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	<title>SADAR HOSPITAL &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>SADAR HOSPITAL &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>स्वास्थ्य सचिव ने 6 जिलों की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की, सर्जरी की संख्या और प्रकार बढ़ाने का दिया निर्देश</title>
		<link>https://www.patnanow.com/health-department-samiksha/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 17:45:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना,11 सितंबर 2026: स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने शुक्रवार को राज्य के 6 जिलों- नवादा, किशनगंज, औरंगाबाद, बक्सर, गोपालगंज एवं जमुई के सदर अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं एवं सर्जरी की प्रगति की समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की. बैठक में बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि अस्पतालों में केवल सर्जरी की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सर्जरी के प्रकार (Types of Surgery) में भी विस्तार किया जाए. उन्होंने कहा कि उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों, ऑपरेशन थिएटर और संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए मरीजों को जिला स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए. उन्होंने कहा कि कई सदर अस्पतालों में अभी भी मुख्य रूप से Lower Segment Caesarean Section (LSCS) जैसी सर्जरी अधिक हो रही हैं, जबकि सामान्य सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, नेत्र रोग एवं अन्य जटिल सर्जरी की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है. विशेषज्ञ चिकित्सकों को केवल ओपीडी तक सीमित न रखते हुए उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप सर्जिकल सेवाओं का विस्तार करने का निर्देश दिया गया. अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार नवादा सदर अस्पताल में कुल 224 सर्जरी (7 प्रकार), बक्सर में 80 सर्जरी (7 प्रकार), गोपालगंज में 80 सर्जरी (6 प्रकार), औरंगाबाद में 38 सर्जरी (5 प्रकार), जमुई में 89 सर्जरी (4 प्रकार) और किशनगंज में 63 सर्जरी (4 प्रकार) की गईं. स्वास्थ्य सचिव ने औरंगाबाद, बक्सर और गोपालगंज में पिछले महीनों की तुलना में सर्जरी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना,11 सितंबर 2026: स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने शुक्रवार को राज्य के 6 जिलों- नवादा, किशनगंज, औरंगाबाद, बक्सर, गोपालगंज एवं जमुई के सदर अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं एवं सर्जरी की प्रगति की समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की. बैठक में बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="681" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-health-department-Samiksha-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99210" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-health-department-Samiksha-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-health-department-Samiksha-650x432.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-health-department-Samiksha-1536x1021.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि अस्पतालों में केवल सर्जरी की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सर्जरी के प्रकार (Types of Surgery) में भी विस्तार किया जाए. उन्होंने कहा कि उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों, ऑपरेशन थिएटर और संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए मरीजों को जिला स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए.</p>



<p>उन्होंने कहा कि कई सदर अस्पतालों में अभी भी मुख्य रूप से Lower Segment Caesarean Section (LSCS) जैसी सर्जरी अधिक हो रही हैं, जबकि सामान्य सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, नेत्र रोग एवं अन्य जटिल सर्जरी की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है. विशेषज्ञ चिकित्सकों को केवल ओपीडी तक सीमित न रखते हुए उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप सर्जिकल सेवाओं का विस्तार करने का निर्देश दिया गया.</p>



<p>अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार नवादा सदर अस्पताल में कुल 224 सर्जरी (7 प्रकार), बक्सर में 80 सर्जरी (7 प्रकार), गोपालगंज में 80 सर्जरी (6 प्रकार), औरंगाबाद में 38 सर्जरी (5 प्रकार), जमुई में 89 सर्जरी (4 प्रकार) और किशनगंज में 63 सर्जरी (4 प्रकार) की गईं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="681" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-health-secretary-analysis-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99211" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-health-secretary-analysis-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-health-secretary-analysis-650x432.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-health-secretary-analysis-1536x1021.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>स्वास्थ्य सचिव ने औरंगाबाद, बक्सर और गोपालगंज में पिछले महीनों की तुलना में सर्जरी की संख्या में आई कमी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सुधार के निर्देश दिए. उन्होंने अनावश्यक रेफरल पर रोक लगाने, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियमित समीक्षा करने और टीम भावना के साथ कार्य करते हुए जिला अस्पतालों को मजबूत बनाने पर जोर दिया.</p>



<p>उल्लेखनीय है कि जिला अस्पतालों में सर्जिकल सेवाओं के विस्तार पर स्वास्थ्य विभाग लगातार काम कर रहा है. जिला अस्पतालों में सर्जरी सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों के परिणामस्वरूप जून से अगस्त 2026 के बीच सर्जरी की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. जून 2026 में जिला अस्पतालों में कुल 2,428 सर्जरी हुई थीं, जो जुलाई में बढ़कर 5,650 और अगस्त में 8,209 तक पहुंच गईं. जुलाई की तुलना में अगस्त में सर्जरी की संख्या में 45.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.</p>



<p>अगस्त 2026 में कई जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया। वैशाली जिला अस्पताल में 651 सर्जरी, पटना में 587, अररिया में 529, मधेपुरा में 494 और भोजपुर में 362 सर्जरी की गईं. इससे स्पष्ट है कि जिला अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों, ऑपरेशन थिएटर और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का प्रभावी उपयोग बढ़ रहा है.</p>



<p>वहीं सर्जरी के प्रकारों में भी लगातार विस्तार किया जा रहा है. अगस्त माह में बेगूसराय जिला अस्पताल में 60 प्रकार की सर्जरी, पटना में 53, नालंदा में 42, भोजपुर में 40 और मुजफ्फरपुर में 33 प्रकार की सर्जरी उपलब्ध कराई गईं. विशेषज्ञ विभागों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें जुलाई की तुलना में ईएनटी सर्जरी में 471.7 प्रतिशत, ऑर्थोपेडिक्स में 296.2 प्रतिशत, नेत्र रोग में 174.3 प्रतिशत और जनरल सर्जरी में 66.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>उमस भरी गर्मी से बच्चों में बढ़ सकता है डायरिया का खतरा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/umas-bhari-garmi-badha-sakti-hai-dayariya-ka-khatara/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 May 2022 06:17:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
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					<description><![CDATA[कुशल प्रबंधन नहीं हो तो डायरिया हो सकता है जानलेवा डायरिया के लक्षणों को जानकर एवं सही समय पर उचित प्रबंधन बेहद जरूरी आरा,14 मई. जिले के लोगों को हीट वेव से राहत तो मिल गई है, लेकिन अब बारिश के बाद तल्ख धूप के कारण उमस भरी गर्मी सताने लगी है. जिसके कारण लोगों का जीना दुभर हो गया है. ऐसे मौसम में जरा सी लापरवाही बीमारियों को न्योता दे सकती है. ऐसी स्थिति में लोगों और सावधान रहने की जरूरत है विशेष रूप से शिशुओं और छोटे बच्चों को. क्योंकि बदलते मौसम और उमस भरी गर्मी के दौरान बच्चों में डायरिया की शिकायत बढ़ जाती है. डायरिया के कारण बच्चों में अत्यधिक निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं. यहां तक कि इस दौरान कुशल प्रबंधन नहीं होने से यह जानलेवा भी हो जाता है. स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े भी इसे शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक मानते हैं. सही समय पर डायरिया के लक्षणों को जानने के बाद यदि सही समय पर उचित प्रबंधन कर लिया जाय तो बच्चों को इस गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है. बच्चों को डायरिया से बचाया जा सकता हैअपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएन सिन्हा ने बताया, डायरिया के शुरुआती लक्षणों का ध्यान रख माताएं इसकी आसानी से पहचान कर सकती हैं. इससे केवल नवजातों को ही नहीं, बल्कि बड़े बच्चों को भी डायरिया से बचाया जा सकता है. लगातार पतले दस्त आना, बार-बार दस्त के साथ उल्टी का होना, प्यास [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>कुशल प्रबंधन नहीं हो तो डायरिया हो सकता है जानलेवा</strong></p>



<p><strong>डायरिया के लक्षणों को जानकर एवं सही समय पर उचित प्रबंधन बेहद जरूरी</strong></p>



<p>आरा,14 मई. जिले के लोगों को हीट वेव से राहत तो मिल गई है, लेकिन अब बारिश के बाद तल्ख धूप के कारण उमस भरी गर्मी सताने लगी है. जिसके कारण लोगों का जीना दुभर हो गया है. ऐसे मौसम में जरा सी लापरवाही बीमारियों को न्योता दे सकती है. ऐसी स्थिति में लोगों और सावधान रहने की जरूरत है विशेष रूप से शिशुओं और छोटे बच्चों को. क्योंकि बदलते मौसम और उमस भरी गर्मी के दौरान बच्चों में डायरिया की शिकायत बढ़ जाती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="500" height="334" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0031.jpg" alt="" class="wp-image-62264" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0031.jpg 500w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0031-350x234.jpg 350w" sizes="(max-width: 500px) 100vw, 500px" /></figure>



<p><strong>डायरिया के कारण बच्चों में अत्यधिक निर्जलीकरण </strong>(डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं. यहां तक कि इस दौरान कुशल प्रबंधन नहीं होने से यह जानलेवा भी हो जाता है. स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े भी इसे शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक मानते हैं. सही समय पर डायरिया के लक्षणों को जानने के बाद यदि सही समय पर उचित प्रबंधन कर लिया जाय तो बच्चों को इस गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="608" height="505" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0030.jpg" alt="" class="wp-image-62265" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0030.jpg 608w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0030-350x291.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 608px) 100vw, 608px" /></figure>



<p><strong>बच्चों को डायरिया से बचाया जा सकता है</strong><br>अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएन सिन्हा ने बताया, डायरिया के शुरुआती लक्षणों का ध्यान रख माताएं इसकी आसानी से पहचान कर सकती हैं. इससे केवल नवजातों को ही नहीं, बल्कि बड़े बच्चों को भी डायरिया से बचाया जा सकता है. लगातार पतले दस्त आना, बार-बार दस्त के साथ उल्टी का होना, प्यास बढ़ जाना, भूख का कम जाना या खाना नहीं खाना, दस्त के साथ हल्के बुखार का आना और कभी- कभी स्थिति गंभीर हो जाने पर दस्त में खून भी आने लगता है. यहां तक की गंभीर डायरिया बच्चों या वयस्कों को जान का भी खतरा होने की संभावना रहती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="250" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0029.jpg" alt="" class="wp-image-62266" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0029.jpg 450w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0029-350x194.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 450px) 100vw, 450px" /></figure>



<p><strong>सेविका या आशा दीदी से करें संपर्क</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="426" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0032-650x426.jpg" alt="" class="wp-image-62267" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0032-650x426.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0032-350x229.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0032.jpg 684w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>डॉ. केएन सिन्हा ने बताया कि बार-बार डायरिया या दस्त होने से शरीर में डिहाइड्रेशन हो जाता है. जिसको दूर करने के लिए शिशुओं और बड़े बच्चों को ओरल रीहाइड्रेशन सोल्यूशन (ORS) का घोल पिलाएं. इससे दस्त के कारण पानी के साथ शरीर से निकले जरूरी एल्क्ट्रोलाइट्स (सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड एवं बाईकार्बोनेट) की कमी को दूर किया जा सकता है. माताएं अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका या अपने इलाके की आशा दीदी से संपर्क कर इस बात की जानकारी ले सकती हैं. साथ ही, उनसे ORS का घोल बनाने की विधि और किस उम्र के बच्चे को इसकी कितनी मात्रा व कितने बार दिया जाना है ये भी जान सकती हैं.</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्वस्थ हुए भोजपुर में 3 कोरोना संक्रमित मरीज</title>
		<link>https://www.patnanow.com/3-corona-marijo-ki-ghar-huyi-wapasi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Apr 2021 13:53:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
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					<description><![CDATA[आरा,25. कोरोना संक्रमण के बढ़ते दौड़ में आज सुखद बात सामने आयी. भोजपुर जिला में डेडीकेटेड कोविड वार्ड में भर्ती तीन कोविड मरीजों को सम्मान पूर्वक उनके घर विदा किया गया, जो पिछले कई दिनों से संक्रमण के कारण सदर अस्पताल में भर्ती थे. इस बात की सूचना भोजपुर DM ने ट्वीट कर भी सोशल मीडिया पर साझा किया है. कोरोना से जंग जीतने वाले इन योद्धाओं को अस्पताल प्रशासन ने माला पहनाकर स्वागत किया और उन्हें उनके घर भेजा. तीनों कोरोना योद्धा को अस्पताल प्रशासन ने अगले 14 दिन के लिए घर में रहने की सलाह दी है. आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="484" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/04/IMG_20210425_192114.jpg" alt="" class="wp-image-51908" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/04/IMG_20210425_192114.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/04/IMG_20210425_192114-350x261.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आरा,25. कोरोना संक्रमण के बढ़ते दौड़ में आज सुखद बात सामने आयी. भोजपुर जिला में डेडीकेटेड कोविड वार्ड में भर्ती तीन कोविड मरीजों को सम्मान पूर्वक उनके घर विदा किया गया, जो पिछले कई दिनों से संक्रमण के कारण सदर अस्पताल में भर्ती थे. </p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="hi" dir="ltr">आज डेडीकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर आरा से 3 मरीजों को सम्मान पूर्वक डिस्चार्ज किया गया ।सभी मरीज corona संक्रमित थे एवं स्वस्थ होकर सदर अस्पताल से वापस जा रहे हैं।  सभी को कम से कम 10 से 14 दिनों तक होम आइसोलेशन में रहने के निर्देश दिए गए| <a href="https://twitter.com/hashtag/%E0%A4%B9%E0%A4%AE_%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE_%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#हम_जीतेंगे_कोरोना_हारेगा</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/togetherwewin?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#togetherwewin</a> <a href="https://t.co/CqekbLNtkM">pic.twitter.com/CqekbLNtkM</a></p>&mdash; Roshan Kushwaha (@roshankush_ias) <a href="https://twitter.com/roshankush_ias/status/1386309555030683648?ref_src=twsrc%5Etfw">April 25, 2021</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>इस बात की सूचना भोजपुर DM ने ट्वीट कर भी सोशल मीडिया पर साझा किया है. कोरोना से जंग जीतने वाले इन योद्धाओं को अस्पताल प्रशासन ने माला पहनाकर स्वागत किया और उन्हें उनके घर भेजा. तीनों कोरोना योद्धा को अस्पताल प्रशासन ने अगले 14 दिन के लिए घर में रहने की सलाह दी है.</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>यहां इलाज कराना हो तो बैंडेज-पट्टी साथ लेकर आएं</title>
		<link>https://www.patnanow.com/sadar-hospital-ka-haal-behaal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[amitverma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 Jun 2017 16:39:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[SADAR HOSPITAL]]></category>
		<category><![CDATA[इमरजेंसी]]></category>
		<category><![CDATA[बक्सर]]></category>
		<category><![CDATA[सदर अस्पताल]]></category>
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					<description><![CDATA[इमरजेंसी में भी नहीं मिलती हैं दवाएं इलाज कराना हो तो दवा, सूई और बैंडेज-पट्टी खरीदकर ले जाएं बक्सर सदर अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों को इन दिनों दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं. अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उनके पास पर्याप्त मात्रा में दवा का स्टॉक है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही है. यहां वैसे मरीजों को काफी फजीहत झेलनी पड़ती है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और सदर अस्पताल इलाज कराने पहुंचते हैं. गुरुवार की रात ऐसा ही मामला सदर अस्पताल में सामने आया. जब कोरानसराय थाना के कमधरपुर गांव में एक शख्स को अज्ञात अपराधियों ने गोलियों से भून दिया. उसके शरीर में पांच गोलियां लगी थी. किसी तरह परिजन उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर आये थे. लेकिन, सदर अस्पताल के इमरजेंसी में ना तो बैंडेज था ना ही पट्टी. इसके लिए ड्यूटी पर तैनात डॉ अमलेश कुमार व स्टाफ ने परिजनों को बाहर से बैंडेज लाने के लिए कहा. इस दौरान घायल दर्द से तड़पता रहा. सदर अस्पताल के कई वार्डों में दर्जनों ऐसे मरीज भर्ती हैं, जिनका इलाज तो सदर अस्पताल में हो रहा है लेकिन सिर्फ कागज पर. उन्हें सुविधा के नाम पर केवल सुबह-शाम डॉक्टर के दर्शन होते हैं. दवा उन्हें बाहर से ही लाना पड़ता है. सूई धागा खरीदकर मरीज पहुंचते हैं इमरजेंसी वार्ड गुरुवार की रात कुछ ऐसे भी वार्ड थे जहां एक भी दवा उपलब्ध नहीं थी. संक्रमण वार्ड में तो सिर्फ पानी ही मिला. सरकार की तरफ से मिलने वाले भोजन में भी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इमरजेंसी में भी नहीं मिलती हैं दवाएं</strong></p>
<p><strong>इलाज कराना हो तो दवा, सूई और बैंडेज-पट्टी खरीदकर ले जाएं</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-16352" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/04/PNC-BUXAR-SADAR-HOSPITAL-650x362.jpg" alt="" width="650" height="362" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/04/PNC-BUXAR-SADAR-HOSPITAL.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/04/PNC-BUXAR-SADAR-HOSPITAL-350x195.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>बक्सर सदर अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों को इन दिनों दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं. अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उनके पास पर्याप्त मात्रा में दवा का स्टॉक है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही है. यहां वैसे मरीजों को काफी फजीहत झेलनी पड़ती है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और सदर अस्पताल इलाज कराने पहुंचते हैं. गुरुवार की रात ऐसा ही मामला सदर अस्पताल में सामने आया. जब कोरानसराय थाना के कमधरपुर गांव में एक शख्स को अज्ञात अपराधियों ने गोलियों से भून दिया. उसके शरीर में पांच गोलियां लगी थी. किसी तरह परिजन उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर आये थे. लेकिन, सदर अस्पताल के इमरजेंसी में ना तो बैंडेज था ना ही पट्टी. इसके लिए ड्यूटी पर तैनात डॉ अमलेश कुमार व स्टाफ ने परिजनों को बाहर से बैंडेज लाने के लिए कहा. इस दौरान घायल दर्द से तड़पता रहा. सदर अस्पताल के कई वार्डों में दर्जनों ऐसे मरीज भर्ती हैं, जिनका इलाज तो सदर अस्पताल में हो रहा है लेकिन सिर्फ कागज पर. उन्हें सुविधा के नाम पर केवल सुबह-शाम डॉक्टर के दर्शन होते हैं. दवा उन्हें बाहर से ही लाना पड़ता है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-19884" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/06/PNC-BUXAR-HOSPITAL-650x366.jpg" alt="" width="650" height="366" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/06/PNC-BUXAR-HOSPITAL.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/06/PNC-BUXAR-HOSPITAL-350x197.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p><strong>सूई धागा खरीदकर मरीज पहुंचते हैं इमरजेंसी वार्ड</strong></p>
<p>गुरुवार की रात कुछ ऐसे भी वार्ड थे जहां एक भी दवा उपलब्ध नहीं थी. संक्रमण वार्ड में तो सिर्फ पानी ही मिला. सरकार की तरफ से मिलने वाले भोजन में भी किसी -किसी दिन कटौती हो जाती है. पूछने पर कहा जाता है कि भूल से कैंटिन के लोग इस वार्ड में नहीं पाए हैं. लेकिन इन सब बातों की निगरानी का जिम्मा जिन्हें दिया गया है उन्हें कुछ मालूम ही नहीं हो पाता है. दवा का आलम यह है कि जो मरीज सड़क हादसे में इमरजेंसी वार्ड में पहुंचते हैं उन्हें पहले सूई और धागा बाहर से खरीद कर लाना पड़ता है. उसके बाद ही उनका इलाज हो पाता है. इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ भी इस बात को स्वीकारते हैं कि पहले घायल का इलाज होना जरूरी है, लेकिन वे लोग अपनी मजबूरी का हवाला देकर मरीज के परिजन को धागा अन्य दवा के लिए बाहर भेज देते हैं.</p>
<p><strong>दवा खत्म हो गई होगी, मामला मेरे संज्ञान में नहीं है</strong></p>
<blockquote><p>जिले के सरकारी अस्पतालों में यहां से ही दवा की आपूर्ति की जाती है. हो सकता है कुछ दवा खत्म हो गई होगी. इस तरह का कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, पता कर दवा उपलब्ध करवाई जाएगी.- डॉ.बीके, सिविल सर्जन, बक्सर</p></blockquote>
<p>&nbsp;</p>
<p>बक्सर से ऋतुराज</p>
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