूबरू होने के लिए प्रतिदिन पधार रहे हैं। मेला 15 दिनों का है. 12 दिन में 8 लाख से अधिक लोग आए . ग्रामीण शिल्प,संस्कृति एवं लोक कला और देशी व्यंजनों के प्रति लोगों को आकर्षण इस बात का प्रमाण है कि लोग अपने पूरानी संस्कृति एवं परंपरा की ओर लौट रहे हैं. लिहाजा बिहार सरस मेला अपने धरोहरों को बचाने एवं उन्हें पुनर्जीवित करने में बड़ा प्लेटफार्म और माध्यम बना है ।बिहार सरस मेला बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन समिति (जीविका ) द्वारा आयोजित है. बिहार सरस मेला में बिहार समेत 22 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलायें हस्तशिल्प को लेकर 5 सौ से अधिक स्टॉल्स परउपस्थित हैं. बिहार के सभी 38 जिला से 191 स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिलाएं अपने-अपने क्षेत्र की संस्कृति, लोक कला,कलाकृतियाँ एवं देशी व्यंजनों को लेकर उपस्थित हैं । जहाँ स्टॉल धारक के साथ ही आगंतुक भी एक दुसरे के शिल्प , स्वाद, संस्कृति से परिचित हो रहे हैं. अन्य 22 जिलों से 66 स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला उद्यमी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>29 दिसम्बर  तक चलेगा सरस मेला </strong></p>



<p><strong>12 दिनों में लगभग 12 करोड़ 47 लाख 72 हजार रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद– बिक्री</strong></p>



<p><strong>शिल्प, कलाकृतियाँ , लोक कला एवं देशी व्यंजनों की बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री </strong></p>



<p>पटना- सरस मेला अब समापन की ओर अग्रसर है। 15 दिसंबर 2023 से जारी बिहार सरस मेला का 29 दिसंबर को समापन होना है।लिहाजा लोग जमकर खरीददारी कर रहे हैं। मेला में लोग अपनी संस्कृति, शिल्प, लोक कला , परंपरा एवं देशी स्वाद से रूबरू होने के लिए प्रतिदिन पधार रहे हैं। मेला 15 दिनों का है. 12 दिन में 8 लाख से अधिक लोग आए . ग्रामीण शिल्प,संस्कृति एवं लोक कला और देशी व्यंजनों के प्रति लोगों को आकर्षण इस बात का प्रमाण है कि लोग अपने पूरानी संस्कृति एवं परंपरा की ओर लौट रहे हैं. लिहाजा बिहार सरस मेला अपने धरोहरों को बचाने एवं उन्हें पुनर्जीवित करने में बड़ा प्लेटफार्म और माध्यम बना है ।बिहार सरस मेला बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन समिति (जीविका ) द्वारा आयोजित है. बिहार सरस मेला में बिहार समेत 22 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलायें हस्तशिल्प को लेकर 5 सौ से अधिक स्टॉल्स परउपस्थित हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/DDUGKY-EVENT-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81221" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/DDUGKY-EVENT-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/DDUGKY-EVENT-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/DDUGKY-EVENT-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/DDUGKY-EVENT.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार के सभी 38 जिला से 191 स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिलाएं अपने-अपने क्षेत्र की संस्कृति, लोक कला,कलाकृतियाँ एवं देशी व्यंजनों को लेकर उपस्थित हैं । जहाँ स्टॉल धारक के साथ ही आगंतुक भी एक दुसरे के शिल्प , स्वाद, संस्कृति से परिचित हो रहे हैं. अन्य 22 जिलों से 66 स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला उद्यमी भी हस्तशिल्प को लेकर उपस्थित हैं. 151 स्वरोजगारी भी विभिन्न स्टॉल पर उत्पादों को लेकर प्रस्तुत हैं. विभिन्न विभागों, संस्थानों एवं बैंको के 50 स्टॉल से विभिन्न योजनाओं &nbsp;की जानकारी दी जा रही है. इसके साथ ही विभिन्न जिलों से उप विकास आयुक्त के माध्यम से आई महिला उद्यमी 50 स्टॉल पर भी हस्तशिल्प,कलाकृतियाँ एवं व्यंजनों की खरी-बिक्री कर रही हैं.</p>



<p>12 दिनों में लगभग 12 करोड़ 47 लाख 72 हजार रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद – बिक्री हुई है. बिहार सरस मेला के आयोजन के 12 वे दिन 26 सितम्बर मंगलवार को 1 करोड़ 18 लाख 43 हजार रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है । सरस मेला में सुसज्जित सभी स्टॉल पर उपलब्ध शिल्प, कलाकृतियाँ , लोक कला एवं देशी व्यंजनों की बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री हो रही है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Visiters-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81224" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Visiters-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Visiters-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Visiters-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Visiters.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कई स्टॉल ऐसे हैं जहाँ प्रतिदिन 50 से 60 हजार रुपये से ज्यादा के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हो रही है. ओड़िसा के कटक जिला अंतर्गत बक्सी बाज़ार से आई हाजी अली स्वयं सहायता समूह की सदस्य आलिया बेगम ने अपने स्टॉल से अब तक 6 लाख रुपये से ज्यादा केपरिधानों की बिक्री की हैं. उनके स्टॉल से कॉटन, सिल्क एवं चंदेरी से बनी हुई सूट, साडी, दुपट्टा, कुर्ती मैटेरियल , चादर, तकिया कवर, सोफे कवर , आदि की बिक्री हो रही हैl सरस मेला में कैशलेश खरीददारी की व्यवस्था है.विभिन्न स्टॉल्स पर उपस्थित ग्रामीण परिवेश से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली जीविका दीदियाँ बिहार में महिला सशक्तिकरण एवं स्वावलंबन की झलक प्रदर्शित कर रही हैं.सरस मेला के अन्य आकर्षणों में जीविका दीदियों द्वारा संचालित दीदी की रसोई, जीविका शिल्पग्राम एवं जीविका मधु ग्राम का स्टॉल है. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Seminar-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81225" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Seminar-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Seminar-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Seminar-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Seminar.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>महिला विकास निगम और बिहार महिला उद्योग संघ के स्टॉल भी सुसज्जित हैं. बिहार जीविका द्वारा संचालित सतत जीविकोपार्जन योजना के स्टॉल से गरीबी उन्मूलन एवं स्वरोजगार के लिए किये जा रहे कार्यों की प्रदर्शनी एवं गरीबी रेखा से बाहर निकलकर सूक्ष्म उद्धमी के तौर पर पहचान बना रही जीविका दीदियों द्वारा गढ़े गए उत्पादों की बिक्री हो रही है.संध्या समय में सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत मुख्य मंच पर गायक शक्ति सिंह द्वारा “संदेशे आते हैं और दिल दिया है जान भी देंगे” की प्रस्तुति ने दर्शकों की वह वाही लुटी. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="467" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Cultural-Program-467x650.jpg" alt="" class="wp-image-81226" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Cultural-Program-467x650.jpg 467w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Cultural-Program-252x350.jpg 252w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Cultural-Program.jpg 676w" sizes="(max-width: 467px) 100vw, 467px" /></figure>



<p>इससे पूर्व दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना अंतर्गत जीविका द्वारा रोजगार एवं प्रशिक्षण विषय पर लघु की प्रस्तुति की गई. नाटक में जीविका से संबद्ध स्वयं सहायता समूह की बैठक का क्रियान्वयन एवं गाँव के बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार एवं मार्गदर्शन हेतु संचार बनाने की कला को प्रदर्शित किया गया. उसके बाद डान बास्को स्कुल की छात्राओं ने नागपुरी एवं क्लासिकल नृत्य की प्रस्तुति दी. छात्र-छात्राओं द्वारा होटल प्रबंधक को लेकर रैम्प वॉल्क भी पेश किया गया. प्रस्तुति देने वाले छात्र-छात्राओं में मुस्कान, सरिता, चांदनी, श्रुति, सीता एवं हिमाचल आदि रही. नुक्कड़ नाटक के तहत महिला एवं बाल विकास के तत्वाधान में प्रहरी संस्था के कलाकारों द्वारा द्वारा बाल विवाह एवं दहेज़ प्रथा उन्मूलन के साथ ही सामजिक कुरीतियों के निवारण हेतु दर्शकों को जागरूक किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Visiters-1-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81230" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Visiters-1-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Visiters-1-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Visiters-1-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Visiters-1-1536x691.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/Visiters-1.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सेमिनार हॉल में जीविका से संबद्ध महिला किसान उत्पादक कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के बीच एक्सपोजर परिभ्रमण कार्यक्रम के तहत जिलों में चल रही गतिविधियों पर चर्चा हुई. इस कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलो से आई महिला किसान उत्पादक कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने शिरकत की. इस कार्यक्रम के समन्वयक श्री देवेश कुमार, परियोजना प्रबंधक- मार्केटिंग एंड इनोवेशन,जीविका रहे. इसके बाद अटल इनोवेशन मिशन द्वारा स्टार्टअप ओ लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया.फन ज़ोन, फ़ूड जोन , पालना घर एवं बाइस्कोप के प्रति आगंतुकों का आकर्षण बना हुआ है. सरस मेला परिसर में विभिन्न स्थानों पर बने सेल्फी ज़ोन पर लोग अपने परिजनों के साथ फोटोग्राफी कर रहे हैं.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>बिहार का यह मेला दूसरे राज्यों की कला को भी दे रहा सम्मान</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bihar-ke-is-mele-me-dusare-rajyon-ka-bhi-bhi-reha-samman/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Dec 2023 04:16:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
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					<description><![CDATA[3 दिनों में ही 1 लाख से ज्यादा लोग पहुँचे 17 राज्यों की संस्कृति एक साथ पटना में पटना,19 दिसंबर. बिहार की राजधानी पटना के लिए रविवार का दिन खास रहा. क्योंकि इस दिन पटना के हृदय स्थली में लगे सरस मेला में 70 हजार से ज्यादा लोग आये और अपनी सदियों पुरानी लोक संस्कृति, लोक शिल्प और देशी व्यंजनों का स्वाद का लुत्फ उठाया. बिहार सरस मेला में 500 से ज्यादा स्टॉल पर हमारे देश के विभिन्न प्रदेशों की संस्कृति, हस्त शिल्प, परंपरा और देशी व्यंजन ग्रामीण महिलाओं, शिल्पकारों एवं स्वरोजगारियों द्वारा प्रदर्शित है. बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका के तत्वाधान में बिहार सरस मेला 15 से 29 दिसंबर 2023 तक गाँधी मैदान, पटना में सुबह 10 बजे से सायं 8 बजे तक आयोजित है. बिहार समेत 22 राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिला उद्यमी अपने-अपने प्रदेश की हस्तशिल्प, लोक कला, संस्कृति एवं व्यंजनों का प्रदर्शन एवं बिक्री कर रही है. बिहार के मिथिलांचल की ओर से मधुबनी चित्रकला, सिक्की कला और मखाना, भागलपुर से सिल्क से बने मनोरम परिधान, कैमूर से दरी और कालीन, मुजफ्फरपुर से लहठी और चूड़ी , पूर्वी चंपारण से आये सीप से बनी कलाकृतियों के साथ-साथ कटिहार के आये बांस से बने गृह सज्जा के उत्पाद, पटना जिले से कांस्य एवं पीतल धातु से बने बर्तन, भोजपुर से क्रोसिया कला, दरभंगा और मधेपुरा से आये चमरे के उत्पाद, पूर्णिया से आये मलबरी के धागों से बनी सुन्दर साड़ियाँ, गया जिले के पत्थारकट्टी कला एवं लकड़ियों से बने गृह सज्जा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>3 दिनों में ही 1 लाख से ज्यादा लोग पहुँचे</strong></p>



<p><strong>17 राज्यों की संस्कृति एक साथ पटना में</strong></p>



<p>पटना,19 दिसंबर. बिहार की राजधानी पटना के लिए रविवार का दिन खास रहा. क्योंकि इस दिन पटना के हृदय स्थली में लगे सरस मेला में 70 हजार से ज्यादा लोग आये और अपनी सदियों पुरानी लोक संस्कृति, लोक शिल्प और देशी व्यंजनों का स्वाद का लुत्फ उठाया. बिहार सरस मेला में 500 से ज्यादा स्टॉल पर हमारे देश के विभिन्न प्रदेशों की संस्कृति, हस्त शिल्प, परंपरा और देशी व्यंजन ग्रामीण महिलाओं, शिल्पकारों एवं स्वरोजगारियों द्वारा प्रदर्शित है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/IMG-20231219-WA0024-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81036" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/IMG-20231219-WA0024-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/IMG-20231219-WA0024-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/IMG-20231219-WA0024-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/IMG-20231219-WA0024.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



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<p>बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका के तत्वाधान में बिहार सरस मेला 15 से 29 दिसंबर 2023 तक गाँधी मैदान, पटना में सुबह 10 बजे से सायं 8 बजे तक आयोजित है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-2-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81040" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-2-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-2-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-2-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-2-1536x691.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-2.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81037" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-1536x691.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार समेत 22 राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिला उद्यमी अपने-अपने प्रदेश की हस्तशिल्प, लोक कला, संस्कृति एवं व्यंजनों का प्रदर्शन एवं बिक्री कर रही है. बिहार के मिथिलांचल की ओर से मधुबनी चित्रकला, सिक्की कला और मखाना, भागलपुर से सिल्क से बने मनोरम परिधान, कैमूर से दरी और कालीन, मुजफ्फरपुर से लहठी और चूड़ी , पूर्वी चंपारण से आये सीप से बनी कलाकृतियों के साथ-साथ कटिहार के आये बांस से बने गृह सज्जा के उत्पाद, पटना जिले से कांस्य एवं पीतल धातु से बने बर्तन, भोजपुर से क्रोसिया कला, दरभंगा और मधेपुरा से आये चमरे के उत्पाद, पूर्णिया से आये मलबरी के धागों से बनी सुन्दर साड़ियाँ, गया जिले के पत्थारकट्टी कला एवं लकड़ियों से बने गृह सज्जा के उत्पादों के साथ-साथ भागलपुर के कतरनी चावल और चुडे ने पूरे सरस मेला को अपनी सुन्दरता और खुशबु से सराबोर कर दिया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-3-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81039" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-3-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-3-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-3-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-3-1536x691.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-3.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-1-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81038" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-1-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-1-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-1-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-1-1536x691.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-1.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अन्य राज्यों मध्य प्रदेश से आये बुटिक और चंदेली प्रिंट की साड़ियाँ, आन्ध्र प्रदेश से आये गरम मसाले एव लकड़ी के गृह सज्जा के उत्पाद, ओड़िसा से आये सवाई घांस से बने साज-सज्जा के उत्पाद एवं सांस्कृतिक परिधान, हरियाणा से एप्लिक कला से सुसज्जित चादर और साड़ियाँ, गुजरात के कच्छ के रण से आये कच्छी कला से बने परिधान, मिटटी के बर्तन, झारखंड से आये जन जातीय कबीलों से आये हुए शिल्पकारों द्वारा निर्मित हर्बल औषधियों के साथ साथ मनमोहक आदीवा गहने और जूट से बने अन्य उत्पाद खूब बिके.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-5-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81042" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-5-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-5-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-5-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-5.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-4-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81041" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-4-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-4-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-4-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-4.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>असाम से आये बांस से बने उत्पाद, पंजाब से आये फुलकारी कला से बने परिधान एवं हस्तनिर्मित परिधान, पश्चिम बंगाल से आये खजूर के पत्तों से बने मनमोहक कृत्रिम फूलों एवं पत्थर तथा बांस के बने उत्पाद, तेलंगाना से एप्लिक वर्क की चादरें, छोटे बच्चों के हस्तनिर्मित परिधान एवं जूट तथा चमरे से बने उत्पाद, छत्तीसगढ़ से आये अत्यंत मनमोहक सलवार-सूट और साड़ियों ने सरस मेला में देश के विभिन्न प्रदेशों के आहार-व्यवहार , परंपरा, लोक कला, शिल्प एवं संस्कृति जीवंत किया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-10-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81047" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-10-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-10-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-10-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-10.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-9-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81046" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-9-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-9-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-9-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-9.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उत्तर प्रदेशों के सहारन की काष्ठ शिल्प लोगों को सहज ही लुभा रहा है. झूले, टेबल, पलंग समेत घर – दुकान की जरुरत एवं सजावट के उत्पादों की खूब बिक्री हो रही है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-7-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81045" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-7-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-7-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-7-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-7.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-8-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81044" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-8-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-8-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-8-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-8.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-6-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81043" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-6-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-6-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-6-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-6.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार सरस मेला के दुसरे दिन 16 दिसंबर को 44 हजार से ज्यादा लोग आये और लगभग 73 लाख 03 हजार रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई. दो दिनों में लगभग 83 लाख 13 हजार रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है. रविवार को खरीद-बिक्री का आंकड़ा 1 करोड़ रूपया पार कर गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-13-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81049" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-13-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-13-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-13-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-13.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-12-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81048" style="aspect-ratio:2.218430034129693;width:299px;height:auto" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-12-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-12-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-12-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-12-1536x691.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-12.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जीविका दीदियों द्वारा संचालित शिल्पग्राम एवं मधुग्राम के स्टॉल से बड़े पैमाने पर उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री हो रही है. व्यंजन परिसर में जीविका दीदी की रसोई के साथ ही व्यंजनों के विभिन्न स्टॉल पर शुद्ध, देशी एवं पौष्टिक व्यंजन का लुत्फ़ आगंतुक उठा रहे हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-14-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81050" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-14-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-14-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-14-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-14.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इसके साथ ही प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम, सेमिनार, परिचर्चा, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु जन-जागरूकता कार्यक्रम एवं नुक्कड़ नाटक सरस मेला परिसर में आयोजित हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-20-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81052" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-20-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-20-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-20-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-20.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-11-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81051" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-11-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-11-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-11-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-11.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत मुख्य मंच पर सुशीला श्रीकला के कलाकारों ने लोक गीत, पचरा एवं गजल की प्रस्तुति की. कलाकारों में लालकेश्वर एवं रजा कुमार ने अपने लोकगीत से समां बाँधा. की बोर्ड पर मुन्ना रफ़ी , नाल पर अनिल कुमार एवं आक्टोपैड पर रंजित ने संगत दिया. इससे पूर्व महिला एवं बाल विकास निगम के तत्वाधान में विद्या केंद्र के कलाकारों द्वारा दहेज़ प्रथा एवं बाल विवाह उन्मूलन पर गीत एवं नृत्य की प्रस्तुति की गई. कलाकारों में शालू, पूजा, नीतू, गुड्डू, रत्नेश, विट्टू, मनोज, मुन्ना, दीपक एवं अभिषेकं रहे. तत्पश्चात कला संस्कृति एवं युवा विभाग के तत्वाधान में बारहमासा एवं लोक गीत के तहत “आज मिथिला नगरिया नेहाल सखिया” एवं झिझिया लोकनृत्य की प्रस्तुति की गई.</p>





<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-21-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81053" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-21-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-21-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-21-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-21.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सेमिनार हॉल में जीविका के तत्वाधान में शिक्षा से गरीबी उन्मूलन विषय सेमिनार का आयोजन किया गया. इस सेमिनार में राज्य के 32 जिलों में जीविका दीदियों द्वारा संचालित सामुदायिक पुस्तकालय सह करियर विकास केंद्र के माद्यम से शिक्षा के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों पर चर्चा हुई. इसके साथ ही मीडिया लिटरेसी को लेकर भी लोगों को जागरूक करने हेतु विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई. इस चर्चा में पुष्पेन्द्र सिंह तिवारी, राज्य परियोजना प्रबंधक-जीविका, प्रथम से ममता, सुनाई संस्था से प्रणव चौधरी, मनोज कुमार, प्रबंधक, सामजिक विकास –जीविका एवं एन.आई.ओ.एस. से सुजीत विषय विशेषज्ञ के तौर पर शामिल हुए .</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-22-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-81054" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-22-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-22-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-22-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC_Saras-Mela-2033-22.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इनलोगों ने दर्शकों के तरफ से आये सवालों का भी उत्तर दिया सेमिनार कार्यक्रम की संयोजक श्रीमती अंशु सिंह थे.</p>



<p>नुक्कड़ नाटक के तहत जन जागरूकता अभियान कार्यक्रम के अंतर्गत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के तत्वाधान में “कलमबाज” के द्वारा वित्तीय साक्षरता , साइबर क्राइम और ऑन लाइन खरीददारी के गुर बताया जा रहा है.</p>



<p>विभिन्न योजनाओं के प्रति आगंतुकों को जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों एवं बैंकों के स्टॉल भी सुशोभित हैं.</p>



<p>बच्चों के लिए फन जोन एवं पालना घर सजाये गए हैं. आगंतुकों के लिए सरस मेला परिसर में कैशलेश खरीददारी की भी व्यवस्था की गई है. साथ ही जीविका दीदियों द्वारा संचालित ग्राहक सेवा केंद्र के माध्यम से आगंतुकों एवं स्टॉल धारकों के लिए ग्राहक सेवा केंद्र की भी उपलब्धता है.</p>



<p>बिहार सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ ही सतत जीविकोपार्जन योजना के बिहार में सफल क्रियान्वयन की झलक दिखेगी. साथ ही नशा मुक्त बिहार एवं अत्यंत गरीब परिवारों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान की बानगी भी सतत जीविकोपार्जन योजना के स्टॉल पर प्रदर्शित हो रही है.<br>सदियों पुराना बाइस्कोप देश की विरासत एवं संस्कृति से लोगों को परिचित करा रहा है. बाइस्कोप देखने के लिए कतार लगी दिखी.</p>



<p>सरस मेला परिसर में बने देशी सेल्फी ज़ोन में आगंतुक अपनों के साथ मेला की यादें सेल्फी लेकर संजो रहे हैं.</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
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		<title>सरस मेला में दिख रही है लोक संस्कृति</title>
		<link>https://www.patnanow.com/folk-culture-is-visible-in-saras-mela/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 17 Dec 2023 04:39:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
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					<description><![CDATA[15 दिसंबर से 29 दिसंबर 2023 तक आयोजित ग्रामीण शिल्प और उत्पादों को बेचने के लिए सरस मेला एक बड़ा बाज़ार है पटना- कल तक हाशिये पर जिंदगी गुजर-बसर कर रही ग्रामीण परिवेश की महिलाएं अब एक कुशल उद्यमी के तौर पर पुरे देश में अपनी पहचान बना रही हैं . ये महिलाये स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अब अपने हुनर , लोक संस्कृति, परंपरा , लोक कलाकृतियाँ एवं देशी व्यंजनों को राष्ट्रीय पटल पर प्रदर्शित एवं बिक्री करते हुए आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त हुई हैं .इसकी बानगी बिहार सरस मेला में प्रदर्शित है.बिहार सरस मेला ग्रामीण विकास विभाग, बिहार के तत्वाधान में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका द्वारा 15 दिसंबर से 29 दिसंबर 2023 तक आयोजित है. ग्रामीण शिल्प के लिए सरस मेला एक ऐसा मंच है जो स्वदेशी उत्पादों एवं इससे जुड़े लोगों को बाज़ार उपलब्ध कराने के साथ प्रोत्साहन भी देता है l सरस मेला का आयोजन देश के स्वयं सहायता समूहों से जुडी महिलाओं , स्वरोजगारियों ,एवं अन्य शिल्पकारों द्वारा निर्मित उत्पाद हस्त शिल्प एवं लोक कलाकृतियों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए किया जाता है . लिहाजा ग्रामीण शिल्प और उत्पादों को बेचने के लिए सरस मेला एक बड़ा बाज़ार है . यहाँ आकर बिहार के स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के अलावा देश के अन्य राज्यों की महिलायें लाभान्वित हो रही है . वर्तमान में आयोजित बिहार सरस मेला में 5 सौ से ज्यादा स्टॉल पर देश भर की कलाकृतियाँ , शिल्प एवं देशी व्यंजन देशी अंदाज में प्रदर्शित है. [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> 15 दिसंबर से 29 दिसंबर 2023 तक आयोजित</strong></p>



<p><strong>ग्रामीण शिल्प और उत्पादों को बेचने के लिए सरस मेला एक बड़ा बाज़ार है</strong></p>



<pre class="wp-block-code"><code></code></pre>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/360aa022-aa11-4cc8-9188-354a7bba6002-650x293.jpeg" alt="" class="wp-image-80994" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/360aa022-aa11-4cc8-9188-354a7bba6002-650x293.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/360aa022-aa11-4cc8-9188-354a7bba6002-350x158.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/360aa022-aa11-4cc8-9188-354a7bba6002-768x346.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/360aa022-aa11-4cc8-9188-354a7bba6002.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पटना- कल तक हाशिये पर जिंदगी गुजर-बसर कर रही ग्रामीण परिवेश की महिलाएं अब एक कुशल उद्यमी के तौर पर पुरे देश में अपनी पहचान बना रही हैं . ये महिलाये स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अब अपने हुनर , लोक संस्कृति, परंपरा , लोक कलाकृतियाँ एवं देशी व्यंजनों को राष्ट्रीय पटल पर प्रदर्शित एवं बिक्री करते हुए आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त हुई हैं .इसकी बानगी बिहार सरस मेला में प्रदर्शित है.बिहार सरस मेला ग्रामीण विकास विभाग, बिहार के तत्वाधान में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका द्वारा 15 दिसंबर से 29 दिसंबर 2023 तक आयोजित है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/44931f22-4819-4aa5-a9cd-5af5d4c64b1f-650x293.jpeg" alt="" class="wp-image-80995" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/44931f22-4819-4aa5-a9cd-5af5d4c64b1f-650x293.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/44931f22-4819-4aa5-a9cd-5af5d4c64b1f-350x158.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/44931f22-4819-4aa5-a9cd-5af5d4c64b1f-768x346.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/44931f22-4819-4aa5-a9cd-5af5d4c64b1f.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ग्रामीण शिल्प के लिए सरस मेला एक ऐसा मंच है जो स्वदेशी उत्पादों एवं इससे जुड़े लोगों को बाज़ार उपलब्ध कराने के साथ प्रोत्साहन भी देता है l सरस मेला का आयोजन देश के स्वयं सहायता समूहों से जुडी महिलाओं , स्वरोजगारियों ,एवं अन्य शिल्पकारों द्वारा निर्मित उत्पाद हस्त शिल्प एवं लोक कलाकृतियों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए किया जाता है . लिहाजा ग्रामीण शिल्प और उत्पादों को बेचने के लिए सरस मेला एक बड़ा बाज़ार है . यहाँ आकर बिहार के स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के अलावा देश के अन्य राज्यों की महिलायें लाभान्वित हो रही है . वर्तमान में आयोजित बिहार सरस मेला में 5 सौ से ज्यादा स्टॉल पर देश भर की कलाकृतियाँ , शिल्प एवं देशी व्यंजन देशी अंदाज में प्रदर्शित है. बिहार से अभी जिलों से 191 जीविका दीदियों ने अपने-अपने क्षेत्र की शिल्प कला , व्यंजन एवं विशेषताओं को प्रदर्शित एवं बिक्री कर रही हैं. इसी तरह अन्य 21 राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण शिल्पकार एवं स्वरोजगारी अपने-अपने प्रदेश की लोक कलाकृतियाँ एवं शिल्प को लेकर उपस्थित हैं l बिहार सरस मेला में कुल 22 राज्यों की सहभागिता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/44931f22-4819-4aa5-a9cd-5af5d4c64b1f-1-650x293.jpeg" alt="" class="wp-image-80996" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/44931f22-4819-4aa5-a9cd-5af5d4c64b1f-1-650x293.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/44931f22-4819-4aa5-a9cd-5af5d4c64b1f-1-350x158.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/44931f22-4819-4aa5-a9cd-5af5d4c64b1f-1-768x346.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/44931f22-4819-4aa5-a9cd-5af5d4c64b1f-1.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार सरस मेला के पहले ही दिन 15 दिसंबर को 39 हजार से ज्यादा लोग आये और लगभग 10 लाख 08 हजार रुपये के उत्पादों की खरीद-बिक्री हुई .जीविका दीदियों द्वारा संचालित शिल्पग्राम एवं मधुग्राम के स्टॉल से बड़े पैमाने पर उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री हो रही है . व्यंजन परिसर में जीविका दीदी की रसोई के साथ ही व्यंजनों के विभिन्न स्टॉल पर शुद्ध, देशी एवं पौष्टिक व्यंजन का लुत्फ़ आगंतुक उठा रहे हैं . इसके साथ ही प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम, सेमिनार, परिचर्चा, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु जन-जागरूकता कार्यक्रम एवं नुक्कड़ नाटक सरस मेला परिसर में आयोजित हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/३३३३-650x293.jpeg" alt="" class="wp-image-80998" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/३३३३-650x293.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/३३३३-350x158.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/३३३३-768x346.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/३३३३.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत मुख्य मंच पर सुशीला श्रीकला के कलाकारों ने सूफी गायन, लोक गीत एवं गजल की प्रस्तुति की. शक्ति पाठक ने गजल प्रस्तुति के तहत “हमको किसके गम ने मारा- ये कहानी फिर कभी की” पेश कर दर्शकों को झुमाया.डा. ब्रिज बिहारी ने लोक “गीत काहे को ब्याहे विदेश –अरे लाखिया”और सूफी गायन पेश किया .“पिया गईले कलकतवा ए सजनी “इनके साथ वाद्य यंत्रों पर राजन कुमार-तबला, अनिल राज-ढोलक, सुजीत कुमार- की पैड एवं रंजन कुमार ने ऑकटा पैड पर संगत की . सांस्कृतिक कार्यक्रम के मंच संचालक गुलाम सिमानी रहे .</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/aefdf75f-8740-41d4-a4eb-614bd784659b-650x293.jpeg" alt="" class="wp-image-80997" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/aefdf75f-8740-41d4-a4eb-614bd784659b-650x293.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/aefdf75f-8740-41d4-a4eb-614bd784659b-350x158.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/aefdf75f-8740-41d4-a4eb-614bd784659b-768x346.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/aefdf75f-8740-41d4-a4eb-614bd784659b.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/११११-650x293.jpeg" alt="" class="wp-image-80999" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/११११-650x293.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/११११-350x158.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/११११-768x346.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/११११.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<pre class="wp-block-code"><code>सेमिनार हॉल में जीविका के तत्वाधान में जीविका दीदियों के साथ उद्योग संवाद प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया l बतौर प्रशिक्षण श्री देवश कुमार, परियोजना प्रबंधक ने जीविका दीदियों को उनके द्वारा निर्मित उत्पादों को बाज़ार में बेहतर ढंग से बिक्री करने, आकर्षक पैकिंग और मुनाफे के साथ बिक्री का गुर बताया.
तत्पश्चात  कॉफ्फेड के तत्वाधान में बिहार को मछली व्यवसाय में अग्रणी  बनाने के लिए जीविका दीदियों और जीविका समूह के सहयोग पर चर्चा हुई l कार्यक्रम मे कॉफ्फेड के प्रबंध निदेशक श्री ऋषिकेश कश्यप ने उपस्थित जीविका दीदियों से बिहार को मछली उत्पादन में अव्वल बनाने के लिए साथ आने का आग्रह किया .नुक्कड़ नाटक के तहत जन जागरूकता अभियान कार्यक्रम के अंतर्गत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के तत्वाधान में “कलमबाज” के द्वारा वित्तीय साक्षरता, साइबर क्राइम और ऑन लाइन खरीददारी सावधानी के साथ करने के लिए आगंतुकों को बताया गया. विभिन्न योजनाओं के प्रति आगंतुकों को जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों एवं बैंकों के स्टॉल भी सुशोभित है. जहाँ आगंतुक विभिन्न योजनाओं से रूबरू हो रहे हैं और अपने सवालों का उत्तर भी पा रहे हैं.

परियोजना पदाधिकारी महुआ राय चौधरी ने बताया कि बच्चों के लिए फन जोन एवं पालना घर सजाये गए हैं.आगंतुकों के लिए सरस मेला परिसर में कैशलेश खरीददारी की भी व्यवस्था की गई है. साथ ही जीविका दीदियों द्वारा संचालित ग्राहक सेवा केंद्र के माध्यम से आगंतुकों एवं स्टॉल धारकों के लिए ग्राहक सेवा केंद्र की भी उपलब्धता है.बिहार सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ ही सतत जीविकोपार्जन योजना के बिहार में सफल क्रियान्वयन की झलक दिखेगी । साथ ही नशा मुक्त बिहार एवं अत्यंत गरीब परिवारों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान की बानगी भी सतत जीविकोपार्जन योजना के स्टॉल पर प्रदर्शित हो रही है. सतत जीविकोपार्जन योजना से सम्बंधित स्टॉल पर वैशाली जिला के हाजीपुर से श्रीमती विन्दु देवी अपने नर्सरी में तैयार किये गए फूल, फल एवं सजावट के पौधे प्रदर्शनी सह बिक्री के लिए लेकर आई हैं. बिंदु देवी का परिवार कल तक गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर कर रहा था l इनके पति की दिमागी हालत ख़राब थी और वो इन्हें छोड़कर कहीं चले गए हैं. हासिये पर जीवन जी रही बिंदु देवी को जीविका का साथ मिला.


वर्ष 2020 में इन्हें हिमालय जीविका महिला ग्राम संगठन के अनुमोदन के बाद सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत स्वरोजगार एवं स्वावलंबन के लिए पहले चरण में 10 हजार रुपये की विशेष निवेश निधि की राशी तत्पश्चात जीविकोपार्जन निवेश निधि के तहत 20 हजार रुपये की राशी के पौधे और फिर प्रति माह एक हजार रुपये की राशी जीविकोपार्जन अंतराल सहयोग निधि के तहत दी गई l इस राशी से इन्होने अपने रूचि के अनुरूप नर्सरी शुरू की. अब ये प्रति माह 10 से 15 हजार रूपया प्रति माह शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं. मुनाफे की राशी से इन्होने एक गाय भी खरीद ली है.अब बिंदु देवी बिहार सरस मेला में बतौर महिला उद्यमी उपस्थित हैं. यह बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण एवं स्वावलंबन की मिसाल है. इस तरह से 3 सौ से ज्यादा महिला उद्यमी एवं शिल्पकार एक मेला में उपस्थित हैं. सरस मेला परिसर में सेल्फी ज़ोन भी लोगों को सहज ही आकर्षित कर रहे हैं. देशी अंदाज में बने जांता और ओखल - मुसल चलाती ग्रामीण महलाओं के साथ लोग सेल्फी ले रहे हैं.लाह से चूड़ी एवं उनी कपड़ों का जीवंत निर्माण- प्रदर्शन एवं बिक्री हो रहीहै.



                                                                             </code></pre>
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		<title>सरस मेला में मिल रहा है लोक कला एवं देशी व्यंजनों का  स्वाद</title>
		<link>https://www.patnanow.com/taste-of-folk-art-and-local-cuisine-is-available-in-saras-mela/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Sep 2023 03:09:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार सरस मेला अपने धरोहरों को बचाने एवं उन्हें पुनर्जीवित करने में बड़ा प्लेटफार्म 22 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलायें राजधानी पटना में सूट, साड़ी , दुपट्टा, कुर्ती मैटेरियल , चादर, तकिया कवर, सोफे कवर की विशेष मांग रविवार का दिन बिहार सरस मेला के लिए खास रहा.अपनी संस्कृति, शिल्प, लोक कला , परंपरा एवं देशी स्वाद से रूबरू होने के लिए लोग पधारें.मेला के पांचवे दिन रविवार को तीस हजार से ज्यादा लोग आये.ग्रामीण शिल्प ,संस्कृति एवं लोक कला और देशी व्यंजनों के प्रति लोगों को आकर्षण इस बात का प्रमाण है कि लोग अपने पूरानी संस्कृति एवं परंपरा की ओर लौट रहे हैं.लिहाजा बिहार सरस मेला अपने धरोहरों को बचाने  एवं उन्हें पुनर्जीवित करने में बड़ा प्लेटफार्म और माध्यम बना है. बिहार सरस मेला बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन समिति (जीविका ) द्वारा 20 सितम्बर से 27 सितम्बर 2023 तक आयोजित है. बिहार सरस मेला में बिहार समेत 22 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलायें अपने हुनर को लेकर 131 स्टॉल्स पर उपस्थित हैं. बिहार के सभी अड़तीस जिलों से स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिलाएं अपने-अपने क्षेत्र की संस्कृति, लोक कला, कलाकृतियाँ एवं  देशी व्यंजनों को लेकर उपस्थित हैं.सिक्किम,झारखण्ड,उत्तरप्रदेश, आँध्रप्रदेश,हरियाणा,छत्तीसगढ़,मेघालय,उत्तराखंड,पंजाब,असम,कर्नाटक, केरल ,पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र,गुजरात, उड़िसा, मध्य प्रदेश, तेलंगाना,राजस्थान,जम्मू-कश्मीर एवं तमिलनाडु से के स्टॉल सुसज्जित हैं.जहाँ स्टॉल धारक के साथ ही आगंतुक भी एक दुसरे के शिल्प और स्वाद से परिचित हो रहे हैं.चार दिनों में लगभग 92 लाख रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद – बिक्री हुई है.बिहार सरस मेला के चौथे दिन  [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बिहार सरस मेला अपने धरोहरों को बचाने एवं उन्हें पुनर्जीवित करने में बड़ा प्लेटफार्म</strong></p>



<p><strong>22 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलायें राजधानी पटना में</strong></p>



<p><strong>सूट, साड़ी , दुपट्टा, कुर्ती मैटेरियल , चादर, तकिया कवर, सोफे कवर की विशेष मांग </strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/0ef7385d-28bd-417b-b91a-394d19058200-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78564" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/0ef7385d-28bd-417b-b91a-394d19058200-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/0ef7385d-28bd-417b-b91a-394d19058200-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/0ef7385d-28bd-417b-b91a-394d19058200-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/0ef7385d-28bd-417b-b91a-394d19058200.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>रविवार का दिन बिहार सरस मेला के लिए खास रहा.अपनी संस्कृति, शिल्प, लोक कला , परंपरा एवं देशी स्वाद से रूबरू होने के लिए लोग पधारें.मेला के पांचवे दिन रविवार को तीस हजार से ज्यादा लोग आये.ग्रामीण शिल्प ,संस्कृति एवं लोक कला और देशी व्यंजनों के प्रति लोगों को आकर्षण इस बात का प्रमाण है कि लोग अपने पूरानी संस्कृति एवं परंपरा की ओर लौट रहे हैं.लिहाजा बिहार सरस मेला अपने धरोहरों को बचाने  एवं उन्हें पुनर्जीवित करने में बड़ा प्लेटफार्म और माध्यम बना है. बिहार सरस मेला बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन समिति (जीविका ) द्वारा 20 सितम्बर से 27 सितम्बर 2023 तक आयोजित है. बिहार सरस मेला में बिहार समेत 22 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलायें अपने हुनर को लेकर 131 स्टॉल्स पर उपस्थित हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/4f8082b3-0382-4ec9-a3e4-1adce475014a-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78565" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/4f8082b3-0382-4ec9-a3e4-1adce475014a-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/4f8082b3-0382-4ec9-a3e4-1adce475014a-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/4f8082b3-0382-4ec9-a3e4-1adce475014a-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/4f8082b3-0382-4ec9-a3e4-1adce475014a.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p></p>



<p>बिहार के सभी अड़तीस जिलों  से स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिलाएं अपने-अपने क्षेत्र की संस्कृति, लोक कला, कलाकृतियाँ एवं  देशी व्यंजनों को लेकर उपस्थित हैं.सिक्किम,झारखण्ड,उत्तरप्रदेश, आँध्रप्रदेश,हरियाणा,छत्तीसगढ़,मेघालय,उत्तराखंड,पंजाब,असम,कर्नाटक, केरल ,पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र,गुजरात, उड़िसा, मध्य प्रदेश, तेलंगाना,राजस्थान,जम्मू-कश्मीर एवं तमिलनाडु से के स्टॉल सुसज्जित हैं.जहाँ स्टॉल धारक के साथ ही आगंतुक भी एक दुसरे के शिल्प और स्वाद से परिचित हो रहे हैं.चार दिनों में लगभग 92 लाख रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद – बिक्री हुई है.बिहार सरस मेला के चौथे दिन  23  सितम्बर को साढ़े 35 लाख रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/94072fba-62d2-4ca4-8252-858fc2426911-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78568" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/94072fba-62d2-4ca4-8252-858fc2426911-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/94072fba-62d2-4ca4-8252-858fc2426911-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/94072fba-62d2-4ca4-8252-858fc2426911-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/94072fba-62d2-4ca4-8252-858fc2426911.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/9be3f8bf-7f1e-47f0-80cd-9b116417a20b-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78566" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/9be3f8bf-7f1e-47f0-80cd-9b116417a20b-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/9be3f8bf-7f1e-47f0-80cd-9b116417a20b-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/9be3f8bf-7f1e-47f0-80cd-9b116417a20b-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/9be3f8bf-7f1e-47f0-80cd-9b116417a20b.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आयोजन के चौथे दिन लगभग 17 हजार 700 लोग आये. सरस मेला में सुसज्जित सभी स्टॉल पर उपलब्ध शिल्प, कलाकृतियाँ , लोक कला एवं देशी व्यंजनों की बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री हो रही है.कई स्टॉल ऐसे हैं जहाँ प्रतिदिन 40 से 50 हजार रुपये से ज्यादा के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हो रही है.शनिवार को ओड़िसा के कटक जिला अंतर्गत बक्सी बाज़ार से आई हाजी अली स्वयं सहायता समूह की सदस्य आलिया बेगम ने अपने स्टॉल से एक लाख रुपये  से ज्यादा के परिधानों की बिक्री की.उनके स्टॉल से कॉटन, सिल्क एवं चंदेरी से बनी हुई सूट, साडी, दुपट्टा, कुर्ती मैटेरियल , चादर, तकिया कवर, सोफे कवर , आदि की बिक्री हो रही है.सरस मेला में कैशलेश खरीददारी की व्यवस्था है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3d34b016-6fec-4e34-b335-7682c3bb112e-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78567" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3d34b016-6fec-4e34-b335-7682c3bb112e-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3d34b016-6fec-4e34-b335-7682c3bb112e-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3d34b016-6fec-4e34-b335-7682c3bb112e-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3d34b016-6fec-4e34-b335-7682c3bb112e.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>परियोजना महुआ राय चौधरी ने बताया कि विभिन्न स्टॉल्स पर उपस्थित ग्रामीण परिवेश से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली जीविका दीदियाँ बिहार में महिला सशक्तिकरण एवं स्वावलंबन की झलक प्रदर्शित कर रही हैं.उन्ही महिलाओं में से एक हैं सावित्री देवी.सावत्री देवी मधुबनी के झंझारपुर प्रखंड से आई हैं.सावित्री भगवती जीविका महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं.सावित्री सिक्की से बने हुए चूड़ी, झुमका, स्टिक, रोटी डब्बा, पेन स्टैंड, टिशु बाक्स , मछली, कछुआ , कॉस्टल जैसे उत्पादों को प्रदर्शनी सह बिक्री कर रही हैं.सावित्री वर्ष 2014 से ही सरस मेला में खुद के द्वारा सिक्की से बनाये गए उत्पादों को लेकर आती हैं.इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर देश के अन्य राज्यों में लगने शिल्प मेला में भी जाती हैं.सावित्री बताई हैं कि जीविका से जुड़ने के बाद उनके हुनर को बड़ा बाज़ार और पहचान मिली है.पहले उनका हुनर घर तक ही सिमित था लेकिन जीविका से जुड़ने के बाद सिक्की से बने शिल्प एवं कलाकृतियों को अंतरष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है.</p>



<p><strong>रवीन्द्र भारती,पटना </strong></p>
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		<title>सरस मेला में महज दो दिनों में लगभग 33 लाख की खरीद -बिक्री</title>
		<link>https://www.patnanow.com/buying-and-selling-of-about-rs-33-lakh-in-just-two-days-in-saras-mela/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 Sep 2023 01:50:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[gyan bhavan patna]]></category>
		<category><![CDATA[Jivika]]></category>
		<category><![CDATA[mahua roy chawdhry]]></category>
		<category><![CDATA[roshan kumar]]></category>
		<category><![CDATA[saras mela 2023]]></category>
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					<description><![CDATA[शिल्प,&#160;परिधान एवं स्वाद के अनुरूप व्यंजनों की खरीदारी जमकर हो रही पटना:राजधानी के ज्ञान भवन,&#160;पटना में सरस मेला लगा हुआ है .बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन&#160;समिति&#160;,जीविका के तत्वाधान में बिहार सरस मेला चल रहा है .सरस मेला में घर के सजावट से लेकर देशी व्यंजन और देशी परिधान हर उम्र और हर&#160;तबके के लिए उपलब्ध है .लिहाजा यहाँ आकर अपने पसंद के शिल्प,&#160;परिधान एवं स्वाद के अनुरूप व्यंजनों की खरीददारी कर रहे हैं .बिहार सरस मेला में&#160;बिहार समेत&#160;22&#160;राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिला शिल्पकार अपने- अपने क्षेत्र के शिल्प,&#160;संस्कृति,&#160;स्वाद और परंपरा को लेकर&#160;उपस्थित हैं .131&#160;स्टॉल पर हमारे देश का हुनर,&#160;शिल्प,&#160;स्वाद,&#160;संस्कृति और परंपरा परिलक्षित है .बिहार के सभी जिलों से जीविका दीदियों का ग्रामीण&#160;शिल्प और हुनर विभिन्न स्टॉल पर प्रदर्शनी सह बिक्री के लिए सुसज्जित हैं .इन स्टॉल्स से उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद –बिक्री बड़े पैमाने पर हो रही है. महज दो दिनों में लगभग&#160;33&#160;लाख के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद &#8211; बिक्री हुई है .बिहार सरस मेला के दुसरेदिन&#160;21&#160;सितम्बर को साढ़े&#160;उन्नीस लाख के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है .आयोजन के दुसरे दिन लगभग&#160;9&#160;हजार&#160;600&#160;लोग आये .बिहार सरस मेला के दुसरे दिन&#160;बिहार के बांका जिला के अमरपुर स्थित बभनगावा की बानो खातून ने&#160;90&#160;हजार से ज्यादा के परिधानों की बिक्री की हैं .बानो खातून नसीब जीविका&#160;महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं .उनके द्वारा उत्पादित परिधानों में हैण्डलूम&#160;,&#160;प्योर सिल्क की साडी,&#160;दुपट्टा,&#160;सूट आदि हैं .बानो खातून पिछले&#160;7&#160;सालों से सरस मेला में अपने स्टॉल से परिधानों की बिक्री सह प्रदर्शनी करती आ रही हैं. बारिश के बीच सरस मेला से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शिल्प,&nbsp;परिधान एवं स्वाद के अनुरूप व्यंजनों की खरीदारी जमकर हो रही</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/9752ce4a-224f-488b-99ef-d0a3ce941988-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78520" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/9752ce4a-224f-488b-99ef-d0a3ce941988-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/9752ce4a-224f-488b-99ef-d0a3ce941988-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/9752ce4a-224f-488b-99ef-d0a3ce941988-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/9752ce4a-224f-488b-99ef-d0a3ce941988-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/9752ce4a-224f-488b-99ef-d0a3ce941988.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पटना:राजधानी के ज्ञान भवन,&nbsp;पटना में सरस मेला लगा हुआ है .बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन&nbsp;समिति&nbsp;,जीविका के तत्वाधान में बिहार सरस मेला चल रहा है .सरस मेला में घर के सजावट से लेकर देशी व्यंजन और देशी परिधान हर उम्र और हर&nbsp;तबके के लिए उपलब्ध है .लिहाजा यहाँ आकर अपने पसंद के शिल्प,&nbsp;परिधान एवं स्वाद के अनुरूप व्यंजनों की खरीददारी कर रहे हैं .बिहार सरस मेला में&nbsp;बिहार समेत&nbsp;22&nbsp;राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिला शिल्पकार अपने- अपने क्षेत्र के शिल्प,&nbsp;संस्कृति,&nbsp;स्वाद और परंपरा को लेकर&nbsp;उपस्थित हैं .131&nbsp;स्टॉल पर हमारे देश का हुनर,&nbsp;शिल्प,&nbsp;स्वाद,&nbsp;संस्कृति और परंपरा परिलक्षित है .बिहार के सभी जिलों से जीविका दीदियों का ग्रामीण&nbsp;शिल्प और हुनर विभिन्न स्टॉल पर प्रदर्शनी सह बिक्री के लिए सुसज्जित हैं .इन स्टॉल्स से उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद –बिक्री बड़े पैमाने पर हो रही है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3130135b-1ff9-44ea-894c-74e9231fbc2b-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78521" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3130135b-1ff9-44ea-894c-74e9231fbc2b-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3130135b-1ff9-44ea-894c-74e9231fbc2b-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3130135b-1ff9-44ea-894c-74e9231fbc2b-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3130135b-1ff9-44ea-894c-74e9231fbc2b-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3130135b-1ff9-44ea-894c-74e9231fbc2b.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>महज दो दिनों में लगभग&nbsp;33&nbsp;लाख के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद &#8211; बिक्री हुई है .बिहार सरस मेला के दुसरेदिन&nbsp;21&nbsp;सितम्बर को साढ़े&nbsp;उन्नीस लाख के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है .आयोजन के दुसरे दिन लगभग&nbsp;9&nbsp;हजार&nbsp;600&nbsp;लोग आये .बिहार सरस मेला के दुसरे दिन&nbsp;बिहार के बांका जिला के अमरपुर स्थित बभनगावा की बानो खातून ने&nbsp;90&nbsp;हजार से ज्यादा के परिधानों की बिक्री की हैं .बानो खातून नसीब जीविका&nbsp;महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं .उनके द्वारा उत्पादित परिधानों में हैण्डलूम&nbsp;,&nbsp;प्योर सिल्क की साडी,&nbsp;दुपट्टा,&nbsp;सूट आदि हैं .बानो खातून पिछले&nbsp;7&nbsp;सालों से सरस मेला में अपने स्टॉल से परिधानों की बिक्री सह प्रदर्शनी करती आ रही हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/c84340bc-3490-4ed1-8fb2-85c831ea506b-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78522" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/c84340bc-3490-4ed1-8fb2-85c831ea506b-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/c84340bc-3490-4ed1-8fb2-85c831ea506b-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/c84340bc-3490-4ed1-8fb2-85c831ea506b-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/c84340bc-3490-4ed1-8fb2-85c831ea506b-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/c84340bc-3490-4ed1-8fb2-85c831ea506b.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बारिश के बीच सरस मेला से मनपसंद हस्त शिल्प,&nbsp;हस्तकला एवं देशी व्यंजनों की खरीददारी आगंतुक खूब कर रहे हैं .खादी,&nbsp;सिल्क,&nbsp;मटका,&nbsp;कॉटन,&nbsp;कोशा आदि से बनी साड़ियाँ,&nbsp;सलवार,&nbsp;सूट&nbsp;,&nbsp;नाइटी जैसे परिधानों की खरीददारी बड़े पैमाने पर हो रही है .वहीँ घर सजाने के लिए हस्तशिल्प,कालीन,&nbsp;रग्स,&nbsp;आराम कुर्सी,&nbsp;लैम्प,&nbsp;झूमर,&nbsp;तोरण&nbsp;,&nbsp;कृत्रिम फूल और गमले की भी खरी-बिक्री हो रही है .बच्चों के खिलौने लट्टू,&nbsp;घिरनी,&nbsp;डमरू,&nbsp;किट-किट,&nbsp;योयो&nbsp;,डुगडुगी चकरी और नेम प्लेट बड़ी संख्या में बिक रहे हैं .कश्मीर से आये गर्म कपडे,&nbsp;शाल,&nbsp;शूट और स्टॉल भी आकर्षण के केंद्र हैं . देशी व्यंजनों में दीदी&nbsp;की रसोई के स्टॉल पर आगंतुक देशी व्यंजनों का स्वाद तो चख ही रहे हैं घर के लिए भी विभिन्न प्रकार के अचार,&nbsp;पापड़,&nbsp;दनौरी,&nbsp;अद्वरी,&nbsp;सत्तू जैसे देशी&nbsp;व्यंजन ले जा रहे हैं .जीविका दीदियों द्वारा संचालित शिल्पग्राम से बिहार राज्य के शिल्प की खरीद-बिक्री हो रही है वहीँ जीविका मधुग्राम से मध की भी&nbsp;बिक्री जारी है.</p>



<p><strong>परियोजना समन्वयक महुआ राय चौधरी ने कहा कि अपने हुनर को व्यवसाय में तब्दील करती और उसे बड़ा आकार देती हुई भोजपुर जिला अंतर्गत कोइलवर प्रखंड के मानसिक अस्पताल में&nbsp;संचालित जानकी जीविका महिला सिलाई सह उत्पादक कंपनी लिमिटेड का भी स्टॉल सुसज्जित है .इस स्टॉल से भी जीविका दीदियों द्वारा सिले गए सूट&nbsp;,नाईटी&nbsp;,&nbsp;सलवार,&nbsp;पेतोकोट,&nbsp;झोला,&nbsp;आदि की बिक्री हो रही है .</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/cc5679bb-5eb6-4bd6-ba90-76d98f4c3d12-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78523" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/cc5679bb-5eb6-4bd6-ba90-76d98f4c3d12-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/cc5679bb-5eb6-4bd6-ba90-76d98f4c3d12-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/cc5679bb-5eb6-4bd6-ba90-76d98f4c3d12-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/cc5679bb-5eb6-4bd6-ba90-76d98f4c3d12-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/cc5679bb-5eb6-4bd6-ba90-76d98f4c3d12.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जानकी जीविका महिला सिलाई सह उत्पादक कंपनी लिमिटेड द्वारा राज्य के अस्पतालों में&nbsp;संचालित दीदी की रसोई के लिए मांग के अनुरूप जीविका दीदियों का ड्रेस,&nbsp;स्कुल ड्रेस एवं अन्य संस्थानों के लिए परिधानों की आपूर्ति की जा रही है .बिहार&nbsp;के इकलौते मानसिक अस्पताल में में इलाजरत मरोजों के लिए जानकी जीविका महिला सिलाई सह उत्पादक कंपनी लिमिटेड द्वारा साढ़े चार लाख रुपये की&nbsp;ड्रेस की आपूर्ति की गई है .इस कंपनी में  दीदियों को रोजगार और उनके हुनर को प्रोत्साहन मिला है.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>सरस मेला से जीविका दीदियां संस्कृति और परंपरा को कर रही पुनर्जीवित</title>
		<link>https://www.patnanow.com/jeevika-didis-are-reviving-culture-and-tradition-through-saras-mela/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Sep 2023 05:34:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[Jivika]]></category>
		<category><![CDATA[mahuaroy chuwdhry]]></category>
		<category><![CDATA[RAUSHAN KUMAR]]></category>
		<category><![CDATA[saras mela 2023]]></category>
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					<description><![CDATA[लट्टू, घिरनी, डमरू, किट-किट, योयो ,डुगडुगी और चकरी मेला में आकर्षण के केंद्र सिल्क, खादी , कॉटन, मलबरी, फुलकारी, चिकेन कारी, आर्गेंजर,मश्लिन कॉटन,चंदेरी कॉटन, बांका सिल्क, कोशा, मटका, घींग्चा , मूंगा, एरी सिल्क सरस मेला के माध्यम से जीविका दीदियाँ संस्कृति और परंपरा को पुनर्जीवित कर रही हैं . इसके साथ ही एक दुसरे के हुनर को भी सीखते हुए सम्माहित कर रही है . इसकी बानगी बिहार सरस मेला में परिलक्षित हो रही है . बिहार सरस मेला बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका द्वारा 20 सितम्बर से 27 सितम्बर तक ज्ञान भवन, पटना में आयोजित है . ग्रामीण शिल्प , हुनर , स्वाद, संस्कृति एवं परंपरा को प्रोत्साहन एवं पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष दो संस्करण में आयोजित किया जा रहा है . प्रथम संस्करण के तहत बिहार सरस मेला ज्ञान भवन में चल रहा है . बुधवार को बिहार सरस मेला का शुभारंभ श्री श्रवन कुमार, माननीय मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया गया .              बिहार सरस मेला के पहले ही दिन 13 लाख 40 हजार 500 रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई . लगभग 7 हजार लोग आये . बिहार सरस  मेला के पहले ही दिन एरिशा नोगब्री ने अपने स्टॉल से 44 हजार रुपये के उत्पादों की बिक्री की . इनके द्वारा बेचे गए उत्पादों में प्राकृतिक सूखे फूल, बोनसाई, सेकुलुन ऑक्सीजन, जैविक रस हल्दी और  पर्यावरण को शुद्ध रखने वाले पौधे हैं .  बिहार सरस मेला के प्रति लोगों का रुझान निरंतर बढ़ते जा रहा है . यहाँ प्रदर्शनी सह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
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<p><strong>लट्टू, घिरनी, डमरू, किट-किट, योयो ,डुगडुगी और चकरी मेला में आकर्षण के केंद्र</strong></p>



<p><strong>सिल्क, खादी , कॉटन, मलबरी, फुलकारी, चिकेन कारी, आर्गेंजर,मश्लिन कॉटन,चंदेरी कॉटन, बांका सिल्क, कोशा, मटका, घींग्चा , मूंगा, एरी सिल्क</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/2-1-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78466" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/2-1-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/2-1-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/2-1-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/2-1-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/2-1.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सरस मेला के माध्यम से जीविका दीदियाँ संस्कृति और परंपरा को पुनर्जीवित कर रही हैं . इसके साथ ही एक दुसरे के हुनर को भी सीखते हुए सम्माहित कर रही है . इसकी बानगी बिहार सरस मेला में परिलक्षित हो रही है . बिहार सरस मेला बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका द्वारा 20 सितम्बर से 27 सितम्बर तक ज्ञान भवन, पटना में आयोजित है . ग्रामीण शिल्प , हुनर , स्वाद, संस्कृति एवं परंपरा को प्रोत्साहन एवं पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष दो संस्करण में आयोजित किया जा रहा है . प्रथम संस्करण के तहत बिहार सरस मेला ज्ञान भवन में चल रहा है . बुधवार को बिहार सरस मेला का शुभारंभ श्री श्रवन कुमार, माननीय मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया गया .</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/e81a94af-cc2c-4d06-9d18-ec6740b2d3ef-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78471" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/e81a94af-cc2c-4d06-9d18-ec6740b2d3ef-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/e81a94af-cc2c-4d06-9d18-ec6740b2d3ef-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/e81a94af-cc2c-4d06-9d18-ec6740b2d3ef-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/e81a94af-cc2c-4d06-9d18-ec6740b2d3ef-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/e81a94af-cc2c-4d06-9d18-ec6740b2d3ef.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>             बिहार सरस मेला के पहले ही दिन 13 लाख 40 हजार 500 रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई . लगभग 7 हजार लोग आये . बिहार सरस  मेला के पहले ही दिन एरिशा नोगब्री ने अपने स्टॉल से 44 हजार रुपये के उत्पादों की बिक्री की . इनके द्वारा बेचे गए उत्पादों में प्राकृतिक सूखे फूल, बोनसाई, सेकुलुन ऑक्सीजन, जैविक रस हल्दी और  पर्यावरण को शुद्ध रखने वाले पौधे हैं .  बिहार सरस मेला के प्रति लोगों का रुझान निरंतर बढ़ते जा रहा है . यहाँ प्रदर्शनी सह बिक्री के लिए आये सिल्क, खादी , कॉटन, मलबरी, फुलकारी, चिकेन कारी, आर्गेंजर,मश्लिन कॉटन,चंदेरी कॉटन, बांका सिल्क, कोशा, मटका, घींग्चा , मूंगा, एरी सिल्क  आदि से बने परिधान एवं ड्रेस मैटेरिअल सहज ही लोगों को आकर्षित कर रहे हैं . परिधानों की खरीददारी के साथ ही देशी व्यंजनों का भी स्वाद आगंतुक चख रहे हैं . </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3-3-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78468" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3-3-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3-3-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3-3-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3-3-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/3-3.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जीविका दीदियों द्वारा संचालित दीदी की रसोई के स्टॉल पर स्वादिष्ट एवं पौष्टिक व्यंजनों का लुत्फ़ आगंतुक उठा रहे हैं . घरेलु व्यंजनों में बरी-पापड़, अदवरी, दनावरी, विभिन्न प्रकार के अचार, मखाना, चना जोर गरम, आयुर्वेदिक पाचक आदि की भी खूब खरीद-बिक्री हो रही है . बचपन के खिलौने लट्टू, घिरनी, डमरू, किट-किट, योयो ,डुगडुगी और चकरी तथा बच्चियों के लिए किचेन सेट मेला में आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं . इन सब खिलौने को देखकर सहज ही अपना बचपन लौट आता है और आगंतुक अपने बच्चे-बच्चियों के जरुर खरीद  रहे हैं . ताकि नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति और परंपरा से अवगत हो .सरस मेला के माध्यम से राज्य सरकार दारा चलाई जा रही एवं जीविका द्वारा संचालित सतत जीविकोपार्जन योजना के सफल क्रियान्वयन की बानगी भी दिख रही है . </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/4-1-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78469" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/4-1-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/4-1-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/4-1-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/4-1-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/4-1.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कल तक शराब एवं ताड़ी व्यवसाय से जुड़े परिवार अब उससे इतर स्वरोजगार करते हुए समाज में सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं . सारण जिला अंतर्गत मांझी प्रखंड स्थित बरेजा गाँव से आई सीता देवी के पति स्व. हरिनंदन महतो की मृत्यु अत्यधिक शराब पीने से हो गई थी . वो शराब बेचते भी थे . उनकी मृत्यु के बाद सीता ने खुद को संभाला और सतत जीविकोपार्जन योजना की मदद से वो परचूनी दुकान चलते हुए सिक्की कला को भी पुनर्जीवित कर रही हैं . वर्ष 2021 में उन्हें सतत जीविकोपार्जन योजना से जोड़ा गया . उन्हें क्रमशः कुल 37 हजार रुपये की सहयोग राशि व्यवसाय करने के लिए जीविका द्वारा दी गई . उन्हें पारचून दुकान खोल लिया . अब वो खुद के संबल से अपने दो बेटा और दो बेटी का परवरिस कर रही हैं . सभी स्कुल जाने लगे हैं . सीता इन दिनों कुश से उत्पादों का निर्माण कर बाज़ार में बेच रही हैं . इससे भी उन्हें मुनाफा हो रहा है और परम्परा और संस्कृति तथा शिल्प पुनर्जीवित हो रहा है . सीता ने कुश से राखी  बनाकर बेचा . इस व्यवसाय से उन्हें सिर्फ अगस्त माह में 21 हजार रुपये का मुनाफा हुआ . उनके कार्य और हुनर की भी तारीफ हुई . सीता देवी अपने द्वारा कुश से बनाये गए उत्पादों को लेकर सरस मेला में सतत जीविकोपार्जन योजना के स्टॉल पर उपस्थित हैं . बिहार से सीता देवी जैसी 80 से ज्यादा जीविका दीदियाँ सरस मेला में खुद के द्वारा बनाये गए शिल्प को लेकर उपस्थित हैं .</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/1-3-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78470" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/1-3-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/1-3-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/1-3-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/1-3.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>परियोजना समन्यवक महुआ राय चौधरी ने बताया कि बिहार सरस मेला में बिहार समेत 22 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिला शिल्पकार अपने- अपने क्षेत्र के शिल्प, संस्कृति, स्वाद और परंपरा को लेकर उपस्थित हैं . 131 स्टॉल पर हमारे देश का हुनर, शिल्प, स्वाद, संस्कृति और परंपरा परिलक्षित है. बिहार के सभी जिलों से जीविका दीदियों का ग्रामीण शिल्प और हुनर विभिन्न स्टॉल पर प्रदर्शनी सह बिक्री के लिए सुसज्जित हैं . इन स्टॉल्स से उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद –बिक्री बड़े पैमाने पर हो रही है . सरस मेला का सबसे खास आकर्षण जीविका दीदियों द्वारा संचालित दीदी की रसोई, शिल्पग्राम एवं मधुग्राम है .बिहार सरस मेला 20 सितंबर से शुरू होकर 27 सितंबर तक चलेगा . मेला का समय सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक निर्धारि . प्रवेश निःशुल्क है.</p>



<p><strong>रवींद्र भारती </strong></p>
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		<title>सरस मेला &#8211; 2023 पटना के ज्ञान भवन में शुरू</title>
		<link>https://www.patnanow.com/saras-mela-2023-starts-at-gyan-bhawan-patna/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Sep 2023 03:58:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[22 state participation]]></category>
		<category><![CDATA[gyan bhavan]]></category>
		<category><![CDATA[Jivika]]></category>
		<category><![CDATA[saras mela 2023]]></category>
		<category><![CDATA[shravan kumar minister]]></category>
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					<description><![CDATA[गाँव के शिल्पकारों को बेहतर मंच भी मिल रहा है -श्रवण कुमार ग्रामीण शिल्प को एक मंच प्रदान करते हुए उसे बाज़ार उपलब्ध कराना इस मेला का उदेश्य बिहार समेत 22 राज्यों के लगे 135 स्टॉल खरीदारी के साथ लें लजीज पकवानों का आनंद बड़े पैमाने पर एक ही चाट के नीचे हुनरमंद शिल्पकारों को मौका और प्रोत्साहन दिया जा रहा है. ग्रामीण विकास विभाग महिलाओं के स्वावलंबन के लिए तत्पर है और हरसंभव सहयोग प्रदान किया जा रहा है -श्रवण कुमार पटना के ज्ञान भवन में बुधवार को सरस मेले का उद्घाटन बिहार ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने किया.यह मेला 20 सितम्बर से 27 सितम्बर तक आयोजित किया गया है. इस मेले में बिहार समेत 22 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला शिल्पकार अपने-अपने क्षेत्र की संस्कृति, परम्परा, व्यंजन और शिल्प को प्रदर्शित करेंगी. इस मेले में कुल 135 स्टॉल लगाए गए हैं.मेले में घूमने का समय सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक है.बिहार के सभी 38 जिला से कुल 80 जीविका दीदियां अपने-अपने हस्तशिल्प और देसी व्यंजनों को लेकर इस मेले में उपस्थित हैं. स्वागत संबोधन राम निरंजन सिंह, निदेशक, बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) ने किया .आगत तिथियों का स्वागत करते हुए निदेशक , जीविका&#160; ने अपने संबोधन में कहा कि इस बार बिहार समेत 22 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुडी महिला उद्यमी अपने हस्तशिल्प, कलाकृतियाँ, स्वाद, व्यंजन और परम्परा को लेकर 135 स्टॉल पर उपस्थित हैं . बिहार के सभी जिला से जीविका से सम्बद्ध स्वयं सहायता समूह [&#8230;]]]></description>
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<h2 class="wp-block-heading">गाँव के शिल्पकारों को बेहतर मंच भी मिल रहा है -श्रवण कुमार</h2>



<p><strong>ग्रामीण शिल्प को एक मंच प्रदान करते हुए उसे बाज़ार उपलब्ध कराना इस मेला का उदेश्य</strong></p>



<p><strong>बिहार समेत 22 राज्यों के लगे 135 स्टॉल</strong></p>



<p><strong>खरीदारी के साथ लें लजीज पकवानों का आनंद</strong></p>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color"><strong>बड़े पैमाने पर एक ही चाट के नीचे हुनरमंद शिल्पकारों को मौका और प्रोत्साहन दिया जा रहा है. ग्रामीण विकास विभाग महिलाओं के स्वावलंबन के लिए तत्पर है और हरसंभव सहयोग प्रदान किया जा रहा है -श्रवण कुमार</strong></p>
</blockquote>



<p>पटना के ज्ञान भवन में बुधवार को सरस मेले का उद्घाटन बिहार ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने किया.यह मेला 20 सितम्बर से 27 सितम्बर तक आयोजित किया गया है. इस मेले में बिहार समेत 22 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला शिल्पकार अपने-अपने क्षेत्र की संस्कृति, परम्परा, व्यंजन और शिल्प को प्रदर्शित करेंगी. इस मेले में कुल 135 स्टॉल लगाए गए हैं.मेले में घूमने का समय सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक है.बिहार के सभी 38 जिला से कुल 80 जीविका दीदियां अपने-अपने हस्तशिल्प और देसी व्यंजनों को लेकर इस मेले में उपस्थित हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/5bf51122-82d6-4be2-a530-173f067f725b-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78402" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/5bf51122-82d6-4be2-a530-173f067f725b-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/5bf51122-82d6-4be2-a530-173f067f725b-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/5bf51122-82d6-4be2-a530-173f067f725b-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/5bf51122-82d6-4be2-a530-173f067f725b.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> स्वागत संबोधन राम निरंजन सिंह, निदेशक, बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) ने किया .आगत तिथियों का स्वागत करते हुए निदेशक , जीविका&nbsp; ने अपने संबोधन में कहा कि इस बार बिहार समेत 22 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुडी महिला उद्यमी अपने हस्तशिल्प, कलाकृतियाँ, स्वाद, व्यंजन और परम्परा को लेकर 135 स्टॉल पर उपस्थित हैं . बिहार के सभी जिला से जीविका से सम्बद्ध स्वयं सहायता समूह से जुडी जीविका दीदियाँ भी अपने विभिन्न उत्पादों को लेकर उपस्थित हैं . ग्रामीण शिल्प को एक मंच प्रदान करते हुए उसे बाज़ार उपलब्ध कराना इस मेला का उदेश्य है और प्रतिवर्ष सरस मेला के प्रति लोगों के आकर्षण में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है .</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/845d8371-fa60-4bed-9add-e5df679a3c68-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78403" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/845d8371-fa60-4bed-9add-e5df679a3c68-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/845d8371-fa60-4bed-9add-e5df679a3c68-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/845d8371-fa60-4bed-9add-e5df679a3c68-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/845d8371-fa60-4bed-9add-e5df679a3c68.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> आगंतुकों की संख्या और खरीद-बिक्री के आंकड़ों में निरंतर वृद्धि बिहार सरस के प्रति आगंतुकों के क्रेज को दर्शाता है .तत्पश्चात डा.एन.सरवन कुमार, सचिव, ग्रामीण विकास विभाग ने अपना उद्बोधन व्यक्त किया. इस अवसर पर सचिव, ग्रामीण विकास, विभाग&nbsp; ने कहा कि ग्रामीण शिल्प और उत्पादों को बेचने के लिए सरस मेला एक बड़ा माध्यम है .&nbsp; उन्होंने कहा कि जीविका ने समाज में बड़ा बदलाव लाया है. इससे पूर्व तनय सुल्तानिया , उप विकास आयुक्त, पटना ने कहा कि सरस मेला के माध्यम से ग्रामीण परिवेश की महिलाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं. ग्रामीण शिल्प और हस्तकला के सबसे बड़े बाज़ार में आकर बिहार के देश भर की स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाएं&nbsp; लाभान्वित हो रही है. &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>



<p>&nbsp;जीविका की परियोजना समन्यवक महुआ राय चौधरी ने बताया किअररिया से जुट से बने उत्पाद, अरवल से लकड़ी से बने उत्पाद, औरंगाबाद से डिजाइनर बैंगल्स, कारपेट और कालीन, बांका से सिल्क से बने कपड़े, साड़ी, शूट, दुपट्टा और खाद्य पदार्थों के अंतर्गत कतरनी चुडा, चावल, सत्तू और गुड, बेगुसराय से सत्तू, बरी, मसाला, किशनगंज से हल्दी पावडर, लखीसराय से मिठाइयां, मधेपुरा से घर के सजावट के लिए बांस से बने उत्पाद, शिवहर से लाह की बनी चूड़ियां, सीतामढ़ी से मधुबनी पेंटिंग, आदि के स्टॉल यहां लगाए गए हैं,बिहार से दे व्यंजनों के 22 स्टॉल, हस्तशिल्प के 34 स्टॉल, हैंडलूम के 12, हस्तनिर्मित उत्पादों के 4, सिलाई केंद्र का 1, दीदी की रसोई के 4 और रग्स के 3 स्टॉल है। जीविका दीदी की रसोई&#8221; के स्टॉल पर आगंतुक देशी व्यंजनों के स्वाद का लुत्फ़ उठा सकेंगे. बिहार के अलावा अन्य राज्यों से हस्तशिल्प के 8 स्टॉल, हैंडलूम के 18, हस्तनिर्मित उत्पादों के 10 और अन्य व्यंजनों के 5 स्टॉल हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/b90c019d-3717-43e6-a4a7-da30d4ee0c8d-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-78404" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/b90c019d-3717-43e6-a4a7-da30d4ee0c8d-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/b90c019d-3717-43e6-a4a7-da30d4ee0c8d-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/b90c019d-3717-43e6-a4a7-da30d4ee0c8d-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/b90c019d-3717-43e6-a4a7-da30d4ee0c8d.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जीविका की परियोजना पदाधिकारी महुआ राय चौधरी ने बताया कि सरस मेला का सबसे खास आकर्षण जीविका दीदियों द्वारा संचालित दीदी की रसोई, शिल्पग्राम एवं मधुग्राम है .इसके साथ ही जीविका द्वारा संचालित सतत जीविकोपार्जन योजना के स्टॉल से आगंतुक गरीबी उन्मूलन की दिशा में किये जा रहे कार्यों से रूबरू हो रहे हैं. इसके अलावा महिला विकास निगम के और बिहार महिला उद्द्योग संघ के स्टॉल पर राज्य में हो रहे विकासात्मक कार्यों की प्रदर्शनी एवं उत्पादों की खरीद -बिक्री हो रही है . सरस मेला को फोर नाइन मीडिया प्राईवेट लिमिटेड, दिल्ली ने सजाया-संवारा है . &nbsp;बिहार सरस मेला 20 सितंबर से शुरू होकर 27 सितंबर तक चलेगा .मेला का समय सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक निर्धारित है वहीँ &nbsp;प्रवेश निःशुल्क रखा गया है .</p>



<p><strong>रवीन्द्र भारती </strong></p>
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