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	<title>Russia &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>नेताओं की याददाश्त इरेज कर रोक सकता हूं रूस-यूक्रेन युद्ध: करौली बाबा संतोष सिंह</title>
		<link>https://www.patnanow.com/i-can-stop-russia-ukraine-war-by-erasing-the-memory-of-leaders-karauli-baba-santosh-singh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Mar 2023 06:02:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[कानपुर के करौली बाबा ने कर दिया है अजीबोगरीब दावा एक साल से ज्यादा दिन से चल रहे युद्ध को रोकने का किया दावा दोनों देशों के नेताओं की याददाश्त को मिटाकर युद्ध को रोक सकते हैं करौली बाबा संतोष सिंह भदौरिया अपने बयानों के लिए सुर्खियों में बने हुए हैं. आए दिन कुछ न कुछ ऐसा कह रहे हैं, जिससे नया बवाल खड़ा हो रहा है. अब उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर एक बड़ी टिप्पणी की है. करौली बाबा का दावा है कि वे दोनों देशों के नेताओं की याददाश्त को मिटाकर युद्ध को रोक सकते हैं.संतोष भदौरिया उर्फ करौली बाबा बीते दिनों तब सुर्खियों में आए थे जब एक शख्स ने उन पर अपने समर्थकों द्वारा मारपीट करने का आरोप लगाया था. पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 504 और 325 के तहत मामला दर्ज किया. पुलिस जांच के लिए उनके आश्रम पहुंची, लेकिन बाबा का बयान दर्ज नहीं किया. स्वयंभू संत ने कहा कि पुलिस आई और गई और वो भी जांच के पक्ष में हैं. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सरकार के शासन के दौरान पुलिस ने &#8216;राजनीतिक प्रतिशोध&#8217; के चलते उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था. वहीं, रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी. करौली बाबा ने कहा कि अगर मैं चाहूं तो दोनों देशों के नेताओं की याददाश्त को मिटाकर रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को रोक सकता हूं. संतोष भदौरिया ने अपने भक्त की पिटाई [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p><strong>कानपुर के करौली बाबा ने कर दिया है अजीबोगरीब दावा</strong></p>



<p><strong>एक साल से ज्यादा दिन से चल रहे युद्ध को रोकने का किया दावा </strong></p>



<p><strong>दोनों देशों के नेताओं की याददाश्त को मिटाकर युद्ध को रोक सकते</strong> <strong>हैं </strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="540" height="405" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/karuali.png" alt="" class="wp-image-72661" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/karuali.png 540w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/karuali-350x263.png 350w" sizes="(max-width: 540px) 100vw, 540px" /></figure>



<p>करौली बाबा संतोष सिंह भदौरिया अपने बयानों के लिए सुर्खियों में बने हुए हैं. आए दिन कुछ न कुछ ऐसा कह रहे हैं, जिससे नया बवाल खड़ा हो रहा है.  अब उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर एक बड़ी टिप्पणी की है. करौली बाबा का दावा है कि वे दोनों देशों के नेताओं की याददाश्त को मिटाकर युद्ध को रोक सकते हैं.संतोष भदौरिया उर्फ करौली बाबा बीते दिनों तब सुर्खियों में आए थे जब एक शख्स ने उन पर अपने समर्थकों द्वारा मारपीट करने का आरोप लगाया था. पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 504 और 325 के तहत मामला दर्ज किया. </p>



<p> पुलिस जांच के लिए उनके आश्रम पहुंची, लेकिन बाबा का बयान दर्ज नहीं किया. स्वयंभू संत ने कहा कि पुलिस आई और गई और वो भी जांच के पक्ष में हैं. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सरकार के शासन के दौरान पुलिस ने &#8216;राजनीतिक प्रतिशोध&#8217; के चलते उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था. वहीं, रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी. करौली बाबा ने कहा कि अगर मैं चाहूं तो दोनों देशों के नेताओं की याददाश्त को मिटाकर रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को रोक सकता हूं.  </p>



<p>संतोष भदौरिया ने अपने भक्त की पिटाई की घटना पर कहा कि यह एक &#8216;षड्यंत्र&#8217; था और डॉक्टर (भक्त) को उनकी छवि खराब करने के लिए भेजा गया था. उन्होंने कहा कि सीसीटीवी वीडियो में डॉक्टर को जाने से पहले धन्यवाद कहते हुए देखा जा सकता है. यह पूछे जाने पर कि क्या उनके पास अपने दावे का समर्थन करने के लिए सीसीटीवी फुटेज है. भदौरिया ने कहा कि सीसीटीवी डेटा केवल 14 दिनों के लिए सेव किया जा सकता है, इसलिए वो रिकॉर्डिंग नहीं दे पाएंगे.</p>
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		<title>गूगल ने एंटीट्रस्ट लॉ को तोड़ा , 32,000 करोड़ का लगा जुर्माना</title>
		<link>https://www.patnanow.com/google-breaks-antitrust-law-fined-rs-32000-crore/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Sep 2022 05:37:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[32000 crore]]></category>
		<category><![CDATA[Google breaks antitrust law]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
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					<description><![CDATA[एंटीट्र्स्ट फाइन यूरोपियन यूनियन कि कोर्ट ने लगाया जुर्माना भारत भी कर रहा है तैयारी गूगल पर 4.1 बिलियन डॉलर (करीब 32,000 करोड़ भारतीय रुपए) का एंटीट्र्स्ट फाइन यूरोपियन यूनियन की दूसरी बड़ी कोर्ट ने लगाया है. गूगल पर अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल करते हुए प्रतिस्पर्धा को खत्म करने का आरोप लगा था. कोर्ट ने माना कि गूगल ने एंटीट्रस्ट लॉ को तोड़ा है. गूगल ने ऐसा अपने सर्च इंजन की लीडरशिप को मजबूत करने के लिए अपनी एंड्रॉइड स्मार्टफोन टेक्नोलॉजी और उस मार्केट में उसके प्रभुत्व का इस्तेमाल करके किया है. इससे पहले साउथ कोरिया में प्राइवेसी वॉयलेशन के मामले में लॉमेकर्स ने अल्फाबेट और मेटा पर 71 मिलियन डॉलर (करीब 565 करोड़ रुपए) का संयुक्त जुर्माना लगाया था. जांच में पता चला था कि गूगल यूजर का डेटा एकत्र कर उसकी स्टडी कर रहा था, और उनकी वेबसाइट के इस्तेमाल पर नजर रख रहा था. बीते कुछ सालों में गूगल और अन्य बिग टेक दिग्गज पर दुनियाभर में अपनी एकाधिकारको लेकर प्रतिस्पर्धा को लेकर दबाव बढ़ा है. वहीँ भारत भी इन टेक्नोलॉजी फर्म्स के एंटीट्रस्ट और मोनोपॉली वाले व्यवहार के खिलाफ कमर कसता दिख रहा है. इससे गूगल के लिए राह मुश्किल हो सकती है, क्योंकि वह विश्व के विभिन्न हिस्सों में एक के बाद एक लड़ाई हार रहा है. भारत में सीसीअई  और मिटी के नेतृत्व में कई कदम उठाए जा रहे हैं जिनमें इंडियन न्यूज पब्लिशर्स के साथ गूगल जैसी कंपनियों के एंटी ट्रस्ट बिहेवियर को गंभीरता से चुनौती दी गई है. एक पार्लियामेंट्री कमेटी भी [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p><strong>एंटीट्र्स्ट फाइन यूरोपियन यूनियन कि कोर्ट ने लगाया जुर्माना </strong></p>



<p><strong>भारत भी कर रहा है तैयारी </strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="325" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/google.png" alt="" class="wp-image-66679" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/google.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/google-350x175.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>गूगल पर 4.1 बिलियन डॉलर (करीब 32,000 करोड़ भारतीय रुपए) का एंटीट्र्स्ट फाइन यूरोपियन यूनियन की दूसरी बड़ी कोर्ट ने लगाया है. गूगल पर अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल करते हुए प्रतिस्पर्धा को खत्म करने का आरोप लगा था. कोर्ट ने माना कि गूगल ने एंटीट्रस्ट लॉ को तोड़ा है. गूगल ने ऐसा अपने सर्च इंजन की लीडरशिप को मजबूत करने के लिए अपनी एंड्रॉइड स्मार्टफोन टेक्नोलॉजी और उस मार्केट में उसके प्रभुत्व का इस्तेमाल करके किया है. इससे पहले साउथ कोरिया में प्राइवेसी वॉयलेशन के मामले में लॉमेकर्स ने अल्फाबेट और मेटा पर 71 मिलियन डॉलर (करीब 565 करोड़ रुपए) का संयुक्त जुर्माना लगाया था.</p>



<figure class="wp-block-gallery has-nested-images columns-default is-cropped wp-block-gallery-1 is-layout-flex wp-block-gallery-is-layout-flex">
<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="598" height="299" data-id="66680" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/sambhavana-2.jpg" alt="" class="wp-image-66680" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/sambhavana-2.jpg 598w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/sambhavana-2-350x175.jpg 350w" sizes="(max-width: 598px) 100vw, 598px" /></figure>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="355" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/google1.jpg" alt="" class="wp-image-66681" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/google1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/google1-350x191.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जांच में पता चला था कि गूगल यूजर का डेटा एकत्र कर उसकी स्टडी कर रहा था, और उनकी वेबसाइट के इस्तेमाल पर नजर रख रहा था. बीते कुछ सालों में गूगल और अन्य बिग टेक दिग्गज पर दुनियाभर में अपनी एकाधिकारको लेकर प्रतिस्पर्धा को लेकर दबाव बढ़ा है. वहीँ भारत भी इन टेक्नोलॉजी फर्म्स के एंटीट्रस्ट और मोनोपॉली वाले व्यवहार के खिलाफ कमर कसता दिख रहा है. इससे गूगल के लिए राह मुश्किल हो सकती है, क्योंकि वह विश्व के विभिन्न हिस्सों में एक के बाद एक लड़ाई हार रहा है. भारत में सीसीअई  और मिटी के नेतृत्व में कई कदम उठाए जा रहे हैं जिनमें इंडियन न्यूज पब्लिशर्स के साथ गूगल जैसी कंपनियों के एंटी ट्रस्ट बिहेवियर को गंभीरता से चुनौती दी गई है. एक पार्लियामेंट्री कमेटी भी इस मामले को देख रही है.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>रूस, जर्मनी,स्पेन समेत कई देशों से पहुंचे पिंडदानी, गया में किया पिंडदान</title>
		<link>https://www.patnanow.com/foreign-pilgrims-from-many-countries-are-also-reaching-gaya-ji/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Sep 2022 06:52:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[पितृपक्ष में पूर्वजों को मोक्ष दिलाने में विदेशी नागरिक भी आगे कई देशों के विदेशी श्रद्धालु भी पहुंच रहे हैं गया जी आश्विन कृष्णपक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर अमावस्या तक की अवधि पितृपक्ष भारत की सनातन परंपरा विदेशियों को खींच लाई है. पूर्वजों को मोक्ष दिलाने वे भी यहां की पवित्र धरती पर आ रहे हैं. विदेशियों का एक जत्था गुरुवार को गया जी पहुंचा. सभी ने भारतीय वेशभूषा में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कर्मकांड किया. जत्थे में रूस, जर्मनी,स्पेन आदि देश के लोग हैं.उन्होंने बताया कि ये लोग भारतीय संस्कृति से काफी प्रभावित हैं. सभी ने गया जी पहुंचने के बाद पावन भूमि को नमन किया. पितृपक्ष में वे अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण व कर्मकांड कर रहे हैं. रूस से टीटोवा मैरिना, शेरेंदो इकातेरी, सामिया डेहरडे, जुलकारिनिवा जुल्फ व इप्रेनटेसेवा यालिया, जर्मनी से युगेनिया क्रेंच, अन्ना बारोन, फिलकोवा इरीना और सेरगिरवा इरीना, माले से क्रियूको एलेक्सैंट, क्यूकोवा टेटालिया, क्रूरकिना इरीना एवं ज्ञेमचिकहिना मॉरी, लक्ष्मी नारायण कौर, ज्वाइंट पैनी, लक्ष्मण सिंह, छैगोतेरीवा, गोलिनोवा विक्टर, सिमेंटेस केसीनूए और स्पेन की डारिया आदि हैं. उन्&#x200d;होंने मोक्षदायिनी फल्गु नदी में तर्पण अर्पण करने के बाद देवघाट पर पिंडदान किया. वे दूसरे दिन शनिवार को पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और रविवार को अक्षयवट में कर्मकांड करेंगे. उसके बाद सभी नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए.जहाँ से वे अपने अपने देश जायेंगे. क्या है वैदिक मत वैदिक मतानुसार जीवित चेतन पितरों अर्थात&#x200d;् जीते हुए ज्ञानी पुरुषों का श्रद्धापूर्वक भोजनादि से सत्कार करना श्राद्ध करना [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पितृपक्ष में पूर्वजों को मोक्ष दिलाने में विदेशी नागरिक भी आगे </strong></p>



<p><strong>कई देशों के विदेशी श्रद्धालु भी पहुंच रहे हैं गया जी</strong></p>



<p><strong>आश्विन कृष्णपक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर अमावस्या तक की अवधि पितृपक्ष </strong></p>



<p>भारत की सनातन परंपरा विदेशियों को खींच लाई है. पूर्वजों को मोक्ष दिलाने वे भी यहां की पवित्र धरती पर आ रहे हैं. विदेशियों का एक जत्था गुरुवार को गया जी पहुंचा. सभी ने भारतीय वेशभूषा में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कर्मकांड किया. जत्थे में रूस, जर्मनी,स्पेन आदि देश के लोग हैं.उन्होंने बताया कि ये लोग भारतीय संस्कृति से काफी प्रभावित हैं. सभी ने गया जी पहुंचने के बाद पावन भूमि को नमन किया. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/FcHR3Q6aUAE_0Dh-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-66604" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/FcHR3Q6aUAE_0Dh-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/FcHR3Q6aUAE_0Dh-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/FcHR3Q6aUAE_0Dh.jpg 720w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पितृपक्ष में वे अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण व कर्मकांड कर रहे हैं. रूस से टीटोवा मैरिना, शेरेंदो इकातेरी, सामिया डेहरडे, जुलकारिनिवा जुल्फ व इप्रेनटेसेवा यालिया, जर्मनी से युगेनिया क्रेंच, अन्ना बारोन, फिलकोवा इरीना और सेरगिरवा इरीना, माले से क्रियूको एलेक्सैंट, क्यूकोवा टेटालिया, क्रूरकिना इरीना एवं ज्ञेमचिकहिना मॉरी, लक्ष्मी नारायण कौर, ज्वाइंट पैनी, लक्ष्मण सिंह, छैगोतेरीवा, गोलिनोवा विक्टर, सिमेंटेस केसीनूए और स्पेन की डारिया आदि हैं. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="391" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/forener.jpg" alt="" class="wp-image-66605" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/forener.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/forener-350x211.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उन्&#x200d;होंने मोक्षदायिनी फल्गु नदी में तर्पण अर्पण करने के बाद देवघाट पर पिंडदान किया. वे दूसरे दिन शनिवार को पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और रविवार को अक्षयवट में कर्मकांड करेंगे. उसके बाद सभी नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए.जहाँ से वे अपने अपने देश जायेंगे.</p>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background">क्या है वैदिक मत</p>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background">वैदिक मतानुसार जीवित चेतन पितरों अर्थात&#x200d;् जीते हुए ज्ञानी पुरुषों का श्रद्धापूर्वक भोजनादि से सत्कार करना श्राद्ध करना है. वैदिक मत में जीवित चेतन पितरों, ज्ञाननिष्ठ सत्त्वगुणी पुरुषों का, जो लोक-नाम स्थान है, वही पितृलोक है. जिस प्रदेश में मानस कर्म में प्रधान विचारशील ज्ञानी लोग निवास करते हैं, वह पितृलोक है अथवा उन पितरों के समुदाय मेल का नाम पितृलोक है. पौराणिक ग्रन्थों में जिनके लिये मरने के पश्चात शास्त्रों में पितृलोक में जाना लिखा है, वे शरीर छोड़ने के पश्चात पितृजनों के समुदाय अथवा प्रदेश में अर्थात&#x200d;् पितरों के घरों में जाकर जन्म लेते हैं. मनुस्मृति में उत्पादक, यज्ञोपवीत कराने वाला, विद्यादाता, अन्नदाता और भय से बचाने वाला, ये पांच पिता माने गये हैं. इस प्रकार पितृ शब्द योगरूढ़ है, और अपने उत्पादक पिता में रूढ़ि भी है. लौकिक व्यवहार में पिता शब्द से प्रकरणानुसार जनक, यज्ञोपवीत कराने, अन्न देने व भय से बचाने वाले का ग्रहण होता है. परन्तु श्राद्ध कर्म में विशेषकर पितृ शब्द से विद्यादाता का ग्रहण होता है. अपने उत्पादक पिता की सेवा शुश्रूषा तो सबको सदैव करनी ही चाहिए. ज्ञान अथवा विद्या देने वाले ज्ञानी पिता का भी भोजनादि से प्रतिदिन सत्कार करना चाहिए, वही श्राद्ध है.</p>



<p class="has-cyan-bluish-gray-background-color has-background">श्राद्ध कर्म में पूजने योग्य दो ही हैं&#8211; पितृ और देव</p>



<p class="has-cyan-bluish-gray-background-color has-background">&nbsp;वाणी के कर्म में प्रवीण, पढ़ाने और उपदेश करने में सदा प्रवृत्त अर्थात&#x200d;् पढ़ाने और उपदेशादि वाणी के कर्म द्वारा विद्या का प्रचार करके जगत का उपकार करने के लिए प्रतिक्षण प्रवृत्त पुरुष देवता कहलाते हैं. वाक&#x200d;्, वाणी, सरस्वती, विद्या आदि एकार्थक शब्दों के मद्देनजर विद्यावान लोगों को देव मानना सैद्धांतिक रूप से ठीक ही है. मानसकर्म ज्ञान में सदा रमण करने, मन ही मन में शुद्ध आनन्द की लहरियों का अनुभव करने, अच्छे-बुरे का सदा विवेक से निर्णय करने, अल्पभाषी, अथवा वाणी को वश में करके मौन रहने वाले, जगत के उपकार हेतु सम्यक&#x200d;् ज्ञान व अनुभव प्राप्त विषयों को सरल कर प्रचलित करने वाले पितर हैं.</p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-background-color has-background">शतपथ ब्राह्मण के अनुसार जिनमें सत्य बोलना, हितकारी वाक्य बोलना, प्रियवाणी बोलना और वेदादिशास्त्र पढ़ना इन्हीं चार प्रसंगों में वाणी का व्यय करना, किन्तु क्रोधादिपूर्वक नहीं बोलना ये गुण जिनमें हो वे देव हैं. और मानस विचार में तत्पर रहें अर्थात&#x200d;् मन के तीन दोष- किसी दूसरे की वस्तु को लेने की तृष्णा, दूसरों का अनिष्ट विचार और व्यर्थ असम्भव विचार– ये दोष जिनमें न हों तथा मानस तीन गुण&#8211; सब प्राणियों पर दया, निरपेक्ष व संतोष और शुभकर्मों परमात्मा की उपासनादि में श्रद्धाभक्ति, जिनमें विशेष कर हों, वे पितर कहलाते हैं. जिनकी वाणी सब प्रकार शुद्ध है, वे देव और जिनका मन सब प्रकार शुद्ध है, वे पितृ कहलाते हैं. मानस विचार की रक्षा वाणी से होती है, इसीलिए पितृ कार्य का रक्षक देवकार्य को माना है, तथा देव को ऋषि और पितृ को मुनि भी कहा जाता है.</p>



<p class="has-vivid-green-cyan-background-color has-background">मनुस्मृति तृतीय अध्याय श्राद्ध प्रकरण में कहा गया है कि सत्त्वगुण की प्रधानता होने से बुद्धिवर्द्धक तथा खाने योग्य कव्य पदार्थों को प्रयत्न के साथ ज्ञानियों को खिलाना चाहिए और होमने योग्य वस्तु चारों प्रकार के विद्वानों को खिलानी चाहिए. उपनिषदों में भी कहा गया है&#8211; आत्मज्ञानी की पूजा करें. उपनिषदों के इस वचन से भी ज्ञानी लोगों का ही सत्कार सिद्ध होता है. सत्य-असत्य का विवेक करने वाले ज्ञानीजनों की सम्यक&#x200d;् श्रद्धा, भक्ति से सेवा करने वाले सेवकों पर प्रसन्न होकर वे कल्याण करने के लिए मन लगाते हैं. श्रेष्ठमार्ग उपदेश से जता देते हैं कि यह काम ऐसे करना चाहिए. इसी कारण ज्ञानयुक्त पितृजनों की अन्नादि दान से श्रद्धापूर्वक सेवा-शुश्रूषा करनी चाहिए. प्राणियों का प्राण अन्न के ही आश्रय होने के कारण सब सत्कारों में भोजनार्थ अन्न से सत्कार करना ही सबमें मुख्य माना गया है. इसीलिए तर्पण और श्राद्ध में अन्न, जल से सत्कार करना मुख्य है. कालान्तर में वैदिक ज्ञान से दूर होने से तर्पण व श्राद्ध की इस प्राचीन परम्परा में विकृति आ गई, और मृत्यु को प्राप्त लोगों के नाम से पिंड देने की परम्परा चल पड़ी. वैदिक विद्वान वेदविरोधी इन प्रसंगों को प्रक्षिप्त मानते हैं और कहते हैं कि भोजन से ज्ञानी पितृ लोगों का श्राद्ध करना अत्यन्त उचित है.</p>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">पौराणिक मत में आश्विन कृष्णपक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर अमावस्या तक की अवधि को पितृपक्ष माना जाता है. इस काल में पितरों के लिए श्रद्धा से श्राद्ध करना पुण्यकर्म माना गया है. मनुस्मृति के अनुसार नित्य अन्न, जल, दूध अथवा खीर, फल और कन्दमूलों से पितृ नाम ज्ञानी पुरुषों का प्रीतिपूर्वक श्रद्धा से सत्कार करें.</p>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">पाणिनीय सूत्र में श्राद्धे शरदः कहा गया है. इस सूत्र का आशय यह है कि ऋतुवाचक शरद शब्द से श्राद्ध अर्थ में ठञ&#x200d;् प्रत्यय होता है. शरद ऋतु में नैमित्तिक श्राद्ध की विशेषता समझनी चाहिए. अर्थात&#x200d;् साधनों के ठीक-ठीक न मिलने आदि पर श्राद्ध का नैमित्तिक करना कहा गया है. भोजन करने योग्य वस्तु सर्वोपरि उत्तम पदार्थ, वस्तु सब दूध से बनते हैं. और वर्षा ऋतु के होने से गौ आदि पशुओं के भक्ष्य घासादि की अधिकता से दूध अधिक उत्पन्न होता है. श्राद्ध में खीर आदि पुष्ट वस्तुओं का विधान किया गया है. अन्नों के बीच उत्तम माने जाने वाले चावल भी वर्षा की अधिकता से शरद ऋतु में ही उत्पन्न होते हैं. वर्तमान में श्राद्ध नित्य कर्म के रूप में कम और नैमित्तिक कर्म के रूप में ही होता ज्यादा दिखाई देता है.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>रूस में यात्री विमान दुर्घटना&#124;2 बच्चों समेत 41 की मौत</title>
		<link>https://www.patnanow.com/airplane-accident-in-russia-leaving-41-dead/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nikhil]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 May 2019 20:57:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[दुर्घटना]]></category>
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					<description><![CDATA[मॉस्को (ब्यूरो रिपोर्ट) &#124; रूस की राजधानी मॉस्को से आर्कटिक क्षेत्र में स्थित रूसी शहर मरमंस्क जा रहे एक यात्री विमान दुर्घटना में 2 बच्चों समेत कम से कम 41 लोगों की मौत हो गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को हुए इस हादसे में जब ऐरोफ्लोट जेट विमान हवा में ही था, तभी उसमें आग लग गई. इसके बाद विमान की इमर्जेंसी लैंडिंग करानी पड़ी, हालांकि क्रैश लैंडिंग के वक्त विमान पूरी तरह आग के गोले में तब्दील हो गया. दुर्घटना के वक्त विमान में 78 लोग सवार थे जिनमें से 37 को बचा लिया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस के इस सुखोई सुपरजेट विमान में मॉस्को के शेरेमेतयेवो एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद आग लग गई. इसके बाद विमान की इमर्जेंसी लैंडिंग का फैसला लिया गया, हालांकि फिर भी कई लोगों की जानें नहीं बचाई जा सकीं. एयरपोर्ट के एक अधिकारी के मुताबिक, कुछ लोगों ने विमान से बाहर निकलने में भी देरी की क्योंकि वे अपने सामान को साथ ले जाना चाहते थे. माना जा रहा है कि यह हादसा किसी इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी के चलते हुआ.]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
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<p><strong>मॉस्को (ब्यूरो रिपोर्ट)</strong> | रूस की राजधानी मॉस्को से आर्कटिक क्षेत्र में स्थित रूसी शहर मरमंस्क जा रहे एक यात्री विमान दुर्घटना में 2 बच्चों समेत कम से कम 41 लोगों की मौत हो गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को हुए इस हादसे में जब ऐरोफ्लोट जेट विमान हवा में ही था, तभी उसमें आग लग गई. इसके बाद विमान की इमर्जेंसी लैंडिंग करानी पड़ी, हालांकि क्रैश लैंडिंग के वक्त विमान पूरी तरह आग के गोले में तब्दील हो गया. दुर्घटना के वक्त विमान में 78 लोग सवार थे जिनमें से 37 को बचा लिया गया है.<br> रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस के इस सुखोई सुपरजेट विमान में मॉस्को के शेरेमेतयेवो एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद आग लग गई. इसके बाद विमान की इमर्जेंसी लैंडिंग का फैसला लिया गया, हालांकि फिर भी कई लोगों की जानें नहीं बचाई जा सकीं. एयरपोर्ट के एक अधिकारी के मुताबिक, कुछ लोगों ने विमान से बाहर निकलने में भी देरी की क्योंकि वे अपने सामान को साथ ले जाना चाहते थे. माना जा रहा है कि यह हादसा किसी इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी के चलते हुआ.</p>
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