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	<title>Sanjay upadhyay &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>बिदेसिया की 731वीं प्रस्तुति पटना में</title>
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		<pubDate>Sun, 19 Sep 2021 16:39:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रंग जलसा में सम्मानित हुई प्रसिद्ध अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी रानावि के निदेशक दिनेश खन्ना ने कहा बिहार के साथ खड़ा है राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय पटना: नाट्यसंस्था निर्माण कला मंच की ओर से कालिदास रंगालय में आयोजित शांति स्मृति सम्मान2021 का आयोजन किया गया। इस आयोजन में शांति स्मृति सम्मान अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी को वर्ष 2021 का रंग सम्मान दिया गया इस अवसर हिमानी शिवपुरी ने कहा कि उन्हें सम्मान तो बहुत मिला है लेकिन पटना में जो सम्मान मिला है उससे वो पटना की हो कर रह गई हैं। दर्शकों की फरमाइश पर उन्होंने डायलॉग भी सुनाए.इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय नाट्य विद्यायल के निदेशक दिनेश खन्ना ,पद्मश्री उषा किरण खान ने हिमानी शिवपुरी को 25 हजार रुपये, शॉल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।इस मौके पर रंग आलोचक अजीत राय भी मौजूद थे। पांच दिवसीय इस समारोह के तीसरे दिन भिखारी ठाकुर की चर्चित रचना बिदेसिया नाटक का मंचन किया गया। निर्माण कला मंच की ओर से संजय उपाध्याय निर्देशित इस नाटक के 731वें शो में भिखारी ठाकुर के समय में समाज में व्याप्त पलायन की पीड़ा को दिखाया गया।बिदेसिया बिछोह और मिलन की अभिलाषा के गीत हैं, जिनमें लोकनायक नायिका के मन की आतुरता का सहज चित्रण होता है. लोक नाट्य शैली में हुए इस नाटक में एक ऐसे युवक की कहानी दिखाई गई जो शादी के कुछ दिनों बाद ही घूमने और रोजगार की खातिर कोलकाता चला जाता है। कोलकाता महानगर उसे खूब भाता है और वह वहीं एक अन्य महिला के साथ अपना घर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रंग जलसा में सम्मानित हुई प्रसिद्ध अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी </strong></p>



<p><strong>रानावि के निदेशक दिनेश खन्ना ने कहा बिहार के साथ खड़ा है राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय </strong></p>



<p>पटना: नाट्यसंस्था निर्माण कला मंच की ओर से कालिदास रंगालय में आयोजित शांति स्मृति सम्मान2021 का आयोजन किया गया। इस आयोजन में शांति स्मृति सम्मान अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी को वर्ष 2021 का रंग सम्मान दिया गया इस अवसर हिमानी शिवपुरी ने कहा कि उन्हें सम्मान तो बहुत मिला है लेकिन पटना में जो सम्मान मिला है उससे वो पटना की हो कर रह गई हैं। दर्शकों की फरमाइश पर उन्होंने डायलॉग भी सुनाए.इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय नाट्य विद्यायल के निदेशक दिनेश खन्ना ,पद्मश्री उषा किरण खान ने हिमानी शिवपुरी को 25 हजार रुपये, शॉल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।इस मौके पर रंग आलोचक अजीत राय भी मौजूद थे।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="581" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0919_220354.jpg" alt="" class="wp-image-55536" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0919_220354.jpg 581w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0919_220354-339x350.jpg 339w" sizes="(max-width: 581px) 100vw, 581px" /><figcaption><strong>अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी को सम्मानित करते रानावि के निदेशक दिनेश खन्ना ,पद्मश्री उषा किरण खान संजय उपाध्याय व अन्य</strong></figcaption></figure>



<p>पांच दिवसीय इस समारोह के तीसरे दिन भिखारी ठाकुर की चर्चित रचना बिदेसिया नाटक का मंचन किया गया। निर्माण कला मंच की ओर से संजय उपाध्याय निर्देशित इस नाटक के 731वें शो में भिखारी ठाकुर के समय में समाज में व्याप्त पलायन की पीड़ा को दिखाया गया।बिदेसिया बिछोह और मिलन की अभिलाषा के गीत हैं, जिनमें लोकनायक नायिका के मन की आतुरता का सहज चित्रण होता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210919_201530.jpg" alt="" class="wp-image-55538" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210919_201530.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210919_201530-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>नाटक बिदेशिया का एक दृश्य </strong></figcaption></figure>



<p><br>लोक नाट्य शैली में हुए इस नाटक में एक ऐसे युवक की कहानी दिखाई गई जो शादी के कुछ दिनों बाद ही घूमने और रोजगार की खातिर कोलकाता चला जाता है। कोलकाता महानगर उसे खूब भाता है और वह वहीं एक अन्य महिला के साथ अपना घर बसा लेता है। इधर पति के चले जाने से पत्नी विरह वेदना झेलने को विवश रहती है। उसकी पीड़ा को देख कर गांव के बटोही बाबा कोलकाता जाते हैं और उसे वापस लाते हैं। युवक के गांव आने के बाद कोलकाता वाली महिला भी पहुंच जाती है दोनों ही अब साथ रहने के लिए राजी हो जाती है। नाटक गांवों से शहरों में होते पलायन और इससे उपजी पीड़ा को बड़े ही रोचक अंदाज में दिखा गया। संजय उपाध्याय निर्देशित नाटक में प्रमुख भूमिका में शारदा सिंह ने प्यारी सुंदरी और विदेशी की भूमिका में सुमन कुमार ने नाटक को अंत तक बांधे रखा। रखेलिन रूबी खातून बटोही की भूमिका में पप्पू ठाकुर और जोकर की भूमिका में धीरज दास ने अपने अभिनय से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रकाश परिकल्पना जय कुमार भारती और रूप सज्जा संजय सावंत और जितेंद्र कुमार जीतू की थी। <br>भिखारी ठाकुर रचित विदेशिया के गीतों को संजय उपाध्याय ने रंग संगीत के प्रयोग के जरिये उम्दा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210919_200406.jpg" alt="" class="wp-image-55541" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210919_200406.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210919_200406-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>नाटक बिदेसिया का एक दृश्य </strong></figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210919_201800.jpg" alt="" class="wp-image-55537" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210919_201800.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210919_201800-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>प्यारी सुंदरी और बिदेसिया</strong></figcaption></figure>
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		<title>&#8220;राइडर्स टू द सी&#8221; की बेहतरीन प्रस्तुति पटना में</title>
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		<pubDate>Mon, 13 Sep 2021 04:43:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नाट्य प्रस्तुति कल्पनाओं और वास्तविकता के मूल को ध्यान में किया गया जो एक बेहतरीन प्रस्तुति थी -संजय उपाध्याय कलाकारों ने अपने संवाद सम्प्रेषण और निर्देशक की रचनाशीलता प्रस्तुति को जीवंत बनाती है &#8211; परवेज अख्तर पटना: नाट्य संस्था वाइटल इन्वेंशन ऑफ सोशल हारमोनी विद आर्ट (विश्वा) ने जॉन मिलिंगटन सिन्ज लिखित एवं राजेश राजा निर्देशित नाटक &#8220;राइडर्स टू द सी&#8221; का मंचन कालिदास रंगालय गांधी मैदान पटना में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन पटना की मेयर सीता साहू ,परवेज अख्तर,संजय उपाध्याय ,बिहार पुलिस मेंस एसो के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह और अन्य ने किया ।इस मौके पर संस्था की ओर से आगत अतिथियों को सम्मानित भी किया गया । नाटक की कहानी समंदर के सवार एक दुखांत कथा है। यह एक ऐसे परिवार की कहानी है जो एक समुद्री टापू पर रहता है, जिसमें एक माँ अपने दो बेटियों और एक बेटे के साथ रहती है। उस स्त्री ने अपने पति और अपने 4 बेटों को समंदर में खो दिया है घर में कमाने वाला सिर्फ एक ही बेटा बच्चा है और वो भी छोड़े बेचने टापू के पार जा रहा है समुद्री जीव से उस मां को ये डर है की रात होने तक उसका कोई भी पुत्र जीवित नही रहेगा इसलिये वो अपने बेटे को समंदर में नहीं जाने को कहती है पर वो अंतिम बेटा समुद्र में चला जाता है। अपने अकेले बचे बेटे के भी समंदर में जाने से मां विक्षिप्तता की स्थिति में भ्रम और सच्चाई के बीच संघर्ष करती है उसे अपने सारे खोए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नाट्य प्रस्तुति कल्पनाओं और वास्तविकता के मूल को ध्यान में किया गया जो एक बेहतरीन प्रस्तुति थी -संजय उपाध्याय </strong></p>



<p><strong>कलाकारों ने अपने संवाद सम्प्रेषण और निर्देशक की रचनाशीलता प्रस्तुति को जीवंत बनाती है &#8211; परवेज अख्तर </strong></p>



<p>पटना: नाट्य संस्था वाइटल इन्वेंशन ऑफ सोशल हारमोनी विद आर्ट (विश्वा) ने  जॉन मिलिंगटन सिन्ज लिखित एवं राजेश राजा निर्देशित नाटक &#8220;राइडर्स टू द सी&#8221; का मंचन कालिदास रंगालय गांधी मैदान पटना में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन पटना की मेयर सीता साहू ,परवेज अख्तर,संजय उपाध्याय ,बिहार पुलिस मेंस एसो के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह और अन्य ने किया ।इस मौके पर संस्था की ओर से आगत अतिथियों को सम्मानित भी किया गया ।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="313" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_095931.jpg" alt="" class="wp-image-55423" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_095931.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_095931-350x169.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>पटना की मेयर दीप प्रज्ज्वलित करते हुए </strong></figcaption></figure>



<p>नाटक की कहानी समंदर के सवार एक दुखांत कथा है। यह एक ऐसे परिवार की कहानी है जो एक समुद्री टापू पर रहता है, जिसमें एक माँ अपने दो बेटियों और एक बेटे के साथ रहती है। उस स्त्री ने अपने पति और अपने 4 बेटों को समंदर में खो दिया है घर में कमाने वाला सिर्फ एक ही बेटा बच्चा है और वो भी छोड़े बेचने टापू के पार जा रहा है समुद्री जीव से उस मां को ये डर है की रात होने तक उसका कोई भी पुत्र जीवित नही रहेगा इसलिये वो अपने बेटे को समंदर में नहीं जाने को कहती है पर वो अंतिम बेटा समुद्र में चला जाता है। अपने अकेले बचे बेटे के भी समंदर में जाने से मां विक्षिप्तता की स्थिति में भ्रम और सच्चाई के बीच संघर्ष करती है उसे अपने सारे खोए हुए बेटे नज़र आने लगते है अंत में उस मां का सामना सच से होता है जब उसका अंतिम बचा बेटा भी समंदर की उफान मारती लहरों में डूब जाता और उसकी लाश घर में आती है तब वो मां कहती है कि एक दिन सब चले ही जाते है बस हमें करना चाहिए और उम्मीद का दामन थाम कर जीवन को जीते रहना चाहिए। ये नाटक आज के कोरोना काल में समसामयिक से लगता है क्योंकि कोरोना में भी कई लोगों ने अपने पूरे परिवार को खो दिया है </p>



<p><br>राइडर्स टू द सी में मौत की त्रासदी को नाटककार ने क्लासिकल प्रतीकात्मकता और यथार्थवादी सम्वाद इस्तेमाल किया है जिस कारण ‘सिन्नज’ का ये नाटक सर्वश्रेष्ठ त्रासदी में शुमार किया जाता है।<br>इस नाटक को पटना रंगमच पर नवोदित अभिनेताओं के साथ काम करने के लिए राजेश राजा लोकप्रिय रहे हैं,उन्होंने ‘राइडर्स टू द सी’ में नए अभिनेताओं से काम लेने में कामयाब रहे।इस नाटक में नवोदित अभिनेता,अभिनेत्रियों के साथ बेहतरीन ब्लाकिंग करवाया और सभी पात्र से सराहनीय अभिनय भी कराने में कामयाब दिखे।मौया की केंद्रीय भूमिका में रेणु सिन्हा के लिए ये भूमिका बहुत महत्वपूर्ण था जिसका उन्होंने भरपूर फ़ायदा उठाया, और दर्शकों को अपने अभिनय और संवाद अदायगी से अंत तक बांधे रखा ।कैथ्लिन की भूमिका में अपर्णा ने भी अपने अभिनय से दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी । नोरा की भूमिका में रिया ने बेहतरीन सम्वाद अदायगी और अपने भाव भंगिमा से नाटक में जान डालने की पूरी कोशिश की। पुत्र बाटले की भूमिका में संदीप कुमार और मृत पुत्रों की भूमिका में प्रिंस राज,दीपक अंकु गौरव और अमरजीत कुमार ने भी अच्छा प्रयास किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="554" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100725.jpg" alt="" class="wp-image-55428" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100725.jpg 554w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100725-323x350.jpg 323w" sizes="(max-width: 554px) 100vw, 554px" /><figcaption><strong>अभिनेत्री रेणु सिन्हा नाटक राइडर्स टू द सी में</strong></figcaption></figure>



<p><br>रज़िया ज़हीर द्वारा हिंदी अनुवादित राइडर्स टू द सी नाटक  में इस सच्चाई को स्वीकार कर परिस्थितियों से संघर्ष कर रहे हैं और जीवन जी रहे हैं। जो लोग समुद्र के किनारे रहते हैं वे जीवन यापन के लिए समुद्र पर निर्भर हैं, लेकिन उन्हें समुद्र से मृत्यु का भी खतरा है,समुद्र लोगों को आजीविका प्रदान करता है, वहीं लोगों की जान भी ले लेता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="361" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100058.jpg" alt="" class="wp-image-55427" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100058.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100058-350x194.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="356" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100137.jpg" alt="" class="wp-image-55426" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100137.jpg 356w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100137-208x350.jpg 208w" sizes="(max-width: 356px) 100vw, 356px" /><figcaption><strong>अपर्णा राज और रिया राइडर्स टू द सी में </strong></figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="361" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100029.jpg" alt="" class="wp-image-55425" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100029.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100029-350x194.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>नाटक राइडर्स टू द सी में</strong></figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="388" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100046.jpg" alt="" class="wp-image-55424" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100046.jpg 388w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0913_100046-226x350.jpg 226w" sizes="(max-width: 388px) 100vw, 388px" /></figure>



<p>पूरे नाटक में सेट डिजाइन बेहतरीन बन पड़ा था सबसे ज़्यादा जिस विधा ने आकर्षित किया ।समुद्र, जीवन का स्रोत और साथ ही जीवन के संहारक को सीमित संसाधन में बेहद ख़ूबसूरती से संजोया रजनीश मानी ने।नाटक में प्रकाश का अपना ही महत्व था समुद्र के नीले जल ,नाव ,मौसम को रौशन कुमार ने बेहतरीन संयोजन करने की पुरजोर कोशिश की।कुछ हद तक वे सफल भी रहे। संगीत पक्ष पर अभी काम करने की आवश्यकता दिख रही थी।</p>



<p>&#8211;<strong>रवींद्र भारती</strong></p>



<p></p>
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