<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Sahitya &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
	<atom:link href="https://www.patnanow.com/tag/sahitya/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.patnanow.com</link>
	<description>Patna News Portal - हर ख़बर पर नज़र</description>
	<lastBuildDate>Wed, 10 Sep 2025 03:59:46 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.8.2</generator>

<image>
	<url>https://www.patnanow.com/assets/2022/08/cropped-PatnaNow_Logo_2022-32x32.png</url>
	<title>Sahitya &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
	<link>https://www.patnanow.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>&#8216;आयाम&#8217; साहित्य का स्त्री स्वर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/aayam-patna-literature-unit/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Sep 2021 08:59:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[2015]]></category>
		<category><![CDATA[Aayam patna literature unit]]></category>
		<category><![CDATA[Sahitya]]></category>
		<category><![CDATA[Usha kiran khan]]></category>
		<category><![CDATA[Veena amrit]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=55670</guid>

					<description><![CDATA[पद्मश्री उषाकिरण खान है संस्थापिका प्रतिभा संपन्न रचनाकार स्त्रियों को एक मंच मुहैया कराता है आयाम पटना: &#8216;आयाम&#8217; संस्था मुख्यतः उन रचनाशील स्त्रियों के लिए हैं जिनकी साहित्यिक प्रतिभा और लेखनी घर की चहारदिवारी एवं अनेक जिम्मेदारियों के भीतर दबी रहती है. &#8216;आयाम&#8217; इन्हीं प्रतिभा संपन्न रचनाकार स्त्रियों को एक मंच मुहैया कराता है जो इसकी हकदार हैं. इसकी शुरुआत पद्मश्री उषाकिरण खान ने किया और आयाम पद्मश्री उषा किरण खान द्वारा स्थापित एक रजिस्टर्ड साहित्यिक संख्या है. संस्थापक अध्यक्ष पद्मश्री उषा किरण खान कहती हैं कि स्त्री जो चाहत की, सेवा की और बुढ़ों की सेवा करती है घर बनाती है, किसी भी मकान में उसकी सहभागिता मात्र कला कौशल दिखाने की नहीं है बल्कि वह भी सोचती भी है. हजारों सालों से दबी कुचली वह अपना स्वर नहीं सुना पानी । शिक्षित समाज में भी स्त्री साहित्य सभाओं में नहीं दिखतीं। दिखती भी हैं तो दाल में नमक बराबर। स्पष्ट है कि आयाम&#8217; की परिकल्पना को आकार देना इसी सोच का प्रतिफल है। यह स्त्रियों के साहित्यिक फलक को एक विस्तृत आयाम और गति प्रदान करता है। यही कारण है कि आज आयाम न सिर्फ बिहार में बल्कि संपूर्ण भारत का स्त्री स्वर बनकर परचम लहरा रहा है। आयाम की सचिव वीणा अमृत बताती है कि आयाम का गठन 22 जुलाई 2015 में हुआ था.इन &#8211; छः सालों के भीतर आयाम ने साहित्य और संस्कृति से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण आयोजन किये गए और महिलाओं ने देश में अपना एक विशेष मुकाम हासिल किया और पहचान बनाई। घरेलु स्त्रियां [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>पद्मश्री उषाकिरण खान है संस्थापिका </strong></p>



<p><strong>प्रतिभा संपन्न रचनाकार स्त्रियों को एक मंच मुहैया कराता है आयाम</strong></p>



<p>पटना: &#8216;आयाम&#8217; संस्था मुख्यतः उन रचनाशील स्त्रियों के लिए हैं जिनकी साहित्यिक प्रतिभा और लेखनी घर की चहारदिवारी एवं अनेक जिम्मेदारियों के भीतर दबी रहती है. &#8216;आयाम&#8217; इन्हीं प्रतिभा संपन्न रचनाकार स्त्रियों को एक मंच मुहैया कराता है जो इसकी हकदार हैं. इसकी शुरुआत पद्मश्री उषाकिरण खान ने किया और आयाम पद्मश्री उषा किरण खान द्वारा स्थापित एक रजिस्टर्ड साहित्यिक संख्या है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="367" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141514.jpg" alt="" class="wp-image-55671" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141514.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141514-350x198.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>पद्मश्री उषा किरण खान आयाम के कार्यक्रम में </strong></figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="397" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141502.jpg" alt="" class="wp-image-55672" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141502.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141502-350x214.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>आयाम के कार्यक्रम में शिरकत करते सहित्यकार </strong></figcaption></figure>



<p><br>संस्थापक अध्यक्ष पद्मश्री उषा किरण खान कहती हैं कि स्त्री जो चाहत की, सेवा की और बुढ़ों की सेवा करती है घर बनाती है, किसी भी मकान में उसकी सहभागिता मात्र कला कौशल दिखाने की नहीं है बल्कि वह भी सोचती भी है. हजारों सालों से दबी कुचली वह अपना स्वर नहीं सुना पानी । शिक्षित समाज में भी स्त्री साहित्य सभाओं में नहीं दिखतीं। दिखती भी हैं तो दाल में नमक बराबर। स्पष्ट है कि आयाम&#8217; की परिकल्पना को आकार देना इसी सोच का प्रतिफल है। यह स्त्रियों के साहित्यिक फलक को एक विस्तृत आयाम और गति प्रदान करता है। यही कारण है कि आज आयाम न सिर्फ बिहार में बल्कि संपूर्ण भारत का स्त्री स्वर बनकर परचम लहरा रहा है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="514" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141443.jpg" alt="" class="wp-image-55673" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141443.jpg 514w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0926_141443-300x350.jpg 300w" sizes="(max-width: 514px) 100vw, 514px" /><figcaption><strong>आयाम की सचिव वीणा अमृत</strong></figcaption></figure>



<p>आयाम की सचिव वीणा अमृत बताती है कि आयाम का गठन 22 जुलाई 2015 में हुआ था.इन &#8211; छः सालों के भीतर आयाम ने साहित्य और संस्कृति से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण आयोजन किये गए और महिलाओं ने देश में अपना एक विशेष मुकाम हासिल किया और पहचान बनाई। घरेलु स्त्रियां जो प्रतिभावान थी, उनके विचारों, भावों एवं लेखनी को एक स्थान पर एकजुट होकर बैठने और अपने साहित्य के एक आयाम देने की पहल की है जिसकी शुरुआत पद्मश्री उषाकिरण ने ही किया। संभवत: देश की यह इकलौती सोच है जो सिर्फ स्त्रियों की है और खासकर उन स्त्रियों की जो नामचीन नहीं बल्कि घरेलु हैं पर जिनमें साहित्यिक अभिरुचि है।</p>



<p>आयाम का संकल्प है घरों में बैठी साहित्य चेता स्त्रियाँ मिल बैठे, कुछ अपनी करें और कुछ सुने । ये स्त्रियाँ जो बड़े- बड़े साहित्यिक उत्सवों में नहीं जा पाती, उनकी सकुचाहट उन्हें रोकती है. ऐसे में आयाम उन्हें एक व मजबूत संबल प्रदान करता है। और आज आयाम में कई ऐसी त्रियाँ है जो घरों से निकलकर लिख रही है, मंचों पर जा रही हैं और साहित्यिक जगत में अपना नाम और स्थान बना रही हैं।</p>



<p>आयाम का उद्देश्य बेहतर साहित्य बेहतर समाज बनाने का है उनकी विसंगतियों को दूर करने का है. आयाम उन सभी स्त्रियों की वह आवाज है जो वे अपने कलम के माध्यम से कुछ गढ़ना चाहती हैं कुछ कहना चाहती हैं। मुलतः आयाम का यही उद्देश्य है कि साहित्य में उनका स्वर बुलन्द हो ताकि समाज को एक नई दिशा और  नई गति मिल सके। साथ ही आयाम बिहार की उन दिवंगत लेखिकाओं कवयित्रियों की रचनाओं और साहित्यिक योगदान को पुनः सामने लाने को प्रयासरत है।इसके तहत &#8216;आयाम&#8217; द्वारा दिवगंत लेखिका बिंदू सिन्ध पर पहला संग्रह लाने जा रहा है इसके बाद प्रकाश वी नारायण इत्यादि पर अनेक किताब प्रकशित करने की योजना पर काम कर रहा है आयाम न सिर्फ साहित्य पर ऐसे मसले भी हैं जो महिलाओं से जुड़ें है उन पर भी कार्य करने की योजना है. समाज को नई दिशा देने की इच्छा रखने वाली कोई भी महिला सदस्य बन सकती है . कोई भी स्त्री जिनकी साहित्यिक रूचि हो वो आयाम से जुड़ सकती हैं.</p>



<p>आयाम लगातार साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रहता है। आयाम का अपना एक फेसबुक पेज भी है जिसपर महामारी के बाद समय समय पर में भी वर्चुअल माध्यम से अनेक साहित्यिक गतिविधियों चर्चाओं इत्यादि में काम करता रहा है । वर्तमान में अध्यक्ष पद्मश्री उषा किरण खान के अलावे सचिव वीणा अमृत, संयुक्त सचिव सुनीता सृष्टि, कोषाध्यक्ष सौम्या सुमन हैं जो इस अभियान को आगे ले जाने में सतत प्रयत्नशील हैं.</p>



<p>PNC DESK</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कहाँ है लघुकथा नगर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/laghu-katha-nagar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Jul 2021 05:51:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Laghukatha nagar]]></category>
		<category><![CDATA[Sahitya]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=54042</guid>

					<description><![CDATA[लघुकथा के पितामह डॉ. सतीशराज पुष्करणा अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच” की स्थापना की पटना : “लघुकथा आंदोलन की शुरुआत करने वाले डॉ. सतीशराज पुष्करणा पटना में मेरे पड़ोसी हुआ करते थे। मैंने उनसे साहित्य के अनेक विधाओं के बारे में सीखा लेकिन लघुकथा नहीं लिख पाया। इसके पीछे की प्रेरणा भी सतीशराज पुष्करणा ही थे। वह हमेशा कहते थे जिस विधा में रुचि हो उस विधा में खुद को पारंगत करो।” उक्त बातें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अवधेश प्रीत ने लेख्य-मंजूषा एवं अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच के संयुक्त तत्वाधान आयोजित कार्यक्रम “शब्दांजली” में कहे। “शब्दांजली” कार्यक्रम पटना के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सतीशराज पुष्करणा जी को श्रद्दांजली सुमन अर्पित करने के लिए किया गया था। विगत 28 जून 2021 को सतीशराज पुष्करणा का निधन दिल्ली में उनके बेटी के आवास पर हुआ था।&#160; पटना के आर ब्लॉक के इंजीनियर्स भवन में आयोजित इस कार्यक्रम लघुकथा के पितामह डॉ. सतीशराज पुष्करणा जी को याद करते हुए अवधेश प्रीत ने बताया कि पुष्करणा जी पटना में जहाँ रहते थे उस जगह का नाम ही उन्होंने “लघुकथा नगर” कर दिया था। उनके यहाँ आने वाली हर चिट्ठी पर यही पता अंकित रहता था।&#160; अवधेश जी ने लघुकथा के क्षेत्र में कार्य करने वालों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आने वाले दिनों “लघुकथा का इतिहास पुष्करणा से पहले और पुष्करणा के बाद” का विमर्श होना चाहिए। कार्यक्रम की शुरुआत में हॉल में उपस्थित सभी लोगों ने पुष्करणा जी के तस्वीर पर पुष्प चढ़ाए और उन्हें अपनी श्रद्दांजली अर्पित की। इस मौके वरिष्ठ पत्रकार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>लघुकथा के पितामह डॉ. सतीशराज पुष्करणा</strong></p>



<p><strong>अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच” की स्थापना की</strong></p>



<p>पटना : “लघुकथा आंदोलन की शुरुआत करने वाले डॉ. सतीशराज पुष्करणा पटना में मेरे पड़ोसी हुआ करते थे। मैंने उनसे साहित्य के अनेक विधाओं के बारे में सीखा लेकिन लघुकथा नहीं लिख पाया। इसके पीछे की प्रेरणा भी सतीशराज पुष्करणा ही थे। वह हमेशा कहते थे जिस विधा में रुचि हो उस विधा में खुद को पारंगत करो।” उक्त बातें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अवधेश प्रीत ने लेख्य-मंजूषा एवं अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच के संयुक्त तत्वाधान आयोजित कार्यक्रम “शब्दांजली” में कहे। “शब्दांजली” कार्यक्रम पटना के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सतीशराज पुष्करणा जी को श्रद्दांजली सुमन अर्पित करने के लिए किया गया था। विगत 28 जून 2021 को सतीशराज पुष्करणा का निधन दिल्ली में उनके बेटी के आवास पर हुआ था।&nbsp;</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="289" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210711-WA0015.jpg" alt="" class="wp-image-54043" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210711-WA0015.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210711-WA0015-350x156.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पटना के आर ब्लॉक के इंजीनियर्स भवन में आयोजित इस कार्यक्रम लघुकथा के पितामह डॉ. सतीशराज पुष्करणा जी को याद करते हुए अवधेश प्रीत ने बताया कि पुष्करणा जी पटना में जहाँ रहते थे उस जगह का नाम ही उन्होंने “लघुकथा नगर” कर दिया था। उनके यहाँ आने वाली हर चिट्ठी पर यही पता अंकित रहता था।&nbsp;</p>



<p>अवधेश जी ने लघुकथा के क्षेत्र में कार्य करने वालों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आने वाले दिनों “लघुकथा का इतिहास पुष्करणा से पहले और पुष्करणा के बाद” का विमर्श होना चाहिए।</p>



<p>कार्यक्रम की शुरुआत में हॉल में उपस्थित सभी लोगों ने पुष्करणा जी के तस्वीर पर पुष्प चढ़ाए और उन्हें अपनी श्रद्दांजली अर्पित की।</p>



<p>इस मौके वरिष्ठ पत्रकार डॉ. ध्रुव कुमार जी भी उपस्थित थे। वह एक ज़माने में डॉ. सतीशराज पुष्करणा जी के शिष्य हुआ करते थे। पुष्करणा जी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का काम इतना बोलता है कि उनका काम ही उनकी पहचान बन जाती है। कुछ ऐसा ही हाल पुष्करणा सर का भी था। उनका नाम सुनते ही लघुकथा दिमाग में आता था और लघुकथा का नाम सुनते ही पुष्करणा सर का नाम दिमाग में आता था।&nbsp;</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="283" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/FB_IMG_1625986532612-1.jpg" alt="" class="wp-image-54045" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/FB_IMG_1625986532612-1.jpg 283w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/FB_IMG_1625986532612-1-165x350.jpg 165w" sizes="auto, (max-width: 283px) 100vw, 283px" /></figure>



<p>पुष्करणा जी के जीवन यात्रा के बारे में बताते हुए डॉ. ध्रुव कुमार ने बताया कि पुष्करणा जी का पटना आगमन सन 1964 में हुआ था। वह मूल रूप से राजस्थान पुष्कर के रहने वाले थे लेकिन उनका जन्म लाहौर पाकिस्तान में हुआ था। पटना में रहते हुए साहित्यकार हरिमोहन झा (मैथिली साहित्यकार) के संपर्क में आने के बाद वह लघुकथा के क्षेत्र में कार्य करना शुरु कर दिए। जबकि हिंदी साहित्य में उनकी शुरुआत कविता, गजल व कहानियों से हुई थी। लघुकथा को हिंदी साहित्य के मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पुष्करणा सर ने “अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच” की स्थापना की थी। जिसमें बाद में उन्होंने मुझे भी जोड़ लिया था। लघुकथा के क्षेत्र में वह इतने समर्पित थे कि उन्होंने पचास सालों में सोलह सौ से अधिक लघुकथा का रचना किये थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने नब्बे किताबों को लिखा था।</p>



<p>डॉ. ध्रुव कुमार ने अपनी बातों को विराम देते हुए कहा कि अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच से उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि आगामी वर्षो में लघुकथा मंच के वार्षिक कार्यक्रमों में एक नए सम्मान “डॉ. सतीशराज पुष्करणा शिखर सम्मान” से हर वर्ष दो लोगों को सम्मानित किया जाएगा।&nbsp;</p>





<p>शब्दांजली कार्यक्रम में उपस्थित विदुषी प्रो. डॉ. अनीता राकेश ने पुष्करणा जी श्रद्दांजली देते हुए कहा कि लघुकथा के क्षेत्र में पुष्करणा जी शिखर हैं। उनके बनाये गए सिद्धांत “ज्योत से ज्योत जलाए चलो” का निर्वहन उनके बाद भी करते रहना होगा।</p>



<p>आभा रानी अपने आसुंओ को संभालते हुए चंद शब्दों में कहा कि पुष्करणा जी लाहौर से आये थे। लेकिन वह पटना बिहार को अपना और पटना उन्हें अपना बना लिया था। वह कभी भी पटना छोड़कर नहीं जाना चाहते थे।</p>



<p id="laghu-katha-nagar-">कार्यक्रम के अंत में लेख्य-मंजूषा की अध्यक्ष विभा रानी श्रीवास्तव ने&nbsp; कहा कि पुष्करणा जी की याद कभी नहीं खत्म होगी। उनकी लिखी हर रचना हमेशा सबको मार्गदर्शन करते रहेगा।&nbsp;आज के कार्यक्रम में उपस्थित लेख्य-मंजूषा और अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच के सभी सदस्य डॉ. सतीशराज पुष्करणा जी को अपनी श्रद्दांजली अर्पित करते हुए उनकी लिखी एक-एक लघुकथा का पाठ किया।कार्यक्रम के अंत में डॉ. सतीशराज पुष्करणा जी के याद में दो मिनट का मौन रखा गया।</p>


]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
