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	<title>Ravindra bharti &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>पद्मश्री शेखर सेन के भावपूर्ण मंचन में सजीव हो उठे तुलसीदास</title>
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		<pubDate>Sun, 29 Oct 2023 04:18:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[युगपुरुष नाट्य महोत्सव 2023 दर्शकों को ऐसा लगा मानो स्वामी विवेकानंद उनसे संवाद कर रहे हों विवेकानंद के जीवन के उतार-चढ़ावों के साथ ही अपनी कला यात्रा को भी पूरी श्रेष्ठता से प्रस्तुत किया पूर्व राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा ने कहा कि एकल अभिनय सम्राट की कठिन अभिनय साधना है पटना, मंच पर प्रकाश आते ही मंच पर स्वामी विवेकानंद के दर्शन होते हैं ऐसा लगा कि विवेकानंद ही मंच पर आ गये. पद्मश्री शेखर सेन ने युगपुरुष नाट्य महोत्सव में स्वामी विवेकानंद की जीवनी पर अपने एकल अभिनय और भावपूर्ण गायन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. इस एकल नाट्य प्रस्तुति की शुरुआत श्लोक ‘सर्वे भवन्तु सुखिन’ से हुआ. ‘अगले पचास साल तक अपने देवी देवता को उठा कर ताक पर रख दो हमारा राष्ट्र ही हमारा देवता है. पूजा करें हम अपनी मातृभूमि की, सेवा करें अपने देशवासियों की’. &#8220;उठो जागो और तब तक कर्म करो जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो&#8221; . ये इस नाटक के संवाद थे जो दर्शकों को झकझोर गये . बिहार आर्ट थियेटर के अध्यक्ष आर के सिन्हा जी की ओर से आयोजित युगपुरुष नाट्योत्सव के दूसरे दिन एकल अभिनय सम्राट पद्मश्री शेखर सेनजी ने स्वामी विवेकानंद की जीवनी को बड़े ही रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया. इस एकल नाट्य प्रस्तुति में संगीत प्रकाश और वेश भूषा के साथ भावप्रवण अभिनय ने राजधानी पटना के रंगकर्मियों और दर्शकों को प्रायोगिक नाटक के कई आयाम दिखाया. ‘डम डम डमरू बजावेला हमार जोगिया’ जैसे छोटे छोटे पदों के गायन और संगीत की धुन [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p><strong> युगपुरुष नाट्य महोत्सव 2023</strong></p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color"><strong>दर्शकों को ऐसा लगा मानो स्वामी विवेकानंद उनसे संवाद कर रहे हों</strong></p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color"><strong>विवेकानंद के जीवन के उतार-चढ़ावों के साथ ही अपनी कला यात्रा को भी पूरी श्रेष्ठता से प्रस्तुत किया</strong></p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color"><strong>पूर्व राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा ने कहा कि एकल अभिनय सम्राट की कठिन अभिनय साधना है</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/c1215e5d-df43-4803-bbba-59f10ffeae34-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-79774" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/c1215e5d-df43-4803-bbba-59f10ffeae34-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/c1215e5d-df43-4803-bbba-59f10ffeae34-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/c1215e5d-df43-4803-bbba-59f10ffeae34-768x512.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/c1215e5d-df43-4803-bbba-59f10ffeae34.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पटना, मंच पर प्रकाश आते ही मंच पर स्वामी विवेकानंद के दर्शन होते हैं ऐसा लगा कि विवेकानंद ही मंच पर आ गये. पद्मश्री शेखर सेन ने युगपुरुष नाट्य महोत्सव में स्वामी विवेकानंद की जीवनी पर अपने एकल अभिनय और भावपूर्ण गायन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. इस एकल नाट्य प्रस्तुति की शुरुआत श्लोक ‘सर्वे भवन्तु सुखिन’ से हुआ. ‘अगले पचास साल तक अपने देवी देवता को उठा कर ताक पर रख दो हमारा राष्ट्र ही हमारा देवता है. पूजा करें हम अपनी मातृभूमि की, सेवा करें अपने देशवासियों की’. &#8220;उठो जागो और तब तक कर्म करो जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो&#8221; . ये इस नाटक के संवाद थे जो दर्शकों को झकझोर गये . बिहार आर्ट थियेटर के अध्यक्ष आर के सिन्हा जी की ओर से आयोजित युगपुरुष नाट्योत्सव के दूसरे दिन एकल अभिनय सम्राट पद्मश्री शेखर सेनजी ने स्वामी विवेकानंद की जीवनी को बड़े ही रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया. इस एकल नाट्य प्रस्तुति में संगीत प्रकाश और वेश भूषा के साथ भावप्रवण अभिनय ने राजधानी पटना के रंगकर्मियों और दर्शकों को प्रायोगिक नाटक के कई आयाम दिखाया. ‘डम डम डमरू बजावेला हमार जोगिया’ जैसे छोटे छोटे पदों के गायन और संगीत की धुन पर लोग झूमने पर मजबूर हुए.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/7049b018-6ea1-450a-a373-ec22e468776e-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-79775" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/7049b018-6ea1-450a-a373-ec22e468776e-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/7049b018-6ea1-450a-a373-ec22e468776e-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/7049b018-6ea1-450a-a373-ec22e468776e-768x512.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/7049b018-6ea1-450a-a373-ec22e468776e.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पूर्व राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा ने कहा कि एकल अभिनय सम्राट की कठिन अभिनय साधना है कि पहले किसी भी युगपुरुष को जानना,उन पर नाटक लिखना और उसे आज के दर्शकों के हिसाब से तैयार कर प्रस्तुति देना राष्ट्र के प्रति समर्पण को दर्शाता है,पद्मश्री शेखर सेन का यह अभियान सदा चलते रहे इसकी हम सब कामना करते हैं. शेखर सेन एक ऐसी सर्वमान्य विरल विभूति हैं जिन्होंने कला की रंगभूमि पर अपनी विलक्षण प्रयोगधर्मिता और नवाचार की मिसाल क़ायम की है. लगभग चार दशकों की रंगयात्रा में शेखर ने सिद्धि और प्रसिद्धि के उन शिखरों को छुआ है जहाँ वे मनुष्यता के लिए आदर्श मूल्यों की तलाश करते हैं. और इस तरह एक सभ्य, सुसंस्कृत, अनुशासित और मर्यादित समाज का सपना देखते हैं. एक सांस्कृतिक अभियान पर निकल पड़े है.</p>



<p>संगीतकार, अभिनेता, लेखक तथा संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष  पद्मश्री शेखर सेन कहते हैं कि कलाकार का चुंबकत्व होता है जो दर्शकों को जोड़े रखता है. जैसे कोई माँ अपने बच्चे को कोई पाठ याद कराती है और फिर उससे पूछती है कि तो बच्चा माँ के सिखाए पाठ को ही ज्यों का त्यों दोहराता है, तब वह यह नहीं सोचता कि माँ को तो सब पता है, उसी ने तो बताया, तो मैं क्यों बताऊँ. इसी तरह कबीर, तुलसी, सूर या स्वामी विवेकानंद के बारे में सबको पता है लेकिन उसे किस रोचकता से पेश किया जा रहा है, यह अहम है. मैं जब कोई भी पात्र करता हूँ तो उसका विवेचन करता हूँ. स्वामी विवेकानंद के विचार प्रेरणादायी हैं. स्वामी जी कहते हैं कि मंदिर के ईश्वर को देखने से कोई लाभ नहीं है, राष्ट्र ही मंदिर है. अब इसे सुनना, गुनना और विश्लेषण करना होगा तभी तो आप उसके मर्म तक पहुँच पाएँगे. हमारे यहाँ शब्द को ब्रह्म कहा गया है, स्वर ब्रह्म कहा गया है और किसी अन्य संस्कृति में शब्दों को या स्वर लहरियों को ब्रह्म नहीं कहा गया है. इनकी साधना करने वाले साधक हैं. उन्हें हिमालय में जाकर तपस्या करने की जरुरत नहीं है, वे कला कर्म करते हुए ही योगी हैं.स्वामी विवेकानंद शास्त्रीय संगीत जानते थे तो उनकी जीवनी को प्रस्तुत करते हुए नाटक स्वामी विवेकानंद में ध्रुपद में स्वामीजी को चौताल में गाता हुआ दिखाता हूँ.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="433" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/185bad02-4794-4b0e-8dc4-28af01146045-433x650.jpg" alt="" class="wp-image-79776" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/185bad02-4794-4b0e-8dc4-28af01146045-433x650.jpg 433w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/185bad02-4794-4b0e-8dc4-28af01146045-233x350.jpg 233w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/185bad02-4794-4b0e-8dc4-28af01146045-768x1152.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/185bad02-4794-4b0e-8dc4-28af01146045-rotated.jpg 853w" sizes="(max-width: 433px) 100vw, 433px" /></figure>



<p>स्वामी विवेकानंद की जीवन यात्रा को जिस रोचक संवाद, कुशल अभिनय, ध्वनि और प्रकाश के साथ ही संगीत की स्वरलहरियों और भजनों की गूँज से प्रस्तुत किया उससे ऐसा लगा मानों हाल में बैठे सभी दर्शक स्वामी विवेकानंद से ही संवाद कर रहे हों. दर्शकों और कलाकार के बीच ऐसा नाट्य आस्वाद दुर्लभ ही होता है. शेखर सेन&nbsp; की एक और खूबी यह है कि वे अपने किरदार का मेक-अप खुद ही करते हैं, किसी मेकअप कलाकार की सेवा नहीं लेते. लेखक, निर्देशक, गायक, संगीतकार और अभिनेता शेखर सेन हर बार एक नए रूप में दर्शकों के सामने आते हैं. शेखर सेन दुनिया भर में अपने एकल नाटकों की 1000 से अधिक प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं. स्वामी विवेकानंद के विराट व्यक्तित्व के जीवन के अनगिनत जाने-अनजाने पहलुओं को दो घंटे के नाटक में रंजकता व निर्देशकीय कुशलता से प्रस्तुत करना कोई आसान काम नहीं, लेकिन शेखर सेन ने इस प्रस्तुति के माध्यम से विवेकानंद के जीवन के उतार-चढ़ावों के साथ ही अपनी कला यात्रा को भी पूरी श्रेष्ठता से प्रस्तुत किया. स्वामी विवेकानंद के प्रोफेसर, पिता विश्वनाथ दत्त, माँ भुवनेशवरी, माँ शारदादेवी, रामकृष्ण परमहंस को निभाते हुए इस शेखरजी ने अकेले ही दर्शकों को पूरे दो घंटे तक बांधे रखा.</p>



<p>शेखर जी ने बहुत ही खूबसूरती से दर्शकों से संवाद करते हुए बताया कि स्वामी विवेकानंद उस दौर में पैदा हुए थे जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था और स्वामी जी भारत को इस गुलामी से मुक्ति देना चाहते थे. स्वामी विवेकानंद द्वारा ब्राह्मो समाज में शामिल होना, विवेकानंद जब कोलकोता के स्कोटिश चर्च कॉलेज में पढ़ रहे थे तो उनके अंग्रेज प्रिंसिपल विलियम हैस्टी ने कैसे विवेकानंद की प्रतिभा को पहचान और उन्हें समाधि और ईश्वर के बारे में जानने व समझने से लिए रामकृष्ण परमहंस के पास जाने की सलाह दी. शेखर सेन  ने इस घटना को अद्भुत कौशल और रंजकता के साथ प्रस्तुत किया. पिता की मृत्यु के बाद घर में घोर गरीबी का सामना करते हुए रामकृष्ण परमहंस से ये कहना कि माँ काली से कह कर मुझे गरीबी से मुक्ति दिलवाने में मदद दिलवाएँ, और फिर रामकृष्ण परमहंस द्वारा विवेकानंद को कहना कि तुम खुद ही माँ से जाकर माँग लो . विवेकानंद तीन बार माँ काली के पास जाकर बजाय गरीबी से मुक्ति के, ज्ञान, वैराग्य, ध्यान और समाधि माँग लेते हैं, इन दृश्यों को जिस जीवंतता और कल्पनाशीलता व भावुक कर देने वाले संवादों से शेखरसेन ने प्रस्तुत किया उसकी गहरी अनूभूति श्रोताओं के दिल और दिमाग में उतर रही थी. मंच सज्जा &#8211; नीतेश शुक्ला , प्रकाश संयोजन &#8211; पंकज मंग , ध्वनि संचालन &#8211; अशोक पवार , संगीत संचालन &#8211; विजय सरोज एवं निर्माण सहायक – सौरभ थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/e8ee7762-8531-4c3c-8ee1-e58e9cec9b01-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-79777" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/e8ee7762-8531-4c3c-8ee1-e58e9cec9b01-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/e8ee7762-8531-4c3c-8ee1-e58e9cec9b01-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/e8ee7762-8531-4c3c-8ee1-e58e9cec9b01-768x512.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/e8ee7762-8531-4c3c-8ee1-e58e9cec9b01.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इस अवसर पर राजधानी के कई प्रतिष्ठित साहित्यकार और नाटक प्रेमियों ने भाव सम्प्रेषण,संवाद अदायगी और गायन का जम कर लुत्फ़ उठाया. आर के सिन्हा ने कहा यह नई पीढ़ी के लिए बहुत ज्ञानवर्धन हैक्योंकि सभी ने विवेकानंद जी को पढ़ा है और सेन जी की प्रस्तुति में जीवंत तरीके से आप उनको अच्छे तरह से जान सकेगा.आपको लगेगा की आपके सामने साक्षात स्वामी विवेकानंद खड़े है. उन्होंने कल अंतिम दिन  गोस्वामी तुलसीदास देखने के लिए लोगो को रविंद्र भवन में समय आने का आमंत्रण दिया. इस मौके भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी , विधायक अरुण सिन्हा,डा शंकर दयाल जी के साथ कई कॉलेजों के छात्र छात्रा ने नाटक देखा.</p>



<p><strong>रवींद्र भारती </strong></p>
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		<title>सिर्फ पटना में कायस्थों की संख्या 10 लाख से अधिक: आर के सिन्हा</title>
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		<pubDate>Fri, 27 Oct 2023 02:19:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पूर्व सांसद आरके सिन्हा ने जातीय गणना के आंकड़ों पर सवाल उठाया चित्रगुप्त पूजा में राज्य में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी 75 मूर्तियां शोभायात्रा में होंगी शामिल जाति आधारित गणना में कायस्थों की संख्या पर जताया एतराज सभी जिला और अनुमंडल केन्द्रों पर कायस्थ मतदाता निर्णायक भूमिका में पटना: चित्रगुप्त पूजा की तैयारी पूरे पटना में शुरू हो गई है. आगामी 15 नवंबर को आयोजित होने वाली चित्रगुप्त पूजा को लेकर पूजा समितियां की बैठक भाजपा के पूर्व सांसद वह चित्रगुप्त मंदिर प्रबंधक समिति के अध्यक्ष आर के सिंह के अध्यक्षता में हुई. पूजा के बाद 16 नवंबर को प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा. इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन मंदिर परिसर में होगा.आरके सिन्हा ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद सुरुचिपूर्ण भाई-भोज की व्यवस्था होगी. इस बार लगभग डेढ़ दर्जन से ज्यादा नए स्थानों पर भी प्रतिमा स्थापित की जाएगी. कुल मिलाकर 75 मूर्तियां शोभायात्रा में शामिल होगीं I लगभग एक दर्जन कलश भी यात्रा में रहेंगे. दानापुर से लेकर पटना सिटी तक विभिन्न चित्रगुप्त पूजा समितियों ने बड़े उल्लास के साथ इस कार्यक्रम को मनाने का निर्णय लिया है. आरके सिन्हा ने जातीय गणना के आंकड़ों पर सवाल उठाया है. उन्होंने कायस्थ जाति की संख्या सिर्फ 7 लाख 80 हजार दिखाए जाने पर आश्चर्य और नाराजगी जताई. कहा कि कायस्थ जाति इतनी भी कम नहीं है कि सरकार उसे दरकिनार या कमजोर दिखाएं. अकेले पाटलिपुत्र और पटना साहिब लोकसभा के दस ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां कायस्थ जाति निर्णायक भूमिका निभाता हैI इसके अतिरिक्त सभी जिला [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p></p>



<p><strong>पूर्व सांसद आरके सिन्हा ने जातीय गणना के आंकड़ों पर सवाल उठाया</strong></p>



<p><strong>चित्रगुप्त पूजा में राज्य में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी</strong></p>



<p><strong>75 मूर्तियां शोभायात्रा में होंगी शामिल</strong></p>



<p><strong>जाति आधारित गणना में कायस्थों की संख्या पर जताया एतराज</strong></p>



<p><strong>सभी जिला और अनुमंडल केन्द्रों पर कायस्थ मतदाता निर्णायक भूमिका में</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a41c3a07-401d-4bad-a033-8d467c3c488d-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-79728" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a41c3a07-401d-4bad-a033-8d467c3c488d-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a41c3a07-401d-4bad-a033-8d467c3c488d-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a41c3a07-401d-4bad-a033-8d467c3c488d-768x512.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a41c3a07-401d-4bad-a033-8d467c3c488d.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>पटना</strong>: चित्रगुप्त पूजा की तैयारी पूरे पटना में शुरू हो गई है. आगामी 15 नवंबर को आयोजित होने वाली चित्रगुप्त पूजा को लेकर पूजा समितियां की बैठक भाजपा के पूर्व सांसद वह चित्रगुप्त मंदिर प्रबंधक समिति के अध्यक्ष आर के सिंह के अध्यक्षता में हुई. पूजा के बाद 16 नवंबर को प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा. इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन मंदिर परिसर में होगा.आरके सिन्हा ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद सुरुचिपूर्ण भाई-भोज की व्यवस्था होगी. इस बार लगभग डेढ़ दर्जन से ज्यादा नए स्थानों पर भी प्रतिमा स्थापित की जाएगी. कुल मिलाकर 75 मूर्तियां शोभायात्रा में शामिल होगीं I लगभग एक दर्जन कलश भी यात्रा में रहेंगे. दानापुर से लेकर पटना सिटी तक विभिन्न चित्रगुप्त पूजा समितियों ने बड़े उल्लास के साथ इस कार्यक्रम को मनाने का निर्णय लिया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/1071dd7e-405b-4622-aa98-2c7f2aeaa0cd-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-79730" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/1071dd7e-405b-4622-aa98-2c7f2aeaa0cd-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/1071dd7e-405b-4622-aa98-2c7f2aeaa0cd-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/1071dd7e-405b-4622-aa98-2c7f2aeaa0cd-768x512.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/1071dd7e-405b-4622-aa98-2c7f2aeaa0cd.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आरके सिन्हा ने जातीय गणना के आंकड़ों पर सवाल उठाया है. उन्होंने कायस्थ जाति की संख्या सिर्फ 7 लाख 80 हजार दिखाए जाने पर आश्चर्य और नाराजगी जताई. कहा कि कायस्थ जाति इतनी भी कम नहीं है कि सरकार उसे दरकिनार या कमजोर दिखाएं. अकेले पाटलिपुत्र और पटना साहिब लोकसभा के दस ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां कायस्थ जाति निर्णायक भूमिका निभाता हैI इसके अतिरिक्त सभी जिला और अनुमंडल केन्द्रों पर कायस्थ मतदाता निर्णायक भूमिका में है. जिसका असर अगले चुनावों में स्पष्ट दिखेगा .</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/d9672934-3094-443a-9d6a-bc204416a45f-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-79729" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/d9672934-3094-443a-9d6a-bc204416a45f-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/d9672934-3094-443a-9d6a-bc204416a45f-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/d9672934-3094-443a-9d6a-bc204416a45f-768x512.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/d9672934-3094-443a-9d6a-bc204416a45f.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आरके सिन्हा ने कहा कि प्रदेश के हर जिले के लगभग विधानसभा में कायस्थ जाति की संख्या ठीक-ठाक है. कई विधानसभा में तो कायस्थ जाति के जनप्रतिनिधि भी जीत कर आते हैं I ग्रामीण इलाके नरकटियागंज से रश्मि वर्मा, सिकटा से दिलीप वर्मा जैसे कई कायस्थ जाति के प्रतिनिधि हैं. सरकार द्वारा जो संख्या बताई जा रही है, उसका आधार ही गलत है. अकेले पटना में कायस्थों की आबादी 10 लाख से अधिक है. क्या बाकि जगहों पर कायस्थों की गिनती नहीं की गई है? उन्होंने कहा कि चित्रगुप्त पूजा में हमलोग अपनी ताकत को दिखाएंगे. बैठक में पटना की लगभग 75 पूजा समितियों के पदाधिकारी एवं सक्रिय सदस्यों के अतिरिक्त सुदामा प्रसाद सिन्हा, मनोज कुमार, आनंद प्रसाद, शैलेन्द्र नारायण सोनू, अमिताभ वर्मा, संजय कुमार, राजेश कुमार, अरुण कर्ण के साथ मंदिर कमिटी के सदस्य और पूजा समिति के सदस्य उपस्थित थे.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>माता सती से जुड़े बिहार में है कई शक्तिपीठ</title>
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		<pubDate>Thu, 19 Oct 2023 05:01:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[माता सती से जुड़े बिहार में कई शक्तिपीठ सबसे जुड़ी हैं अलग-अलग मान्‍यताएं बिहार में मां दुर्गा के कई प्रसिद्ध शक्तिपीठ मंदिर हैं और सबों से अलग-अलग मान्यताएं जुड़ी हैं. दुर्गा सप्तशती के अनुसार जब माता सती ने अपना प्राण हवन कुंड में त्याग दिए थे, तब भगवान शिव सती के शरीर को कंधे पर लेकर तांडव करने लगे थे. भगवान शिव को ऐसे करने से रोकने के लिए भगवान विष्णु ने चक्र चलाकर देवी सती के कई टुकड़े कर दिए. जिन स्थानों पर माता सती के अंग और आभूषण गिरे, वे ही शक्तिपीठ कहलाए. माता सती के कुछ अंग और आभूषण बिहार में भी हैं. बड़ी व छोटी पटनदेवी (पटना) सबसे पहले बात बिहार की राजधानी पटना की. पटना के महाराजगंज में बड़ी पटनदेवी शक्तिपीठ स्थित है. मान्‍यता है कि इस जगह सती के शरीर से दाहिनी जंघा गिरी थी. पटना के ही हाजीगंज क्षेत्र में छोटी पटनदेवी शक्तिपीठ है. मान्यता है कि यहां देवी सती के पट और वस्त्र गिरे थे. बिहार की राजधानी पटना में स्थित है पटन देवी मंदिर जो 51 शक्तिपीठों में शुमार होता है. क्या आपको यह पता है कि कई ऐसे शहर हैं जिनके नाम अमुक ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिर के नाम पर पड़े हैं. ठीक इसी तरह बिहार की राजधानी पटना में एक पौराणिक और ऐतिहासिक मंदिर स्थित है जिसके नाम पर बिहार की राजधानी का नाम रखा गया. कई इतिहासकार यह बताते हैं कि पटना को पहले मगध के नाम से जाना जाता था. मगर 1912 में इसका नाम मगध से [&#8230;]]]></description>
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<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>माता सती से जुड़े बिहार में कई शक्तिपीठ</strong></p>



<p class="has-vivid-purple-color has-text-color"><strong> सबसे जुड़ी हैं अलग-अलग मान्‍यताएं</strong></p>



<p>बिहार में मां दुर्गा के कई प्रसिद्ध शक्तिपीठ मंदिर हैं और सबों से अलग-अलग मान्यताएं जुड़ी हैं. दुर्गा सप्तशती के अनुसार जब माता सती ने अपना प्राण हवन कुंड में त्याग दिए थे, तब भगवान शिव सती के शरीर को कंधे पर लेकर तांडव करने लगे थे. भगवान शिव को ऐसे करने से रोकने के लिए भगवान विष्णु ने चक्र चलाकर देवी सती के कई टुकड़े कर दिए. जिन स्थानों पर माता सती के अंग और आभूषण गिरे, वे ही शक्तिपीठ कहलाए. माता सती के कुछ अंग और आभूषण बिहार में भी हैं.</p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color"><strong>बड़ी व छोटी पटनदेवी (पटना)</strong></p>



<p>सबसे पहले बात बिहार की राजधानी पटना की. पटना के महाराजगंज में बड़ी पटनदेवी शक्तिपीठ स्थित है. मान्‍यता है कि इस जगह सती के शरीर से दाहिनी जंघा गिरी थी. पटना के ही हाजीगंज क्षेत्र में छोटी पटनदेवी शक्तिपीठ है. मान्यता है कि यहां देवी सती के पट और वस्त्र गिरे थे. बिहार की राजधानी पटना में स्थित है पटन देवी मंदिर जो 51 शक्तिपीठों में शुमार होता है. क्या आपको यह पता है कि कई ऐसे शहर हैं जिनके नाम अमुक ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिर के नाम पर पड़े हैं. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/badi-aur-choti-patn-devi-650x366.png" alt="" class="wp-image-79530" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/badi-aur-choti-patn-devi-650x366.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/badi-aur-choti-patn-devi-350x197.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/badi-aur-choti-patn-devi-768x432.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/badi-aur-choti-patn-devi.png 1200w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ठीक इसी तरह बिहार की राजधानी पटना में एक पौराणिक और ऐतिहासिक मंदिर स्थित है जिसके नाम पर बिहार की राजधानी का नाम रखा गया. कई इतिहासकार यह बताते हैं कि पटना को पहले मगध के नाम से जाना जाता था. मगर 1912 में इसका नाम मगध से बदलकर पटना रख दिया गया था.  इसका प्राचीन नाम पाटलिपुत्र भी था. पटना में पटन देवी मंदिर स्थित है जिसे 51 शक्तिपीठों में शुमार किया जाता है. पटन देवी को बड़ी पटन देवी मंदिर,पाटन देवी मंदिर के नाम से भी जानते हैं.</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>मां शीतला मंदिर (नालंदा)</strong></p>



<p>बिहारशरीफ से पश्चिम एकंगरसराय पथ पर मघरा गांव में प्राचीन शीतला मंदिर शक्तिपीठ है. यहां सती के हाथ से कंगन गिरा था. बिहारशरीफ मुख्यालय से महज कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है मघड़ा गांव. इस गांव की पहचान सिद्धपीठ के रूप में की जाती है. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="400" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/mata-sheetla-mandir.png" alt="" class="wp-image-79531" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/mata-sheetla-mandir.png 600w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/mata-sheetla-mandir-350x233.png 350w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<p>शीतला माता मंदिर के प्रति लोगों की आस्था जुड़ी हुई है. यह मंदिर प्राचीन काल से ही आस्था का केंद्र रहा है. यहां कभी गुप्त काल के शासक चंद्रगुप्त द्वितीय के समय चीनी यात्री फाह्यान ने पूजा की थी. उन्होंने अपनी रचना में भी शीतला माता मंदिर की चर्चा की है.</p>



<p class="has-vivid-purple-color has-text-color"><strong>मां मंगला गौरी मंदिर (गया)</strong></p>



<p>गया-बोधगया मार्ग पर भस्मकुट पर्वत है, जहां मां मंगला गौरी शक्तिपीठ है. माना जाता है कि यहां देवी सती का स्तन गिरा था. पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक, भगवान भोले शंकर जब अपनी पत्नी सती का जला हुआ शरीर लेकर तीनों लोकों में उद्विग्न होकर घूम रहे थे तो सृष्टि को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने मां सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से काटा था. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="448" height="450" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/maan-mangala-gauri-mandir-gaya.png" alt="" class="wp-image-79532" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/maan-mangala-gauri-mandir-gaya.png 448w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/maan-mangala-gauri-mandir-gaya-348x350.png 348w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/maan-mangala-gauri-mandir-gaya-250x250.png 250w" sizes="(max-width: 448px) 100vw, 448px" /></figure>



<p>इसी क्रम में मां सती के शरीर के टुकड़े देश के विभिन्न स्थानों पर गिरे थे, जिसे बाद में शक्तिपीठ के रूप में जाना गया. इन्हीं स्थानों पर गिरे हुए टुकड़े में स्तन का एक टुकड़ा गया के भस्मकूट पर्वत पर गिरा था.</p>



<p class="has-pale-pink-color has-text-color"><strong>चामुंडा मंदिर (नवादा)</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="640" height="360" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/chamunda-mandir.png" alt="" class="wp-image-79533" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/chamunda-mandir.png 640w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/chamunda-mandir-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></figure>



<p>नवादा-रोह-कौआकोल मार्ग पर रुपौ गांव में चामुंडा शक्तिपीठ है. कहा जाता है कि यहां देवी सती का सिर गिरा था. नवादा-रोह-कौआकोल मार्ग पर रूपौ गांव में स्थित चामुंडा मंदिर एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है. इस मंदिर में देवी चामुंडा की एक पुरानी मूर्ति है. हर मंगलवार को यहां भारी भीड़ उमड़ती है. चामुंडा मंदिर से पश्चिम-दक्षिण एक प्राचीन गढ़ पर स्थित शिव मंदिर में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है. मार्कंडेय पुराण के अनुसार चण्ड-मुण्ड के वध के बाद देवी दुर्गा ही चामुंडा कहलाईं.</p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color"><strong>मां चंडिका स्‍थान (मुंगेर)</strong></p>



<p>मुंगेर में गंगा तट पर मां चंडिका देवी के मंदिर को शक्तिपीठ का दर्जा प्राप्‍त है. कहते हैं कि यहां माता सती की दांयीं आंख गिरी थी. चंडिका स्थान भारत के बिहार राज्य के मुंगेर में स्थित एक हिंदू मंदिर है. यह इक्यावन शक्तिपीठों में से एक है , देवी शक्ति के लिए समर्पित पूजा स्थल . </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="365" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/chandika3-munger-650x365.jpg" alt="" class="wp-image-79534" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/chandika3-munger-650x365.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/chandika3-munger-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/chandika3-munger-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/chandika3-munger.jpg 970w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मुंगेर के पूर्वोत्तर कोने पर, चंडिका स्थान, मुंगेर शहर से सिर्फ दो किलोमीटर दूर है. सिद्धि-पीठ होने के नाते, चंडिका स्थान को सबसे पवित्र और पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है, जो गुवाहाटी के पास कामाक्ष्य मंदिर जितना ही महत्वपूर्ण है. यहां सती की बाईं आंख गिरी थी और ऐसा माना जाता है कि यहां पूजा करने वालों को नेत्र पीड़ा से छुटकारा मिलता है. यह बिहार के अंग प्रदेश क्षेत्र में प्रमुख हिंदू तीर्थस्थलों में से एक है.</p>



<p class="has-luminous-vivid-amber-color has-text-color"><strong>उग्रतारा स्थान (सहरसा)</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="480" height="353" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/ugrtara.png" alt="" class="wp-image-79535" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/ugrtara.png 480w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/ugrtara-350x257.png 350w" sizes="(max-width: 480px) 100vw, 480px" /></figure>



<p>सहरसा से 17 किमी दूर महिषी में उग्रतारा शक्तिपीठ है. मान्‍यता है यहां देवी सती की बायीं आंख गिरी थी. श्री उग्रतारा मंदिर सहरसा के महिषी प्रखंड के महिषी गांव में सहरसा स्टेशन के करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित है. इस प्राचीन मंदिर में, भगवती तारा की मूर्ति बहुत पुरानी है और दूर-दूर से भक्तों को आकर्षित करती है. मुख्य देवता के दोनों तरफ, दो छोटे देवी देवता हैं जिन्हें लोगों द्वारा एकजटा और नील सरस्वती के रूप में पूजा की जाती है.</p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color"><strong>धीमेश्वर स्थान (पूर्णिया)</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="432" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/purandevi-purniya-650x432.jpg" alt="" class="wp-image-79539" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/purandevi-purniya-650x432.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/purandevi-purniya-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/purandevi-purniya-768x511.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/purandevi-purniya.jpg 875w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p></p>



<p>पूर्णिया के बनमनखी प्रखंड के धीमेश्वर स्थान में छिन्नमस्ता देवी का मंदिर है. यह शक्तिपीठों में शुमार है. एक ही प्रतिमा में महाविद्या, मां काली, मां दुर्गा, मां छिन्नमस्तिका, त्रिपुर सुंदरी, बग्ला देवी, तारा देवी, धूआंबती, माता लक्ष्मी, मां सरस्वती समेत 10 देवियां मौजूद हैं. इस कारण इन्हें पूर्ण देवी कहा गया. इन्हीं के नाम पर पूर्णिया का नामकरण पड़ा. वहीं मंदिर के बुजुर्ग पुजारी पंडित परमानंद मिश्र और सुबोध मिश्र ने कहा कि माता पुरण देवी की महिमा अपरंपार है. यहां एक साथ दसों महाविद्याओं की पूजा अर्चना होती है. एक ही प्रतिमा में दसों महाविद्याएं विराजमान हैं. यह आपरूपी प्रतिमा है. बाबा हठीनाथ ने 500 साल पहले माता के प्रतिमा को बगल के तालाब से निकलकर विधि विधान के साथ स्थापित किया था.</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>अंबिका भवानी (सारण)</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/ambika-bhavani-saran-650x366.png" alt="" class="wp-image-79537" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/ambika-bhavani-saran-650x366.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/ambika-bhavani-saran-350x197.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/ambika-bhavani-saran-768x432.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/ambika-bhavani-saran.png 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>छपरा- पटना मुख्य मार्ग पर आमी स्थित अंबिका भवानी मंदिर को शक्तिपीठ माना जाता हैं. जिले के आमी गांव स्थित मां अंबिका भवानी आस्था, भक्ति एवं विश्वास की असीमित सत्ता को समेटे हुए हैं. मां भवानी की यह शक्तिपीठ बिहार, उत्तर प्रदेश व पड़ोसी देश नेपाल के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. चैत्र और आश्विन नवरात्र पर यहां विशेष पूजन होने की वजह से नौ दिन का मेला लगता है. अष्टमी के दिन का विशेष निशा पूजा मुख्य आकर्षण है. इस स्थान की ख्याती अवधूत भगवान राम, तांत्रिक बाबा गंगा राम समेत अन्य सिद्ध साधकों की तपोस्थली के रूप में भी है. संतान, दीर्घ आयु व सुखमय जीवन के लिए नवविवाहित दंपती यहां चुनरी व प्रसाद चढ़ाने आते हैं.</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>मां ताराचंडी (रोहतास)</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="547" height="560" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/maa-tarachandi.png" alt="" class="wp-image-79536" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/maa-tarachandi.png 547w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/maa-tarachandi-342x350.png 342w" sizes="(max-width: 547px) 100vw, 547px" /></figure>



<p>सासाराम से करीब छह किमी दूर कैमूर पहाड़ी की गुफा में मां ताराचंडी मंदिर है, जो देश के 51 शक्तिपीठों में एक माना जाता है. 51 शक्तिपीठों में से एक मां ताराचंडी मंदिर सासाराम से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर कैमूर पहाड़ी की गुफा में स्थित है. मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर इस मंदिर के पास पहाड़, झरने व अन्य जल स्त्रोत हैं. इस पीठ के बारे में किवदंती है कि सती के तीन नेत्रों में से श्री विष्णु के चक्र से खंडित होकर दायां नेत्र यहीं पर गिरा था, जो तारा शक्तिपीठ के नाम से विख्यात हुआ. पुराणों, तंत्र शास्त्रों व प्रतिमा विज्ञान में मां तारा व चंडी का जैसा रूप वर्णित है, उसी अनुसार सासाराम में दस महाविद्याओं में दूसरी मां तारा अवस्थित हैं. मां तारा की प्रतिमा प्रत्यालीढ़ मुद्रा में, बायां पैर आगे शव पर आरूढ़ है. कद में अपेक्षाकृत नाटी हैं, लंबोदर हैं व उनका वर्ण नील है. देवी के चार हाथ हैं. दाहिने हाथ में खड्ग व कैंची है. जबकि बाएं में मुंड व कमल है. कटि में व्याघ्रचर्म लिपटा है. मां तारा की मूर्ति कैमूर पहाड़ी की प्राकृतिक गुफा में अवस्थित है, जो पत्थर पर उत्कीर्ण है. गुफा के बाहर आधुनिक काल में मंदिर का स्वरूप दिया गया है. गुफा की ऊंचाई लगभग चार फीट है. गुफा के अंदर व बाहर की मूर्तियां पूर्व मध्यकालीन हैं.</p>



<p><strong>रवीन्द्र भारती </strong></p>
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		<title>ऋतुराज सिन्हा के मार्गदर्शन में एसीएफएल का फतुहा और बख्तियारपुर में निःशुल्क चिकित्सा शिविर</title>
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		<pubDate>Sat, 14 Oct 2023 07:55:16 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Ravindra bharti]]></category>
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					<description><![CDATA[1000 से अधिक महिला पुरुषों का हुआ स्वास्थ्य जांच महिलाओं, बच्चों और वयस्कों का प्राथमिक जांच किया आदि चित्रगुप्त फाइनेंस लिमिटेड ने अपने निदेशक ऋतुराज सिन्हा के मार्गदर्शन में, पटना जिले के फतुहा और बख्तियारपुर में एम स्वास्थ्य  जो की एक डिजिटल हेल्थकेयर सेवा प्रदाता है, और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और सामर्थ्य बढ़ा रहे हैं के साथ मिलकर नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन फतुहा में 11 अक्टूबर 2023, बुधवार को और बख्तियारपुर में 13 अक्तूबर 2023, शुक्रवार को किया. आदि चित्रगुप्त फाइनेंस लिमिटेड ने अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी गतिविधि के रूप में मुफ्त स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया. आदि चित्रगुप्त फाइनेंस लिमिटेड हमेशा अपने ग्राहकों की जीवन शैली को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है, ना सिर्फ व्यवसाय के लिए ऋण प्रदान करके बल्कि वित्तीय साक्षरता और स्वच्छता पर शिक्षा जैसे अन्य कार्यक्रमों के द्वारा भी उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए कार्यरत है. आयोजित चिकित्सा शिविर में राजधानी पटना के प्रतिष्ठित पारस हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल थे जिन्होंने ना सिर्फ मौजूद महिलाओं, बच्चों और वयस्कों का प्राथमिक जांच किया बल्कि जीवनशैली में मामूली बदलाव करके कैसे स्वस्थ रहें इसके बारे में भी बताया. विशेषज्ञों में डॉ अमितेश चौधरी,डॉ प्रगति अगरवाल, डॉ विजय शंकर प्रसाद सिंह,डॉ अवि अंकुर और डॉ मोबस्सर मौजूद थे. राम जानकी उत्सव पैलेस, गोविंदपुर, फतुहा, और आर के पैलेस, गुमटी रोड, बख्तियारपुर में आयोजित चिकित्सा शिविर में प्रातः 11:00 बजे से संध्या 05:00 बजे के बीच फतुहा में 450 और बख्तियारपुर में 300 लोगों ने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>1000 से अधिक महिला पुरुषों का हुआ स्वास्थ्य जांच</strong></p>



<p><strong>महिलाओं, बच्चों और वयस्कों का प्राथमिक जांच किया </strong></p>



<p>आदि चित्रगुप्त फाइनेंस लिमिटेड ने अपने निदेशक ऋतुराज सिन्हा के मार्गदर्शन में, पटना जिले के फतुहा और बख्तियारपुर में एम स्वास्थ्य  जो की एक डिजिटल हेल्थकेयर सेवा प्रदाता है, और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और सामर्थ्य बढ़ा रहे हैं के साथ मिलकर नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन फतुहा में 11 अक्टूबर 2023, बुधवार को और बख्तियारपुर में 13 अक्तूबर 2023, शुक्रवार को किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/1bcd82ad-19ae-4eb4-a066-e593e18f10fe-650x488.jpg" alt="" class="wp-image-79313" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/1bcd82ad-19ae-4eb4-a066-e593e18f10fe-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/1bcd82ad-19ae-4eb4-a066-e593e18f10fe-350x263.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/1bcd82ad-19ae-4eb4-a066-e593e18f10fe-768x576.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/1bcd82ad-19ae-4eb4-a066-e593e18f10fe.jpg 1024w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आदि चित्रगुप्त फाइनेंस लिमिटेड ने अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी गतिविधि के रूप में मुफ्त स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया. आदि चित्रगुप्त फाइनेंस लिमिटेड हमेशा अपने ग्राहकों की जीवन शैली को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है, ना सिर्फ व्यवसाय के लिए ऋण प्रदान करके बल्कि वित्तीय साक्षरता और स्वच्छता पर शिक्षा जैसे अन्य कार्यक्रमों के द्वारा भी उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए कार्यरत है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="488" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/2a5a67e3-181c-45cf-8448-d46d1232f050-488x650.jpg" alt="" class="wp-image-79314" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/2a5a67e3-181c-45cf-8448-d46d1232f050-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/2a5a67e3-181c-45cf-8448-d46d1232f050-263x350.jpg 263w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/2a5a67e3-181c-45cf-8448-d46d1232f050.jpg 768w" sizes="(max-width: 488px) 100vw, 488px" /></figure>



<p>आयोजित चिकित्सा शिविर में राजधानी पटना के प्रतिष्ठित पारस हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल थे जिन्होंने ना सिर्फ मौजूद महिलाओं, बच्चों और वयस्कों का प्राथमिक जांच किया बल्कि जीवनशैली में मामूली बदलाव करके कैसे स्वस्थ रहें इसके बारे में भी बताया. विशेषज्ञों में डॉ अमितेश चौधरी,डॉ प्रगति अगरवाल, डॉ विजय शंकर प्रसाद सिंह,डॉ अवि अंकुर और डॉ मोबस्सर मौजूद थे.</p>



<p>राम जानकी उत्सव पैलेस, गोविंदपुर, फतुहा, और आर के पैलेस, गुमटी रोड, बख्तियारपुर में आयोजित चिकित्सा शिविर में प्रातः 11:00 बजे से संध्या 05:00 बजे के बीच फतुहा में 450 और बख्तियारपुर में 300 लोगों ने मुफ्त स्वास्थ्य जांच का लाभ उठाया और सार्वजनिक स्वास्थ्य की बेहतरी से जुड़ी कई जरूरी जानकारी भी हासिल की. शिविर में लोगों का मुफ्त ब्लड शुगर जाँच भी किया गया. आए लोगों को जरूरत के हिसाब से नि:शुल्क दवाइयाँ बांटी गईं और साथ हीं महिलाओं और लड़कियों को सैनेटरी पैड भी दिए गए.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a993b35e-2391-4daf-a5fc-9a6c18969804-650x488.jpg" alt="" class="wp-image-79316" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a993b35e-2391-4daf-a5fc-9a6c18969804-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a993b35e-2391-4daf-a5fc-9a6c18969804-350x263.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a993b35e-2391-4daf-a5fc-9a6c18969804-768x576.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a993b35e-2391-4daf-a5fc-9a6c18969804.jpg 1024w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आदि चित्रगुप्त फाइनेंस लिमिटेड, भारतीय रिजर्व बैंक से पंजीकृत बिहार की पहली और एकमात्र NBFC-MFI है . आदि चित्रगुप्त फाइनेंस लिमिटेड ग्रामीण और अर्ध ग्रामीण क्षेत्रों की वंचित स्व-नियोजित महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करता है और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने और आर्थिक विषयों पर उनकी सूझबूझ बढ़ाने के लिए कार्य करता है. ACFL के निदेशक और संस्थापक ऋतुराज सिन्हा का मानना है कि जब महिलाओं की सुझबुझ आर्थिक विषयों की बढ़ेगी और आर्थिक निर्णयों में उनके भागीदारी बढ़ेगी, तो समाज में उनका मान बढ़ेगा और तभी देश का सर्वांगीण विकास होगा और इसके लिए जरूरी है महिलाओं का स्वस्थ रहना.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/586b3323-d40d-423c-b359-663049d50498-650x488.jpg" alt="" class="wp-image-79315" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/586b3323-d40d-423c-b359-663049d50498-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/586b3323-d40d-423c-b359-663049d50498-350x263.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/586b3323-d40d-423c-b359-663049d50498-768x576.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/586b3323-d40d-423c-b359-663049d50498.jpg 1024w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बख्तियारपुर में नि:शुल्क चिकित्सा शिविर में उपस्थित ACFL के निदेशक और सीईओ श्री ज्ञान मोहन ने बताया कि 2017 से लेकर अब तक ACFL ने महिलाओं को ना सिर्फ आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने का कार्य किया है बल्कि उनके और उनके परिवार तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने के लिए भी कार्यरत रहा है.  मोहन ने बताया कि हमने एम स्वास्थ्य के साथ मिलकर अपने प्रत्येक शाखाओं पर इ-क्लिनिक शुरू किया है जहाँ महिलाएं और उनके परिवार के सदस्य कार्य दिवस के दिन प्रातः 09:00 बजे से संध्या 05:00 बजे तक आकर प्रशिक्षित ANM/GNM से प्राथमिक चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकता है, और विडियो कॉल के माध्यम से 17 विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टर से अपनी मुफ्त परामर्श भी ले सकते हैं. डॉक्टर द्वारा लिखी गयी दवाइयाँ उन्हें शाखा पर मुफ्त दी जाती हैं. महिला ग्राहक 24&#215;7 किसी भी समय फ़ोन कॉल के माध्यम से भी आकस्मिक किसी चिकित्सा सलाह का भी लाभ उठा सकती हैं.</p>



<p><strong>रवीन्द्र भारती </strong></p>
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		<title>आंतरिक शत्रुओं से निपटना कठिन, नशे से दूर रहें बच्चे: गंगा प्रसाद</title>
		<link>https://www.patnanow.com/it-is-difficult-to-deal-with-internal-enemies-children-should-stay-away-from-drugs-ganga-prasad/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Aug 2023 06:36:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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		<category><![CDATA[karntitirth festival sanskar bharti]]></category>
		<category><![CDATA[prof shyam sharma]]></category>
		<category><![CDATA[Ravindra bharti]]></category>
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					<description><![CDATA[ललितकला के बिना के किसी भी संस्कृति का विकास नहीं : प्रो. श्याम शर्मा स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा 1498 से होनी चाहिए : आशुतोष भटनागर क्रांतितीर्थ समापन समारोह संपन्न पटना: आज हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं. कोई भी देश जब आजाद होता है, तो अपनी प्राचीन सभ्यता व संस्कृति पर गौरव करता है. देश के बाह्य शत्रुओं से तो निपटना तो आसान है, लेकिन देश के अंदर के शत्रुओं ने निपटना कठिन है. भारत संसार का गुरु था, इस क्रांतितीर्थ उत्सव पर हम संकल्प लें कि यह फिर से उठ खड़ा हो और विश्वगुरु बने. उक्त बातें सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने रविवार को कहीं. वे चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, पटना में आयोजित &#8216;क्रांतितीर्थ&#8217; महोत्सव के समापन समारोह के उद्घाटन के बाद संबोधित कर रहे थे. इसका आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एन्ड कल्चरल स्टडीज, इंडिया एवं संस्कार भारती, बिहार प्रदेश द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था. उन्होंने कहा कि मैकाले ने भारत में ऐसी शिक्षा व्यवस्था स्थापित कर दी, जिससे भारत के लोग तन से तो भारतीय रहे, लेकिन मन व विचार से अंग्रेज हो गए. प्रसन्नता कि बात है कि आजादी के इस अमृतकाल में नई शिक्षा नीति—2020 से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का अवसर मिला है. उन्होंने अटल सरकार द्वारा पोखरन में परमाणु परीक्षण कराए जाने को भारत का गौरव लौटाने वाला बताया. साथ ही उन्होंने समारोह में आए बुजुर्गों से आह्वान कि बच्चों में नशे के बढ़ते लत के प्रति सचेत रहें और अपने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ललितकला के बिना के किसी भी संस्कृति का विकास नहीं : प्रो. श्याम शर्मा</strong></p>



<p><strong>स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा 1498 से होनी चाहिए : आशुतोष भटनागर</strong></p>



<p><strong>क्रांतितीर्थ समापन समारोह संपन्न</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="462" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/12b00d88-da86-4499-bc14-6bee3baebb79-650x462.jpg" alt="" class="wp-image-77022" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/12b00d88-da86-4499-bc14-6bee3baebb79-650x462.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/12b00d88-da86-4499-bc14-6bee3baebb79-350x249.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/12b00d88-da86-4499-bc14-6bee3baebb79-768x546.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/12b00d88-da86-4499-bc14-6bee3baebb79.jpg 1266w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पटना: आज हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं. कोई भी देश जब आजाद होता है, तो अपनी प्राचीन सभ्यता व संस्कृति पर गौरव करता है. देश के बाह्य शत्रुओं से तो निपटना तो आसान है, लेकिन देश के अंदर के शत्रुओं ने निपटना कठिन है. भारत संसार का गुरु था, इस क्रांतितीर्थ उत्सव पर हम संकल्प लें कि यह फिर से उठ खड़ा हो और विश्वगुरु बने. उक्त बातें सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने रविवार को कहीं. वे चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, पटना में आयोजित &#8216;क्रांतितीर्थ&#8217; महोत्सव के समापन समारोह के उद्घाटन के बाद संबोधित कर रहे थे. इसका आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एन्ड कल्चरल स्टडीज, इंडिया एवं संस्कार भारती, बिहार प्रदेश द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="378" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/a29dba7f-ea25-4fe6-bd12-46fe451284b6-650x378.jpg" alt="" class="wp-image-77023" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/a29dba7f-ea25-4fe6-bd12-46fe451284b6-650x378.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/a29dba7f-ea25-4fe6-bd12-46fe451284b6-350x203.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/a29dba7f-ea25-4fe6-bd12-46fe451284b6-768x446.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/a29dba7f-ea25-4fe6-bd12-46fe451284b6.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि मैकाले ने भारत में ऐसी शिक्षा व्यवस्था स्थापित कर दी, जिससे भारत के लोग तन से तो भारतीय रहे, लेकिन मन व विचार से अंग्रेज हो गए. प्रसन्नता कि बात है कि आजादी के इस अमृतकाल में नई शिक्षा नीति—2020 से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का अवसर मिला है. उन्होंने अटल सरकार द्वारा पोखरन में परमाणु परीक्षण कराए जाने को भारत का गौरव लौटाने वाला बताया. साथ ही उन्होंने समारोह में आए बुजुर्गों से आह्वान कि बच्चों में नशे के बढ़ते लत के प्रति सचेत रहें और अपने बच्चों को दूर रखें. उन्होंने कहा कि आज विश्व आतंकवाद से पीड़ित है, लेकिन विश्व को शांति भारत से ही मिलेगी, क्योंकि भारत &#8216;वसुधैव कुटुंबकम्&#8217; की बात करता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="539" height="530" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/743fe899-d62b-470e-b27b-46bd70a8fbac.jpg" alt="" class="wp-image-77024" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/743fe899-d62b-470e-b27b-46bd70a8fbac.jpg 539w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/743fe899-d62b-470e-b27b-46bd70a8fbac-350x344.jpg 350w" sizes="(max-width: 539px) 100vw, 539px" /></figure>



<p>पद्मश्री से सम्मानित चित्रकार व संस्कार भारती के बिहार प्रदेश के अध्यक्ष प्रो. श्याम शर्मा ने कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म भारत में हुआ. यही एक ऐसी जगह है जहां ऋषियों ने संपूर्ण मानवता के कल्याण की कामना की. ललितकला के बिना के किसी भी संस्कृति का विकास नहीं हो सकता. विदेशी आक्रांताओं ने सर्वप्रथम हमारी संस्कृति पर ही आघात किया. उन्होंने बिहार की चौपाल संस्कृति को नष्ट कर दिया. आज प्रसन्नता कि दशकों तक जिन कृतियों व घटनाओं पर धूल पड़ी रही, आज उन्हें सामने लाया जा रहा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="203" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/abcd24d9-4981-401b-8748-0dfff5d3e280-650x203.jpg" alt="" class="wp-image-77025" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/abcd24d9-4981-401b-8748-0dfff5d3e280-650x203.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/abcd24d9-4981-401b-8748-0dfff5d3e280-350x109.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/abcd24d9-4981-401b-8748-0dfff5d3e280-768x239.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/abcd24d9-4981-401b-8748-0dfff5d3e280.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जम्मू—कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक आशुतोष भटनागर ने कहा कि प्राय: हमलोग स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा 1857 से शुरू करते हैं, जबकि इसकी चर्चा 1498 से होनी चाहिए. उन्होंने केलादि शिवप्पा नायक, संन्यासी मूलचंद, प्रफृल्लचंद राय, बाबा राघव दास जैसे अल्पज्ञात व अज्ञात देशभक्तों व महापुरुषों की चर्चा करते हुए आह्वान किया कि जब 2047 में हम आजादी का शताब्दी वर्ष मनाएं, तो ये महापुरुष इतने अल्पज्ञात न रहें, बल्कि उनके बारे में देश भलीभांति जानें.</p>



<p>न्यायामू​र्ति राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि इस ग्रह पर भारत ही एकमात्र स्थान है, जहां ऋषि व संन्यासी के साथ—साथ संस्कार भी जन्म लेते हैं. उन्होंने बाह्य मजबूती से अधिक आंतरिक मजबूती पर जोर दिया और कहा कि हम अगर आंतरिक रूप से मजबूत होते, तो कोई विदेशी आक्रांता यहां टिक नहीं पाता. इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एन्ड कल्चरल स्टडीज के निदेशक अरिंदम मुखर्जी ने बताया कि संस्था द्वारा चार राज्यों में बड़े कार्यक्रम कराए जा रहे हैं, ताकि भावी पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम का बीजरोपण हो.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="449" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/ef723035-d405-48d4-8026-4bf0b0867c61-650x449.jpg" alt="" class="wp-image-77026" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/ef723035-d405-48d4-8026-4bf0b0867c61-650x449.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/ef723035-d405-48d4-8026-4bf0b0867c61-350x242.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/ef723035-d405-48d4-8026-4bf0b0867c61-768x531.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/ef723035-d405-48d4-8026-4bf0b0867c61-130x90.jpg 130w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/ef723035-d405-48d4-8026-4bf0b0867c61.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इससे पूर्व सभी अतिथियों को अंगवस्त्र एवं प्रतीकचिह्न देकर स्वागत किया गया. स्कूलों की छात्राओं द्वारा रघुवीर नारायण रचित गीत— &#8216;सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा&#8230;&#8217; की प्रस्तुति दी गई. प्रसिद्ध लोकगायक व संस्कार भारती के दक्षिण बिहार के प्रांत अध्यक्ष भरत शर्मा व्यास ने राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत अपने गायन से समारोह राष्ट्रभाव से भर दिया. उद्घाटन सत्र के बाद राज्य भर से युवा कलाकारों द्वारा सुदीपा घोष के निर्देशन में &#8216;स्वातंत्र्य समर नृत्य नाटिका&#8217; की प्रस्तुति की गई, जिसमें 05 फरवरी 1932 को मुंगेर में हुए बलिदान से लेकर स्वतंत्रता संग्राम के कई अन्य घटनाओं का चित्रण किया गया. अंत में कलाकारों व प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया.</p>



<p>इस अवसर पर चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, पटना के निदेशक डॉ. राणा सिंह, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कुमोद कुमार, समाजसेवी डॉ. मोहन सिंह, कार्यक्रम संयोजक पंकज कुमार, संस्कार भारती के प्रदेश महामंत्री आनंद प्रकाश नारायण सिंह, उपाध्यक्ष संजय उपाध्याय, ​कला समीक्षक विनोद अनुपम, साहित्यकार ममता मेहरोत्रा, रंगकर्मी सुमन कुमार समेत कई गणमान्य उपस्थित थे.</p>



<p><strong>रवीन्द्र भारती </strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>संस्कार भारती द्वारा आयोजित रंग सुगंध कार्यक्रम में तीन नाटकों की हुई प्रस्तुति</title>
		<link>https://www.patnanow.com/three-plays-were-presented-in-the-rang-sugandha-program-organized-by-sanskar-bharti/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Jul 2023 07:32:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Premchand rangshala]]></category>
		<category><![CDATA[rang sugandh natya smaroh 2023]]></category>
		<category><![CDATA[Ravindra bharti]]></category>
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					<description><![CDATA[ प्रयास, पटना की प्रस्तुति &#8216;दशरथ माँझी&#8217;  दशरथ माँझी के जीवन में, उनकी पत्नी का गहलौर पहाड़ी पर पानी का घड़ा फूटना&#8230;. उनका प्यासा रह जाना&#8230;. इस घटना से दुःखी हो पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का धुन सवार होना, और एक दिन भागीरथी मेहनत और मतवाला साहस के बदौलत पहाड़ काट कर रास्ता बना देना.इन्हीं घटनाओं से दशरथ माँझी माउण्टेन मैन बन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो, एक नया इतिहास पुरूष बन गये. मगर इस इतिहास के पीछे उनके 22 वर्षो का अथक संघर्ष रहा। नाटककार / निर्देशक मिथिलेश सिंह ने नाटक दशरथ माँझी में सत्य के ऊपर कल्पनाओं का चादर ओढ़ाया है, ताकि वह सुंदर दिखे। एक ऐसा व्यक्ति जो पत्नी के चोट लगने के कारण पहाड़ काटने का निर्णय लेता है। वह जरूर सनकी रहा होगा. दशरथ माँझी के चरित्र को गढ़ने में नाटककार / निर्देशक, उनके सनकिया स्वभाव को जीवंत करने के लिए कुछ काल्पनिक घटनाओं का सहारा भी लिया है. मंच पर: दशरथ माँझी: उदय सागर ,फगुनियाँ : रजनी शरण,मंगरू माँझी : दीपक आनंद पुनेसर माँझी / कुली : विनोद कुमार यादव &#160;कुमुद रंजन &#8216;लेख&#8217; गिरीश मोहन,वहीँ मंच के परे:संगीत संरचना, संजय उपाध्याय (पू० निदेशक म०प्र०ना० वि०, भोपाल )गीत: सतीश कुमार मिश्रा / मिथिलेश सिंह,गायिका बबीता रावत (उत्तराखण्ड),गायक:संजय उपाध्याय / पुनीत मिश्रा, पंकज शर्मा -स्पेशल साउंड इफेक्ट्स:- किशोर सिन्हा / बृज बिहारी मिश्रा,मंच परिकल्पना, पद्मश्री प्रो. श्याम शर्मा,मंच निर्माण, सुनिल शर्मा, राकेश कुमार, रंजय कुमार,कला / रूप सज्जा- उदय कुमार शंकर,प्रोपर्टी इंचार्ज / लेखा अधिकारी- रामेश्वर कुमार,वेष-भूषा समाग्री-सत्यनारायण कुमार, विजय कु· सिंह :-वस्त्र विन्यास, गुड़िया सिंह, [&#8230;]]]></description>
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<p class="has-white-color has-vivid-cyan-blue-background-color has-text-color has-background"><strong> प्रयास, पटना की प्रस्तुति &#8216;दशरथ माँझी&#8217;</strong></p>



<p> दशरथ माँझी के जीवन में, उनकी पत्नी का गहलौर पहाड़ी पर पानी का घड़ा फूटना&#8230;. उनका प्यासा रह जाना&#8230;. इस घटना से दुःखी हो पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का धुन सवार होना, और एक दिन भागीरथी मेहनत और मतवाला साहस के बदौलत पहाड़ काट कर रास्ता बना देना.इन्हीं घटनाओं से दशरथ माँझी माउण्टेन मैन बन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो, एक नया इतिहास पुरूष बन गये. मगर इस इतिहास के पीछे उनके 22 वर्षो का अथक संघर्ष रहा। नाटककार / निर्देशक मिथिलेश सिंह ने नाटक दशरथ माँझी में सत्य के ऊपर कल्पनाओं का चादर ओढ़ाया है, ताकि वह सुंदर दिखे। एक ऐसा व्यक्ति जो पत्नी के चोट लगने के कारण पहाड़ काटने का निर्णय लेता है। वह जरूर सनकी रहा होगा. दशरथ माँझी के चरित्र को गढ़ने में नाटककार / निर्देशक, उनके सनकिया स्वभाव को जीवंत करने के लिए कुछ काल्पनिक घटनाओं का सहारा भी लिया है.</p>



<p>मंच पर: दशरथ माँझी: उदय सागर ,फगुनियाँ : रजनी शरण,मंगरू माँझी : दीपक आनंद पुनेसर माँझी / कुली : विनोद कुमार यादव &nbsp;कुमुद रंजन &#8216;लेख&#8217; गिरीश मोहन,वहीँ मंच के परे:संगीत संरचना, संजय उपाध्याय (पू० निदेशक म०प्र०ना० वि०, भोपाल )गीत: सतीश कुमार मिश्रा / मिथिलेश सिंह,गायिका बबीता रावत (उत्तराखण्ड),गायक:संजय उपाध्याय / पुनीत मिश्रा, पंकज शर्मा -स्पेशल साउंड इफेक्ट्स:- किशोर सिन्हा / बृज बिहारी मिश्रा,मंच परिकल्पना, पद्मश्री प्रो. श्याम शर्मा,मंच निर्माण, सुनिल शर्मा, राकेश कुमार, रंजय कुमार,कला / रूप सज्जा- उदय कुमार शंकर,प्रोपर्टी इंचार्ज / लेखा अधिकारी- रामेश्वर कुमार,वेष-भूषा समाग्री-सत्यनारायण कुमार, विजय कु· सिंह :-वस्त्र विन्यास, गुड़िया सिंह, रूपा सिंह, बीणा गुप्ता.मंच व्यवस्था- सिद्धांत कुमार, राकेश कुमार, आदित्य पाण्डेय,प्रकाश संरचना- राहूल रवि,सहायक निर्देशक-अभिषेक चौहान,ध्वनि संचालक / सह निर्देशक : रवि भूषण &#8216;बबलु&#8217;और इस नाटक के लेखक-निर्देशक थे मिथिलेश सिंह.</p>



<p class="has-vivid-purple-background-color has-background"><strong>कफ़न  ( बज्जिका) में 909 वी प्रस्तुति</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/1342a500-7278-42f4-b7ff-fd3012140b45-2-650x488.jpg" alt="" class="wp-image-76573" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/1342a500-7278-42f4-b7ff-fd3012140b45-2-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/1342a500-7278-42f4-b7ff-fd3012140b45-2-350x263.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/1342a500-7278-42f4-b7ff-fd3012140b45-2-768x576.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/1342a500-7278-42f4-b7ff-fd3012140b45-2.jpg 1040w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कलम के जादूगर मुन्शी प्रेमचन्द की कहानी &#8220;कफ़न &#8220;मे निर्देशकिय पक्ष यह है कि घीसू और माधो (पिता पूत्र )निक्क्मे इसलिये हैं कि ये निक्क्मापन इनका मौन विरोध है. दोनो चौधरी जैसे अन्य धनिक और शोषक लोगो का काम सिर्फ़ इसलिये नहीं करना चाहते क्योकि वे वर्षॊ से मज़दूर किसान का शोषन ही करते आये हैं. उनका ये मौन विरोध तब फ़ूट पडता है जब चौधरी छ्ल से हडपी घीसू की ज़मीन का केस जीतकर उसी की मृत पुतोह के लिये दिखावा करने के हुये कफ़न, लहठी, सेनुर, अगरबत्ती, सेन्ट, फ़ल और बताशा चढाता है. माधो और घीसू इन सामानो को अस्वीकार करते हुए कह उठते है कि &#8220;जबतक बुधिया ज़िन्दा थी तबतक खाना और एक केथरी तक नहीं दिया किसी ने अब जब वो मर गयी तो नया कफ़न चाहिए? वे दोनो उन सामानो तोड़  फ़ोड  इस सामाजिक व्यवस्था का विरोध करते हैं.  इस नाटक को वर्तमान से जोड़ते हुये शिक्षा व्यवस्था, मध्यान भोजन, शराब बन्दी वर्ण व्यवस्था पे चुटेले प्रहार भी किये हैं.</p>



<p>घीसू -क्षितिज प्रकाश,माधो -रविशंकर पासवान,सतरोहन -प्रशांत कुमार,गणेश -विवेक यादव,रघु&nbsp; -पवन कुमार अपूर्व,गोपाल बाबू -रणधीर कुमार,चौधरी जी -यशवंत राज,तोताराम &#8211;तरुणएश कुमार.चौकीदार एक -बिनोद हाजीपुरी /अमर सिंह राजपूत,चौकीदार दो -सुधाशु कुमार,लाईट -सोनू कुमार,साउंड -तरुणेश कुमार.</p>



<p class="has-white-color has-pale-cyan-blue-background-color has-text-color has-background"><strong>टुटल तागक एकटा ओर</strong></p>



<p>रंग अभ्युदय की प्रस्तुति टुटल तागक एकटा ओर नाटक के लेखक -महेंद्र मलंगिया और परिकल्पना व निर्देशक: अभिषेक देवनारायन थे,इस नाटक में किसी टूटे हुए धागे के दोनों सिरों के सामने, क्या यह प्रश्न उठेगा कि टूटा हुआ सिरा वह खुद है&#8230;?  या यह,  कि जो टूटा हुआ है वह उस धागे का दूसरा सिरा है, वो नहीं&#8230; ? जीवन के पोले से टूटे हुए धागे के दोनों सिरों की कथा-व्यथा है यह नाटक। जैसे किसी पगडंडी के किनारे बरगद के पेड़ के नीचे गिरा हुआ एक घोंसला और चारो तरफ उड़ते हुए प्रेमी चिड़ा-चिड़ी के टूटे पंख। क्या घोंसला फिर से बसेगा या कि बवंडर में सबकुछ उजड़ गया? जीवन के अच्छे-बुरे, श्वेत-स्याह राग-रंग, अन्हरिया-इजोरिया में रचा-बसा प्रेम और घृणा, व्यक्ति की अस्मिता, निर्णय लेने का सामर्थ्य और अवसर, किसी एक क्षण की पीड़ा को जीवनपर्यंत भोगने के लिए अभिशप्त होना, आदि आदि अनेकों द्वंद और उससे जूझते दो व्यक्तियों का आर्तनाद है यह नाटक। </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="611" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/32771f43-f6f4-477e-b1e5-a7e249e18473-1-611x650.jpg" alt="" class="wp-image-76574" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/32771f43-f6f4-477e-b1e5-a7e249e18473-1-611x650.jpg 611w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/32771f43-f6f4-477e-b1e5-a7e249e18473-1-329x350.jpg 329w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/32771f43-f6f4-477e-b1e5-a7e249e18473-1.jpg 687w" sizes="(max-width: 611px) 100vw, 611px" /></figure>



<p>भीषण आंधी में थके हुए पत्तों के बीच सरसराती एक कानाफूसी – ‘क्यूँ चले गए छोड़ के मुझे&#8230;?’ और जबाब में – ‘ये अब मत पूछो&#8230;!’ क्या फिर से आने वाली उस भयंकर आंधी में डाल से वह पत्ता जुड़ा हुआ ही रहेगा या अलग हो जाएगा सदा के लिए? समय-काल बदल रहा है और साथ ही जीवन का रूप-रंग-चाल-ढाल सब। कुछ चीज़ें सही नहीं लगती हैं और कुछ जैसे साफ अपरिचित, फिर भी जो सामने है, उस परिस्थिति से विमुख होना असंभव है। इसलिए जीवन के जरुरी निर्णय गंभीर मंथन की मांग  करते हैं, और साथ ही स्वीकार्यता और नए परिवर्तन को आत्मसात करने का सामर्थ्य भी। टूटे हुए धागे के दोनों सिरों के बीच उचित-अनुचित, होश और आवेश के बीच की खींचतान है यह नाटक।    </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/a1d03c36-9083-4da8-8fdd-2d622bb2829d-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-76575" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/a1d03c36-9083-4da8-8fdd-2d622bb2829d-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/a1d03c36-9083-4da8-8fdd-2d622bb2829d-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/a1d03c36-9083-4da8-8fdd-2d622bb2829d-768x512.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/a1d03c36-9083-4da8-8fdd-2d622bb2829d.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिन्नी : सुनीता झा,पुरुष : काश्यप कमल ,प्रकाश –. नीरज कुंदेर,पेंटिंग्स – सर्वप्रिया झा,आभार : यदुवीर भारती, बजरंग मंडल, श्यामा चरण, मुकेश झा मिक्कू&nbsp; : स्व. प्रणव नार्मदेय के कविता ‘संक्रमित सम्बन्ध लेखक-महेंद्र मलंगिया परिकल्पना/निर्देशन अभिषेक देवनारायन.</p>



<p>प्रस्तुति के मंचन के अवसर पर डा रंजना झा, अध्यक्ष,संस्कार भारती, उत्तर बिहार प्रांत, डा विद्या चौधरी, पुरातत्वविद , राम नरेश शर्मा, उपाध्यक्ष,बज्जिका विकास परिषद,पंकज कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष, संस्कार भारती पटना महानगर बिहार प्रदेश, सायन कुणाल, समाजसेवी और मीडिया प्रभारी मनीष महिवालउपस्थित थे.</p>



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		<item>
		<title>3 करोड़ रुपये किलो बिकते है टमाटर के बीज</title>
		<link>https://www.patnanow.com/tomato-seeds-are-sold-for-rs-3-crore-per-kg/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Jul 2023 06:49:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
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		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[3 crore kg tomato seeds . hejera jenetics]]></category>
		<category><![CDATA[Ravindra bharti]]></category>
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					<description><![CDATA[ये हैं दुनिया के सबसे महंगे टमाटर के बीज एक बार खा लिया तो बार-बार खाने के मन करेगा गहन क्वालिटी कंट्रोल टेस्ट के बाद तैयार होते हैं बीज 1 बीज से मिलता है 20 किलो टमाटर हेजेरा जेनेटिक्स ऐसे टमाटर के बीज बेचता है जो सोने से भी अधिक महंगे हफ्तेभर पहले 60 रुपये किलो बिकने वाला टमाटर अब 100 से 150 रुपये में बिक रहा है. दिल्ली में केवल एक किलो टमाटर 80 से 100 रुपये में मिल रहा है. टमाटर की बात करें तो क्या आप जानते हैं कि हेजेरा जेनेटिक्स ऐसे टमाटर के बीज बेचता है जो सोने से भी अधिक महंगे हैं? उनके स्पेशल समर सन टमाटर के बीज यूरोपीय बाजार में वास्तव में आश्चर्यजनक कीमतों के साथ हाई डिमांड में हैं. इन बेहद महंगे टमाटर के बीजों के एक किलोग्राम पैकेट की कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये है. इतने पैसे से आप आसानी से पांच किलोग्राम सोना खरीद सकते हैं.दरअसल, टमाटर की इस विशेष किस्म का प्रत्येक बीज बीस किलोग्राम तक टमाटर पैदा कर सकता है.  जो बात इस टमाटर को अलग करती है वह यह है कि यह बीज रहित है, जिससे किसानों को हर फसल के लिए नए बीज खरीदने पड़ते हैं. &#160;अधिक लागत के बावजूद, ये टमाटर अपने असाधारण स्वाद के लिए जाने जाते हैं. एक बार जब कोई उनके स्वाद का अनुभव कर लेता है, तो उन्हें बार-बार उसे खाने का मन होता है. आम टमाटर इस अनूठी किस्म के टमाटर की कीमत की तुलना में काफी सस्ते हैं. हाजेरा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ये हैं दुनिया के सबसे महंगे टमाटर के बीज</strong></p>



<p><strong>एक बार खा लिया तो बार-बार खाने के मन करेगा</strong></p>



<p><strong>गहन क्वालिटी कंट्रोल टेस्ट के बाद तैयार होते हैं बीज</strong></p>



<p><strong>1 बीज से मिलता है 20 किलो टमाटर</strong></p>



<p><strong>हेजेरा जेनेटिक्स ऐसे टमाटर के बीज बेचता है जो सोने से भी अधिक महंगे </strong></p>



<p></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="365" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/tomato-650x365.png" alt="" class="wp-image-76046" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/tomato-650x365.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/tomato-350x197.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/tomato-768x432.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/tomato.png 948w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>हफ्तेभर पहले 60 रुपये किलो बिकने वाला टमाटर अब 100 से 150 रुपये में बिक रहा है. दिल्ली में केवल एक किलो टमाटर 80 से 100 रुपये में मिल रहा है. टमाटर की बात करें तो क्या आप जानते हैं कि हेजेरा जेनेटिक्स ऐसे टमाटर के बीज बेचता है जो सोने से भी अधिक महंगे हैं? उनके स्पेशल समर सन टमाटर के बीज यूरोपीय बाजार में वास्तव में आश्चर्यजनक कीमतों के साथ हाई डिमांड में हैं. इन बेहद महंगे टमाटर के बीजों के एक किलोग्राम पैकेट की कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये है. इतने पैसे से आप आसानी से पांच किलोग्राम सोना खरीद सकते हैं.दरअसल, टमाटर की इस विशेष किस्म का प्रत्येक बीज बीस किलोग्राम तक टमाटर पैदा कर सकता है.  जो बात इस टमाटर को अलग करती है वह यह है कि यह बीज रहित है, जिससे किसानों को हर फसल के लिए नए बीज खरीदने पड़ते हैं.</p>



<p>&nbsp;अधिक लागत के बावजूद, ये टमाटर अपने असाधारण स्वाद के लिए जाने जाते हैं. एक बार जब कोई उनके स्वाद का अनुभव कर लेता है, तो उन्हें बार-बार उसे खाने का मन होता है. आम टमाटर इस अनूठी किस्म के टमाटर की कीमत की तुलना में काफी सस्ते हैं. हाजेरा सर्वोत्तम टमाटर के बीजों को तैयार करने के लिए समर्पित है. इस टारगेट को प्राप्त करने के लिए, हेजेरा रिसर्च, प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग और क्वालिटी में अपनी दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ाने को प्राथमिकता देता है, जिससे उसके ग्राहकों और कर्मचारियों दोनों को फायदा होगा.</p>



<p>हजेरा के एक प्रतिनिधि, टायरेल ने बताया कि उनका ध्यान उत्पादकों और किसानों दोनों के लिए नई किस्मों के प्रजनन और बीज उत्पादन पर है. बीज उत्पादन चरण के बाद, वे यह सुनिश्चित करने के लिए गहन क्वालिटी कंट्रोल टेस्ट करते हैं कि बीज आवश्यक कमर्शियल स्टैंडर्ड को पूरा करते हैं. एक बार जब बीज इन परीक्षणों में सफल हो जाते हैं, तो उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की डिलीवरी की गारंटी के लिए आगे की प्रोसेसिंग की जाती हैं.</p>



<p><strong>सबसे महंगी सब्जी हॉपशूट</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="364" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/hopsuit-650x364.png" alt="" class="wp-image-76047" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/hopsuit-650x364.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/hopsuit-350x196.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/hopsuit-768x430.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/hopsuit.png 770w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>दूसरी ओर, हॉप शूट्स (हॉप पौधे की हरी युक्तियाँ) को दुनिया की सबसे महंगी सब्जी माना जाता है. हॉप पौधा आम तौर पर बीयर उत्पादन से जुड़ा होता है, क्योंकि इसके फूलों का उपयोग शराब बनाने में किया जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक किलोग्राम हॉप शूट्स की कीमत लगभग 85,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक है.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>रहस्य और रोमांच से भरपूर है कहानी &#8216;डिकोड&#8217; -राजीव रंजन सिन्हा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/the-story-decode-is-full-of-mystery-and-adventure-rajeev-ranjan-sinha/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Jun 2023 03:56:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[गांव -शहर]]></category>
		<category><![CDATA[amazon]]></category>
		<category><![CDATA[decode book]]></category>
		<category><![CDATA[rajiv ranjan sinha decode]]></category>
		<category><![CDATA[Ravindra bharti]]></category>
		<category><![CDATA[writter rajiv ranjan sinha]]></category>
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					<description><![CDATA[‘कोड वर्ड’ लिखे जाने से पहले उसका डिकोड किया गया ‘डिकोड: एक अज्ञात सन्देश का रहस्य’ रवीन्द्र भारती आईबी को एक कोड मिलता है। उस कोड को डिकोड करने की ज़िम्मेवारी आईबी के तेज तर्रार अधिकारी संजय भटनागर को दी जाती है। संजय उस समय नॉर्थ ईस्ट में एक खास मिशन पर होता है. उसे जानकारी मिलती है कि उस क्षेत्र में आतंकवादियों के द्वारा गोला बारूद इकठ्ठा किया जा रहा है. इधर, कोड को डिकोड करने के दरमियान उसकी मुलाक़ात संजना माथुर से होती है, जो कि पेशे से एक डॉक्टर है. संजना पर एक मॉल में ब्लास्ट करने का आरोप लगता है. उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाता है. संजय को ये यक़ीन होता है कि संजना निर्दोष है. संजय का साथी राज,जो कि पेशे से वकील है. वह संजना का केस लड़ता है. और, अदालत में उसे बेगुनाह साबित करता है. अपनी तफ़्तीश में संजय ये पाता है कि संजना को मॉल ब्लास्ट में फंसाया गया था. फंसाने वाले की असलियत जब ज़ाहिर होती है तब उसे ये जानकारी होती है कि कोड का वह भी एक हिस्सा है. कोड को जब वह पूरी तरह से डिकोड करता है तब वह पाता है कि दुश्मनों की योजना एक साथ कई घातक घटनाओं को अंजाम देना है. राजीव रंजन ने क्या कहा &#8211; पहली कहानी ‘तपोभूमि’ लिखने के बाद दूसरी कहानी लिखने का विचार  आया। सोचने लगा कि ‘कोड’ थीम पर कहानी लिखी जाए। एक ऐसा कोड जिसे डिकोड करने की ज़िम्मेवारी आईबी की होती है. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p class="has-vivid-purple-background-color has-background"><strong>‘कोड वर्ड’ लिखे जाने से पहले उसका डिकोड किया गया</strong></p>



<p class="has-vivid-purple-background-color has-background"><strong>‘डिकोड: एक अज्ञात सन्देश का रहस्य’</strong></p>



<p><strong>रवीन्द्र भारती </strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/5884f842-a28f-4a4b-b00b-a37a766ab970.jpg" alt="" class="wp-image-75374" width="481" height="766" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/5884f842-a28f-4a4b-b00b-a37a766ab970.jpg 314w, https://www.patnanow.com/assets/2023/06/5884f842-a28f-4a4b-b00b-a37a766ab970-220x350.jpg 220w" sizes="(max-width: 481px) 100vw, 481px" /></figure>



<p>आईबी को एक कोड मिलता है। उस कोड को डिकोड करने की ज़िम्मेवारी आईबी के तेज तर्रार अधिकारी संजय भटनागर को दी जाती है। संजय उस समय नॉर्थ ईस्ट में एक खास मिशन पर होता है. उसे जानकारी मिलती है कि उस क्षेत्र में आतंकवादियों के द्वारा गोला बारूद इकठ्ठा किया जा रहा है. इधर, कोड को डिकोड करने के दरमियान उसकी मुलाक़ात संजना माथुर से होती है, जो कि पेशे से एक डॉक्टर है. संजना पर एक मॉल में ब्लास्ट करने का आरोप लगता है. उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाता है. संजय को ये यक़ीन होता है कि संजना निर्दोष है. संजय का साथी राज,जो कि पेशे से वकील है. वह संजना का केस लड़ता है. और, अदालत में उसे बेगुनाह साबित करता है. अपनी तफ़्तीश में संजय ये पाता है कि संजना को मॉल ब्लास्ट में फंसाया गया था. फंसाने वाले की असलियत जब ज़ाहिर होती है तब उसे ये जानकारी होती है कि कोड का वह भी एक हिस्सा है. कोड को जब वह पूरी तरह से डिकोड करता है तब वह पाता है कि दुश्मनों की योजना एक साथ कई घातक घटनाओं को अंजाम देना है.</p>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background"><strong>राजीव रंजन ने क्या कहा &#8211;</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/Pic-1.jpeg" alt="" class="wp-image-75375" width="483" height="483"/></figure>



<p>पहली कहानी ‘तपोभूमि’ लिखने के बाद दूसरी कहानी लिखने का विचार  आया। सोचने लगा कि ‘कोड’ थीम पर कहानी लिखी जाए। एक ऐसा कोड जिसे डिकोड करने की ज़िम्मेवारी आईबी की होती है. अब इसमें सवाल ये था कि ‘कोड वर्ड’ होगा क्या. इस पर गहरा मंथन हुआ. जिसके बाद यह तथ्य निकलकर सामने आया कि ‘कोड वर्ड’ का निर्माण तभी हो सकता है जब घटनाओं के बारे में विचार किया जाये. निःसंदेह घटनाओं का ज़िक्र व्यापक होगा. और, जब उसे समेटा जाएगा तब एक ‘कोड वर्ड’ का निर्माण होगा. मतलब ये हुआ कि ‘कोड वर्ड’ लिखे जाने से पहले उसका डिकोड किया गया. अगर ‘डिकोड’ नहीं किया जाता तो मेरे लिए ‘कोड वर्ड’ लिखना मुश्किल था. इसलिए मैंने पहले डिकोड को परिभाषित किया, फिर मैंने उसे आधार बनाकर ‘कोड वर्ड का निर्माण किया. अब कोड क्या था और और उसे डिकोड कैसे किया गया, इसके लिए आपको मेरी कहानी ‘डिकोड: एक अज्ञात सन्देश का रहस्य’ पढ़ना होगा.</p>



<p class="has-vivid-green-cyan-color has-text-color"><strong>नीचे दिए गये लिंक से आप किताब ले सकते हैं </strong></p>



<p><a href="https://www.amazon.in/Rajiv-Ranjan-Sinha-books/s?k=Rajiv+Ranjan+Sinha+books&amp;page=2">https://www.amazon.in/Rajiv-Ranjan-Sinha-books/s?k=Rajiv+Ranjan+Sinha+books&amp;page=2</a></p>
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		<title>एक आईपीएस की फर्ज और सेवा की कहानी है राजीव रंजन सिन्हा की ‘तपोभूमि’</title>
		<link>https://www.patnanow.com/rajiv-ranjan-sinhas-tapo-bhoomi-is-the-story-of-duty-and-service-of-an-ips/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Jun 2023 13:41:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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		<category><![CDATA[patna news]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
		<category><![CDATA[rajiv ranjan sinha]]></category>
		<category><![CDATA[Ravindra bharti]]></category>
		<category><![CDATA[tapobhumi rajiv ranjan sinha]]></category>
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					<description><![CDATA[काला-दस्ता को उखाड़ फेंकने की चुनौती को किया था स्वीकार कैसे बनें एक अच्छा रचनाकार : राजीव रंजन सिन्हा भारतीय पुलिस सेवा में चुने जाने के बाद सिद्धार्थ की पहली पोस्टिंग बारामूला में एसपी के पद पर होती है. बारामूला और उसके आसपास इलाक़े में तईबा नामक आतंकवादी गुट सक्रिय है. इस गुट का सरगना फ़िराक खान है. सिद्धार्थ का सामना इसी गुट के कुछ आतंकवादियों से हो जाता है. जिसमें फ़िराक खान का भाई मारा जाता है. भाई की हत्या से वह बौख़ला जाता है. वह अपने दस्ते के साथ एसपी आवास और दफ़्तर पर एक साथ हमला कर देता है. हमले से निपटने के लिए सेना की एक टुकड़ी वहां आकर मोर्चा संभाल लेती है. इस टुकड़ी का नेतृत्व कैप्टेन सुमित सिंह करता है. सुमित सिद्धार्थ का ज़िगरी दोस्त है. दोनों तरफ से जबरदस्त फ़ायरिंग होती है, जिसमें फ़िराक खान सहित उसका पूरा कुनबा ख़त्म हो जाता है. इस लड़ाई में सिद्धार्थ को बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ती है. माता-पिता और उसकी छोटी बहन की मौत हो जाती है. वहीं सुमित शहीद हो जाता है.&#160; सिद्धार्थ को कई गोलियां लगती है. इलाज़ के दौरान वह ज़िंदा तो बच जाता है. लेकिन, कोमा यानी अप्राकृतिक निद्रा में चला जाता है. तक़रीबन दो साल तक वह ऐसे ही हालत में रहता है. कोमा से बाहर आने के बाद उसकी पोस्टिंग झारखंड के राजनगर में कर दी जाती है. राजनगर बड़ा ही ख़ूंखार इलाक़ा है. यहां देश का कानून नहीं बल्कि काला-दस्ता का राज चला करता है. काला-दस्ता का गठन देश के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>काला-दस्ता को उखाड़ फेंकने की चुनौती को किया था स्वीकार</strong></p>



<p><strong>कैसे बनें एक अच्छा रचनाकार : राजीव रंजन सिन्हा</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="493" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/Profile-Pic.jpeg" alt="" class="wp-image-75320" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/Profile-Pic.jpeg 493w, https://www.patnanow.com/assets/2023/06/Profile-Pic-288x350.jpeg 288w" sizes="(max-width: 493px) 100vw, 493px" /></figure>



<p>भारतीय पुलिस सेवा में चुने जाने के बाद सिद्धार्थ की पहली पोस्टिंग बारामूला में एसपी के पद पर होती है. बारामूला और उसके आसपास इलाक़े में तईबा नामक आतंकवादी गुट सक्रिय है. इस गुट का सरगना फ़िराक खान है. सिद्धार्थ का सामना इसी गुट के कुछ आतंकवादियों से हो जाता है. जिसमें फ़िराक खान का भाई मारा जाता है. भाई की हत्या से वह बौख़ला जाता है. वह अपने दस्ते के साथ एसपी आवास और दफ़्तर पर एक साथ हमला कर देता है. हमले से निपटने के लिए सेना की एक टुकड़ी वहां आकर मोर्चा संभाल लेती है. इस टुकड़ी का नेतृत्व कैप्टेन सुमित सिंह करता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/tapobhumi.jpeg" alt="" class="wp-image-75318" width="371" height="571" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/tapobhumi.jpeg 324w, https://www.patnanow.com/assets/2023/06/tapobhumi-227x350.jpeg 227w" sizes="(max-width: 371px) 100vw, 371px" /></figure>



<p>सुमित सिद्धार्थ का ज़िगरी दोस्त है. दोनों तरफ से जबरदस्त फ़ायरिंग होती है, जिसमें फ़िराक खान सहित उसका पूरा कुनबा ख़त्म हो जाता है. इस लड़ाई में सिद्धार्थ को बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ती है. माता-पिता और उसकी छोटी बहन की मौत हो जाती है. वहीं सुमित शहीद हो जाता है.&nbsp; सिद्धार्थ को कई गोलियां लगती है. इलाज़ के दौरान वह ज़िंदा तो बच जाता है. लेकिन, कोमा यानी अप्राकृतिक निद्रा में चला जाता है. तक़रीबन दो साल तक वह ऐसे ही हालत में रहता है. कोमा से बाहर आने के बाद उसकी पोस्टिंग झारखंड के राजनगर में कर दी जाती है. राजनगर बड़ा ही ख़ूंखार इलाक़ा है. यहां देश का कानून नहीं बल्कि काला-दस्ता का राज चला करता है. काला-दस्ता का गठन देश के गद्दारों ने आज़ादी के बाद किया था. इसमें वैसे लोग शामिल थे, जिन्होंने अपने निज़ी फ़ायदे के लिए आज़ादी से पहले अंग्रेज़ों के तलवे चाटें. और, बाद&nbsp; में जंगल और पहाड़ों में अपना आशियाना बना लिया.</p>



<p>पहले तो आदिवासियों के हक़ के लिए सरकार से लड़ने की बात कही. और, बाद में उनकी ही हक़मारी कर उनके ही इलाक़े में अपना दबदबा क़ायम कर लिया. उन्हें सरकार के खिलाफ़ भड़का कर उनके हाथों में बंदूकें थमा दी. और, इस तरह से कला-दस्ता ने एक बड़ी फौज़ तैयार कर ली. उसने अपने हथियारबंद कार्यकर्ता को ‘लड़ाके’ का नाम दिया. बाद के दिनों में इस संगठन को नेताओं का संरक्षण भी मिलने लगा. काला-दस्ता अपनी धमक बरकरार रखने के लिए समतल मैदानों में कई छोटे-बड़े नरसंहारों को अंज़ाम दिया.राजनगर में पोस्टिंग के बाद सिद्धार्थ के सामने चुनौती होती है काला-दस्ता के ख़ात्मे की.</p>



<p><a href="https://www.amazon.in/Rajiv-Ranjan-Sinha-books/s?k=Rajiv+Ranjan+Sinha+books&amp;page=2">https://www.amazon.in/Rajiv-Ranjan-Sinha-books/s?k=Rajiv+Ranjan+Sinha+books&amp;page=2&amp;language=  </a></p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>राजीव रंजन सिन्हा&nbsp;की चंद बातें आपसे सीधे &#8230;.</strong></h2>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/Pic.jpeg" alt="" class="wp-image-75319" width="524" height="524"/></figure>



<p>अगर आप कल्पनाशील हैं, तो आप अपनी कल्पनाओं की उड़ान को आसमान में जितनी ऊंची ले जा सकते हैं. उसे जरूर ले जाएं. पता नहीं वह उड़ान कब आपकी लेखन का शक़्ल लेकर एक कहानी गढ़ जाये. ये मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि मैंने कल्पना में ही जी कर कुछ कहानियां लिखी है. बचपन से ही कुछ न कुछ सोचने की आदत रही है. कल्पना में खो जाना मानों मेरी फितरत में शुमार हो चुका है. मैंने अपनी इसी आदत को हमेशा अपने अंदर बरकरार रखा. एक समय ऐसा आया जब&nbsp; मुझे ये लगने लगा कि मुझे कुछ लिखना चाहिए, तब मैंने सोचना शुरू किया कि क्या लिखा जाए. किस पर लिखा जाये? कैसे लिखा जाए? लिखने का प्रारूप कैसा होना चाहिए? ये तमाम सवाल ऐसे थे, जिनका जवाब मुझे ढूंढना था. चार पांच दिनों के मशक्कत के बाद मुझे अपने सारे सवालों का जवाब मिल गया. पहली बार कहानी लिखनी थी, तो मैंने कुछ सच्चे तथ्य को लिया. और, उसके बाद कहानी का सार लिखा. सार तो लिखा गया, अब बारी थी सार को उपन्यास के रूप में अमली जामा पहनाने का. अपनी कल्पनाओं की उड़ान को मैंने बेलगाम कर दिया. एक कड़ी से दूसरी कड़ी को जोड़ता चला गया. और, जब सारी कड़ियां जुड़ गयी तब एक कहानी ने जन्म लिया. जिसका नाम ‘तपोभूमि’ था.&nbsp;</p>



<p><strong>रवीन्द्र भारती</strong></p>
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		<title>प्रार्थना, पूजा-पाठ, हवन के साथ हुआ देश के नए संसद भवन का उद्घाटन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/the-countrys-new-parliament-building-was-inaugurated-with-prayer-worship-havan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 May 2023 07:07:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
		<category><![CDATA[PM modi inaugurate newparliyament]]></category>
		<category><![CDATA[Ravindra bharti]]></category>
		<category><![CDATA[sengole]]></category>
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					<description><![CDATA[पीएम नरेंद्र मोदी ने आज नए संसद भवन का उद्घाटन किया यह दिव्य और भव्य इमारत जन-जन के सशक्तिकरण के साथ ही, राष्ट्र की समृद्धि और सामर्थ्य को नई गति और शक्ति प्रदान करेगी नया संसद भवन कई खूबियों से लैस है और इसकी सुरक्षा-व्यवस्था का भी खास ध्यान रखा गया है. नए संसद भवन में सीसीटीवी कैमरे से लेकर थर्मल इमेजिंग सिस्टसम, आई कार्ड, सिक्योरिटी ऑपरेटिंग सेंटर हर चीज को आधुनिक बनाया गया है. हवन-पूजा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने आज नए संसद भवन का उद्घाटन किया. इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी मौजूद रहे. तमिलनाडु के अधीनम संतों ने पूरे विधि-विधान के साथ अनुष्ठान कराया. धार्मिक अनुष्ठान के बाद संतों ने पीएम मोदी को सेंगोल सौंपा, जिसे उन्होंने नए संसद भवन में स्थापित किया. इससे पहले पीएम ने सेंगोल को साष्टांग प्रणाम किया. &#160;सेंगोल स्थापना के बाद पीएम मोदी ने नए संसद भवन के निर्माण में लगे श्रमिकों का सम्मान किया. इसके बाद सर्वधर्म सभा हुई. इस प्रार्थना सभा में केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे. संसद भवन में सेंगोल की स्थापना के बाद पीएम मोदी ने तमिलनाडु के विभिन्न अधीनम संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया. अब सोशल मीडिया पर नए संसद भवन के उद्घाटन की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. &#160;पीएम ने ट्विटर पर उद्घाटन की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा- आज का दिन हम सभी देशवासियों के लिए अविस्मरणीय है. संसद का नया भवन हम सभी को गर्व और उम्मीदों से भर देने वाला है. मुझे पूर्ण विश्वास [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पीएम नरेंद्र मोदी ने आज नए संसद भवन का उद्घाटन किया</strong></p>



<p><strong>यह दिव्य और भव्य इमारत जन-जन के सशक्तिकरण के साथ ही, राष्ट्र की समृद्धि और सामर्थ्य को नई गति और शक्ति प्रदान करेगी</strong></p>



<p><strong>नया संसद भवन कई खूबियों से लैस है और इसकी सुरक्षा-व्यवस्था का भी खास ध्यान रखा गया है. नए संसद भवन में सीसीटीवी कैमरे से लेकर थर्मल इमेजिंग सिस्टसम, आई कार्ड, सिक्योरिटी ऑपरेटिंग सेंटर हर चीज को आधुनिक बनाया गया है.</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="595" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm-3.png" alt="" class="wp-image-74781" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm-3.png 595w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm-3-347x350.png 347w" sizes="(max-width: 595px) 100vw, 595px" /></figure>



<p>हवन-पूजा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने आज नए संसद भवन का उद्घाटन किया. इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी मौजूद रहे. तमिलनाडु के अधीनम संतों ने पूरे विधि-विधान के साथ अनुष्ठान कराया. धार्मिक अनुष्ठान के बाद संतों ने पीएम मोदी को सेंगोल सौंपा, जिसे उन्होंने नए संसद भवन में स्थापित किया. इससे पहले पीएम ने सेंगोल को साष्टांग प्रणाम किया. &nbsp;सेंगोल स्थापना के बाद पीएम मोदी ने नए संसद भवन के निर्माण में लगे श्रमिकों का सम्मान किया. इसके बाद सर्वधर्म सभा हुई. इस प्रार्थना सभा में केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm2.png" alt="" class="wp-image-74785" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm2.png 600w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm2-350x350.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm2-250x250.png 250w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="503" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm-4.png" alt="" class="wp-image-74782" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm-4.png 503w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm-4-293x350.png 293w" sizes="(max-width: 503px) 100vw, 503px" /></figure>



<p></p>



<p>संसद भवन में सेंगोल की स्थापना के बाद पीएम मोदी ने तमिलनाडु के विभिन्न अधीनम संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया. अब सोशल मीडिया पर नए संसद भवन के उद्घाटन की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. &nbsp;पीएम ने ट्विटर पर उद्घाटन की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा- आज का दिन हम सभी देशवासियों के लिए अविस्मरणीय है. संसद का नया भवन हम सभी को गर्व और उम्मीदों से भर देने वाला है. मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह दिव्य और भव्य इमारत जन-जन के सशक्तिकरण के साथ ही, राष्ट्र की समृद्धि और सामर्थ्य को नई गति और शक्ति प्रदान करेगी. &nbsp;</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="599" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm-6.png" alt="" class="wp-image-74784" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm-6.png 599w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm-6-350x350.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm-6-250x250.png 250w" sizes="(max-width: 599px) 100vw, 599px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="413" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm-5.png" alt="" class="wp-image-74783" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm-5.png 413w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/pm-5-241x350.png 241w" sizes="(max-width: 413px) 100vw, 413px" /></figure>



<p>नए संसद भवन का उद्घाटन करने पहुंचे पीएम मोदी &nbsp;अपने चिर-परिचित अंदाज में नजर आए. इस खास मौके पर उन्होंने सफेद रंग का धोती-कुर्ता पहन रखा था. पीएम ने कुर्ते के ऊपर एक क्रीम कलर का जैकेट भी पहना था. &nbsp;बता दें कि नया संसद भवन कई खूबियों से लैस है और इसकी सुरक्षा-व्यवस्था का भी खास ध्यान रखा गया है. नए संसद भवन में सीसीटीवी कैमरे से लेकर थर्मल इमेजिंग सिस्टसम, आई कार्ड, सिक्योरिटी ऑपरेटिंग सेंटर हर चीज को आधुनिक बनाया गया है.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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